सर्वपुरातन संस्कृति हजारों साल से भारत वर्ष को एक सूत्र में पिरोये हुए है – डॉ. मोहन भागवत जी Reviewed by Momizat on . अनुगुल, भुवनेश्वर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत एक चिरंजीवी राष्ट्र है. हिन्दुत्व हमारी संस्कृति है. यह सर्वप अनुगुल, भुवनेश्वर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत एक चिरंजीवी राष्ट्र है. हिन्दुत्व हमारी संस्कृति है. यह सर्वप Rating: 0
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सर्वपुरातन संस्कृति हजारों साल से भारत वर्ष को एक सूत्र में पिरोये हुए है – डॉ. मोहन भागवत जी

अनुगुल, भुवनेश्वर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत एक चिरंजीवी राष्ट्र है. हिन्दुत्व हमारी संस्कृति है. यह सर्वपुरातन संस्कृति हजारों साल से भारत वर्ष को एक सूत्र में पिरोये हुए है, मजबूती प्रदान कर रहा है. सभी धर्म, वर्ण, जाति व विचार को सम्मान देना तथा एकता के सूत्र में बांधे रखना ही हिन्दुत्व है. विविधता में एकता हमारे देश का परिचय है, जबकि इसे जोड़कर रखने का मंत्र हिन्दुत्व है. सनातनकाल से हिन्दुत्व इसी तरह से जोड़ते हुए आ रहा है. दूसरी तरफ रोम एवं ग्रीस जैसी समृद्ध कही जाने वाली सभ्यता आज विलुप्त सी हो गई हैं.

उन्होंने कहा कि मुगल एवं अंग्रेजों द्वारा सैकड़ों साल तक भारतीय संस्कृति का दमन करने के बावजूद हिन्दुत्व अपनी मौलिकता को बचाए हुए है. हम अपनी संस्कृति को बचाए रखने में सफल हुए हैं. भारतीय संस्कृति की महानता एवं उदारता ही इसे लोकप्रिय बनाती है. पूरी दुनिया में इस समय अशांति का वातावरण फैला हुआ है और पूरी दुनिया शांति के लिए भारत की और देख रही है. पूरी दुनिया को एक सूत्र में बांधने की ताकत भारत में है. सरसंघचालक जी अनुगुल में दो दिवसीय प्रवासी कार्यकर्ता सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे.

डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे पुरातन देश है. अतीत में यह था, वर्तमान में है और सृष्टि के खत्म होने तक रहेगा. भारत महान संस्कृति हिन्दुत्व पर आधारित है. ऐसे में यह उदार सभ्यता एवं संस्कृति सभी को अच्छी लगती है. भारत में रहने वाले सभी भारतीयों को हिन्दुत्व ही प्रभावित किए हुए है. धर्मनिरपेक्षता के कारण ही आज भारत में सभी को अपने-अपने धर्म का पालन करने का समान अधिकार मिला हुआ है. विश्व में केवल एकमात्र देश भारत ही है, जहां पर सभी धर्म संप्रदाय के लोग सुरक्षित ढंग से रह रहे हैं. अखंड भारत से अलग हुए अन्य देश एवं संप्रदाय के लोग अपने अस्तित्व के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. भारत एवं भारतीयता से अलग होने पर ही उन्हें इस तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा है. सनातन धर्म काल के समय में भारत विश्व का गुरु था और एक बार फिर वही समय आ रहा है.

संघ राजनीति नहीं करता है. यह हिन्दुत्व के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका मतलब सहिष्णुता है. हिन्दुत्व जीवन जीने का एक तरीका है, यह धर्म मात्र नहीं है. पूरी दुनिया में रहने वाले हिन्दुओं ने हमेशा शांति का संदेश दिया है और किसी देश की स्वतंत्रता में कभी हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं की है.

जब पश्चिमी दुनिया ने पूर्व की ओर देखा तो उन्हें भारत और चीन दिखे. आक्रामक रवैये के कारण चीन पर पश्चिम का भरोसा नहीं बना. लेकिन भारत में सबका विश्वास है. भारत एक वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता है. हिन्दू सत्य में विश्वास रखते हैं, लेकिन दुनिया शक्ति का सम्मान करती है. संगठन में शक्ति होती है. संगठित होना स्वाभाविक नियम है.

उन्होंने कहा कि विभिन्न देश मतभेद होने के कारण विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं. इससे बचने के लिए पूरी दुनिया भारत पर भरोसा कर रही है. इसके लिए हिन्दुस्तान में रहने वाले हिन्दुओं को एकत्र होना होगा. हिन्दुत्व सनातन धर्म के अधीन रहने वाले सभी भारतीय को एक होना होगा. वर्तमान भारत के साथ अखंड भारत को आगे बढ़ाना होगा, ताकि विश्व में शांति स्थापित हो सके.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी जी ने कहा कि हमारी संस्कृति नास्तिक में भी आस्तिकता को खोजती है. समारोह में संघ के पूर्वक्षेत्र संघ चालक अजय कुमार नंदी जी, ओडिशा पूर्व प्रांत के संघ चालक समीर कुमार महांती जी, सहित केंद्रीय मंत्री धर्मेद्र प्रधान, जुएल ओराम व अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे. अतिथि परिचय एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनिल कुमार मिश्र जी ने दिया.

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