You Are Here: Home » विचार (Page 4)

सीमा पर रहने वाले भारतीय किसान हिन्दुस्तान की पहचान भी हैं

नई दिल्ली. दूर-दूर तक रेत के पहाड़ और उनके बीच निःशब्दता को भंग करती सिंधु और उसकी सहायक नदियां – श्योक और जंस्कार. श्योक और जंस्कार को भी समृद्ध करने वाली छोटी नदियां नुब्रा, सरू, डोडा और लुंगनक और छोटी-बड़ी जलधाराएं. भारत के सीमांत पर उत्तर-पश्चिम का लद्दाख क्षेत्र है यह. इन नदियों ने अपने साथ लायी मिट्टी से इस रेगिस्तान में जगह-जगह उपजाऊ मैदानों का निर्माण किया है. मीलों तक फैले हरे-भरे चरागाह इस क्षेत्र ...

Read more

आत्मगौरव का प्रतीक भारतीय नव वर्ष

यह नव संवत् ही मेरा नववर्ष ! आपका नववर्ष !! प्रत्येक भारतीय का नववर्ष !!! सोचिए 1 जनवरी तो अंग्रेजों का नववर्ष अथवा उनका नववर्ष जो अंग्रेजियत में जी रहे हैं. जिन्हें न गुलामी का दंश पता है, न स्वतंत्रता की कीमत, जिन्हें गीता और रामायण का ध्यान  नहीं है, जिन्हें न तो हस्तिनापुर याद है, न ही दुष्यंत पुत्र भरत याद है, जिन्हें राम, कृष्ण, शिवाजी, राणाप्रताप, चन्द्रगुप्त, बुद्ध, महावीर याद नहीं तथा जिन्हें गुरू ...

Read more

संघ शिक्षा वर्ग में आए स्वयंसेवकों से न मिल पाने की पीड़ा से आहत थे डॉ साहब

डॉ साहब संघ कार्य, और स्वयंसेवकों को लेकर किस कदर चिंतित रहते थे, उनके जीवन के अंत तक यह व्यवहार से परिलक्षित होता रहा. नागपुर में संघशिक्षा वर्ग के दौरान डॉ साहब अस्वस्थता के कारण स्वयंसेवकों से नहीं मिल पाए थे, जिसकी पीड़ा उनके चेहरे पर स्पष्ट दिख जाती थी और जब बड़े आग्रह के पश्चात स्वयंसेवकों से मिलने का अवसर मिला तो प्रसन्नता भी साफ दिख रही थी. उस घटना का संकलन स्वयंसेवक बंधुओं के लिये दिया जा रहा है... ...

Read more

मदर टेरेसा का ईसाई मिशनरीज़ और मतांतरण से संबंध !

कानून के विरोध में ईसाई मिशनरियों ने कोलकाता में प्रदर्शन करने व जुलूस निकालने शुरु किये. लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ, जब मदर टेरेसा भी इन प्रदर्शनों में अग्रिम पंक्तियों में देखी गईं. मदर टेरेसा सेवा कार्यों में लगी हुई थीं, उनका विदेशी पैसे के बल पर मतान्तरण के काम में लगे इन ईसाई समूहों से क्या सम्बंध था ? फिर यह कानून तो सभी समुदायों को एक साथ प्रभावित कर रहा था, केवल ईसाई मिशनरियां ही इसको लेकर इतनी उत्त ...

Read more

हम तो सहिष्णुता के जगद्गुरु हैं

अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा शायद उस भारत विरोधी प्रचार तंत्र का शिकार हैं, जो पिछले छह-सात दशकों से खासकर पिछले आठ-नौ महीनों से बेतहाशा चला रखा है. अन्यथा उनके द्वारा ऐसा वक्तव्य देने की कोई आवश्यकता प्रतीत नहीं होती, और उसके पश्चात अब सफाई भी दी जा रही है. देश में क्या हो रहा है और क्या करना है, देश का तंत्र उसे अच्छी तरह समझता है. अमरीका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा को अपने सफल और हर्ष परिपूर्ण भारत दौर ...

Read more

आतंकवाद को लेकर पाकिस्तानी नीति और अमेरिका का व्यवहार

एक बहुत बड़ा प्रश्न आजकल तीन देशों में बहस का मुद्दा बना हुआ है. मुद्दा है पाकिस्तान में आतंकवाद और आतंकवादी. इसकी व्याख्या करना जरुरी है या इसे दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि पाकिस्तान आतंकवाद का शिकार है या फिर अन्य देशों ख़ासकर भारत में, आतंकवाद के हथियार से शिकार करने वाला शिकारी ? इन अन्य देशों की सूची में अफ़ग़ानिस्तान तो बहुत पहले जुड़ गया था, लेकिन 9/11 के बाद अमेरिका का नाम भी इसमें जुड़ गया था ...

Read more

विख्यात पत्रकार जिलानी के साथ श्री गुरूजी का साक्षात्कार– न्यायोचित माँगें पूरी की जानी चाहिये, पर जब चाहे विशेषाधिकारों की माँग कतई न्यायोचित नहीं : श्री गुरूजी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य सम्पूर्ण समाज को संगठित कर अपने हिन्दू जीवन दर्शन के प्रकाश में समाज की सर्वांगीण उन्नति करना है. रा.स्व.संघ का कार्य किसी भी मजहब विशेष के विरुद्ध नहीं है. परन्तु किसी भी प्रकार की राष्ट्र विरोधी गतिविधि का संघ हमेशा विरोध करता आया है. समाज के वामपंथी एवं तथाकथित सेकुलर लेखक, जो संघ के विरुद्ध लगातार झूठा और गलत प्रचार करते आये हैं, संघ को मुस्लिम एवं ईसाई विरोधी बताने का ...

Read more

अब प्राथमिकता हो कश्मीरी पंडित पुनर्वास

कश्मीर में 19 जनवरी 1990 को बर्बर जनसंहार के बाद पच्चीस वर्षों का लम्बा अंतराल बीत गया है. जिसमें दिल्ली और श्रीनगर की असंवेदनशीलता के सिवा कश्मीरी पंडितों को कुछ नहीं मिला. कश्मीर के सर्वाधिक नए जन सांख्यिकीय आंकड़ों पर नजर डालें तो स्वतंत्रता के समय घाटी में 15% कश्मीरी पंडितों की आबादी थी जो आज 1 % से नीचे होकर 0 % की ओर बढ़ रही है. हाल ही के इतिहास में कश्मीर के ज.स. आंकड़ों में यदि परिवर्तन का सबसे बड़ा का ...

Read more

राष्ट्र भाव का संक्रमण-काल

भारत में राष्ट्रभाव का आधार राष्ट्रीयता, भारतीयता और हिन्दुत्व जैसे शाष्वत् गुणों से भरा हुआ है. इसकी सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक जीवन-शैली निम्न पंक्तियों की धारा में समरसता, समानता और समता की मिठास से सराबोर है:- संस्कृति सबकी एक चिरतंन, खून रगों में हिन्दू है. विशाल सागर समाज अपना, हम सब इसके बिन्दू हैं.. भारत में सदैव संस्कृति का साम्राज्य रहा है. राजनैतिक साम्राज्यों की उथल-पुथल,  परकियों के अत्याचा ...

Read more

असली उद्देश्य मतांतरण के लिये विवश करना है

नैशनल डैमोक्रेटिक फ़्रंट आफ बोडोलैंड (सोंगबिजित) के धड़े ने पिछले दिनों असम प्रदेश के दो जिलों शोणितपुर और कोकराझार में जो नरसंहार किया, उससे मानवता भी लज्जित हो जाये. इस गिरोह के लोगों ने पांच अलग-अलग स्थानों के गांवों में लगभग 80 से भी ज़्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया. इनमें ज़्यादातर औरतें और बच्चे ही थे. यहां तक कि एक पांच माह के बच्चे को भी गोली मारी गई. गिरोह की नृशंसता का अनुमान इसी से लगाया जा ...

Read more
Scroll to top