You Are Here: Home » विचार (Page 19)

असम के बोडो क्षेत्र में हिंसा की साज़िश

असम में चार जिलों कोकराझार, उदालगुडी, चिरांग और बक्सा को मिला कर बोडो क्षेत्र कहा जाता है. लेकिन इस क्षेत्र में अवैध बंगलादेशी घुसपैठ के कारण जनसंख्या संतुलन बिगड़ रहा है, जिस कारण स्थानीय बोडो जनजाति लोगों में और अवैध बंगलादेशी घुसपैठियों में निरन्तर संघर्ष की स्थिति बनी रहती है. आज तक असम की कांग्रेस सरकार वोट बैंक के लालच में इन अवैध बंगलादेशी घुसपैठियों को प्रश्रय देती रही है. इतना ही नहीं उच्चतम न्याया ...

Read more

मां अमृतानंदमयी के बहाने हिंदू आस्था पर विषवमन

क्या यह मात्र एक विस्मयजनक संयोग से परे एक सुनियोजित साजिश नहीं लगती है कि देश में ठीक आम चुनावों के पहले हिन्दू विद्वेषीग्रंथों व अनेक निन्दात्मक लेखों के प्रकाशन की बाढ़ जैसी आ गई है? साथ ही हिन्दुओं की भावनाओं को मर्मान्तक रूप से आहत करने वाले अनेक वर्षों या दशकों पुराने ग्रंथों व सामग्री का पुनःप्रकाशन/पुनःमुद्रण व पाकिस्तानी मीडिया विशेष कर ‘डॉन’ और ‘जंग’ नामक दैनिकों में हिन्दू आस्था पर खुलकर विषवमन कर ...

Read more

चौतरफा आक्रमण की चौसर

मीडिया के सहारे भारत में उथल-पुथल फैलाने में जुटी है माओवादी, चर्च और जिहाद की तिकड़ी पिछले 10-15 सालों से देश के हर हिस्से में बहुत बड़े अनुपात में मतान्तरण का काम जारी है. यह मुख्य रूप से हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिये किया जा रहा है. वैसे तो तमाम चर्च किसी इमारत के दायरे में रहकर अपने काम से काम रखने वाले हुआ करते थे. लेकिन पिछले 15 साल से वे धीरे-धीरे आक्रामक होते गये हैं. ये लोग अचानक पूरे देश में किस त ...

Read more

बाबासाहब ने अनुच्छेद 370 का किया था विरोध

जिस प्रकार से विश्व की राजनीति में कार्ल मार्क्स ने मजदूरों के पक्ष में अमिट छाप छोड़ी है, उसी प्रकार से आधुनिक भारत के इतिहास में बाबासाहब भीमराव रामजी अंबेडकर ने पूरे राष्ट्र में वंचित समाज के पक्ष में सामाजिक और राजनीतिक चेतना जागृत की है. आज भारत का जन साधारण उनको सिर्फ आरक्षण नीति के प्रवर्तक के तौर पर जानता है. आम आदमी यह भी जानता है कि वह हमारी संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष भी थे. इस तरह वह ...

Read more

संकट की घड़ी में सोये हैं सभी

देश-विदेश के अनेक जिम्मेदार लोगों तथा संस्थाओं द्वारा भारत में जिहादियों, चर्च संगठनों एवं माओवादियों की ओर से समेकित उग्रवादी गतिविधियां चलने के संकेत प्रत्यक्ष रूप से देने के बाद भी केंद्र सरकार किसी भी तरह की प्रभावी कार्रवाई करती नहीं दिखती. ये कुछ ऐसे विषय हैं, जो मीडिया का मुद्दा नहीं बनते, लेकिन जिम्मेदार स्तर पर उसका प्रमाण मिलने के कारण उस पर नजर तो डालनी ही पड़ती है. मार्च, 2014 में असम के मुख्यमं ...

Read more

झूठे इतिहास पर यूरोप ने लूटा 500 साल

पांच सौ से अधिक साल तक यूरोपीय लोगों ने संसार के कितने ही देशों पर गुलामी लादी, तरह-तरह के अत्याचार कर वहां लूट मचाई. विश्व के कई विचारक भले इसे उपनिवेशवाद कहें, लेकिन पूरे यूरोप की यही भावना थी और आज भी है, कि पूरे संसार को लूटने का यह अधिकार उसे इतिहास से ही प्राप्त हुआ है. हर एक देश का इतिहास होता है, उस इतिहास को इतिहासज्ञ की किसी कसौटी से तो गुजरना ही होता है. यूरोप को पूरे विश्व को पांच सौ वर्ष तक लूट ...

Read more

डॉ. हेडगेवार ने संघ से अस्पृश्यता कैसे मिटाई?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में पूरी दुनिया जानती है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक कौन थे,  भारत के गठन में उनका क्या योगदान था, ऐसे सवाल अगर विद्वानों से पूछे जायें तो उनमें से 90 प्रतिशत लोगों को इस के बारे में कुछ नहीं पता होता है और शेष दस प्रतिशत लोगों को आधी-अधूरी जानकारी होती है. कुछ लोगों को विकृत जानकारी होती है. अचंभे की बात तो यह है कि इन विद्वानों को अपने अज्ञान के बारे में कोई ...

Read more

भारतीय कालगणना ही पूर्ण वैज्ञानिक है

वर्ष-प्रतिपदा (31 मार्च) से युगाब्द 5116 विक्रमी 2071 तथा शालिवाहन शक संवत्‌ 1936 का शुभारम्भ हो रहा है. अंग्रेजों के भारत में आने के पहले तक भारत का जन-समुदाय इन्हीं संवतों को मानता था. समाज की व्यवस्था ऐसी थी कि बिना किसी प्रचार के हर व्यक्ति को तिथि, मास व वर्ष का ज्ञान हो जाता था. अमावस्या को स्वतः ही बाजार व अन्य काम-काज बन्द रखे जाते थे. एकादशी, प्रदोष आदि पर व्रत-उपवास भी लोग रखते थे. तात्पर्य यह है ...

Read more
Scroll to top