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संकट की घड़ी में सोये हैं सभी

देश-विदेश के अनेक जिम्मेदार लोगों तथा संस्थाओं द्वारा भारत में जिहादियों, चर्च संगठनों एवं माओवादियों की ओर से समेकित उग्रवादी गतिविधियां चलने के संकेत प्रत्यक्ष रूप से देने के बाद भी केंद्र सरकार किसी भी तरह की प्रभावी कार्रवाई करती नहीं दिखती. ये कुछ ऐसे विषय हैं, जो मीडिया का मुद्दा नहीं बनते, लेकिन जिम्मेदार स्तर पर उसका प्रमाण मिलने के कारण उस पर नजर तो डालनी ही पड़ती है. मार्च, 2014 में असम के मुख्यमं ...

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झूठे इतिहास पर यूरोप ने लूटा 500 साल

पांच सौ से अधिक साल तक यूरोपीय लोगों ने संसार के कितने ही देशों पर गुलामी लादी, तरह-तरह के अत्याचार कर वहां लूट मचाई. विश्व के कई विचारक भले इसे उपनिवेशवाद कहें, लेकिन पूरे यूरोप की यही भावना थी और आज भी है, कि पूरे संसार को लूटने का यह अधिकार उसे इतिहास से ही प्राप्त हुआ है. हर एक देश का इतिहास होता है, उस इतिहास को इतिहासज्ञ की किसी कसौटी से तो गुजरना ही होता है. यूरोप को पूरे विश्व को पांच सौ वर्ष तक लूट ...

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डॉ. हेडगेवार ने संघ से अस्पृश्यता कैसे मिटाई?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में पूरी दुनिया जानती है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक कौन थे,  भारत के गठन में उनका क्या योगदान था, ऐसे सवाल अगर विद्वानों से पूछे जायें तो उनमें से 90 प्रतिशत लोगों को इस के बारे में कुछ नहीं पता होता है और शेष दस प्रतिशत लोगों को आधी-अधूरी जानकारी होती है. कुछ लोगों को विकृत जानकारी होती है. अचंभे की बात तो यह है कि इन विद्वानों को अपने अज्ञान के बारे में कोई ...

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भारतीय कालगणना ही पूर्ण वैज्ञानिक है

वर्ष-प्रतिपदा (31 मार्च) से युगाब्द 5116 विक्रमी 2071 तथा शालिवाहन शक संवत्‌ 1936 का शुभारम्भ हो रहा है. अंग्रेजों के भारत में आने के पहले तक भारत का जन-समुदाय इन्हीं संवतों को मानता था. समाज की व्यवस्था ऐसी थी कि बिना किसी प्रचार के हर व्यक्ति को तिथि, मास व वर्ष का ज्ञान हो जाता था. अमावस्या को स्वतः ही बाजार व अन्य काम-काज बन्द रखे जाते थे. एकादशी, प्रदोष आदि पर व्रत-उपवास भी लोग रखते थे. तात्पर्य यह है ...

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