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संस्कारित समाज से स्वस्थ्य भारत का होगा निर्माण – ऋषि डंडवाल

देहरादून, 20 अप्रैल. (विसंके).  अभावों एवं शिक्षा के बीच पल रहे बच्चों का जीवन संवारने का कार्य सेवा भारती अपने विभिन्न केन्द्रों के माध्यम से कर रही है. इन बच्चों को संस्कारमय शिक्षा के साथ उन्हें स्वावलंबी बनाना प्रमुख उदेदश्य है. इसी सोच के साथ, पूरे देश में सेवा भारती केन्द्रों को चला रही है. सेवा भारती देहरादून महानगर द्वारा आज महदेवी कन्या पाठशाला इण्टर कॉलेज में वार्षिकोत्सव आयोजित किया गया. इस अवसर ...

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मेवात के अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा का प्रश्न

फरीदाबाद. वल्लभगढ़. नगर के अनेक सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने राज्य सरकार से मेवात क्षेत्र के अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा एवं उनके मानसम्मान पर गहराये संकट पर चिंता व्यक्त करते पुन्हाना में हाल ही में घटित साम्प्रदायिक संघर्ष के कारणों की पूरी निष्पक्षता से जांच करने तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है. विश्व हिन्दू परिषद, फरीदाबाद के जिला उपाध्यक्ष आत्मप्रकाश सेतिया की एक प्रेस रिपोर्ट के अ ...

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ऐसी न्याय प्रणाली चाहिये जो ग्रामों को विवादमुक्त बना दे – धर्माधिकारी

नई दिल्ली. भारत में आयातित प्रतिपक्षीय न्यायप्रणाली से उपजे खतरों के प्रति चेताते हुए प्रसिद्ध गांधीवादी चिंतक और न्यायविद - न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर शंकर धर्माधिकारी ने कहा है कि अंग्रेजों से उधार में ली गयी निर्णय प्रणाली न्याय प्रणाली नहीं कहलायी जा सकती. हमें आजादी के बाद राष्ट्र अध्यक्ष और झण्डे के साथ-साथ न्यायप्रणाली भी बदल देनी चाहिये थी और इस गलती के लिये अगली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी. श्री धर्मा ...

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डॉ. हेडगेवार ने संघ से अस्पृश्यता कैसे मिटाई?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में पूरी दुनिया जानती है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक कौन थे,  भारत के गठन में उनका क्या योगदान था, ऐसे सवाल अगर विद्वानों से पूछे जायें तो उनमें से 90 प्रतिशत लोगों को इस के बारे में कुछ नहीं पता होता है और शेष दस प्रतिशत लोगों को आधी-अधूरी जानकारी होती है. कुछ लोगों को विकृत जानकारी होती है. अचंभे की बात तो यह है कि इन विद्वानों को अपने अज्ञान के बारे में कोई ...

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भारतीय कालगणना ही पूर्ण वैज्ञानिक है

वर्ष-प्रतिपदा (31 मार्च) से युगाब्द 5116 विक्रमी 2071 तथा शालिवाहन शक संवत्‌ 1936 का शुभारम्भ हो रहा है. अंग्रेजों के भारत में आने के पहले तक भारत का जन-समुदाय इन्हीं संवतों को मानता था. समाज की व्यवस्था ऐसी थी कि बिना किसी प्रचार के हर व्यक्ति को तिथि, मास व वर्ष का ज्ञान हो जाता था. अमावस्या को स्वतः ही बाजार व अन्य काम-काज बन्द रखे जाते थे. एकादशी, प्रदोष आदि पर व्रत-उपवास भी लोग रखते थे. तात्पर्य यह है ...

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लोकसभा चुनाव परिवर्तन का उचित अवसर: संघ

बंगलुरु, 7 मार्च. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आगामी लोकसभा चुनाव को समस्त देशवासियों के लिये परिवर्तन का उचित अवसर बताते हुए जागृत मतदाताओं से देश के भविष्य निर्धारण के लिये सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया है. सरकार्यवाह श्री सुरेश (भय्या) जी जोशी द्वारा प्रस्तुत वार्षिक प्रतिवेदन में कहा गया है कि केंद्र की वर्तमान सरकार की विश्वसनीयता, प्रामाणिकता व देशहित के प्रति प्रतिबद्धता पर आज प्रश्नचिन्ह लगा है. ...

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एकात्म मानववाद पर राष्ट्रीय निबन्ध प्रतियोगिता

अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ ‘एकात्म मानववाद’ के विशेष संदर्भ में आर्थिक विकास विषय पर सभी के लिये राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता आयोजित कर रही है. प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. चन्द्र प्रकाश सिंह के अनुसार एक लाख रुपये के एकमात्र पुरस्कार वाली इस प्रतियोगिता में आलेख भेजने की अंतिम तिथि 15 जुलाई है. पुरस्कार की घोषणा आगामी 25 सितंबर को होगी. डॉ. सिंह ने कहा है कि जहां संचार एवं सम्पर्क की दृष्टि से विश्व एक ग्राम ...

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परमपूज्य सरसंघचालक डॉ मोहनजी भागवत का नववर्ष पर शुभकामना सन्देश

नमस्कार, सभी को नववर्ष की शुभकामनायें. हम सब लोग जानते हैं कि, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का यह दिन हमारी मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के प्रारम्भ का दिवस है, शालिवाहन के विजय का दिवस है और हमारे परमपूज्य संघ निर्माता के जन्म का दिवस है. हमारी परम्परा में इसको संकल्प का दिवस माना जाता है, क्योंकि किसी भी परिवर्तन के लिये तीन बातों की आवश्यकता होती है. एक बात होती है दृढ़ संकल्प, दूसरी बात होती है कि उस संकल्प को अपन ...

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