सामाजिक समरसता आचरण में लाने की आवश्यकता है – पराग अभ्यंकर जी Reviewed by Momizat on . इंदौर (विसंकें). डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति इंदौर द्वारा आयोजित चिंतन यज्ञ के आज दूसरे व अंतिम दिन का विषय था सामाजिक समरसता व पंथ परंपरा. जिसके मुख्य वक्ता थे - इंदौर (विसंकें). डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति इंदौर द्वारा आयोजित चिंतन यज्ञ के आज दूसरे व अंतिम दिन का विषय था सामाजिक समरसता व पंथ परंपरा. जिसके मुख्य वक्ता थे - Rating: 0
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सामाजिक समरसता आचरण में लाने की आवश्यकता है – पराग अभ्यंकर जी

DSC_0050इंदौर (विसंकें). डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति इंदौर द्वारा आयोजित चिंतन यज्ञ के आज दूसरे व अंतिम दिन का विषय था सामाजिक समरसता व पंथ परंपरा. जिसके मुख्य वक्ता थे – मालवा प्रान्त के प्रान्त प्रचारक पराग अभ्यंकर जी. उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि सामाजिक समरसता को समझना है तो हमको हमारे इतिहास में जाना होगा. हमारे देश में प्रारम्भ से विकास के लिए जो मानव दर्शन था, वह केवल और केवल भारत में था.  मनुष्य का मनुष्य से क्या सम्बन्ध है, मनुष्य का प्राणियों से क्या सम्बन्ध है, इस विषय पर हमारे देश में ऋषि मुनियों ने बहुत खोज की और लम्बे समय खोज के बाद ये ध्यान आया कि जितने संसार में लोग हैं, सभी एक दूसरे पर आश्रित हैं. एक दूसरे से ही ये जीवन चल रहा है, ऋषि मुनियों ने कहा कि पूरे संसार में एक बात व्याप्त है और वह है ईश्वरीय तत्व, वही ब्रह्म है जो हम सभी में है. वहीं से हमारा मौलिक चिंतन व्यापक हुआ.

उन्होंने कहा कि हमारा भारत दर्शन कहता है कि सभी का कल्याण हो, सर्वे भवन्तु सुखिनः का मार्ग भारत ने दिया. तब ये जाति – पंथ के भेद नहीं थे. पर, जैसे – जैसे समय बीता विभिन्न कारणों से बाल विवाह, पर्दा प्रथा सहित अन्य कुरीतियां भी प्रारम्भ हो गयीं. लोग अपनी रक्षा की अधिक चिंता करने लगे. सभी को कल्याण या धर्म से अधिक अपनी सुरक्षा की चिंता थी. ऐसे समय में भक्ति के मार्ग से लोगों को धर्म के प्रति जागरूक किया गया. डॉ. भीमराव जी आंबेडकर जी ने बाल्य काल से ही जाति भेद को सहन किया, उन्हें प्रताड़ना सहन करना पड़ी. पर उन्होंने अपनी शिक्षा को जारी रखा और अपने समाज को बराबरी का दर्जा  मिले, इसके लिए लड़ते रहे. उन्होंने किसी धर्म के खिलाफ कभी कोई कार्य DSC_0067नहीं किया. जाति भेद करने वालों से संघर्ष करते रहे और समरसता का भाव जगाने के लिए पूरा जीवन दे दिया. वही कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक कर रहा है, जात पात का भेदभाव कभी संघ में देखने को नहीं मिला. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बवर्धा में आयोजित शिविर में जब गांधी जी आये तो उन्होंने देखा कि यहां सभी एक साथ बैठकर भोजन कर रहे हैं, कोई भेदभाव नहीं. ये सब देखकर गांधी जी कहा था कि जो बात मैं लिखता हूं या आग्रह करता हूं, उसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आचरण में उतारा है.

पराग जी ने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक समरसता को हम सभी के आचरण में उतारने की आवश्यकता है. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गुरू सिंह सभा के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. आंबेडकर सा.वि. संस्थामन के विभागाध्यक्ष डॉ. सीडी ने की. कार्यक्रम का संचालन जयश्री जी ने किया. कार्यक्रम में काफी संख्या में समाज जन एवं मातृशक्ति उपस्थित थी.

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