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राष्ट्र भाव का संक्रमण-काल

भारत में राष्ट्रभाव का आधार राष्ट्रीयता, भारतीयता और हिन्दुत्व जैसे शाष्वत् गुणों से भरा हुआ है. इसकी सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक जीवन-शैली निम्न पंक्तियों की धारा में समरसता, समानता और समता की मिठास से सराबोर है:- संस्कृति सबकी एक चिरतंन, खून रगों में हिन्दू है. विशाल सागर समाज अपना, हम सब इसके बिन्दू हैं.. भारत में सदैव संस्कृति का साम्राज्य रहा है. राजनैतिक साम्राज्यों की उथल-पुथल,  परकियों के अत्याचा ...

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असली उद्देश्य मतांतरण के लिये विवश करना है

नैशनल डैमोक्रेटिक फ़्रंट आफ बोडोलैंड (सोंगबिजित) के धड़े ने पिछले दिनों असम प्रदेश के दो जिलों शोणितपुर और कोकराझार में जो नरसंहार किया, उससे मानवता भी लज्जित हो जाये. इस गिरोह के लोगों ने पांच अलग-अलग स्थानों के गांवों में लगभग 80 से भी ज़्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया. इनमें ज़्यादातर औरतें और बच्चे ही थे. यहां तक कि एक पांच माह के बच्चे को भी गोली मारी गई. गिरोह की नृशंसता का अनुमान इसी से लगाया जा ...

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बिशप लिब्बी के आने से तेज होगी चर्च की मतांतरण की मुहिम

सत्रह दिसम्बर, 2014 को चर्च ऑफ इंग्लैंड ने लिब्बी लेन नामक महिला की पहली बार बिशप के तौर पर नियुक्ति की है. पहली नजर में यह विषय महिलाओं को अपनी योग्यता दिखाने का अवसर देने जैसा प्रतीत होगा, लेकिन पूरी दुनिया में ईसाईकरण का जो नया अतिव्यापक स्वरूप जारी है, उसे इससे नई गति मिलेगी, इसमें संदेह नहीं है. ईसाईकरण में लाई गई यह नई गति केवल पिछली पांच सदियों के सतत प्रयासों का हिस्सा है. जहां-जहां इस तेजी से ईसाईक ...

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संविधान का हवाला देकर मतांतरण पर दोहरा नजरिया घातक

संसद से लेकर मीडिया तक आज जाने कैसा अजीब खेल हो रहा है. सेकुलरवादी और अंग्रेजी मीडिया दशकों से जिस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मतांतरण विरोधी घोषित कर रहा था, वही आज मतांतरण के मुद्दे पर उसे लेकर जमीन-असमान एक करने पर तुला हुआ है. आगरा में हुए एक 'घर वापसी' कार्यक्रम ने 'मतांतरण' के मुद्दे पर फिर बहस छेड़ दी है. उस घटना को देश के सेकुलरवादी और कुछ अंग्रेजी अखबार ऐसे पेश कर रहे हैं मानो भारत को एक 'थियोक्रेटि ...

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अपनी जड़ों से जुड़ने की स्वाभाविक इच्छा कन्वर्जन नहीं-घर वापसी – मनमोहन वैद्य

23 दिसम्बर को संसद के शीतकालीन सत्र का एक पूरा सप्ताह विपक्षी दलों के गतिरोध की भेंट चढ़ गया। इस कारण कई आवश्यक विधेयक सदन के पटल पर नहीं रखे जा सके। कांग्रेस, वामपंथियों और समाजवादी पार्टी सहित सभी सेकुलरवादी दलों ने आगरा में विश्व हिन्दू परिषद द्वारा 57 परिवारों की घर वापसी को कन्वर्जन बताते हुए कई दिन तक संसद ठप्प रखी। सरकार ने ठोस कन्वर्जन विरोधी कानून बनाने की बात की तो इस पर सभी मौन हो गए। इस बहाने कन ...

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भारत के रत्न को भारत रत्न

सवाल सीधा-सा था, इतनी कठिनाइयों में भी आप शांत स्वर कैसे रखते हैं? आपकी आस्था का आधार? अटल जी अपनी चिर-परिचित शैली में मुझे देखते रहे और फिर हौले से मुस्कराते हुए बोले, आस्था? मेरी आस्था भारत है, और कुछ नहीं. मैं अवाक रह गया. इतनी बड़ी बात कितनी सहजता से कह गये अटल जी. अटल जी की तुलना सिर्फ अटल जी से ही की जा सकती है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक और कवि ऐसे कि हृदय में सागर हिलोरें लेने लगे, वक्ता ऐसे ...

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जाग रहा है हिन्दू समाज : परम पूज्य सरसंघचालक

हमने संकल्प किया है. हिन्दू समाज जब-जब मन से संकल्प करता है, उस संकल्प को अवरुद्ध करने की शक्ति दुनिया में किसी की नहीं होती. क्योंकि हिन्दू समाज का संकल्प सत्य संकल्प होता है. सबका मंगल करने वाला संकल्प होता है. किसी के विरोध में वह संकल्प नहीं होता है.  अपने पवित्र हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति व हिन्दू समाज के संरक्षण तथा उसकी सर्वांगींण उन्नति का वह संकल्प होता है. इतिहास साक्षी है कि जब-जब हिन्दू समाज क ...

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मतांतरण पर बेजा शोर

आगरा में हुए कथित मतांतरण को लेकर मीडिया और संसद में कोहराम मचा है. मतांतरण की इस घटना पर गुस्सा क्या महज मतांतरण अभियान के कारण है या मतांतरण करने वाले और मतांतरित होने वालों के मजहब के कारण है? यदि मतांतरित होने वाले दलित समाज के होते और वे इस्लाम या ईसाइयत में मतांतरित होते तो क्या स्वयंभू सेक्युलरिस्टों की यही प्रतिक्रिया होती? अभी मध्य प्रदेश के रतलाम में ईसाई समाज की चंगाई सभा में वनवासियों (आदिवासियो ...

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धर्मांतरण पर चिंता

संगठित धर्मांतरण पर हिंदू संगठनों को कठघरे में खड़ा करना कथित हिंदू-आतंकवाद पर शोर-शराबा करने के समान है. यानी वास्तविक दोषियों और मूल गड़बड़ी पर चुप्पी साधने जैसी बात. वस्तुत: आतंकवाद और संगठित धर्मांतरण, इन दोनों ही समस्याओं के संदर्भ में हिंदू तो पीड़ित समुदाय है, उत्पीड़क नहीं. धर्मांतरण  संबंधी घटनाओं के सदियों के अनुभव, आंकड़े तथा उन पर भारतीय महापुरुषों के सुचिंतित वचन और शिक्षायें, सभी निरपवाद रूप से यही ...

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घरवापसी से उठा निष्कारण विवाद : मा. गो. वैद्य

उत्तर प्रदेश के आगरा महानगर में 57 मुस्लिम परिवारों ने फिर से अपने मूल हिन्दू धर्म में प्रवेश किया. इस घटना को लेकर संसद में तथा प्रसार माध्यमों में अकारण विवाद खड़ा किया जा रहा है. अनेक लोगों ने इस विधि को धर्मान्तरण, धर्म परिवर्तन, अंग्रेजी में ‘कन्व्हर्शन’ कहा है. किन्तु यह धर्मपरिवर्तन नहीं है. यह अपने ही घर में यानी समाज में परावर्तन यानी पुनरागमन है. यह ‘घरवापसी’ है. उनका धर्म परिवर्तन तो पहले ही हो चु ...

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