हजारों लोगों ने सेवा यज्ञ में दी आहुति Reviewed by Momizat on . वार्षिक सेवा दिवस पर मातृशक्ति और समाज बंधुओं का रहा सहभाग जयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जयपुर प्रान्त के सेवा विभाग ने रविवार को 20 जिलों (संघ कार्य वार्षिक सेवा दिवस पर मातृशक्ति और समाज बंधुओं का रहा सहभाग जयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जयपुर प्रान्त के सेवा विभाग ने रविवार को 20 जिलों (संघ कार्य Rating: 0
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हजारों लोगों ने सेवा यज्ञ में दी आहुति

वार्षिक सेवा दिवस पर मातृशक्ति और समाज बंधुओं का रहा सहभाग

जयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जयपुर प्रान्त के सेवा विभाग ने रविवार को 20 जिलों (संघ कार्य योजना अनुसार) में सेवा दिवस मनाया. जिसमें 447 शाखाओं ने भाग लिया. इस अवसर पर हजारों स्वयंसेवकों के साथ समाज बंधुओं और मातृशक्ति ने भी विभिन्न सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया. सेवा दिवस पर कार्य का विभाजन चार प्रकार से हुआ, जिसमें स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, धार्मिक और पर्यावरण मुख्य रहा. सेवा दिवस पर 5038 स्वयंसेवकों के साथ 8226 समाज बंधुओं और 1617 की संख्या में मातृशक्ति ने सेवा यज्ञ में आहुति दी.

संघ अपने प्रारंभ समय से ही सेवा कार्य करता आया है. सन् 1989 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी (संघ संस्थापक) की जन्मशताब्दी पर स्वयंसेवकों द्वारा स्थापित सेवा के लिए पूर्णतः समर्पित संस्था सेवा भारती से आज सभी परिचित हैं. सन् 1989 में संपूर्ण भारत में 5 हजार सेवा कार्यों के लक्ष्य को लेकर चला संघ आज संस्था के माध्यम से 1लाख 70 हजार 700 सेवा कार्य देश भर में चला रहा है. सेवा का यही भाव शाखाओं में आ रही वर्तमान पीढ़ी में बना रहे तथा उत्तरोत्तर वृद्धि करता रहे. शाखाओं के पास पड़ोस में रहने वाले दीन-दुःखी, पीड़ित, अभावग्रस्त समाज के कष्टों को अनुभव कर उनके कष्टों को अपना मानकर उनके निवारण के कार्य में अधिक सक्रियता से नागरिकों को साथ लेकर स्वयंसेवक कार्य में लगें. ऐसा विचार कर वार्षिक सेवा दिवस की योजना की गयी थी.

चार विषयों में से कौन किस विषय पर कार्य करेगा, इसका निर्धारण जिलानुसार किया गया. तत्पश्चात शाखाशः विषय से संबंधित कार्य की योजना की गई. एक शाखा एक कार्यक्रम करे, ऐसी योजना प्रान्त की प्रत्येक शाखा की बनाई गई. सेवा दिवस के दिन 447 शाखाओं ने गरीब बस्तियों में चिकित्सा शिविर, फल वितरण, वस्त्र वितरण, भजन कीर्तन, मलीन बस्तियों की सफाई, श्मशान घाट की सफाई, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता, सेवा बस्तियों में सत्संग, मौसमी बीमारियों से बचाव के लिये दवा व आयुर्वेदिक काढ़े का वितरण, आदि कार्य किये.

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