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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 2

कुश निर्मित आद्य श्रीराम मंदिर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भारत की सांस्कृतिक मर्यादा के अनुरूप अनेक महत्वपूर्ण निर्णय अपने जीवन में ही ले लिये थे. मरते दम तक सत्ता से चिपके रहने के अनैतिक दुर्भाव को ठोकर मारकर राजा राम ने समस्त साम्राज्य को अपने भाईयों एवं पुत्रों में बांट दिया था. श्रीराम ने अयोध्या छोड़ने का निश्चय कर के महाप्रयाण की मानसिकता बना ली. आयु का प्रभाव शरीर पर पड़ते ही उन्होंने सरयु मैया की ग ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 1

पतित-पावनी : अयोध्या जिसे युद्ध में कोई जीत न सके वही अयोध्या है. हिमालय की गोद में अठखेलियां खेलती हुई पुण्य-सलिला सरयु अविरल चट्टानी रास्तों को तोड़कर मैदानी क्षेत्रों को तृप्त करती चली आ रही है. वैदिक काल से आज तक निरंतर चला आ रहा यह पुण्य प्रवाह अपने अंदर भारत राष्ट्र के सहस्राब्दियों पुराने इतिहास को संजोए हुए है. इसी पतित पावनी नदी ‘सरयु मैया’ के किनारे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की क्रीडा स्थली अयोध्य ...

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भारतीयता का मूल भाव

'भविष्य का भारत' - इस विषय पर हाल ही में हुई व्याख्यान माला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने जब कहा कि “संघ जिस बंधुभाव को लेकर काम करता है, उस बंधुभाव का एक ही आधार है, विविधता में एकता. परम्परा से चलते आए इस चिंतन को ही दुनिया हिंदुत्व कहती है. इस लिए हम कहते हैं कि हमारा हिन्दू राष्ट्र है. इसका मतलब इस में मुसलमान नहीं चाहिए , ऐसा बिलकुल नहीं होता है. जिस दिन यह कहा जाएगा कि ...

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हिन्दुओं का कातिल और मंदिरों को ध्वस्त करने वाला तानाशाह था टीपू

जयंतियां हम मनाते हैं महान हस्तियों को याद करने के लिए, लेकिन टीपू सुल्तान की जयंती मनाना सिर्फ मुस्लिम वोटरों को लुभाना ही कांग्रेस का एकमात्र मकसद है. सेकुलर और वामपंथी इतिहासकारों द्वारा लिखी पाठ्यपुस्तकों में यही पढ़ाया जाता है कि टीपू सेकुलर, साम्राज्यवाद विरोधी और जनकल्याणकारी शासक था. उनकी मुख्य दलील होती है टीपू ऐसा शासक था, जिसने उपनिवेशवादी अंग्रेजों से युद्ध किया. अंग्रेज भी उसका लोहा मानते थे. इ ...

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हिन्दुओं का हितैषी नहीं बर्बर हत्यारा था टीपू

दक्षिण भारत में असंख्य लोग जानते हैं कि टीपू का शासन हिन्दू जनता के विनाश और इस्लाम के प्रसार के अलावा कुछ न था. अंग्रेजों से उस की लड़ाई अपना राज और अस्तित्व बचाने के लिए थी. इसके लिए उस ने फ्रांस को यहां आक्रमण करने का न्योता दिया, जिस की मदद से उस ने भारतीय जनता को रौंद डाला. टीपू ने केवल फ्रांस ही नहीं, ईरान, अफगानिस्तान को भी हमले के लिए बुलाया था. अत: अंग्रेजों से टीपू की लड़ाई को ‘देशभक्ति’ कहना दुष्टत ...

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यदि हिटलर अत्याचारी था, तो टीपू सुल्तान नायक कैसे?

टीपू सुल्तान और एडोल्फ हिटलर ने अपने शासनकाल में एक विशेष संप्रदाय को शिकार बनाया, साथ ही यह दोनों ब्रितानियों से लड़े भी थे. अब ऐसा क्यों है कि जहां भारत में हिटलर की पहचान क्रूर शासक की है, वही टीपू को नायक बताया जा रहा है? हिटलर के अतिरिक्त गोडसे के कृत्य और विचार भी देश के एक वर्ग के लिए घृणा का पर्याय और उनके नाम पर बना मंदिर भी मानवता-बहुलतावाद विरोधी और फासीवाद का प्रतीक है. फिर ऐसा क्यों है कि देश क ...

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झूठे बाने में पलता पीएफआई का जिहाद

कुछ बरसों से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पी.एफ.आई.) अपने कारनामों के कारण पूरे देश में चर्चित है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह संगठन उभरते भारत के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है. सामान्यत: यह संगठन मुस्लिम युवा, मुस्लिम क्षमता, मुस्लिम रणनीति, मुस्लिम कल्याण, मुस्लिम एकीकरण की बात करता है, लेकिन इसकी गतिविधियों को देखने से पता चलता है कि इसके मूल में गिरोहबंदी और हिंसा है. जानकारों का मानना है कि अब तो इसने आ ...

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कांग्रेस के कार्यकाल में हुए हाशिमपुरा नरसंहार पर क्यों मौन है सेकुलर मीडिया !

मेरठ के हाशिमपुरा कांड में 2 मई 1987 को हुए नरसंहार में दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. दिल्ली हाइकोर्ट ने सभी को हत्या, अपहरण, साक्ष्यों को मिटाने का दोषी मानते हुए सजा सुनाई है और तीसहजारी कोर्ट के फैसले को पलट दिया है. दरअसल दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट ने साल 2015 में सभी 19 आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसमें तीन की मौत हो चुकी है. हाशिमपुरा में निर्दोष लोगों को निशाना बनाए जाने के खिलाफ मोर्चा लेन ...

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अमेरिका भी मानता है कि भारत वामपंथी हिंसा से पीड़ित है

देर से ही सही, पर अब विश्व के कई देश जान गए हैं और मान भी रहे हैं कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी), जिसे भाकपा (माओवादी) के नाम से जाना जाता है, भारत के लिए सबसे गंभीर खतरा है. अमेरिकी विदेश विभाग की आतंकवाद पर हाल ही में जारी रपट में कहा गया है कि भाकपा (माओवादी) दुनिया का चौथा सबसे खतरनाक संगठन है. वह भारत में हिंसा के ज्यादातर मामलों के लिए जिम्मेदार है. इस कारण यह भारत का सबसे बड़ा हिंसक विद्रोही स ...

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शाश्वत मूल्यों के प्रकाश में चलने वाली परम्परा के लिए ग्लास्नोस्त शब्द अप्रासंगिक है

सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत की तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के पश्चात अपेक्षित बहस जनमाध्यमों में चल पड़ी है. अनेक लोगों ने इसका स्वागत किया है. कुछ लोगों ने जो कहा गया उसकी प्रामाणिकता पर संदेह जताया है. कुछ ने यह सब नीचे ज़मीनी स्तर तक कैसे पहुँच पाएगा, इस की चर्चा की है या चिंता व्यक्त की है. विभिन्न विषयों पर संघ के जिस दृष्टिकोण को सरसंघचालक ने रखा, वह कई लोगों को एकदम नया, क्रांतिकारी विचार लगा होगा. परंत ...

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