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राष्ट्रीय आकांक्षा है राम मंदिर निर्माण

भारत की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कहा है कि मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य भाग नहीं है. नमाज़ के लिए मस्जिद अनिवार्य नहीं है. वह खुले मैदान में भी की जा सकती है. और सन 1528 में मुग़ल आक्रामक बाबर को अयोध्या में मस्जिद बनानी भी थी तो अन्य कहीं पर भी वह बन सकती थी. मंदिर तोड़कर वहीं मस्जिद बनाना आवश्यक नहीं था. इस्लामिक स्कॉलर्स यह भी कहते हैं कि ज़बरदस्ती या बलपूर्वक कब्ज़ा की हुई जमीन या भवन में नमाज़ अल्लाह को क ...

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विज्ञान और प्रकृति से कोसों दूर, ग्रेगरियन कैलेंडर (ईस्वी सन्)

अनेक मित्रों ने नए ईस्वी सन् के आगमन पर शुभकामनाएं और बधाई भेजी है. सब का हार्दिक धन्यवाद. 31 दिसम्बर की रात को मौजमस्ती कर के इस नए वर्ष का स्वागत करने वाले लोगों के प्रति हमदर्दी जताते हुए यह निवेदन है कि वो इस अंतरराष्ट्रीय मस्ती में अपने भारत के गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक धरोहर को न भूलें. इस नववर्ष की पृष्ठभूमि को समझना आज के संदर्भ में जरूरी है. इस समय विश्व में 70 से अधिक कालगणनाएं प्रचलित हैं, उनसे ...

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तीन ऐसे उदाहरण जिस पर नसीरउद्दीन शाह ‘गायों’ पर बात करने से चूक गए

अभिनेता नसीरउद्दीन शाह ने भारतीय संविधान के तहत सच्चाई के साथ जो कहा कि देश रहने के लिए सुरक्षित नहीं है. उनको ये कहने का पूरा अधिकार है कि पाकिस्तान में घर जैसा अहसास होता है. जो वो पहले कह चुके हैं. उन्होंने कहा कि एक पुलिस अफसर की तुलना में एक गाय की मौत को महत्व दिया जा रहा है (हालांकि एक बार पूछा जाना चाहिए कि दोनों के जीवन के मूल्य की तुलना कैसे की जा सकती). लेकिन अब भारतीय द्वारा उनके शब्दों पर हमला ...

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आखिर किस गलती की सजा भुगत रहे हैं जम्मू-कश्मीर के वाल्मिीकि

इसे भारतीय लोकतंत्र की विडंबना ही कहा जाएगा कि एक ओर तो पूरा भारत बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धा और आदर के साथ याद करके वंचित समाज के प्रति न्याय करने के अपने संकल्प को दोहराता है. लेकिन दूसरी ओर इसी लोकतंत्र के एक राज्य जम्मू कश्मीर में वाल्मीकि समाज के साथ छह दशक से चले आ रहे अन्याय की ओर आंखें भी मूंदे रहता है. पूरे भारत में जम्मू-कश्मीर अकेला ऐसा राज्य है, जहां ‘370’  ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – (अंतिम)

कोर्ट के कटघरे में हिन्दुओं की आस्था, हिन्दुओं के कटघरे में कोर्ट की आस्था भारत के सम्पूर्ण राष्ट्र जीवन को झकझोर देने वाले, करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के साथ जुड़े हुए, गत 490 वर्षों से निरंतर संघर्ष करते चले आ रहे हिन्दू समाज की अस्मिता श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर के पुनर्निर्माण का ज्वलंत एवं भावुक विषय सर्वोच्च न्यायालय की प्राथमिकता में नहीं है. यह किसका दुर्भाग्य है? समस्त भारतीयों का? करोड़ों हिन्दुओं का?  ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 13

राष्ट्र की अस्मिता : ‘शौर्य दिवस’ 06 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बने एक जर्जर ढांचे को भारत के राष्ट्रीय स्वाभिमान पर एक विदेशी आक्रांता द्वारा लगाया गया कलंक का टीका मानकर लाखों कारसेवकों की भीड़ ने इस कलंक को मिटा दिया. यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि श्रीराम जन्मभूमि को मुक्त करवाने का यह 78वां प्रयास था. इस दिन को कुछ लोगों ने शौर्य दिवस कहा तो कुछ लोगों ने शर्म का दिन करार कर दिया. एक ओर ...

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भारत के गौरव का प्रतीक है राम मंदिर

आधुनिक भारत के कई राष्ट्र निर्माताओं ने ‘भारत की सामूहिक अंतश्चेतना’ को अपनी वाणी और आचरण से अभिव्यक्त किया है. इस‘सामूहिक अंतश्चेतना’ की इच्छा, आकांक्षा और संकल्प है अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाकर भारत के गौरव-प्रतीक को प्रतिष्ठित करना. जैसे ही सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकताएं भिन्न हैं और अयोध्या में राम मंदिर के मामले की तेजी से सुनवाई करने का उसका कोई इरादा नहीं, वैसे ही यह मुद ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 12

प्राणोत्सर्ग करने का दृढ़ संकल्प मंदिर पर लगे सरकारी ताले के खुलने के बाद सभी हिन्दू संगठनों ने इस स्थान पर एक भव्य मंदिर बनाने के लिए प्रयास शुरु कर दिए. इस कालखंड में निरंतर 6 वर्षों के इंतजार के बाद सरकार भी टालमटोल करती रही और न्यायालय भी इस मुद्दे को लटकाता रहा. निरंतर 6-7 वर्षों के इंतजार के बाद विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक मंडल के सभी संतों महात्माओं ने सर्वसम्मति के साथ एक स्वर में 6 दिसम्बर 1992 ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 11

आध्यात्मिक इतिहास की एक दुलर्भ घटना श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के बनते बिगड़ते स्वरूप और बलिदानों की अविरल श्रृंखला के बीच भी हिन्दुओं के द्वारा आरती वंदन और अखंड रामायण पाठ एक क्षण के लिए भी बंद नहीं हुआ. अयोध्या क्षेत्र में संत महात्मा तथा समस्त हिन्दू समाज अपने श्रीराम की प्रतिमा को जन्मभूमि मंदिर में ही देखने के लिए उतावले हो रहे थे. संयम और उदारता अपनी सीमाएं पार करने ही वाले थे कि एक अनोखी एवं संसार के आध् ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 10

राष्ट्रवादी मुस्लिम सरदार और धूर्त अंग्रेज औरंगजेब के पश्चात् कुछ समय तो शांति से कटा, परन्तु धर्मान्ध मुस्लिम नवाबों के अहम के कारण यह विवाद सुलझने के स्थान पर उलझता चला गया. हिन्दुओं ने एक दिन भी मंदिर पर अपने अधिकार को नहीं छोड़ा. एक कालखंड ऐसा भी आया जब हिन्दू मुस्लिम सद्भाव का वातावरण बना. सन् 1789 में महाराष्ट्र के एक सशक्त हिन्दू राजा महादजी सिंधिया ने दिल्ली पर आक्रमण करके विजय प्राप्त की. मुगल शासक ...

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