“संविधान के अधीन रहते हुए ही सत्य कथन करें पत्रकार” – डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी Reviewed by Momizat on . पुणे (विसंकें). सांसद डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि संविधान ने जिस तरह नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार दिया है, उसी तरह उस पर कुछ बंधन पुणे (विसंकें). सांसद डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि संविधान ने जिस तरह नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार दिया है, उसी तरह उस पर कुछ बंधन Rating: 0
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“संविधान के अधीन रहते हुए ही सत्य कथन करें पत्रकार” – डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी

पुणे (विसंकें). सांसद डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि संविधान ने जिस तरह नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार दिया है, उसी तरह उस पर कुछ बंधन भी लगाए हैं. उन बंधनों के अधीन रहकर ही पत्रकारों को सत्य कथन करना चाहिए. संविधान की चौखट के अधीन रहकर ही पत्रकारों को अपने कर्तव्य का निर्वाह करना चाहिए. विश्व संवाद केंद्र, पश्चिम महाराष्ट्र और डेक्कन एजुकेशन सोसायटी की ओर से दिए जाने वाले देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार सम्मान समारोह में संबोधित कर रहे थे, पुणे स्थित फर्ग्यूसन कॉलेज के एम्फीथियेटर में यह समारोह संपन्न हुआ.

विश्व संवाद केन्द्र और डेक्कन एजुकेशन सोसायटी की ओर से इस वर्ष वरिष्ठ पत्रकार भाऊ तोरसेकर, युवा पत्रकार और दैनिक लोकमत के वरिष्ठ उपसंपादक पराग पोतदार, कार्टूनिस्ट और जिला सूचना अधिकारी राजेंद्र सरग और सोशल मीडिया के लिए ब्लॉग लेखक देविदास देशपांडे को सम्मानित किया गया. डॉ. स्वामी ने कहा कि संविधान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुछ मुद्दों पर अंकुश लगाया है. स्वतंत्रता अथवा देश की अखंडता के विरोध में वक्तव्य करना, दुश्मन की प्रशंसा करना आदि संविधान के प्रावधानों द्वारा प्रतिबंधित है. इसके अलावा धार्मिक अस्थिरता निर्माण करना, सामाजिक शांति में बाधा पहुंचाने वाले वक्तव्यों पर भी संविधान का निषेध है. आम तौर पर आलोचना के कारण पत्रकारों पर मानहानि का दावा ठोंका जाता है. लेकिन ऐसे मानहानि के दावों में झूठी जानकारी प्रकाशित हुई है, यह शिकायतकर्ता को ही साबित करना होगा. पत्रकारिता को प्रतिष्ठा प्राप्त हो, इसके लिए इस क्षेत्र में उतरने से पहले ही आईआईटी की तर्ज पर दो वर्षों के पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होना चाहिए. तभी इस क्षेत्र में गंभीरता से और नीतिमत्ता के आधार पर सत्य कथन का काम हो सकता है. इसके अलावा समाचार का सही तरह से फॉलोअप करना भी आवश्यक है. कई बार सतही तौर पर दिखने वाली खबर का फॉलोअप करने पर अलग ही चित्र सामने आ सकता है. इसके आधार पर आम लोगों को न्याय मिलने के लिए पत्रकारों को अपनी कलम का उपयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि “नेशनल हेराल्ड’ और कांग्रेस पार्टी के धोखाधड़ी मामले में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य नेता मोतिलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस आदि का झूठ उजागर हो चुका है.

भाऊ तोरसेकर जी ने कहा कि पत्रकारों को ‘अंदर-बाहर’ सबकी खबर होती है. रोजमर्रा के समाचारों में से मौलिक बात कौन समझनी है, यह समझाने वाला सच्चा ‘पत्रकार’ कहा जा सकता है. आज के चैनलों की चर्चाओं में वास्तविक मुद्दे को किनारे कर बिना वजह कम महत्वपूर्ण मुद्दों पर ही चर्चा होती है. इससे यहां दिखता है कि उथली पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों का अध्ययन नहीं है. भाऊ तोरसेकर ने जोर देकर कहा कि सत्य को बाहर निकालने के लिए पत्रकारों के पास हठधर्मिता होनी ही चाहिए.

विश्व संवाद केंद्र, पश्चिम महाराष्ट्र के अध्यक्ष मनोहर कुलकर्णी ने कार्यक्रम का संचालन किया. वहीं डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. शरद कुंटे ने भी अपने विचार व्यक्त किए.

 

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