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20 नवम्बर / जन्मदिवस – वैकल्पिक सरसंघचालक डॉ. लक्ष्मण वासुदेव परांजपे

नई दिल्ली. स्वाधीनता संग्राम के दौरान संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी ने 1930-31 में जंगल सत्याग्रह में भाग लिया था. उन दिनों संघ अपनी शिशु अवस्था में था. शाखाओं की संख्या बहुत कम थी. डॉ. जी नहीं चाहते थे कि उनके जेल जाने से संघ कार्य में कोई बाधा आये. अतः वे अपने मित्र तथा कर्मठ कार्यकर्ता डॉ. परांजपे को सरसंघचालक की जिम्मेदारी दे कर गये. डॉ. परांजपे ने इस दायित्व को पूर्ण निष्ठा से निभाया. उन्होंने इस दौर ...

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अभावग्रस्त लोगों की सेवा करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य – पी. परमेश्वरन जी

कन्याकुमारी. विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के अध्यक्ष पी. परमेश्वरन ने कहा कि अभावग्रस्त लोगों की सेवा करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है. इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना जीवन समर्पित करना है. कर्तव्य केवल एक दिन का कार्य नहीं है, वरन समर्पण की नित्य साधना से ही कर्तव्य का भाव प्रगट होता है. इसलिए समर्पण की नित्य साधना प्रत्येक मनुष्य को करनी होगी. उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पण का भाव अपने भीतर विद्यमान दिव्य ...

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असंख्य प्रश्नों के उत्तर थे रज्जू भैया

किसी कविता संग्रह का शीर्षक था- लिखना कि जैसे आग. सच है, संभवत: अधिकांश लेखन को किसी न किसी गुण, किसी न किसी तत्व-गुण, रस या स्वभाव के साथ चिन्हित किया जा सकता है. लेकिन हमारे रज्जू भैया को नहीं. न पुस्तक आग है, न रज्जू भैया का जीवन वृतांत आग है. बल्कि उसमें आग, पानी, गगन, वायु और क्षिति सभी कुछ है. शायद इसका कारण इस पुस्तक की विषयवस्तु- पूर्व सरसंघचालक रज्जू भैया ही हैं. रज्जू भैया का जैसा व्यक्तित्व इस पु ...

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महाभारत का धर्मसंकट

जुये में हारने के बाद जब दु:शासन द्रौपदी के केशों को पकड़कर खींचते हुए राजसभा में लाता है तो द्रौपदी भरी सभा में पूछती है कि हे विद्वज्जनो! क्या मैं धर्म के द्वारा जीती गई हूं? लेकिन, धर्मनिष्ठ, धर्मवेत्ता होने के बावजूद राजसभा में बैठे भीष्म पितामह, गुरु द्रोण, कृपाचार्य जैसे मर्मज्ञ द्रौपदी के इस प्रश्र का जवाब नहीं दे पाते. इसे व्दंव्द कहें या उन्नति और संपन्नता के शिखर पर पहुंचे उस समाज की सच्चाई जहां न ...

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क्या आप चुनौतियों से लड़ने को तैयार हैं?

इस दुनिया में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो,जिसके मन में शिखर पर पहुंचने की इच्छा न होती हो? हर व्यक्ति का मन होता है कि वह जिस क्षेत्र में रुचि रखता है,उसके प्रमुख पद पर हो. राजनैतिक पार्टी का प्रमुख होना,किसी बड़ी कंपनी का नेतृत्व करना या टीम का अग्रणी बनना सभी को सुहाता है,लेकिन नेतृत्व की दमदार कला आती कैसे है? कैसे कुछ लोग बड़ी चुनौतियों को झेलते हुए बड़े से बड़े संगठन,कंपनी का नेतृत्व आसानी के साथ करते ह ...

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‘आआपा’ की खुली पोल

जबर्दस्त धमाके के साथ भारतीय राजनीति में दस्तक देने वाले अरविन्द केजरीवाल की 'आम आदमी पार्टी’ को लेकर केवल राजनीतिक पंडितों में ही नहीं बल्कि खासो-आम में जिज्ञासा है. सामाजिक नेता अन्ना हजारे के कंधे पर चढ़ कर दिल्ली की विधानसभा में 28 सीटों से राज्य की सत्ता में पदार्पण करने वाले केजरीवाल के क्रिया-कलापों का समाजशास्त्रीय अध्ययन किये जाने की चर्चा चल पड़ी है. वैसे केजरीवाल के राजनीति में आने के उद्देश्य को त ...

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1998 परमाणु परीक्षण की सुनहरी यादें

भारत एक परमाणु अस्त्र सम्पन्न राष्ट्र है. यह ऐसा सत्य है, जिसे झुठलाया नहीं जा सकता. यह पद हमने किसी से न तो मांगा है और न ही किसी दूसरे ने हमें प्रदान किया है. यह तो राष्ट्र को हमारे वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों की देन है- ये शब्द भारत के यशस्वी पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के हैं, जिनके अहम योगदान और कुशल नीति के चलते भारत को विश्व में यह मान मिला. उनकी दूरदर्शिता और कुशलनीति की बदौलत भारत ने ...

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