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डॉ. हेडगेवार ने राष्ट्रीय दृष्टि जागृत कर समाज को संगठित करने का कार्य शुरू किया

संघ संस्थापक के व्यक्तित्व को समझे बिना संघ को समझना संभव नहीं चुनाव के समय भारत में युद्ध सी स्थिति दिख रही थी. अब सारी धूल बैठने के बाद चित्र स्पष्ट हो गया है. देश की जनता ने राष्ट्रीय पक्ष को मज़बूत समर्थन दे कर सत्तासीन किया है. आरोप-प्रत्यारोप के घमासान में विभाजनवादी राजनीति करने वाले खेमे से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी अकारण-आधारहीन आरोप लगते रहे. स्वातंत्र्यवीर सावरकर और द्वितीय सरसंघचालक माधव सदा ...

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संघ शिक्षा वर्ग – तृतीय वर्ष (नागपुर) समापन समारोह में पू. सरसंघचालक जी का उद्बोधन

वर्ग के मा. सर्वाधिकारी जी, विदर्भ के मा. प्रांत संघचालक जी, नागपुर महानगर के मा. संघचालक जी, इस वर्ग के दर्शन के द्वारा संघ को देखने-समझने का प्रयास करने के लिये देश की सभी दिशाओं के विभिन्न अंचलों से यहां पर उपस्थित परम आत्मीय, सम्माननीय अतिथि वृंद, उपस्थित नागरिक सज्जन, माता-भगिनी, संघ के अन्य अधिकारीगण एवं आत्मीय स्वयंसेवक बंधुओ..... प्रति वर्ष इस समापन कार्यक्रम में उपस्थित रहने का अपने नागपुर के माता- ...

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संघ शिक्षा वर्ग – तृतीय वर्ष के समापन समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोधन के अंश…

चुनाव के बाद, इस वर्ग का प्रारंभ हुआ और समापन हो रहा है। संयोग की बात है, पांच वर्ष पूर्व 2014 में भी ऐसा ही हुआ था और उस समय जो तिथिमान बना वर्ष का, उसमें संयोग ऐसा हुआ कि हिन्दू साम्राज्य दिवस की तिथि शिविर समापन के पहले दिन थी, और इस बार भी हिन्दू साम्राज्य दिवस की तिथि वर्ग समापन से एक दिन पहले है। चुनाव में स्पर्द्धा होती ही है। प्रजातंत्र है, राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ने ही पड़ते हैं। स्पर्द्धा होने क ...

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राष्ट्र के प्रति समर्पण सिखाने वाली पाठशाला है संघ की शाखा – स्वान्त रंजन

उदयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख स्वान्त रंजन जी ने कहा कि संघ की शाखा केवल खेल खेलने का स्थान नहीं है. संघ के तृतीय सरसंघचालक बाला साहब देवरस ने कहा था कि संघ की शाखा सज्जनों की सुरक्षा का बिन बोले अभिवचन है, तरुणों को व्यसन मुक्त रखने वाला संस्कार पीठ है, आपत्ति-विपत्ति में त्वरित निरपेक्ष सहायता का आशा केन्द्र है, महिला सुरक्षा और सभ्य आचरण का आश्वासन है, दुष ...

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कारगिल युद्ध – रणक्षेत्र में भारतीय सेना की वीरता, धैर्य और दृढ़ निश्चय की अतुलनीय गाथा

आज ही के दिन भारत ने कारगिल में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की सार्वजनिक घोषणा की थी, भारत सरकार की कूटनीतिक जीत के साथ भारतीय सेना ने मानवीयता और बहादुरी का उदाहरण प्रस्तुत किया था. भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 07 जून, 1999 को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया. विषय भारतीय सीमा के अन्दर कारगिल में पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ का था. उन्होंने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए कहा, “कोई भी देश इस तरह के आक्रमण को ...

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28 मई / जन्मदिवस – अप्रतिम क्रांतिकारी, कवि, इतिहासकार वीर विनायक दामोदर सावरकर

नई दिल्ली. अप्रतिम क्रांतिकारी, समर्पित समाज सुधारक, महान कवि और महान इतिहासकार वीर सावरकर. सावरकर भारत के पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के केन्द्र लंदन में उसके विरूद्ध क्रांतिकारी आंदोलन संगठित किया था. वे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने वर्ष 1905 के बंग-भंग के बाद 1906 में ‘स्वदेशी’ का नारा देकर, विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी और उन्हें अपने विचारों के कारण बैरिस्टर की डिग्री खोनी पड़ी. सावरकर भ ...

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भारत की जीवनदृष्टि एकात्म और सर्वांगीण है

भारत की जीवनदृष्टि (View of Life) दुनिया में विशिष्ट (Unique) है, कारण उसका आधार आध्यात्मिकता (Spirituality) है. इसीलिए यह दृष्टि एकात्म है और सर्वांगीण भी है. इसी कारण भारत सत्य के अनेक रूप देखता है, उस तक पहुँचने के मार्ग विभिन्न होते हुए भी वे सभी समान हैं यह मानता है. इसी कारण वह अनेकता में एकता देखता है और विविधता में ऐक्य की प्रस्थापना कर सकता है. वह विविधता को भेद नहीं समझता. प्रत्येक व्यक्ति में, चर ...

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अंतर्बाह्य शुचिता व ध्येय के प्रति प्रतिबद्धता, यही इस वर्ग का सार है – भय्याजी जोशी

संघ शिक्षा वर्ग - तृतीय वर्ष का नागपुर में शुभारम्भ नागपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, संघ शिक्षा वर्ग - तृतीय वर्ष का शुभारंभ ‌नागपुर रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति भवन परिसर के महर्षि व्यास सभागृह में हुआ. उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्याजी जोशी जी ने देशभर के सभी प्रान्तों से आए शिक्षार्थियों को उद्बोधित करते हुए कहा कि ‘संघ शिक्षा वर्ग - तृतीय वर्ष’, यह अपने जीव ...

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संघ और राजनीति

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के समय से ही स्वयं को सम्पूर्ण समाज का संगठन मानता, बताता रहा है. स्वतंत्रता के पश्चात भी संघ की इस भूमिका में कोई अंतर नहीं आया. इसलिए स्वतंत्रता के पश्चात 1949 में संघ का जो संविधान बना उस में भी यह स्पष्ट है कि यदि कोई स्वयंसेवक राजनीति में सक्रिय होना चाहता है तो वह किसी भी राजनैतिक दल का सदस्य बन सकता है. यह संविधान भारतीय जनसंघ की स्थापना के पहले बना है. जनसंघ की स्थापन ...

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‘भगवा आतंक’ की कहानी के पीछे थी राजनीतिक साजिश

डॉ. प्रवीण तिवारी दो दशक से प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ टेलीविजन पत्रकार के तौर पर जुड़े हुए हैं. इस दौरान उन्होंने मीडिया, अध्यात्म और प्रेरणापरक 7 पुस्तकें लिखी हैं. 'सत्य की खोज' उनकी पहली पुस्तक थी, जिसे पाठकों ने बहुत पसंद किया था. इसी कड़ी में हाल ही में उनकी पुस्तक 'आतंक से समझौता' भी प्रकाशित हुई, जिसे उन्होंने दो वर्ष के गहन शोध के आधार पर लिखा है. यह पुस्तक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ...

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