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संघ और गांधीजी

चुनाव का शंख बज चुका है. सभी दल अपनी-अपनी संस्कृति और परम्परा के अनुसार चुनावी भाषण भी दे रहे हैं. एक दल के नेता ने कहा कि इस चुनाव में आपको गांधी या गोडसे के बीच चुनाव करना है. एक बात मैंने देखी है. जो गांधी जी के असली अनुयायी हैं, वे अपने आचरण पर अधिक ध्यान देते हैं, वे कभी गोडसे का नाम तक नहीं लेते. संघ में भी गांधी जी की चर्चा तो अनेक बार होती देखी है, पर गोडसे के नाम की चर्चा मैंने कभी नहीं सुनी है. पर ...

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स्वतंत्रता संग्राम में सामूहिक आत्मबलिदान का अनुपम प्रसंग

इतिहास साक्षी है कि भारत की स्वतंत्रता के लिए भारतवासियों ने गत 1200 वर्षों में तुर्कों, मुगलों, पठानों और अंग्रेजों के विरुद्ध जमकर संघर्ष किया है. एक दिन भी परतंत्रता को स्वीकार न करने वाले भारतीयों ने आत्मबलिदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मात्र अंग्रेजों के 150 वर्षों के कालखंड में हुए देशव्यापी स्वतंत्रता संग्राम में लाखों बलिदान दिए गए. परन्तु अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुए सामूहिक आत्मबलिदान ने अनग ...

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आर्टिकल 370 – शेख अब्दुल्ला की ज़िद पर नेहरू ने संविधान सभा में पास कराया विघटनकारी अनुच्छेद

न तो शेख अब्दुल्ला और न ही गोपालस्वामी स्थायी है. भारत सरकार की ताकत और हिम्मत पर भविष्य निर्भर करेगा और अगर हमें अपनी ताकत पर भरोसा नहीं होगा, तो हम एक राष्ट्र के रूप में मौजूद नहीं रह पाएंगे - सरदार पटेल सरदार पटेल नहीं चाहते थे विघटनकारी अनुच्छेद 370 आईसीएस अधिकारी रहे वी. शंकर अपनी किताब ‘माय रेमिनिसेंस ऑफ सरदार पटेल’ में लिखते हैं कि संविधान सभा की सामान्य छवि को सबसे ज्यादा खतरा उस प्रस्ताव से हुआ जो ...

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हिन्दुस्थान भारतवासियों का है और पूर्ण स्वराज्य हमारा ध्येय है – डॉ. हेडगेवार

मैं अच्छी तरह जानता हूं कि मातृभूमि के भक्तों को दमन की चक्की में पीसने वाली सरकार पर मेरे कथन का कोई भी परिणाम नहीं होने वाला है. फिर भी मैं इस बात को दोहराना चाहता हूं कि हिन्दुस्थान भारतवासियों के लिए ही है और पूर्ण स्वराज्य हमारा ध्येय है. आज तक ब्रिटिश प्रधानों एवं शासकों द्वारा उद्घोषित ‘आत्म निर्णय’ का नारा यदि कोरा ढोंग मात्र है तो सरकार खुशी से मेरे भाषण को राजद्रोहात्मक समझे, पर ईश्वर के न्याय पर ...

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भारतीय कालगणना ही पूर्ण वैज्ञानिक है

वर्ष-प्रतिपदा (06 अप्रैल) से युगाब्द 5121 विक्रमी 2076 तथा शालिवाहन शक संवत्‌ 1941 का शुभारम्भ हो रहा है. अंग्रेजों के भारत में आने के पहले तक भारत का जन-समुदाय इन्हीं संवतों को मानता था. समाज की व्यवस्था ऐसी थी कि बिना किसी प्रचार के हर व्यक्ति को तिथि, मास व वर्ष का ज्ञान हो जाता था. अमावस्या को स्वतः ही बाजार व अन्य काम-काज बन्द रखे जाते थे. एकादशी, प्रदोष आदि पर व्रत-उपवास भी लोग रखते थे. तात्पर्य यह है ...

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भारत का अध्यात्म आधारित विचार सर्वसमावेशी (inclusive) और उदार है

मेरे परिचित परिवार की एक छात्रा जयपुर में पढ़ती है. जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल में वह स्वयंसेवी (वालंटियर) के नाते जुड़ी थी. पहले दिन के बाद उसने अपना अनुभव बताया कि सभी सत्रों में, वक्ताओं और प्रबंधकों में भी ‘लेफ़्ट’ का साफ प्रभाव और वर्चस्व दिखता है. मुझे यह जानकर आश्चर्य नहीं हुआ, अपेक्षित था. परंतु उसने एक और अनुभव बताया कि उनकी टीम लीडर, जो एक घोर वामपंथी एक्टिविस्ट है, ने सहज बातचीत में कहा कि इस बार हम ...

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वह रात, जब कश्मीर घाटी में इस्लामिक आतंकवादियों ने 24 हिन्दुओं को बेहरहमी से मार डाला

रामकिशन धर वर्ष 2018 में एक अंग्रेजी पत्रिका को बताते हैं कि, “बगल वाली मस्जिद से पंडितों और भारत के खिलाफ ऊंची आवाज में नारे लगने शुरू होते ही हम समझ जाते थे कि हमारा यहाँ से जाने का समय आ गया है.” ऐसा 1989 से लगातार होता रहा और आज जम्मू-कश्मीर हिन्दुओं से लगभग खाली हो चुका है. साल 1994 तक 2 लाख और 2003 तक विस्थापितों की संख्या 3 लाख से भी ऊपर चली गयी. इस साल तक वहां मात्र 7823 हिन्दू बचे थे. नाड़ीमर्ग नरस ...

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छत्तीसिंहपुरा – जब इस्लामिक आतंकियों ने किया था 36 सिक्खों का नरसंहार

दिसंबर 2000 में भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने दो पाकिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया. उनमें से एक आतंकी सियालकोट का रहने वाला मोहम्मद सुहैल मलिक था. वह अक्तूबर 1999 में चोरी-छिपे भारत में घुसा था. सेना की एक चौकी और बस पर हुए आतंकी हमलों में शामिल, सुहैल का न्यूयॉर्क टाइम्स के एक पत्रकार ने जेल में इंटरव्यू लिया. जिसमें उसने खुलासा किया कि छत्तीसिंहपुरा नरसंहार की घटना में वह भी शामिल था. जिसका उसे कोई ख ...

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इंदौर और मेरठ की घटनाओं पर मीडिया ने क्यों साधी चुप्पी

मेरठ में मुसलमानों की भीड़ अतिक्रमण हटाने के विरोध में पुलिस पर फायरिंग करती है. बसें तोड़ दी जाती हैं. इंदौर में एक स्कूल बस के नीचे बकरी का बच्चा आने के बाद मुसलमानों की भीड़ बच्चों की बस पर पथराव करती है. हाथ जोड़ते बच्चों पर भी उसे दया नहीं आती. वहीं सेकुलर मीडिया का एकांगी और पूर्वाग्रही रवैया बार बार सामने आने से आम लोगों में पनपती नाराजगी सोशल मीडिया पर दिखाई देती है. ड्राईफ्रूट बेचते हुए कुछ कश्मीरि ...

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पाकिस्तान की जेलों में बंद 54 युद्धबंदियों की गुनहगार कांग्रेस

विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान का अभिनंदन है. वह दुनिया के उन चंद खुशनसीब सैन्य पायलटों में से हैं, जो 48 घंटे के अंदर ही दुश्मन की गिरफ्त से छूटकर स्वदेश लौट रहे हैं. केंद्र सरकार की इस सफलता पर पाकिस्तान के लिए ताली बजाने वाली कांग्रेस क्या जवाब दे सकती है कि 93000 युद्धबंदियों को रिहा करके महान बनने के चक्कर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत के 54 युद्धबंदियों को क्यों नहीं छ़ुड़वाया. आज सैन्य ...

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