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सुभाष घई ने कहा, हमारा ज्ञान प​श्चिम के ज्ञान से बेहतर

चित्र भारती फिल्मोत्सव – 2018

नई दिल्ली (इंविसंकें). चित्र भारती फिल्म महोत्सव में मंगलवार को सिनेमा जगत के दिग्गजों ने फिल्म निर्माणकारों और सिनेमा के छात्रों से अपने अनुभव साझा किए और उन्हें सिनेमा जगत की बारीकियों से भी रूबरू कराया. इसके अलावा विभिन्न थियेटर समूहों से जुड़े छात्रों ने समाज को संदेश देने वाले नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए. मंगलवार को विभिन्न श्रेणियों में चयनित फिल्मों की स्क्रीनिंग भी की गई.

मास्टर क्लास में फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर ने कहा कि फिल्म बनाने के लिए सबसे पहले बजट का ध्यान रखना होता है. अपनी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि मैं कम बजट में अच्छी फिल्में बनाने में विश्वास रखता हूं. मैं खासकर महिला प्रधान फिल्में बनाता हूं. प्रश्नोत्तर के दौरान जब उनसे महिला प्रधान फिल्मों को बनाने का कारण पूछा गया कि क्या वह नारीवादी हैं तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ मानववाद को मानता हूं. उन्होंने पद्मावत फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा कि अ​भिव्यक्ति की आजादी के नाम पर एक तरफा सामाजिक सक्रियता नहीं होनी चाहिए. अपनी फिल्म इंदू सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि जब फिल्म का विरोध हो रहा था तो पुरस्कार वापसी गैंग के लोग खामोश थे.

मनोज तिवारी ने कहा कि फिल्मों में जाने से पहले एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि कोई भी रोल छोटा नहीं होता और यदि आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि फिल्मों की नहीं है तो आपको ज्यादा से ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है. सिनेमा में धैर्य सबसे बड़ी चीज होती है, यदि आप निराश हुए तो फिर सफलता से उतने ही दूर हो जाते हैं.

शो-मैन सुभाष घई ने ओपन फोरम में नए फिल्मकारों के साथ बातचीत की. उन्होंने कहा कि जीवन में हम यदि ये सोचें कि सिनेमा के ज्ञाता हो गए हैं तो वह सही नहीं है. सिनेमा की दुनिया में हमें जीवनभर सीखना पड़ता है. मैं भारतीय हूं और हमेशा भारत और इसकी संस्कृति को ध्यान में रखते हुए ही फिल्म बनाउंगा. चित्र भारती ने जो प्रयास किया है वह सराहनीय है. हम जिस भाषा के हैं, उस भाषा में फिल्म बनाएं क्योंकि हम उस भाषा के भाव को समझते हैं. उन्होंने महान फिल्मकार सत्यजीत रे का उदाहरण देते हुए कहा कि वह कहते थे कि क्योंकि मैं बंगाल से हूं, इसलिए बंगाली फिल्म अच्छी बना सकता हूं. पूर्व का ज्ञान पश्चिम के ज्ञान से उन्नत है, लेकिन हम पश्चिम के विचार में उलझे रहते हैं. हम लोगों को चाहिए कि हम ऐसा करें कि विश्व सिनेमा हमारे पीछे चले न कि हम उनके पीछे चलें. पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर कि आप फिल्मोत्सव में क्यों आए ? सुभाष घई जी ने कहा कि “मैं सुभाष घई भारतीय हूँ, चित्र बनाता हूँ. इसलिए फिल्मों के बारे में साधना करने वाली समिति के महोत्सव में आया हूँ.”

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