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14 अगस्त यानी अखंड भारत संकल्प दिवस

अखण्ड भारत महज सपना नहीं, श्रद्धा है, निष्ठा है. जिन आंखों ने भारत को भूमि से अधिक माता के रूप में देखा हो, जो स्वयं को इसका पुत्र मानता हो, जो प्रात: उठकर "समुद्रवसने देवी पर्वतस्तन मंडले, विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यम् पादस्पर्शं क्षमस्वमे. "कहकर उसकी रज को माथे से लगाता हो, वन्देमातरम् जिनका राष्ट्रघोष और राष्ट्रगान हो, ऐसे असंख्य अंत:करण मातृभूमि के विभाजन की वेदना को कैसे भूल सकते हैं, अखण्ड भारत के संकल्प को ...

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‘लव जेहाद’ की राष्ट्रीय एजेंसी से जांच जरूरी

मुस्लिम युवकों द्वारा हिन्दू लड़कियों की छेड़खानी और उन्हें प्रेमजाल में फंसाकर धर्मांतरण कराने का षडयन्त्र काफी समय से चल रहा है, जिसके पीछे का उद्देश्य मुस्लिम जनसंख्या को तेजी से बढ़ाना तथा हिन्दुओं मे भय व्याप्त करना है. इस षड़यन्त्र को लव जेहाद के नाम से जाना जाता है. इसके चलते हिन्दू युवतियों का स्कूल इत्यादि आना जाना भी बहुत कठिन हो गया है. मुस्लिम युवक सरकार और कानून से कितने बेखौफ होकर इस प्रकार की ...

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रक्षाबंधन उत्सव का महत्व

परस्पर संबंधों पर आधारित है जिन्दगी. संबंध की पवित्रता को ठीक समझकर परस्पर पूरक जीवन जीने से ही ऐश्वर्य की प्राप्ति कर सकते हैं. इस तत्व को श्रीकृष्ण जी ने बहुत ही रोचक ढंग से भगवदगीता  में कहा है - देवान भावयतानेन, ते देवा भाव यन्नुवः। परस्परं भाव यन्तः, श्रेयः परम वाप्स्यथः।। ऐश्वर्य प्राप्ति के लिये भगवान जिस श्रेयमार्ग को दिखाता है उस अंतर संबद्धता का महोत्सव है श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाब ...

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रक्षाबंधन : संघ के महाभियान का एक चरणरूप

रक्षा बंधन के पर्व का महत्व भारतीय जनमानस में प्राचीन काल से गहरा बना हुआ है. यह बात सच है कि पुरातन भारतीय परंपरा के अनुसार समाज का शिक्षक वर्ग होता था, वह रक्षा सूत्र के सहारे इस देश की ज्ञान परंपरा की रक्षा का संकल्प शेष समाज से कराता था. सांस्कृतिक और धार्मिक पुरोहित वर्ग भी रक्षा सूत्र के माध्यम से समाज से रक्षा का संकल्प कराता था. हम यही पाते हैं कि किसी भी अनुष्ठान के बाद रक्षा सूत्र के माध्यम से उपस ...

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पोप के दक्षिण कोरिया दौरे के पीछे क्या?

कैथोलिक मत के प्रमुख पोप फ्रांसिस अगले महीने एशिया के प्रमुख देश दक्षिण कोरिया का दौरा करने वाले हैं. छठे एशियाई युवा महोत्सव के प्रमुख अतिथि के रूप में वे वहां उपस्थित रहने वाले हैं. पोप का पद स्वीकारने के बाद यह एशिया में उनकी पहली यात्रा है. चीन में अगले कुछ वर्षों में ईसाई जनसंख्या अमेरिका में ईसाइयों की जनसंख्या के बराबर ही जायेगी. यह घोषणा होने के बाद चीन की सीमा से सटे दक्षिण कोरिया में पोप की यह यात ...

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चीन में मतांतरण पर सख्ती से चर्च में खलबली

आज अमेरिका में ईसाइयों की जितनी संख्या है, उतने ही ईसाई पंद्रह वर्ष बाद चीन में होंगे. यह घोषणा एक चीनी ईसाई मिशनरी ने की है और अमेरिका के परडू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्रोफेसर ने उसके कहे का समर्थन भी किया है. इसलिये फिलहाल चीन में अल्पसंख्यकों के मामले में अघोषित आपातकाल जारी है. समझा जाता था कि विदेशों से नाता रखने वाले जिहादियों एवं चर्च के तत्वों से इस तरह के अल्पसंख्यकों से संबंधित विषयों से न ...

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नरसंहार का भय और लूट का साम्राज्य

पूरा विश्व इस समय बीस वर्ष पूर्व हुए दस लाख लोगों के नरसंहार की दुखद स्मृति में डूबा है. रवांडा में वह नरसंहार 7 अप्रैल 1994 से शुरू होकर 17 जुलाई तक चला था. दुनिया का इससे जितना संबंध है, भारत का उससे अधिक है, क्योंकि अंग्रेजों द्वारा उस देश में घुसपैठ से लेकर भारत में आर्य-अनार्य विवाद, मोहनजोदड़ो, पाकिस्तान निर्माण एवं उस देश में लगातार अशांति फैलाना, इनमें से हर एक मामले में भारत एवं रवांडा का इतिहास एक ...

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राष्ट्र रक्षा का शुभ संकल्प लेने का दिन गुरु पूर्णिमा

भारतीय इतिहास गुरु-शिष्य संबंधों की गाथाओं से भरा पड़ा है. समय-समय पर गुरुओं ने जन-कल्याण के लिये मंत्र दिया, जिसे उनके शिष्यों ने दूर-दूर तक प्रसारित एवं प्रचारित किया इस संबंध की स्मृति में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अनादिकाल से मनाया जाता रहा है. परंतु इसे महर्षि व्यास ने अधिक व्यापक बनाया. इस कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. प्राचीन काल में गुरु दीक्षा और गुरु दक्षिणा के लिय ...

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तमिल-सिंहली विवाद गहराने को ली लेम्युरिया की मदद

कुछ देशों में दीर्घकालीन युद्घ के बीज बोना और उसमें से अपने हित साधना, यही यूरोपीय देशों का पांच सदी का इतिहास है. इस दौरान विश्व पर राज करने और उसमें बहुत बड़ी लूट करने का तरीका दुनिया ने देखा है. भारत सहित विश्व का कोई भी देश इसमें अपवाद नहीं है. एशिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका में कोई भी युद्घ हो और उसका संबंध यूरोपीय वर्चस्व एवं प्रचंड लूट के साथ न हो, ऐसा आमतौर पर नहीं होता. ये युद्घ अधिकतर तो हेमेटिक-स ...

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भारतीय शिक्षा का सच्चा स्वरूप: परम पूज्य श्री गुरु जी

हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि अंग्रेजों ने इस देश में योजनापूर्वक लम्बे समय तक इस बात का प्रयास किया, कि इस देश का राष्ट्रीय समाज अपने इतिहास, संस्कृति तथा सभ्यता को पूरी तरह भुला दे. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये, उन्होंने शिक्षा की एक योजना बनाई. इस योजना के अंग्रेज मूलपुरुष ने कहा था, कि भारत में काले अंग्रेजों का निर्माण करना है. इसी प्रकार की स्वत्वशून्य शिक्षा की रचना, हमारे देश में चलती रही. अंग्रेजों ...

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