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देहरादून में ‘आपातकाल की यादें’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन

देहरादून (विसंकें). विश्व संवाद केन्द्र और उत्तरांचल उत्थान परिषद देहरादून द्वारा डीएवी (पीजी) कॉलेज के दीनदयाल सभागार में ‘आपातकाल की यादें’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री एवं नैनीताल से सांसद भगत सिंह कोश्यारी जी ने कहा कि आपातकाल देश के लोकतंत्र पर काला धब्बा था. इसको याद करना और नई पीढ़ी को यह बताना हम सबकी जिम्मेदारी है. भविष्य में देश ऐसे किसी संकट में न फंसे, इस ...

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26 जून / जन्मदिवस – वन्देमातरम् के गायक – बंकिमचन्द्र चटर्जी

नई दिल्ली. भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में वन्देमातरम् नामक जिस महामन्त्र ने उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक जन-जन को उद्वेलित किया, उसके रचियता बंकिमचन्द्र चटर्जी का जन्म ग्राम काँतलपाड़ा, जिला हुगली,पश्चिम बंगाल में 26 जून, 1838 को हुआ था. प्राथमिक शिक्षा हुगली में पूर्ण कर उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंसी कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की. पढ़ाई के साथ-साथ छात्र जीवन से ही उनकी रुचि साहित् ...

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25 जून / इतिहास स्मृति – …..और अंग्रेज सेना को करना पड़ा समर्पण

नई दिल्ली. जिन अंग्रेजों के अत्याचार की पूरी दुनिया में चर्चा होती है,  भारतीय वीरों ने कई बार उनके छक्के छुड़ाए थे. ऐसे कई प्रसंग इतिहास के पृष्ठों पर सुरक्षित हैं. ऐसा ही एक स्वर्णिम पृष्ठ कानपुर (उ.प्र.) से सम्बन्धित है. वर्ष 1857 में जब देश के अनेक भागों में भारतीय वीरों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल बजा दिया, तो इसकी आंच से कानपुर भी सुलग उठा. यहां अंग्रेज इतने भयभीत थे कि 24 मई, 1857 को रानी ...

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“मैं युद्ध भूमि छोड़कर नहीं जाऊंगी, इस युद्ध में मुझे विजय अथवा मृत्यु में से एक चाहिए” – रानी दुर्गावती

अकबर ने वर्ष 1563 में आसफ खान नामक बलाढ्य सेनानी को गोंडवाना पर आक्रमण करने भेज दिया. यह समाचार मिलते ही रानी दुर्गावती ने अपनी व्यूहरचना आरंभ कर दी. सर्वप्रथम अपने विश्वसनीय दूतों द्वारा अपने मांडलिक राजाओं तथा सेनानायकों को सावधान हो जाने की सूचनाएं भेज दीं. अपनी सेना की कुछ टुकड़ियों को घने जंगल में छिपा रखा और शेष को अपने साथ लेकर रानी निकल पड़ी. रानी ने सैनिकों को मार्गदर्शन किया. एक पहाड़ की तलहटी पर ...

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23 जून / बलिदान दिवस – जम्मू कश्मीर के लिए डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान

नई दिल्ली. छह जुलाई, 1901 को कोलकत्ता में आशुतोष मुखर्जी एवं योगमाया देवी के घर में जन्मे डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी को दो कारणों से सदा याद किया जाता है. पहला तो यह कि वे योग्य पिता के योग्य पुत्र थे. आशुतोष मुखर्जी कोलकत्ता विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुलपति थे. 1924 में उनके देहान्त के बाद केवल 23 वर्ष की अवस्था में ही श्यामाप्रसाद को विश्वविद्यालय की प्रबन्ध समिति में ले लिया गया. 33 वर्ष की छोटी अवस्था म ...

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छुआछूत मुक्त भारत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य – इंद्रेश कुमार जी

नारी संस्कृति है, संस्कार है, नारी शोषण मुक्त समाज संघ का मिशन भिवानी (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इन्द्रेश कुमार जी ने कहा कि संघ स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देकर राष्ट्रनिर्माण के कार्य में लगा रहा है. संपूर्ण देश में प्रतिदिन लाखों स्वयंसेवक तथा राष्ट्र सेविका समिति की हजारों सेविकाएं राष्ट्र निर्माण में साधनारत हैं. इंद्रेश कुमार जी 20 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर् ...

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आत्म विस्मृति को दूर कर राष्ट्र की सुप्त आत्मा को जगाना होगा – अरुण कुमार जी

पत्रकारों को विश्वसनीयता बनाए रखने की आवश्यकता – सुमित्रा महाजन जी नई दिल्ली (इंविसंकें). राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सम्पर्क प्रमुख अरुण कुमार जी ने कहा कि आत्म विस्मृति को दूर भगाकर राष्ट्र की सोयी हुई आत्मा को जगाना होगा. ये हमारा दुर्भाग्य रहा है कि हम पश्चिम की दृष्टि से देखने–सोचने लगे हैं. बीच के काल-खंड में नारद जी हम सभी से विस्मृत हो गए थे. लेकिन खुशी इस बात की है, कि इद्रंप्रस्थ विश ...

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20 जून / बलिदान दिवस – राजा दाहरसेन का बलिदान

नई दिल्ली. भारत को लूटने और इस पर कब्जा करने के लिए पश्चिम के रेगिस्तानों से आने वाले मजहबी हमलावरों का वार सबसे पहले सिन्ध की वीरभूमि को ही झेलना पड़ता था. सिन्ध के राजा थे दाहरसेन, जिन्होंने युद्धभूमि में लड़ते हुए प्राणाहुति दी. उनके बाद उनकी पत्नी, बहिन और दोनों पुत्रियों ने भी अपना बलिदान देकर भारत में एक परम्परा का सूत्रपात किया. सिन्ध के महाराजा के असमय देहांत के बाद उनके 12 वर्षीय पुत्र दाहरसेन गद्द ...

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19 जून / जन्मदिवस – आत्मविलोपी व्यक्तित्व : श्रीपति शास्त्री जी

नई दिल्ली. संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता, इतिहास के प्राध्यापक तथा राजनीति, समाजशास्त्र, साहित्य आदि विषयों के गहन अध्येता श्रीपति सुब्रमण्यम शास्त्री जी का जन्म 19 जून, 1935 को कर्नाटक राज्य के चित्रदुर्ग जिले के हरिहर ग्राम में हुआ था. बालपन में ही वे स्वयंसेवक बने तथा अपने संकल्प के अनुसार अविवाहित रहकर अंतिम सांस तक संघ कार्य करते रहे. वर्ष 1956 में वे मैसूर नगर कार्यवाह बने. उस दौरान उन्होंने मैसूर विश्वविद ...

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सामाजिक व्यवस्था में समरसता एक श्रेष्ठ तत्व है – गुणवंत सिंह कोठारी जी

आगरा (विसंकें). हमारे महापुरूषों ने भारतवर्ष की सृष्टि को समरसता के सूत्रों में हमेशा से एकीकृत करने का प्रयोग किया है और वर्तमान में इसका प्रकटीकरण हमें देखाई देता है - एक स्वयंसेवक के अनुशासन में. हमारा पड़ोसी किस जाति का है, किसान है या मजदूर, वकील है या डॉक्टर, छात्र है या व्यापारी, नौकरी करता है या बेरोजगार, धनी है या निर्धन, शिक्षित है या अशिक्षित, ये सब बातें उस समय गौण हो जाती हैं, जब हम सब भाई की भा ...

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