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कुछ शर्म करो – हमारे जवान मरे नहीं, वे कर्तव्य पथ पर बलिदान देकर अमर हो गए हैं

पुलवामा के अवंतीपुरा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 49 जवान शहीद हुए हैं. हमारी सुरक्षा के लिए तत्पर इन वीरों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया. लेकिन अंग्रेजीदां मीडिया के लिये ये जवान केवल मारे गए हैं. शहीद शब्द से शायद उन्हें नफरत है या फिर उन्हें शब्दों के अर्थ की समझ नहीं है. शहीद न समझ आए तो वीर बलिदानी शब्द भी है, ये भी समझ ना आए तो अंग्रेजी में इसे कहते हैं Martyr. मगर अधिकांश अंग्रेजी अखबारों ने Killed शब्द ...

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हिन्दू परंपरा पर शोर मचाने वाले इस्लाम के नाम पर क्यों चुप हो जाते हैं

जब बात हिन्दू परंपराओं की आती है तो तथाकथित नारीवादी बड़े जोर शोर से मुहिम शुरू कर देते हैं, लेकिन इस्लाम के मामलों में चुप्पी साध लेते हैं, कोई मुहिम नहीं चलाते भले ही उस परंपरा से किसी का जीवन बर्बाद हो रहा हो. 01 फरवरी को पूरे विश्व में ‘वर्ल्ड हिजाब डे’ मनाया गया. इस दिन पूरे विश्व में इस बात पर चर्चा हुई कि आखिर हिजाब के क्या फायदे हैं, हिजाब को महिलाओं की पहचान से जोड़कर देखा गया और हिजाब के बहाने मुस् ...

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महात्मा गांधी की हत्या और कुछ अनुत्तरित प्रश्न

हर साल, 30 जनवरी को हिन्दू राष्ट्रवाद पर टिप्पणी करना कांग्रेस और कम्युनिस्ट ब्रिगेड की आदत का हिस्सा है. 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी. उनकी मृत्यु के कुछ महीने पहले भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त की थी और स्वतंत्रता से कुछ घंटे पहले भारत का विभाजन हुआ था. विभाजन मुस्लिम लीग के आक्रामक रुख, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कमजोर नेतृत्व, भारत को दयनीय स्थिति में छोड़ जाने की ब्रिटिश ...

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स्वामी स्वरूपानन्द जी का कांग्रेसी स्वरूप

द्वारकापीठ के शंकराचार्य श्रद्धेय स्वामी स्वरूपानन्द जी सरस्वती ने अपने कुछ संतों की एक परमधर्म संसद में घोषणा कर दी है कि वे 21 फरवरी को अयोध्या में जाकर 04 ईंटों की पूजा करके श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण प्रारम्भ कर देंगे. स्वामी जी का यह ऐलान जहां एक ओर हिन्दू समाज की मंदिर निर्माण के प्रति जिज्ञासा को दर्शाता है, वहीं यह गत 490 वर्षों से मंदिर के पुर्ननिर्माण के लिए संघर्षरत हिन्दू समाज में फूट ...

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हमारी सनातन परंपरा में शामिल है महिलाओं का सम्मान

कुंभ और अर्द्धकुंभ में अखाड़ों की पेशवाई और शाही स्नान का एक अलग ही आकर्षण रहा है. वर्तमान में शैव, वैष्णव और उदासीन पंथ के संन्यासियों के मान्यता प्राप्त 13 अखाड़े हैं - इनमें से सात शैव अखाड़े हैं - जूना, निरंजनी, महानिर्वाणी, अटल, आह्वान, आनंद और अग्नि. तीन वैष्णव हैं - दिगंबर, निर्वाणी और निर्मोही तथा तीन उदासीन अखाड़े - बड़ा उदासीन, नया उदासीन और निर्मल. इन अखाड़ों की प्रतिनिधि समन्वयक संस्था अखिल भारतीय अखा ...

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ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ का सच और झूठ!

लोकसभा चुनावों की आहट के चलते विपक्षी दलों ने एक बार फिर ईवीएम मशीनों में छेड़छाड़ को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है. हालांकि कुछ समय पूर्व संपन्न राज्यों के विस चुनावों के दौरान यह मुद्दा नहीं बना क्योंकि चुनावों में कांग्रेस को जीत नजर आ रही थी. हाल ही में 19 जनवरी को पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की रैली में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने ईवीएम को ‘चोर मशीन’ कहा था, और इसी बीच अब एक हैकर के द ...

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कनाडा ने माना – खालिस्तानी आतंकी हैं

लगता है, आतंकवाद को लेकर कनाडा की नीति में बदलाव आ रहा है. वहां की सरकार ने पहली बार खालिस्तानियों को आतंकवादी माना है. वर्ष 2018 के लिए आई ‘पब्लिक रिपोर्ट’ में देश को खालिस्तानी आतंकवाद से खतरा बताया गया है. यह रिपोर्ट जस्टिन ट्रूडो सरकार में जनसुरक्षा मंत्री राल्फ गुडाले ने प्रस्तुत की है. इसमें इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और अलकायदा से भी खतरे की आशंका जताई गई है. रिपोर्ट में खालिस्तानी आतंकवाद की ...

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एक युवा सन्यासी का आध्यात्मिक एजेंडा – दरिद्र देवो भवः (भाग – 2)

12 जनवरी / जन्मदिवस, स्वामी विवेकानन्द अनैतिक सामाजिक व्यवस्थाओं और धार्मिक संस्थाओं के कुप्रबंधन के कारण समाज द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे दरिद्र और साधनहीन लोगों के प्रति हमदर्दी स्वामी जी में अकस्मात ही जागृत नहीं हुई थी. बचपन से ही उनका स्वभाव दयालू था. घर-घर जाकर मांगने वाले भिखारियों की दशा देखकर उनकी आंखों में आंसुओं की झड़ी लग जाती थी. इस तरह के गरीब लोगों को वे अपने कपड़े तक उतारकर दे दिया करते थे. अपन ...

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एक युवा सन्यासी का आध्यात्मिक एजेंडा – दरिद्र देवो भवः (भाग – 1)

12 जनवरी / जन्मदिवस, स्वामी विवेकानन्द स्वामी विवेकानन्द के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस ने अपने सभी शिष्यों की एक लघु सभा में घोषणा की थी - ‘नरेन्द्र धर्म की ध्वजा लेकर विश्व में सर्वत्र जाएगा और मानवों को जागृत करते हुए ज्ञान को सर्वत्र प्रस्थापित कर सब प्रकार के अंधकार को निरस्त करेगा. इसकी सर्वत्र विजय होगी’. इतिहास साक्षी है कि अवतारी संत रामकृष्ण परमहंस के यह शब्द व्यवहार की कसौटी पर उस समय खरे उतरने लगे ...

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राष्ट्रीय आकांक्षा है राम मंदिर निर्माण

भारत की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कहा है कि मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य भाग नहीं है. नमाज़ के लिए मस्जिद अनिवार्य नहीं है. वह खुले मैदान में भी की जा सकती है. और सन 1528 में मुग़ल आक्रामक बाबर को अयोध्या में मस्जिद बनानी भी थी तो अन्य कहीं पर भी वह बन सकती थी. मंदिर तोड़कर वहीं मस्जिद बनाना आवश्यक नहीं था. इस्लामिक स्कॉलर्स यह भी कहते हैं कि ज़बरदस्ती या बलपूर्वक कब्ज़ा की हुई जमीन या भवन में नमाज़ अल्लाह को क ...

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