You Are Here: Home » विचार (Page 8)

संघ प्रमुख के बयान पर इतनी तिलमिलाहट क्यों ?

हमारा देश ऐसी अवस्था में पहुंच गया है जहां ऐसा लगता ही नहीं कि किसी के बयान पर शांति और संतुलन से विचार कर प्रतिक्रिया देने की हम आवश्यकता समझते हैं. किसी का एक बयान आया नहीं कि हम उसका परिप्रेक्ष्य, पृष्ठभूमि संदर्भ आदि जाने बिना बयानवीर बन कर खड़े हो जाते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ.मोहन भागवत के हिन्दू संबंधी बयान पर जो बावेला खड़ा करने की कोशिशें हो रहीं हैं वे इसी श्रेणी की हैं. अगर कटु सच ...

Read more

श्री गुरु जी के विचार : हिन्दू ही क्यों?

जो लोग या समाज, अपने देश को मातृभूमि मानकर उसका वन्दन करता है, जिसकी इतिहास की अनुभूतियाँ समान हैं, तथा जिसके सांस्कृतिक जीवनमूल्य समान हैं, उस समाज का राष्ट्र बनता है. अपने देश के सन्दर्भ में विचार किया तो यह स्पष्ट रूप से प्रतीत होगा कि, ऐसे समाज का नाम हिन्दू है. अतः यह हिन्दू राष्ट्र है. एक राष्ट्र बनने के लिये समान भाषा की आवश्यकता नहीं है. अमेरिका और कनाडा की भाषा एक है, किन्तु वे अलग राष्ट्र हैं, कार ...

Read more

14 अगस्त यानी अखंड भारत संकल्प दिवस

अखण्ड भारत महज सपना नहीं, श्रद्धा है, निष्ठा है. जिन आंखों ने भारत को भूमि से अधिक माता के रूप में देखा हो, जो स्वयं को इसका पुत्र मानता हो, जो प्रात: उठकर "समुद्रवसने देवी पर्वतस्तन मंडले, विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यम् पादस्पर्शं क्षमस्वमे. "कहकर उसकी रज को माथे से लगाता हो, वन्देमातरम् जिनका राष्ट्रघोष और राष्ट्रगान हो, ऐसे असंख्य अंत:करण मातृभूमि के विभाजन की वेदना को कैसे भूल सकते हैं, अखण्ड भारत के संकल्प को ...

Read more

‘लव जेहाद’ की राष्ट्रीय एजेंसी से जांच जरूरी

मुस्लिम युवकों द्वारा हिन्दू लड़कियों की छेड़खानी और उन्हें प्रेमजाल में फंसाकर धर्मांतरण कराने का षडयन्त्र काफी समय से चल रहा है, जिसके पीछे का उद्देश्य मुस्लिम जनसंख्या को तेजी से बढ़ाना तथा हिन्दुओं मे भय व्याप्त करना है. इस षड़यन्त्र को लव जेहाद के नाम से जाना जाता है. इसके चलते हिन्दू युवतियों का स्कूल इत्यादि आना जाना भी बहुत कठिन हो गया है. मुस्लिम युवक सरकार और कानून से कितने बेखौफ होकर इस प्रकार की ...

Read more

रक्षाबंधन उत्सव का महत्व

परस्पर संबंधों पर आधारित है जिन्दगी. संबंध की पवित्रता को ठीक समझकर परस्पर पूरक जीवन जीने से ही ऐश्वर्य की प्राप्ति कर सकते हैं. इस तत्व को श्रीकृष्ण जी ने बहुत ही रोचक ढंग से भगवदगीता  में कहा है - देवान भावयतानेन, ते देवा भाव यन्नुवः। परस्परं भाव यन्तः, श्रेयः परम वाप्स्यथः।। ऐश्वर्य प्राप्ति के लिये भगवान जिस श्रेयमार्ग को दिखाता है उस अंतर संबद्धता का महोत्सव है श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाब ...

Read more

रक्षाबंधन : संघ के महाभियान का एक चरणरूप

रक्षा बंधन के पर्व का महत्व भारतीय जनमानस में प्राचीन काल से गहरा बना हुआ है. यह बात सच है कि पुरातन भारतीय परंपरा के अनुसार समाज का शिक्षक वर्ग होता था, वह रक्षा सूत्र के सहारे इस देश की ज्ञान परंपरा की रक्षा का संकल्प शेष समाज से कराता था. सांस्कृतिक और धार्मिक पुरोहित वर्ग भी रक्षा सूत्र के माध्यम से समाज से रक्षा का संकल्प कराता था. हम यही पाते हैं कि किसी भी अनुष्ठान के बाद रक्षा सूत्र के माध्यम से उपस ...

Read more

पोप के दक्षिण कोरिया दौरे के पीछे क्या?

कैथोलिक मत के प्रमुख पोप फ्रांसिस अगले महीने एशिया के प्रमुख देश दक्षिण कोरिया का दौरा करने वाले हैं. छठे एशियाई युवा महोत्सव के प्रमुख अतिथि के रूप में वे वहां उपस्थित रहने वाले हैं. पोप का पद स्वीकारने के बाद यह एशिया में उनकी पहली यात्रा है. चीन में अगले कुछ वर्षों में ईसाई जनसंख्या अमेरिका में ईसाइयों की जनसंख्या के बराबर ही जायेगी. यह घोषणा होने के बाद चीन की सीमा से सटे दक्षिण कोरिया में पोप की यह यात ...

Read more

चीन में मतांतरण पर सख्ती से चर्च में खलबली

आज अमेरिका में ईसाइयों की जितनी संख्या है, उतने ही ईसाई पंद्रह वर्ष बाद चीन में होंगे. यह घोषणा एक चीनी ईसाई मिशनरी ने की है और अमेरिका के परडू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्रोफेसर ने उसके कहे का समर्थन भी किया है. इसलिये फिलहाल चीन में अल्पसंख्यकों के मामले में अघोषित आपातकाल जारी है. समझा जाता था कि विदेशों से नाता रखने वाले जिहादियों एवं चर्च के तत्वों से इस तरह के अल्पसंख्यकों से संबंधित विषयों से न ...

Read more

नरसंहार का भय और लूट का साम्राज्य

पूरा विश्व इस समय बीस वर्ष पूर्व हुए दस लाख लोगों के नरसंहार की दुखद स्मृति में डूबा है. रवांडा में वह नरसंहार 7 अप्रैल 1994 से शुरू होकर 17 जुलाई तक चला था. दुनिया का इससे जितना संबंध है, भारत का उससे अधिक है, क्योंकि अंग्रेजों द्वारा उस देश में घुसपैठ से लेकर भारत में आर्य-अनार्य विवाद, मोहनजोदड़ो, पाकिस्तान निर्माण एवं उस देश में लगातार अशांति फैलाना, इनमें से हर एक मामले में भारत एवं रवांडा का इतिहास एक ...

Read more

राष्ट्र रक्षा का शुभ संकल्प लेने का दिन गुरु पूर्णिमा

भारतीय इतिहास गुरु-शिष्य संबंधों की गाथाओं से भरा पड़ा है. समय-समय पर गुरुओं ने जन-कल्याण के लिये मंत्र दिया, जिसे उनके शिष्यों ने दूर-दूर तक प्रसारित एवं प्रचारित किया इस संबंध की स्मृति में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अनादिकाल से मनाया जाता रहा है. परंतु इसे महर्षि व्यास ने अधिक व्यापक बनाया. इस कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. प्राचीन काल में गुरु दीक्षा और गुरु दक्षिणा के लिय ...

Read more
Scroll to top