सब लोग तन-मन-धन से देशहित में काम करेंगे, तभी देश आगे बढ़ेगा – डॉ. मोहन भागवत जी Reviewed by Momizat on . मुजफ्फरपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर - पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखंड) के संघ कार्यकर्ताओं की बैठक का समापन सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोध मुजफ्फरपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर - पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखंड) के संघ कार्यकर्ताओं की बैठक का समापन सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोध Rating: 0
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सब लोग तन-मन-धन से देशहित में काम करेंगे, तभी देश आगे बढ़ेगा – डॉ. मोहन भागवत जी

मुजफ्फरपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर – पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखंड) के संघ कार्यकर्ताओं की बैठक का समापन सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोधन से हुआ. 08 फरवरी से सदातपुर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के प्रांगण में संघ कार्यकर्ताओं के अलग-अलग समूहों की बैठक हो रही है. अंतिम बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि पूरे विश्व के बुद्धिजीवियों का एक ही मत है कि सद्गुण संपन्न होकर ही प्रगति संभव है. जब तक समाज का जन सामान्य मनुष्य सद्गुण संपन्न होकर राष्ट्रीय चारित्र के साथ व्यवहार नहीं करेगा, तब तक किसी देश की प्रगति संभव नहीं है. देश की प्रगति के लिए ठेका देने की आदत को छोड़ना पड़ेगा. यह सिर्फ किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह का दायित्व नहीं है. सब लोग तन-मन-धन से देशहित में काम करेंगे, तभी देश आगे बढ़ेगा.

संघ कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता स्वयं के जीवन से समय निकालकर समाज कार्य करे. समाज बंधुओं के प्रति अपनत्व का भाव लेकर वह गांव – गांव तक जाकर सबको समाज कार्य के लिए प्रेरित करें. स्वयं के जीवन के उदाहरण से सामाजिक कार्यकर्ताओं को कर्तृत्व, नेतृत्व, व्यक्तित्व, समझदारी और भक्ति इन पांच गुणों से युक्त करें. ऐसा करने से ही समाज में योग्य परिवर्तन आएगा और देश सभी प्रकार से योग्य दिशा में आगे बढ़ेगा.

आज (10 फरवरी) सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी मुजफ्फरपुर के बंदरा स्थित मुतलुपुर में वहां चल रहे खेती के प्रयोग को देखने गए. किसानों के साथ चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसान की उन्नति ही भारत की उन्नति है. गांव की उन्नति के लिए एकता आवश्यक है. गांव में भेदभाव मुक्त वातावरण आवश्यक है. भारत में 8 हजार से अधिक धान की किस्में थीं, परंतु कई किस्में लुप्तप्राय हैं. इसके संरक्षण व संवर्द्धन की आवश्यकता भी उन्होंने बताई. संघ कार्य का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व में भारत माता की जय करने के लिए ही संघ का कार्य है. अपनी परंपरा में बहुत कुछ सीखने लायक बातें हैं.

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