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सहकारिता

सहकारिता का अर्थ है मिल जुलकर काम करना. हमारी संयुक्त परिवार व्यवस्था सहकारिता का एक अच्छा उदाहरण है. जब हम सहकारिता की बात करते हैं, तब हमारा उद्देश्य आर्थिक क्षेत्र में सहयोग करना होता है. हमारी सभी आवश्यक वस्तुएं सहयोग द्वारा ही जुटाई जाती हैं. आज के युग में कोई भी काम सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता है. हमारी प्रगति आपसी सहयोग पर निर्भर है. हम साथियों की मदद लेते भी हैं और उनकी मदद करते भी हैं. सहकारिता ...

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समाज को सही दिशा में मोड़ने वाली नारी शक्ति..!

भारत में नारी शक्ति का सम्मान प्राचीन काल से रहा है. भारत की संस्कृति और सभ्यता को बनाये रखने में यहाँ की महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है. भारतीय समाज समय के साथ काफी बदला है. लेकिन इसके मूल्य आज भी वही हैं. समय के साथ भारतीय समाज में बदलाव लाने का काम यहाँ की महिलाओं ने किया है. प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा के साथ समाज को एक नये मुकाम पर पहुँचाना आसान बात नहीं है. अक्सर देखा जाता है कि या तो परंपराओं ...

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संवाद से सुस्पष्ट दृष्टिपथ की ओर – जे. नंदकुमार जी

भारतीय दर्शन का मूल तत्व है विचार मंथन. स्वस्थ चर्चा और रचनात्मक संवाद ने इस महान राष्ट्र की प्रगति में एक बड़ी भूमिका निभाई है. हमारी मनीषा की विशिष्टता है, ज्ञान वितरित करने की अनूठी परंपरा. यह न तो इकतरफा सम्बन्ध है, और न ही दोतरफा. भारतीय संचार की प्रकृति और प्रवृत्ति हमेशा बहुमुखी रही है. इसमें पूरा समाज सहभागी होता है, इतना ही नहीं तो, प्रकृति का भी ध्यान रखा जाता है. इसलिए, संवाद की हमारी शैली व्यापक ...

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समान नागरिक आचार संहिता : आज की जरूरत

समान नागरिक आचार संहिता का मुद्दा आज एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है. वर्तमान केन्द्र सरकार ने कानून आयोग को इस संहिता को लागू करने के लिए आवश्यक सभी पहलुओं पर विचार करने को कहा है. दरअसल यह मुद्दा आज का नहीं है. यह अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है. भारत विविधताओं से भरा देश है. यहाँ विभिन्न पंथों व पूजा पद्धतियों को मानने वाले लोग रहते हैं. इन सबके शादी करने, बच्चा गोद लेने, जायदाद का बंटवारा करने, त ...

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एकात्म मानवदर्शन व ग्राम विकास

भारत में कृषि की प्रकृति पर निर्भरता लंबे समय से रही है. पहले, अल्प-वृष्टि वाले क्षेत्रों में किसान ऐसी फसलें लिया करते थे, जिनमें पानी की आवश्यकता अधिक न हो. देश के विभिन्न राज्यों में शासक अपने कर्तव्य के नाते सिंचाई के लिए ऐसी व्यवस्थाएं किया करते थे ताकि कम वर्षा की स्थिति में अकाल न पड़े. लेकिन विदेशी आक्रांताओं के शासनकाल में इन व्यवस्थाओं को तहस-नहस कर दिया गया या उनकी अनदेखी कर दी गई. नई व्यवस्थाएं ...

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भारत माता की जय

शायद ही दुनिया में ऐसा कोई देश हो जिसके स्वाधीनता के सत्तर साल पश्चात् देश की जय-जयकार के सामने सवालिया निशान लगता हो. शायद ही दुनिया में ऐसा कोई देश हो जिसमें स्वाधीनता संग्राम के मंत्र स्वरूप वंदे मातरम् की घोषणा को दोहराने में लोग विरोध करते हों, जहां पड़ोसी देश से बेरोकटोक आने वाले घुसपैठियों को रोकने हेतु छात्रों को आंदोलन करना पड़े, जहाँ राष्ट्रध्वज की वंदना के लिए सख्ती बरतने की चर्चा होती हो. दुर्भाग् ...

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संघ पर गांधी हत्या का आरोप , इतिहास का सबसे बड़ा झूठ

गांधी की हत्या से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान नाथूराम गोडसे ने अदालत में बयान दिया था -'हिन्दुओं के उत्थान के लिए काम करने के दौरान मुझे लगा कि हिन्दुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए देश की राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेना जरूरी है. इसीलिए मैं संघ छोड़ हिन्दू महासभा में शामिल हो गया'. यहां गांधी के हत्यारे ने स्वयं ही खुद को आरएसएस से अलग कर हिन्दू महासभा से जोड़ा है. गांधी जी की हत्या उसने अकेले नहीं ...

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गुरु पूर्णिमा और संघ

अपने राष्ट्र और समाज जीवन में गुरुपूर्णिमा-आषाढ़ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है. व्यास महर्षि आदिगुरु हैं. उन्होंने मानव जीवन को गुणों पर निर्धारित करते हुए उन महान आदर्शों को व्यवस्थित रूप में समाज के सामने रखा. विचार तथा आचार का समन्वय करते हुए, भारतवर्ष के साथ उन्होंने सम्पूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शन किया. इसलिए भगवान वेदव्यास जगत् गुरु हैं. इसीलिए कहा है - 'व्यासो नारायणम् स्वयं'- इस दृष्टि से गुर ...

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गुरु पूर्णिमा – गुरु के प्रति आभार का दिन

19 जुलाई, 2016 गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: । गुरु साक्षात् परम्ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम: ।। भारतीय संस्कृति में अनादिकाल से ही गुरु को विशेष दर्जा प्राप्त है. यहां गुरु-शिष्य परंपरा सदियों पुरानी है. हमारे यहां गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान प्राप्त है. गुरु को ईश्वर का साक्षात्कार करवाने वाला माना गया है. गुरु की महानता का परिचय संत कबीर के इस दोहे से हो जाता है गुरु गोविंद दोऊ खड़े, ...

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घन घमंड नभ गरजता घोरा

बरसात के सुख, दु:ख और संताप के अनेक पहलू हैं. छह ऋतुओं वाले हिन्दुस्तान में दूसरी ऋतुएं किसी एक तरह प्रभावित करती हो, लेकिन बरसात कई तरह से प्रभावित करती है. यही वजह है कि साहित्य में चाहे जो रहा हो, लोकगीतों में जितना महत्व बरसात को मिला है, किसी और ऋतु को नहीं मिला. उन कवियों के यहां भी जो लोक जीवन के करीब हैं. प्रकृति ने हमारे सांस्कृतिक जीवन में अति के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी. आषाढ़ बीतते-बीतते बरसात ...

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