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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 9

श्रीगुरु गोबिन्दसिंह और बाबा वैष्णवदास का रणकौशल अत्याचारी शासक और हिन्दू संहारक औरंगजेब ने अपने एक दुर्दांत सेनापति जांबाज खान को मुगल सेना के साथ अयोध्या की ओर कूच करने का हुक्म दे दिया. औरंगजेब की इन हिन्दुत्व विरोधी विनाशकारी चालों से हिन्दू संत महात्मा भी अनभिज्ञ नहीं थे. अयोध्या के पास ही सरयु नदी के अहिल्या घाट पर एक महात्मा बाबा वैष्णवदास एक आश्रम बनाकर हिन्दुत्व के प्रचार प्रसार में लगे थे. इस मठ क ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 8

तथाकथित मानवतावादी अकबर की कुटिल कूटनीति इस्लाम की मूल भावना और शरीयत के सभी उसूलों को ताक पर रखकर बाबर ने मंदिर तोड़कर जो मस्जिद का ढांचा खड़ा कर दिया. यह हिन्दू समाज पर एक कलंक का टीका था. बाबर की विजय विदेश की विजय थी. आक्रमणकारी बाबर द्वारा किसी भी प्रकार का स्मृति चिन्ह समस्त भारत का अपमान था. राष्ट्र के हृदय-स्थल पर एक विदेशी आक्रांता द्वारा हिन्दुओं के ही श्रद्धा केन्द्र को ध्वस्त करके बनाए गए इस ढांचे ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 7

बाबर ने इस्लामिक सिद्धान्तों को भी दफन कर दिया मुगल सेनापति मीरबांकी द्वारा मंदिर को तोड़कर बनाई गई मस्जिद का सफाया करने के लिए हिन्दुओं ने हमलों का तांता लगा दिया. बाबर रोज-रोज के इन युद्धों में हिन्दुओं द्वारा अपमानित हो रहा था. वह कोई समझौता करके अपनी इज्जत बचाने की राह तलाशने लगा. मीरबांकी ने तो अत्यंत दुखी होकर बाबर को एक पत्र भी लिख डाला - ‘मंदिर को भूमिसात करने के पश्चात् उसके ही मलबे से जब से मस्जिद ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 6

मंदिर के खण्डहरों पर बाबरी ढांचा अयोध्या के प्रसिद्ध हिन्दू संत स्वामी श्यामानंद को अपना गुरु मानने वाले दोनों मुस्लिम फकीरों ख्वाजा अब्बास और जलालशाह ने बाबर को चेतावनी दी कि यदि रामजन्मभूमि पर बने मंदिर को नहीं तोड़ा गया तो हिन्दू पुनः संगठित और शक्तिशाली होकर बाबर और उसके सारे सैन्यबल का सफाया कर देंगे. ठीक उसी तरह जैसे राणा संग्राम सिंह के मात्र 30 हजार सैनिकों ने बाबर के 1 लाख सैनिकों को गाजर-मूली की तर ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 5

दो विधर्मी फकीरों की गद्दारी सम्पूर्ण भारत के भूगोल, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को बर्बाद करने के उद्देश्य से विदेशी हमलावरों ने जो हिंसक रणनीति अपनाई थी, उसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों को तोड़ना और अत्यंत अपमानजनक हथकंडे अपना कर भारत के राष्ट्रीय समाज का उत्पीड़न करना. इसी अमानवीय व्यवहार के अंतर्गत हजारों मंदिर टूटे, ज्ञान के भंडार विश्वविख्यात विद्या परिसर जले, अथाह धन सम्पदा लूट ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 4

एक भी यवन सैनिक जिंदा नहीं बचा 11वीं सदी के प्रारम्भ में कौशल प्रदेश पर महाराज लव के वंशज राजा सुहैल देव का राज था. उनकी राजधानी अयोध्या थी, इन्हीं दिनों महमूद गजनवी ने सोमनाथ का मंदिर और शिव की प्रतिमा को अपने हाथ से तोड़कर तथा हिन्दुओं का कत्लेआम करके भारत के राजाओं को चुनौती दे दी. परन्तु देश के दुर्भाग्य से भारत के छोटे-छोटे राज्यों ने महमूद का संगठित प्रतिकार नहीं किया. गजनवी भारत को अपमानित करके सुरक्ष ...

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क्यों खास है 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाना

भारत गणराज्य का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ. संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर के 125वें जयंती वर्ष में 26 नवंबर 2015 को भारत सरकार द्वारा पहली बार इस दिन को "संविधान दिवस" के तौर पर मनाना प्रारंभ किया गया. इसके पीछे जो मंशा थी, वह यह थी कि इससे संविधान के महत्व व दर्शन का प्रसार व डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों एवं अवधारणाओं को आमजन तक पहुंचाने का कार्य आगे बढ़ेगा. संविधान की ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 3

मंदिर की रक्षार्थ बलिदानों की झड़ी श्रीराम जन्मभूमि के साथ भारत की अस्मिता और हिन्दुओं का सर्वस्व जुड़ा है. यही कारण है कि रावण से लेकर बाबर तक जिस भी विदेशी और अधर्मी आक्रांता ने रामजन्मभूमि को अपवित्र करने का जघन्य षड्यंत्र रचा, हिन्दुओं ने तुरन्त उसी समय अपने प्राणों का उत्सर्ग करते हुए अपने इस सांस्कृतिक प्रेरणा केन्द्र की रक्षा की. जन्मभूमि पर महाराजा कुश के द्वारा बनवाया गया मंदिर भी आक्रान्ताओं का निशा ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 2

कुश निर्मित आद्य श्रीराम मंदिर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भारत की सांस्कृतिक मर्यादा के अनुरूप अनेक महत्वपूर्ण निर्णय अपने जीवन में ही ले लिये थे. मरते दम तक सत्ता से चिपके रहने के अनैतिक दुर्भाव को ठोकर मारकर राजा राम ने समस्त साम्राज्य को अपने भाईयों एवं पुत्रों में बांट दिया था. श्रीराम ने अयोध्या छोड़ने का निश्चय कर के महाप्रयाण की मानसिकता बना ली. आयु का प्रभाव शरीर पर पड़ते ही उन्होंने सरयु मैया की ग ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 1

पतित-पावनी : अयोध्या जिसे युद्ध में कोई जीत न सके वही अयोध्या है. हिमालय की गोद में अठखेलियां खेलती हुई पुण्य-सलिला सरयु अविरल चट्टानी रास्तों को तोड़कर मैदानी क्षेत्रों को तृप्त करती चली आ रही है. वैदिक काल से आज तक निरंतर चला आ रहा यह पुण्य प्रवाह अपने अंदर भारत राष्ट्र के सहस्राब्दियों पुराने इतिहास को संजोए हुए है. इसी पतित पावनी नदी ‘सरयु मैया’ के किनारे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की क्रीडा स्थली अयोध्य ...

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