स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत बनाने के लिए संघ कृतसंकल्प – डॉ. मनमोहन वैद्य Reviewed by Momizat on . पटना (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि शिकागो वक्तृत्व के बाद पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ा. 11 सितंबर, 1893 क पटना (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि शिकागो वक्तृत्व के बाद पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ा. 11 सितंबर, 1893 क Rating: 0
You Are Here: Home » स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत बनाने के लिए संघ कृतसंकल्प – डॉ. मनमोहन वैद्य

स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत बनाने के लिए संघ कृतसंकल्प – डॉ. मनमोहन वैद्य

पटना (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि शिकागो वक्तृत्व के बाद पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ा. 11 सितंबर, 1893 को शिकागो में अपने भाषण के माध्यम से उन्होंने भारत की चिंतन परंपरा से विश्व को अवगत करवाया. उन्होंने स्वयं को उस परंपरा का वाहक बताया, जो सभी सन्यासियों की जन्म भूमि से आती है. उन्होंने अपने उद्बोधन में भारत को सभी पंथों की जननी बताया. भारत के बारे में स्वामी विवेकानंद के मन में कोई भ्रांति नहीं थी. मनमोहन वैद्य युवा संगम में उपस्थित युवाओं को संबोधित कर रहे थे.

पटना के शाखा मैदान में 12 जनवरी को आयोजित ‘युवा संगम’ को संबोधित करते हुए डॉ. वैद्य ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत के प्रति पश्चिम की दृष्टि बदली. भारतीय संस्कृति और संस्कारों से वैश्विक जगत को परिचित करवाया. भारत (हिन्दू) की विचारधारा में सत्य को एक माना गया है. सिर्फ उसके मार्ग अलग-अलग बताए गए हैं. भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि वह विविधता का उत्सव मनाता है. रवीन्द्र नाथ टैगोर ने भी अपने वक्तव्य में कहा है कि सामने से तो दिखने में हिन्दू, मुसलमान व अन्य आपस में लड़ते दिखेंगे, लेकिन वास्तव में सभी हिन्दू हैं. पंथ बदल लेने से सत्य नहीं बदल जाता.

उन्होंने देश में बढ़ रहे खतरे की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत में एकता की बात भुलाकर जितनी भेद की बात होगी, भारत उतना ही कमजोर होगा. अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां हमारी एकता को कमजोर करने में लगी हैं. इससे सावधान रहने की जरूरत है. हिन्दुत्व किसी से बैर करना नहीं सिखाता. हमारी अवधारणा ‘ऑल आर वन’ की जगह पर ऑल इज़ वन’ है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चर्चा करते हुए सह सरकार्यवाह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत बनाने के लिए संघ कृतसंकल्प है. आज पूरे देश में संघ के स्वयंसेवक डेढ़ लाख से अधिक सेवा कार्यों के माध्यम से समाज को बल प्रदान कर रहे हैं. संघ ‘महान तत्व ज्ञान है’ जीवन में अपनाने की शिक्षा दे रहा है. समाज की शक्ति बढ़े इसके लिए संघ सतत् क्रियाशील है. उन्होंने कई उदाहरणों से पर्सनल कैपिटल और सोशल कैपिटल के अंतर को स्पष्ट किया. शाखा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में बिहार की पत्रिका संघ प्रवाह के नूतन अंक का विमोचन भी किया गया. समारोह की अध्यक्षता बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पूर्व अध्यक्ष राजमणि प्रसाद ने की. इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत संघचालक राजकुमार सिन्हा, सहित अन्य उपस्थित थे.

About The Author

Number of Entries : 4906

Leave a Comment

Scroll to top