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देवर्षि नारद पत्रकारों के आदर्श प्रेरणास्रोत

नारद शब्द की जो परिभाषा हमारे ऋषियों ने की है, उसके अनुसार – नारं परमात्म विषयकं ज्ञानं ददाति नारदः नारं नरसमूहम दयते पालयति ज्ञान दानेनेति नारदः ददाति नारं ज्ञानं च बालकेभ्यश्च बालकः जातिस्मरो महाज्ञानी तेनायं नारदभिदः अर्थात सर्वोच्च या परमज्ञान देने वाले का नाम है नारद. नारं शब्द का अर्थ दो तरह से प्रस्तुत कर सकते हैं. एक तो सामान्य अर्थ है परमज्ञान, और दूसरा विशेष अर्थ है नर संबंधी ज्ञान. दोनों ही अर्थो ...

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भगवान बुद्ध का कल्याणकारी धम्म

वैशाख पूर्णिमा, यह भगवान गौतम बुद्ध का जन्मदिन है. पूरे देश तथा विश्व में बहुत से स्थानों पर भगवान की जयंती अत्यंत श्रद्धापूर्वक और भक्तिभाव से मनायी जाती है. भगवान के बारे में स्वामी विवेकानंद ने कहा है ‘उनके जैसा महान मानव विश्व में कहीं अन्य नहीं हुआ है. मानव जाति दु:ख से मुक्त कैसे हो सकती है, यह एक ही ध्यास उनको था.’ मानव को सुखी बनाने का ज्ञान अर्थात संबोधि प्राप्त होने के बाद वे प्रथम ऋषिपत्तन (सारना ...

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बंगलादेशियों की दिल्ली तक घुसपैठ

हमारे संसाधनों का दोहन कर रहे घुसपैठियों को देश से बाहर किया जा सकता है, लेकिन वोट बैंक कि राजनीति करने वाले कुछ कथित “सेकुलर” नेता राष्ट्रधर्म निभाने के बजाये घुसपैठियों की वकालत करते है और तो और वे ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर बेतुके बयान देने और घटिया राजनीति करने से भी बाज नहीं आते है. नतीजतन घुसपैठियों की तादाद बढ़ती जा रही है. असम में हो रही हिंसक घटनाओं के कारण भी यही है. सेकुलरिज्म की आड़ में की जाने वाली ...

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आदि-अनादि संवाददाता नारद

कुछ विधायें ऐसी होती हैं जो कालजयी होती हैं. समय और परिस्थितियां उनकी जरूरत महत्व को प्रभावित नहीं कर पातीं. बस उनका नाम और रूप बदलता है. कहने-सुनने या उन्हें इस्तेमाल करने का अंदाज बदलता है, लेकिन उनका मूल तत्व नहीं बदलता. पत्रकारिता ऐसी ही विधा है. पत्रकारिता करने वालों को पत्रकार कहें, संवाददाता कहें अथवा मीडियाकर्मी. यह नाम समय के बदलाव और तकनीक के विकास के कारण बदले. जब संचार के आधुनिक साधन नहीं थे, या ...

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असम के बोडो क्षेत्र में हिंसा की साज़िश

असम में चार जिलों कोकराझार, उदालगुडी, चिरांग और बक्सा को मिला कर बोडो क्षेत्र कहा जाता है. लेकिन इस क्षेत्र में अवैध बंगलादेशी घुसपैठ के कारण जनसंख्या संतुलन बिगड़ रहा है, जिस कारण स्थानीय बोडो जनजाति लोगों में और अवैध बंगलादेशी घुसपैठियों में निरन्तर संघर्ष की स्थिति बनी रहती है. आज तक असम की कांग्रेस सरकार वोट बैंक के लालच में इन अवैध बंगलादेशी घुसपैठियों को प्रश्रय देती रही है. इतना ही नहीं उच्चतम न्याया ...

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मां अमृतानंदमयी के बहाने हिंदू आस्था पर विषवमन

क्या यह मात्र एक विस्मयजनक संयोग से परे एक सुनियोजित साजिश नहीं लगती है कि देश में ठीक आम चुनावों के पहले हिन्दू विद्वेषीग्रंथों व अनेक निन्दात्मक लेखों के प्रकाशन की बाढ़ जैसी आ गई है? साथ ही हिन्दुओं की भावनाओं को मर्मान्तक रूप से आहत करने वाले अनेक वर्षों या दशकों पुराने ग्रंथों व सामग्री का पुनःप्रकाशन/पुनःमुद्रण व पाकिस्तानी मीडिया विशेष कर ‘डॉन’ और ‘जंग’ नामक दैनिकों में हिन्दू आस्था पर खुलकर विषवमन कर ...

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चौतरफा आक्रमण की चौसर

मीडिया के सहारे भारत में उथल-पुथल फैलाने में जुटी है माओवादी, चर्च और जिहाद की तिकड़ी पिछले 10-15 सालों से देश के हर हिस्से में बहुत बड़े अनुपात में मतान्तरण का काम जारी है. यह मुख्य रूप से हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिये किया जा रहा है. वैसे तो तमाम चर्च किसी इमारत के दायरे में रहकर अपने काम से काम रखने वाले हुआ करते थे. लेकिन पिछले 15 साल से वे धीरे-धीरे आक्रामक होते गये हैं. ये लोग अचानक पूरे देश में किस त ...

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बाबासाहब ने अनुच्छेद 370 का किया था विरोध

जिस प्रकार से विश्व की राजनीति में कार्ल मार्क्स ने मजदूरों के पक्ष में अमिट छाप छोड़ी है, उसी प्रकार से आधुनिक भारत के इतिहास में बाबासाहब भीमराव रामजी अंबेडकर ने पूरे राष्ट्र में वंचित समाज के पक्ष में सामाजिक और राजनीतिक चेतना जागृत की है. आज भारत का जन साधारण उनको सिर्फ आरक्षण नीति के प्रवर्तक के तौर पर जानता है. आम आदमी यह भी जानता है कि वह हमारी संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष भी थे. इस तरह वह ...

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संकट की घड़ी में सोये हैं सभी

देश-विदेश के अनेक जिम्मेदार लोगों तथा संस्थाओं द्वारा भारत में जिहादियों, चर्च संगठनों एवं माओवादियों की ओर से समेकित उग्रवादी गतिविधियां चलने के संकेत प्रत्यक्ष रूप से देने के बाद भी केंद्र सरकार किसी भी तरह की प्रभावी कार्रवाई करती नहीं दिखती. ये कुछ ऐसे विषय हैं, जो मीडिया का मुद्दा नहीं बनते, लेकिन जिम्मेदार स्तर पर उसका प्रमाण मिलने के कारण उस पर नजर तो डालनी ही पड़ती है. मार्च, 2014 में असम के मुख्यमं ...

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झूठे इतिहास पर यूरोप ने लूटा 500 साल

पांच सौ से अधिक साल तक यूरोपीय लोगों ने संसार के कितने ही देशों पर गुलामी लादी, तरह-तरह के अत्याचार कर वहां लूट मचाई. विश्व के कई विचारक भले इसे उपनिवेशवाद कहें, लेकिन पूरे यूरोप की यही भावना थी और आज भी है, कि पूरे संसार को लूटने का यह अधिकार उसे इतिहास से ही प्राप्त हुआ है. हर एक देश का इतिहास होता है, उस इतिहास को इतिहासज्ञ की किसी कसौटी से तो गुजरना ही होता है. यूरोप को पूरे विश्व को पांच सौ वर्ष तक लूट ...

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