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संघ जीने वाला स्वयंसेवक

भय्याजी जोशी अटल जी एक संवेदनशील व्यक्ति के रूप में सदैव हमारे स्मरण में रहेंगे. ऐसे व्यक्ति सैकड़ों वर्षों के बाद जन्म लेते हैं. इस शतक में उनके समान और कोई नहीं है. अटल जी अटल जी थे. संघ को वाकई जीने वाले स्वयंसेवक थे. अटल जी संघ के स्वयंसेवक थे. हम उनके जीवन के प्रारंभिक कालखंड को देखते हैं तो यह ध्यान में आता है कि वे युवावस्था में कार्ल मार्क्स के विचारों से प्रभावित थे. लेकिन संघ के स्वयंसेवक बनने के ब ...

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हिन्दुत्व अर्थात् भारतीयता

राष्ट्र की सनातन पहचान से परहेज कैसा? हिन्दुस्थान में हिन्दुत्व का विरोध हो, तो हिन्दुस्थानियों के लिए इससे दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है? इसके लिए वर्तमान राजनीतिक वातावरण जिम्मेदार है और इस वातावरण को बनाया है उन लोगों ने जिन्हें राष्ट्र और समाज की भारतीय अवधारणा से कुछ भी लेना-देना नहीं है. इस प्रकार के दलों, संगठनों और संस्थाओं के अज्ञान और सीमित मानसिकता ने हिन्दुत्व की विशालता को टुकड़ों में बांटकर ...

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संघ को नजदीक जाकर समझने की आवश्यकता

जफर इरशाद, वरिष्ठ पत्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का यह कथन महत्वपूर्ण है कि जिस दिन हम कहेंगे कि मुसलमान नहीं चाहिए, उस दिन हिंदुत्व भी नहीं रहेगा. इस कथन की गहराई को अगर देश का आम मुसलमान समझ जाए तो शायद उन विपक्षी दलों की राजनीतिक दुकानें बंद हो जाएं जो धर्म-मजहब के नाम पर राजनीति करते रहते हैं. नि:संदेह उन मुस्लिम नेताओं की भी राजनीति खत्म हो जाएगी जो मुसलमानों को संघ के नाम पर ड ...

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स्वामी विवेकानंद ने विश्व बंधुत्व का विचार सबके सम्मुख रखा था – डॉ. मनमोहन वैद्य

कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के साथ करने पर संघ से परिचित और राष्ट्रीय विचार के लोगों आश्चर्य होना स्वाभाविक है. भारत के वामपंथी, माओवादी और क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थ के लिए राष्ट्र विरोधी तत्वों के साथ खड़े तत्वों को इससे आनंद होना भी अस्वाभाविक नहीं है. वैसे, इसका अर्थ ये नहीं कि राहुल गांधी जिहादी मुस्लिम आतंकवाद की वैश्विक त्रासदी से अनजान ह ...

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‘सवर्ण’ और ‘दलित’ – हिन्दुओं को बांटने का षड्यंत्र है यह समाजघातक शब्दावली

मैं अपनी बात को एक प्रश्न के साथ शुरु करता हूं. जब अनेक सड़कों, शहरों, योजनाओं, संस्थाओं और अदारों के नाम बदले जा रहे हैं तो फिर समाज को तोड़ने वाली सवर्ण और दलित जैसी खतरनाक शब्दावली को क्यों नहीं बदला जा रहा? इन दिनों दलित बनाम सवर्ण के प्रश्न पर हो रहे राजनीतिक घमासान को देखकर उन अंग्रेज शासकों की आत्माएं फूली नहीं समा रही होंगी, जिन्होंने अपने सम्राज्यवादी शिकंजे को कसने के लिए हिन्दू समाज में जाति आधारित ...

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अर्बन नक्सलियों में अटकी माओवादियों की जान

अगस्त 2008 में बिहार में भयानक बाढ़ आई थी. बताया गया था कि नेपाल का कुसहा बांध टूटने की वजह से यह बाढ़ आई है. यही वह साल था, जब पहली बार मेरा परिचय 'अर्बन नक्सल' यानि शहरी नक्सलवाद शब्द से हुआ था. बिहार में बाढ़ का पानी उतर चुका था. एक शाम 'बाढ़ मुक्ति अभियान' के संयोजक दिनेश कुमार मिश्र का फोन आया. टिकट भिजवा दिया है, पटना आना है. उनके आदेश के बाद पटना पहुंच गया. देश के एक दर्जन पत्रकारों के साथ बिहार की ब ...

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स्वयंसेवक ‘अटल’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निष्ठावान स्वयंसेवक अटल बिहारी वाजपेयी बाल्यकाल से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक अपने स्वयंसेवकत्व पर अटल रहे. संघ का स्वयंसेवक अर्थात् अपने संगठन, समाज और राष्ट्र के हित में स्वयं की प्रेरणा से निःस्वार्थ भाव से निष्ठापूर्वक निरंतर काम करने वाला आदर्श नागरिक. 15 वर्ष की आयु में डी.ए.वी. कॉलेज कानपुर के छात्रावास की संघ शाखा में अपना संघ जीवन प्रारम्भ करने वाले अटल जी को वामपंथी विचा ...

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‘सर्वांग स्वतंत्रता/सर्वांगीण विकास’ की ओर संघ के बढ़ते कदम

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम - 16 (अंतिम) 15 अगस्त 1947 को देश दो भागों में विभक्त हो गया. ‘इंडिया दैट इज़ भारत’ और ‘पाकिस्तान’. भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त होने बाद गांधी जी ने ‘कांग्रेस का काम पूरा हो गया, अब इसे समाप्त कर के एक सेवादल के रूप में परिवर्तित कर देना चाहिए’ का सुझाव कांग्रेस के नेताओं के समक्ष रखा था. परन्तु सत्ता के मोह में फंस चुके कांग्रेस के नेताओं ने गांधी जी की एक ...

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वे पन्द्रह दिन – समापन, 15 अगस्त के बाद…

भारत तो स्वतंत्र हो गया. विभाजित होकर..! परन्तु अब आगे क्या..? दुर्भाग्य से गांधी जी ने मुस्लिम लीग के बारे में जो मासूम सपने पाल रखे थे, वे टूट कर चूर-चूर हो गए. गांधी जी को लगता था, कि ‘मुस्लिम लीग को पकिस्तान चाहिये, उन्हें वो मिल गया. अब वो क्यों किसी को तकलीफ देंगे..?’ पांच अगस्त को ‘वाह’ के शरणार्थी शिबिर में उन्होंने यह कहा था, कि मुस्लिम नेताओं ने उन्हें आश्वासन दिया है कि ‘हिन्दुओं को कुछ नहीं होगा ...

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वे पन्द्रह दिन… / 15 अगस्त, 1947

आज की रात तो भारत मानो सोया ही नहीं है. दिल्ली, मुम्बई, कलकत्ता, मद्रास, बंगलौर, लखनऊ, इंदौर, पटना, बड़ौदा, नागपुर... कितने नाम लिए जाएं. कल रात से ही देश के कोने-कोने में उत्साह का वातावरण है. इसीलिए इस पृष्ठभूमि को देखते हुए कल के और आज के पाकिस्तान का निरुत्साहित वातावरण और भी स्पष्ट दिखाई देता है. रात भर शहर में घूम-घूमकर, स्वतंत्रता का आनंद लेने के पश्चात् सभी लोग अपने-अपने घरों में पहुंच चुके हैं और उन ...

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