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भारत की जनशक्ति के सदुपयोग से आयेंगे अच्छे दिन

कानपुर. विश्व संवाद केंद्र में नारद जयन्ती के उपलक्ष्य में बोलते हुये श्री नरेन्द्र जी (उत्तर क्षेत्र प्रचार प्रमुख) ने कहा कि नारद जी अपनी शक्ति सदैव "सर्वोन्नति एवं सर्वजन हिताय" के उच्चतम उद्देश्य की पूर्ति में लगाते थे. उन्होंने देवताओं की सकारात्मक और दानवों की नकारात्मक दोनों शक्तिओं का सदुपयोग कर समुद्र मन्थन जैसे असम्भव कार्य को सम्भव किया, जिससे निकले धनवन्तरि द्वारा आयुर्वेद जैसे रत्न की उत्पत्ति ...

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जम्मू कश्मीर संवाद केंद्र में मनाई गई नारद जयंती

जम्मू. दिनांक 18 मई को त्रिकुटा संवाद केन्द्र, जम्मू कश्मीर की ओर से देर्विर्ष नारद जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिस में मुख्य वक्ता के नाते पांचजन्य के संपादक श्री हितेष शंकर ने बताया कि नारद जी आदि पत्रकार के तौर पर याद किये जाते है. उनका पूरा जीवन सूचना संचार के लिये समर्पित था. वे देवों के पास भी पहुंचते और दानवों के पास भी जाते. सबके द्वार उनके लिये खुला थे. सब उनका स्वागत करते, सब उनको पूजते क्य ...

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स्वदेशी आन्दोलन के प्रवर्तक विपिन चन्द्र पाल

20 मई/पुण्य-तिथि स्वतन्त्रता आन्दोलन में देश भर में प्रसिद्ध हुई लाल, बाल, पाल नामक त्रयी के एक स्तम्भ विपिनचन्द्र पाल का जन्म सात नवम्बर, 1858 को ग्राम पैल (जिला श्रीहट्ट, वर्तमान बांग्लादेश) में श्री रामचन्द्र पाल एवं श्रीमती नारायणी के घर में हुआ था. बचपन में ही इन्हें अपने धर्मप्रेमी पिताजी के मुख से सुनकर संस्कृत श्लोक एवं कृत्तिवास रामायण की कथाएँ याद हो गयी थीं. विपिनचन्द्र प्रारम्भ से ही खुले विचारो ...

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राजस्थान में 122 जोड़ों का सामूहिक विवाह

8 मई को जयपुर में आयोजित चतुर्थ सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन में 22 जातियों के 65 जोड़े विवाह बन्धन में बंधे. इनमें 6 जोड़ों ने अन्तरजातीय विवाह किया. इस विवाह समारोह का आयोजन सेवा भारती समिति, राजस्थान एवं श्रीराम जानकी विवाह समिति, जयपुर ने किया था. ढेहर के बालाजी के संत हरिशंकर दास एवं नवल सम्प्रदाय के संत मुन्नादास खोड़ा ने नव-दम्पतियों को आशीर्वाद दिया. इस भव्य आयोजन की सफलता में लगभग 300 समाजसेवी क ...

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संघ और व्यक्ति पूजा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझना आसान नहीं है. इसका मुख्य कारण यह है कि संघ वर्तमान में प्रचलित किसी राजनीतिक पार्टी या सामाजिक संस्था या संगठन के ढांचे में नहीं बैठता. कुछ लोगों को लगता हैं कि संघ में तानाशाही पद्धति से काम चलता हैं तो कुछ अन्य लोग यह दावा करते हैं कि संघ में नेतृत्व की पूजा होती हैं. ये दोनों भी सत्य से बिल्कुल परे हैं. व्यक्ति पूजा नहीं संघ के संस्थापक ने ऐसी एक कार्यशैली का आविष्कार किय ...

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जनता ने चुना अपना उत्तराधिकारी

सोलहवीं लोकसभा चुनाव एक ही कारण से ऐतिहासिक माना जायेगा, वह कारण है कि यह पूरा चुनाव एक ही प्रश्न पर केंद्रित हो गया था कि जनता को नरेंद्र मोदी चाहिये या नहीं. अगर किसी राज्य में कोई समस्या आती है तो अपवाद स्वरूप इस समस्या पर सबसे मत लिये जाते हैं. गोवा का महाराष्ट्र में विलीनीकरण किया जाय या उसे स्वतंत्र रखा जाये? इस मुद्दे पर जब गोवा की जनता का मत पूछा गया तो उन्होंने गोवा को स्वतंत्र रखने का निर्णय दिया. ...

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दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण की पहल

12 मई को चित्रकूट में दीनदयाल शोध संस्थान के तत्वावधान में "चित्रकूट की जैव विविधता में दुर्लभ प्रजातियां" विषय पर विद्वानों और जैव विशेषज्ञों ने गहन चिंतन-मनन किया. विद्वानों ने कहा कि चित्रकूट आदिकाल से ही जैव विविधता के रूप में परिपूर्ण रहा है. चित्रकूट पर्वत पर हजारों औषधीय पौधे पाये जाते हैं. कुल 223 तरह के पौधे कामदगिरी पर्वत पर हैं. चित्रकूट के 84 कोसीय क्षेत्र में 780 प्रजातियों के पौधे पाये जाते है ...

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महिला परिवार और समाज की धुरी

अरुणाचल प्रदेश के बरदुमसा में 9 से 11 मई तक महिला सम्मेलन आयोजित हुआ. अरुणाचल विकास परिषद् द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न भागों के 28 गांवों से 275 महिलाओं ने भाग लिया. सम्मेलन के प्रारंभ में राज्य के पूर्व मंत्री नेवालाई तिंगतरा के निधन पर शोक जताया गया. इसके बाद सम्मेलन के मुख्य अतिथि और पूर्व मंत्री श्री कोमोली मोसांग ने महिलाओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि महिलायें परिवार और समाज ...

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‘संत’ के बाने का सच

विश्व के प्रसार माध्यमों तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में ईसाइयत के प्रमुख पोप भाईचारे से रहने की बात भले करते हों किंतु पहले के उन दो पोप को व्यावहारिकता में चर्च द्वारा उनकी शह पर विश्व के पचास देशों को पांच सदी तक लूटते रहने तथा अपने फैलाव के लिये नरसंहार तक की सीमा तक जाने के लिये ज्यादा जाना जाता है जिन्हें अप्रैल के अंतिम सप्ताह में वेटिकन में संतई की उपाधि दी गई. वैसे दुनिया में पोप की छवि शांत ...

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बैरिस्टर नरेन्द्रजीत सिंह

18 मई/जन्म-दिवस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संघचालक की भूमिका परिवार के मुखिया की होती है. बैरिस्टर नरेन्द्रजीत सिंह ने उत्तर प्रदेश में इस भूमिका को जीवन भर निभाया. उनका जन्म 18 मई, 1911 को कानपुर के प्रख्यात समाजसेवी रायबहादुर श्री विक्रमाजीत सिंह के घर में हुआ था. शिक्षाप्रेमी होने के कारण इस परिवार की ओर से कानुपर में कई शिक्षा संस्थायें स्थापित की गयीं. बैरिस्टर साहब के पूर्वज पंजाब के मूल निवासी थे. व ...

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