1976 में सब एडिटर नहीं, सब इंस्पेक्टर तय करता था कि कौन सा समाचार छापना है या नहीं Reviewed by Momizat on . मुरादाबाद (विसंकें). साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कहा कि केवल हम ही नहीं मानते कि देवर्षि नारद जी प्रथम संवादवाहक थे, बल्कि 02 जून 1826 क मुरादाबाद (विसंकें). साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कहा कि केवल हम ही नहीं मानते कि देवर्षि नारद जी प्रथम संवादवाहक थे, बल्कि 02 जून 1826 क Rating: 0
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1976 में सब एडिटर नहीं, सब इंस्पेक्टर तय करता था कि कौन सा समाचार छापना है या नहीं

मुरादाबाद (विसंकें). साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कहा कि केवल हम ही नहीं मानते कि देवर्षि नारद जी प्रथम संवादवाहक थे, बल्कि 02 जून 1826 को भारत का प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड शुरू हुआ था. उस दिन पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया यानि देवर्षि नारद जयंती थी. हितेश शंकर ने पत्रकारिता के मुख्य कार्य सूचना, शिक्षा एवं संचार पर बल दिया तथा नकारात्मक समाचार लेखकों और संपादकों से सजग करते हुए लोकतन्त्र के चतुर्थ स्तम्भ के भाव को चरितार्थ करने का निवेदन किया. उन्होंने कहा कि 1976 में सब एडिटर के स्थान पर सब इंस्पेक्टर यह तय करता था कि कौन सा समाचार छापना है और कौन सा नहीं. हितेश जी मुरादाबाद में आयोजित नारद जयंती कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे.

उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग, अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता ने कहा कि देवर्षि नारद जी को हम विश्व का प्रथम सम्वाद वाहक मानते हैं. उनकी जयंती पत्रकार दिवस के रूप में मनाते हैं. नारद जी की विश्वसनीयता यदि देव पक्ष में थी, तो दानव पक्ष में भी उतनी ही थी.

मुख्य अतिथि मनोज वर्मा ने कहा कि देवर्षि नारद जी को जोकर एवं विवादित चरित्र के रूप में प्रदर्शित किया जाता रहा है. ऐसा कैसे हुआ? नारद जी विद्वान थे. ज्योतिष, संगीत, इतिहास, भूगोल, खगोल, अर्थशास्त्र आदि हर विधा के मर्मज्ञ थे, फिर भी उनका चरित्र जोकर के रूप में प्रदर्शित किया जाता रहा है! इसमें कहीं न कहीं हम भी दोषी हैं. आज पत्रकारिता जगत में विश्वसनीयता संकट के अनेक कारण हैं. देश का समाज जागरूक है. मीडिया जो भी बताएगा, उस पर आंख बंद कर विश्वास नहीं करेगा.

विशिष्ट अतिथि लोकसभा टीवी के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा ने कहा कि एक निष्पक्ष पत्रकार का दायित्व है कि किसी भी खबर की प्रामाणिकता को जाँचने के बाद ही उसे समाज में प्रसारित करे तथा भ्रामक खबरों से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि समाज के जागने का वक्त है, सवाल उठाने का वक्त है, सोशल मीडिया ने जनता को यह मंच प्रदान किया है कि आप अपनी बात कह सकें.

कार्यक्रम के अध्यक्ष एडवोकेट सुधीर गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र के तीन स्तम्भ कार्यपालिका, विधायिका एवं न्यायपालिका हैं. लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ यानि मीडिया का यह कार्य है कि इन स्तम्भों की कमियों को उजागर करे, मीडिया ही समाज की आँख, कान और नाक है. मैंने अक्सर देखा है कि अपराध जगत की खबरों को कुछ पत्र एवं चैनल बहुत प्रमुखता देते हैं, ऐसा लगता है कि देश में चोरी, डकैती, बलात्कार के अलावा कुछ अच्छा हो ही नहीं रहा है. इज़राइल में कानून है कि अखबार के पहले दो पन्नों पर आपराधिक समाचार प्रकाशित नहीं किये जा सकते, और तीसरे पन्ने पर भी छोटे अक्षरों में ही आपराधिक समाचार लिखे जा सकते हैं.

कार्यक्रम में शिशु वाटिका की छात्राओं ने स्वागत गीत एवं देशभक्ति नाटिका वन्देमातरम का सुंदर प्रस्तुतीकरण किया. वरिष्ठ छायाकार ओ.पी. रोड़ा एवं लघु फिल्म बनाकर समाज को जागरूक करने का कार्य करने वाले राकेश जयसवाल को देवर्षि नारद सम्मान दिया गया.

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