हमारी आर्थिक सुरक्षा भी खतरे में घिर रही है – जयन्ती लाल जी Reviewed by Momizat on . सिलीगुड़ी (विसंकें). भारतीय मजदूर संघ के षष्टि पूर्ति वर्ष के समापन अवसर 23 जुलाई 2016 को उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में सम्पन्न कार्यक्रम में राष्ट्रीय मंत्री जयन सिलीगुड़ी (विसंकें). भारतीय मजदूर संघ के षष्टि पूर्ति वर्ष के समापन अवसर 23 जुलाई 2016 को उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में सम्पन्न कार्यक्रम में राष्ट्रीय मंत्री जयन Rating: 0
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हमारी आर्थिक सुरक्षा भी खतरे में घिर रही है – जयन्ती लाल जी

सिलीगुड़ी (विसंकें). भारतीय मजदूर संघ के षष्टि पूर्ति वर्ष के समापन अवसर 23 जुलाई 2016 को उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में सम्पन्न कार्यक्रम में राष्ट्रीय मंत्री जयन्ती लाल जी ने कहा कि आज देश चारों ओर खतरे से घिर रहा है. जैसे हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में दिखाई दे रही है, वैसे ही हमारी आर्थिक सुरक्षा भी खतरे में घिर रही है. इसका सबसे अधिक प्रभाव मजदूरों एवं छोटे किसानों पर पड़ रहा है. जैसे उत्तर बंगाल के बन्द होते चाय बागानों के श्रमिकों को भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है, वैसे ही महाराष्ट्र के छोटे किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे है. देशभर में करोड़ों किसानों को गाँवों से पलायन करना पड़ रहा है. रोजगार की तलाश में करोड़ों लोगों को शहरों में नारकीय जीवन जीने को मजबूर होना पड़ रहा है.

यह सब देश के नीति निर्धारकों की महान गलतियों का ही परिणाम है. आजादी के बाद से ही हम औरों की झूठन पर पलने के आदि हो गये. सत्तर के दशक तक रूस की झूठन पर निर्भर थे. सारी विकास की योजनाएं रूस की नकल पर होती थी. उसके पश्चात हम अमेरिका की नकल करने लगे. कभी स्वतंत्र आर्थिक नीति बनाई ही नहीं. भारत का विकास भारत की मिट्टी से ही होगा. मा, माटी और मानुष का नारा दे कर ममता दीदी ने एक आशा की किरण जगाई थी. किन्तु पूर्ववर्ती शासकों के मार्ग पर चल कर दीदी ने भी निराश किया है. हमारा दीदी से निवेदन है कि व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुये सबको साथ ले कर चले तो बंगाल के गरीब मजदूर किसानों का भला हो पायेगा.

केन्द्र में कोई भी सरकार आती है, आर्थिक विकास के लिए सलाहकार अमेरिका से लाती है. अमेरिका और विश्व बैंक के रंग में रंगे ये सियार देश की जनता को आर्थिक गुलामी की ओर ही धकेलने का काम करते है. गांवों की बर्बादी और मजदूरों की लाचारी ही इनका उद्देश्य रहा है. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हित और भोगवादी समाज की रचना इनकी प्राथमिकता होती है. ऐसे सलाहकारों से घिरी केन्द्र की वर्तमान सरकार देश के करोड़ों श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात करती दिखाई देरही है, इससे न देश का भला होगा और न सरकार का भला होगा. उन्होंने कहा कि भारत में अर्थशास्त्रियों की कमी नहीं है, भारत ने ही दुनिया को अर्थशास्त्र सिखाया है. अतः केन्द्र की वर्तमान सरकार से आग्रह है कि मजदूरों के हितों पर कुठाराघात करना बन्द करे तथा श्रम संघों को विश्वास में ले कर चले.

गैर राजनीतिक, राष्ट्रीय विचारों के मजदूर, किसान एवं व्यापारी संगठन ही इसके उपाय हो सकते है जो श्रमिकों, किसानों ,व्यापारियों एवं आम जनता के सही हितों के लिये आवाज उठा कर शासन को सही कार्य के लिये बाध्य कर सकते हैं. इसी मार्ग चलते हुए भारतीय मजदूर संघ आज देश का प्रथम क्रमांक का श्रम संगठन बना है. मैं बंगाल प्रदेश के सभी मजदूर साथियों से अपील करता हूँ कि अधिकाधिक संख्या में भारतीय मजदूर संघ के साथ जुड़ कर अपने तथा देश के हितों की सुरक्षा के लिये अपनी एकजुटता दिखाए. कार्यक्रम की अध्यक्षता बंगाल प्रदेशाध्यक्ष पुजिता सरकार ने की.

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