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योग व्यायाम या चिकित्सा मात्र नहीं, एकात्मता पर आधारित जीवन का एक मार्ग है

संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रधानमंत्री के सुझाव पर, 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में स्वीकार किया गया है. आम तौर पर लोगों के लिए योग का अर्थ आसन और प्राणायाम होता है, जो शरीर को फिट रखने के लिए किए जाते हैं. लेकिन योग मात्र कुछ व्यायाम या चिकित्सा नहीं है. यह एकात्मता - अस्तित्व की एकता पर आधारित जीवन का एक तरीका है. अस्तित्व परस्पर संबद्ध, परस्पर संबंधित और परस्परावलम्बित है, क्योंकि यह एक ही ...

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स्वतंत्रता संग्राम और संघ

संघ संस्‍थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जन्‍मजात देशभक्‍त और प्रथम श्रेणी के क्रांतिकारी थे. वे युगांतर और अनुशीलन समिति जैसे प्रमुख विप्‍लवी संगठनों में डॉ. पाण्‍डुरंग खानखोजे, अरविन्‍द जी, वारीन्‍द्र घोष, त्रैलौक्‍यनाथ चक्रवर्ती आदि के सहयोगी रहे. रासबिहारी बोस और शचीन्‍द्र सान्‍याल द्वारा प्रथम विश्‍वयुद्ध के समय 1915 में सम्‍पूर्ण भारत की सैनिक छावनियों में क्रान्ति की योजना में वे मध्‍यभारत के प्रमुख थे ...

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आज का मीडिया और हम

ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया को देवर्षि नारद जयंती मनाई जाती है. देवर्षि नारद को दुनिया के प्रथम पत्रकार के रूप में देखा जाता है. समूचे हिंदुस्थान में नारद जयंती का दिवस पत्रकार दिवस के रूप में  मनाया जाता है. लेकिन फिल्मों में दिखाये जाने वाले दृश्यों के कारण और कुछ कथाओं के कारण देवर्षि नारदजी के बारे में गलत अवधारणाएं समाज में प्रचलित हुई हैं. नारद जी की चुगलखोर के रूप में नकारात्मक छवि बनाई गयी है. वास्तव में ...

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सीमा पर रहने वाले भारतीय किसान हिन्दुस्तान की पहचान भी हैं

नई दिल्ली. दूर-दूर तक रेत के पहाड़ और उनके बीच निःशब्दता को भंग करती सिंधु और उसकी सहायक नदियां – श्योक और जंस्कार. श्योक और जंस्कार को भी समृद्ध करने वाली छोटी नदियां नुब्रा, सरू, डोडा और लुंगनक और छोटी-बड़ी जलधाराएं. भारत के सीमांत पर उत्तर-पश्चिम का लद्दाख क्षेत्र है यह. इन नदियों ने अपने साथ लायी मिट्टी से इस रेगिस्तान में जगह-जगह उपजाऊ मैदानों का निर्माण किया है. मीलों तक फैले हरे-भरे चरागाह इस क्षेत्र ...

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आत्मगौरव का प्रतीक भारतीय नव वर्ष

यह नव संवत् ही मेरा नववर्ष ! आपका नववर्ष !! प्रत्येक भारतीय का नववर्ष !!! सोचिए 1 जनवरी तो अंग्रेजों का नववर्ष अथवा उनका नववर्ष जो अंग्रेजियत में जी रहे हैं. जिन्हें न गुलामी का दंश पता है, न स्वतंत्रता की कीमत, जिन्हें गीता और रामायण का ध्यान  नहीं है, जिन्हें न तो हस्तिनापुर याद है, न ही दुष्यंत पुत्र भरत याद है, जिन्हें राम, कृष्ण, शिवाजी, राणाप्रताप, चन्द्रगुप्त, बुद्ध, महावीर याद नहीं तथा जिन्हें गुरू ...

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संघ शिक्षा वर्ग में आए स्वयंसेवकों से न मिल पाने की पीड़ा से आहत थे डॉ साहब

डॉ साहब संघ कार्य, और स्वयंसेवकों को लेकर किस कदर चिंतित रहते थे, उनके जीवन के अंत तक यह व्यवहार से परिलक्षित होता रहा. नागपुर में संघशिक्षा वर्ग के दौरान डॉ साहब अस्वस्थता के कारण स्वयंसेवकों से नहीं मिल पाए थे, जिसकी पीड़ा उनके चेहरे पर स्पष्ट दिख जाती थी और जब बड़े आग्रह के पश्चात स्वयंसेवकों से मिलने का अवसर मिला तो प्रसन्नता भी साफ दिख रही थी. उस घटना का संकलन स्वयंसेवक बंधुओं के लिये दिया जा रहा है... ...

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मदर टेरेसा का ईसाई मिशनरीज़ और मतांतरण से संबंध !

कानून के विरोध में ईसाई मिशनरियों ने कोलकाता में प्रदर्शन करने व जुलूस निकालने शुरु किये. लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ, जब मदर टेरेसा भी इन प्रदर्शनों में अग्रिम पंक्तियों में देखी गईं. मदर टेरेसा सेवा कार्यों में लगी हुई थीं, उनका विदेशी पैसे के बल पर मतान्तरण के काम में लगे इन ईसाई समूहों से क्या सम्बंध था ? फिर यह कानून तो सभी समुदायों को एक साथ प्रभावित कर रहा था, केवल ईसाई मिशनरियां ही इसको लेकर इतनी उत्त ...

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हम तो सहिष्णुता के जगद्गुरु हैं

अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा शायद उस भारत विरोधी प्रचार तंत्र का शिकार हैं, जो पिछले छह-सात दशकों से खासकर पिछले आठ-नौ महीनों से बेतहाशा चला रखा है. अन्यथा उनके द्वारा ऐसा वक्तव्य देने की कोई आवश्यकता प्रतीत नहीं होती, और उसके पश्चात अब सफाई भी दी जा रही है. देश में क्या हो रहा है और क्या करना है, देश का तंत्र उसे अच्छी तरह समझता है. अमरीका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा को अपने सफल और हर्ष परिपूर्ण भारत दौर ...

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आतंकवाद को लेकर पाकिस्तानी नीति और अमेरिका का व्यवहार

एक बहुत बड़ा प्रश्न आजकल तीन देशों में बहस का मुद्दा बना हुआ है. मुद्दा है पाकिस्तान में आतंकवाद और आतंकवादी. इसकी व्याख्या करना जरुरी है या इसे दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि पाकिस्तान आतंकवाद का शिकार है या फिर अन्य देशों ख़ासकर भारत में, आतंकवाद के हथियार से शिकार करने वाला शिकारी ? इन अन्य देशों की सूची में अफ़ग़ानिस्तान तो बहुत पहले जुड़ गया था, लेकिन 9/11 के बाद अमेरिका का नाम भी इसमें जुड़ गया था ...

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विख्यात पत्रकार जिलानी के साथ श्री गुरूजी का साक्षात्कार– न्यायोचित माँगें पूरी की जानी चाहिये, पर जब चाहे विशेषाधिकारों की माँग कतई न्यायोचित नहीं : श्री गुरूजी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य सम्पूर्ण समाज को संगठित कर अपने हिन्दू जीवन दर्शन के प्रकाश में समाज की सर्वांगीण उन्नति करना है. रा.स्व.संघ का कार्य किसी भी मजहब विशेष के विरुद्ध नहीं है. परन्तु किसी भी प्रकार की राष्ट्र विरोधी गतिविधि का संघ हमेशा विरोध करता आया है. समाज के वामपंथी एवं तथाकथित सेकुलर लेखक, जो संघ के विरुद्ध लगातार झूठा और गलत प्रचार करते आये हैं, संघ को मुस्लिम एवं ईसाई विरोधी बताने का ...

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