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आध्यात्मिक बने बिना आजादी असंभव: दादा वासवानी

विजयादशमी समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में साधु वासवानी मिशन के अध्यक्ष दादा वासवानी जी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों के चलते वे उपस्थित नहीं हो सके. उनका संक्षिप्त भाषण उन्हीं की वाणी से ध्वनिमुद्रित कर समारोह स्थल पर सुनाया गया. विस्तृत भाषण सबके समक्ष पढ़ा गया. यहां वह अविरल रूप में प्रस्तुत है. मेरे प्यारे भाइयो और बहनो! आप सबको मेरा हार्दिक प्रणाम! मैं भारत देश की मीठी मधुर हिंदी भाषा ...

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प.पू. सरसंघचालक जी का श्री विजयादशमी उद्बोधन

एक वर्ष के पश्चात् फिर से हम सब विजयादशमी के पुण्यपर्व पर यहाँ एकत्रित हैं, परंतु इस वर्ष का वातावरण भिन्न है यह अनुभव हम सभी को होता है. भारतीय वैज्ञानिकों के द्वारा पहिले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में यान का सफल प्रवेश करा कर हमारे संबंध में विश्व में गौरव तथा भारतीयों के मन में आत्मविश्वास की वृद्धि में चार चाँद जोड़ दिये है. मंगल अभियान में जुड़े वैज्ञानिकों का तथा अन्य सभी कार्यकर्ताओं का हम हृदय से ...

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एकात्म मानव दर्शन – पंडित दीनदयाल उपाध्याय

आज स्वतंत्रता-प्राप्ति के 66 वर्ष उपरान्त भी भारत के सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न बना हुआ है कि सम्पूर्ण जीवन की रचनात्मक दृष्टि से कौन-सी दिशा ली जाये? इस संबंध में सामान्यतया लोग सोचने के लिये तैयार नहीं. वे तो तात्कालिक प्रश्नों का ही विचार करते हैं. कभी आर्थिक प्रश्नों को लेकर उनको सुलझाने का प्रयत्न होता है और कभी राजनीतिक अथवा सामाजिक प्रश्नों को सुलझाने के प्रयत्न किये जाते हैं. किंतु मूल दिशा का पता न ...

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तीसरे विकल्प की खोज

आर्थिक समृद्धि के पीछे जी-तोड़ भाग रहा विश्व आज एक अभूतपूर्व उलझन में फँसा है. उत्पादन की प्रविधियों में अनेक नये अन्वेषण हुये हैं. प्राकृतिक सम्पत्ति के अनेक स्रोत उपलब्ध हुये हैं. उत्पादन में भी प्रचण्ड वृद्धि हुई है और इस सबके होते हुये भी वह उलझन अभी न केवल बनी हुई है, बल्कि बढ़ती भी जा रही है. अभावग्रस्त लोगों के सम्मुख अपनी समस्यायें तो हैं ही, किन्तु अपार समृद्धि वाले लोगों के सम्मुख भी कई नयी समस्या ...

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कौशलयुक्त कर्म की प्रेरणा देते हैं भगवान विश्वकर्मा

भारतीय मनीषा में पर्वों-उत्सवों का अपना विशेष सांस्कृतिक-आध्यात्मिक आधार है. विशेषकर जयंती मनाने के पीछे आदर्श, मूल्य, धरोहर और सामाजिक उपादेयता का अधिक महत्व होता है. हम राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर से लेकर भगवान विश्वकर्मा और अन्य सभी महापुरुषों की जयंती प्रेरणा स्वरूप मनाते हैं. रामनवमी या कृष्ण जन्माष्टमी समाज को ऊर्जा देने वाले सांस्कृतिक-आध्यात्मिक आयाम हैं. विश्वकर्मा जयंती, राष्ट्रीय श्रम दिवस को इसी प ...

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दिखने लगे षड्यंत्र के सूत्र

उग्रवादी संगठन अल कायदा ने पिछले दिनों 'भारत में जिहादी राज' लाने की धमकी दी.'ब्रेकिंग इंडिया' पुस्तक में इसके बारे में पहले ही बताया जा चुका है. अब अल कायदा की प्रत्यक्ष धमकी के बाद उसमें वर्णित भारत विरोधी षड्यंत्र की कलई खोलने वाले अन्य लेखों की चेतावनियों का महत्व और बढ़ गया है. इस पुस्तक के अनुसार, जिहादियों, चर्च के तत्वों और माओवादियों ने इस देश को आपस में बांट लिया है और बड़े-बड़े क्षेत्रों में बांट ...

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क्या इस लव जिहाद को कबूल करेंगे?

दुनिया की नजरों में तुम भले ही मेरी पत्नी बन गई हो, किंतु मेरे लिये तुम तब तक मेरी बीवी नहीं, जब तक तुम तीन बार ‘मुझे कबूल है, कबूल है, कबूल है’ नहीं कह देती.’ हिंदू रीति-रिवाज से एक हिंदू लड़की विवाह करके जब पहली बार ससुराल पहुंची तो उसे पता चला कि जिस लड़के ने खुद को हिंदू बताकर उससे शादी की है, वह वास्तव में मुसलमान है! सोच सकते हैं उस पर क्या बीती होगी? झूठे प्रेमजाल में फंस वैवाहिक जीवन के हसीन सपने लिये ...

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श्री गणेश चतुर्थी आज: गणेशगीता से बप्पा का रहस्यमयी दिव्य संदेश

पौराणिक मान्यता है श्रीकृष्ण की तरह आदिदेव गणपति ने भी संदेश दिये थे, जिन्हें गणेशगीता में पढ़ा जा सकता है. इस ग्रंथ में योगशास्त्र का विस्तार से वर्णन है, जो व्यक्ति को बुराइयों के अंधकार से अच्छाइयों के प्रकाश की ओर ले जाता है. लीलाओं का विस्तृत वर्णन ब्रह्मावैवर्तपुराण में स्वयं भगवान कृष्ण मंगलमूर्ति गणेशजी को अपने समतुल्य बताते हुए कहते हैं कि मात्र वे दोनों ही ईश्वर का पूर्णावतार हैं. यद्यपि ब्रह्मावै ...

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संघ प्रमुख के बयान पर इतनी तिलमिलाहट क्यों ?

हमारा देश ऐसी अवस्था में पहुंच गया है जहां ऐसा लगता ही नहीं कि किसी के बयान पर शांति और संतुलन से विचार कर प्रतिक्रिया देने की हम आवश्यकता समझते हैं. किसी का एक बयान आया नहीं कि हम उसका परिप्रेक्ष्य, पृष्ठभूमि संदर्भ आदि जाने बिना बयानवीर बन कर खड़े हो जाते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ.मोहन भागवत के हिन्दू संबंधी बयान पर जो बावेला खड़ा करने की कोशिशें हो रहीं हैं वे इसी श्रेणी की हैं. अगर कटु सच ...

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श्री गुरु जी के विचार : हिन्दू ही क्यों?

जो लोग या समाज, अपने देश को मातृभूमि मानकर उसका वन्दन करता है, जिसकी इतिहास की अनुभूतियाँ समान हैं, तथा जिसके सांस्कृतिक जीवनमूल्य समान हैं, उस समाज का राष्ट्र बनता है. अपने देश के सन्दर्भ में विचार किया तो यह स्पष्ट रूप से प्रतीत होगा कि, ऐसे समाज का नाम हिन्दू है. अतः यह हिन्दू राष्ट्र है. एक राष्ट्र बनने के लिये समान भाषा की आवश्यकता नहीं है. अमेरिका और कनाडा की भाषा एक है, किन्तु वे अलग राष्ट्र हैं, कार ...

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