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जयंती विशेष – गौरवशाली अतीत को सामने लाने वाले इतिहास पुरुष ठाकुर रामसिंह

ऐसा कहा जाता है कि शस्त्र या विष से तो एक-दो लोगों की ही हत्या की जा सकती है, पर यदि किसी देश के इतिहास को बिगाड़ दिया जाये, तो लगातार कई पीढ़ियाँ नष्ट हो जाती हैं. हमारे इतिहास के साथ दुर्भाग्य से ऐसा ही हुआ. और वर्तमान में हमारी युवा पीढ़ी गलत इतिहास पढ़ रही है, तथा अपने गौरवशाली अतीत से अनभिज्ञ होती जा रही है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता इस भूल को सुधारने में लगे हैं और वास्तविक इतिहास को खोज क ...

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युवा क्रांतिकारी बसंत कुमार बिस्वास

युवा क्रांतिकारी, देशप्रेमी बसंत कुमार बिस्वास ने महज 20 वर्ष की अल्पायु में ही देश के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी. अंग्रेजी हुकुमत के पसीने छुड़ाने वाले बिस्वास ने अपनी जान हथेली पर रखकर वायसराय लोर्ड होर्डिंग पर बम फेंका था. 06 फरवरी 1895 को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के पोरागाच्चा में जन्मे बिस्वास बंगाल के प्रमुख क्रांतिकारी संगठन "युगांतर" के सदस्य थे. वायसराय लोर्ड होर्डिंग की हत्या की योजना क्रांतिक ...

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31 जनवरी / जन्मदिवस – वनबन्धु मदनलाल अग्रवाल

अपना काम करते हुए समाज सेवा बहुत लोग करते हैं, पर 31 जनवरी, 1923 को झरिया (जिला धनबाद, झारखंड) में जन्मे मदनलाल अग्रवाल सामाजिक कार्य को व्यापार एवं परिवार से भी अधिक महत्व देते थे. उन्होंने अनेक संस्थाएं बनाकर अपने रिश्तेदारों व परिचितों को भी इस हेतु प्रेरित किया. यह परिवार जिला झुंझुनु (राजस्थान) के लोयल ग्राम का मूल निवासी था. इनके दादा हरदेव दास 1876 में झरिया आए थे. प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1913-14 मे ...

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29 जनवरी / जन्म दिवस- सबके रज्जू भैय्या

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैय्या) का जन्म 29 जनवरी, 1922 को ग्राम बनैल (जिला बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेश) के एक सम्पन्न एवं शिक्षित परिवार में हुआ था. उनके पिता कुँवर बलबीर सिंह अंग्रेज शासन में पहली बार बने भारतीय मुख्य अभियन्ता थे. इससे पूर्व इस पद पर सदा अंग्रेज ही नियुक्त होते थे. राजेन्द्र सिंह को घर में सब प्यार से रज्जू कहते थे. आगे चलकर उनका यही नाम सर्वत्र ...

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लाला लाजपत राय जयंती

लाला लाजपत राय का जन्म पंजाब के मोगा जिले में अग्रवाल परिवार में हुआ था. उन्होंने कुछ समय हरियाणा के रोहतक और हिसार शहरों में वकालत की. ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गरम दल के प्रमुख नेता थे. बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल के साथ इस त्रिमूर्ति को लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाता था. इन्हीं तीनों नेताओं ने सबसे पहले भारत में पूर्ण स्वतन्त्रता की माँग की थी, बाद में समूचा देश इनके साथ हो गया. उन्होंने स् ...

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महान वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्रनाथ बोस

हमारे देश का इतिहास वैज्ञानिक अनुसंधानों का साक्षी रहा है. शून्य की खोज से लेकर दशमलव की खोज तक देश के गौरवपूर्ण इतिहास का बखान करती है. लगातार विदेशी आक्रमण और गुलामी का दंश झेल रहे भारतवासियों को मंदबुद्धि वाला देश कहा जाने लगा, खोज के मामले में अनाड़ी समझा जाने लगा, विदेशी आक्रांता भारत को पिछलग्गुओं का देश कहने लगे. गुलामी ने भले ही हमें आर्थिक रुप से कमजोर बना दिया हो, लेकिन बौद्धिक रूप से हमने दुनिया ...

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25 दिसम्बर / जन्मदिवस – हिन्दुत्व के आराधक महामना मदनमोहन मालवीय

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का नाम आते ही हिन्दुत्व के आराधक पंडित मदनमोहन मालवीय जी की तेजस्वी मूर्ति आँखों के सम्मुख आ जाती है. 25 दिसम्बर, 1861 को इनका जन्म हुआ था. इनके पिता पंडित ब्रजनाथ कथा, प्रवचन और पूजाकर्म से ही अपने परिवार का पालन करते थे. प्राथमिक शिक्षा पूर्णकर मालवीय जी ने संस्कृत तथा अंग्रेजी पढ़ी. निर्धनता के कारण इनकी माताजी ने अपने कंगन गिरवी रखकर इन्हें पढ़ाया. इन्हें यह बात बहुत कष्ट देती ...

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25 दिसंबर / जन्मदिवस – भारत के अमूल्य रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी

राष्ट्रीय क्षितिज पर स्वच्छ छवि के साथ अजातशत्रु कहे जाने वाले कवि एवं पत्रकार, सरस्वती पुत्र अटल बिहारी वाजपेयी, एक व्यक्ति का नाम नहीं वरन् राष्ट्रीय विचारधारा का नाम था. राष्ट्रहित एवं राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रबल पक्षधर अटल जी राजनेताओं में नैतिकता के प्रतीक थे. अटल जी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ब्रह्ममुहर्त में ग्वालियर में हुआ था. मान्यता अनुसार पुत्र होने की खुशी में जहाँ घर में फूल की थाली बजाई जा रह ...

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राम प्रसाद बिस्मिल

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाजूए कातिल में है. इन पंक्तियों के रचयिता, राम प्रसाद बिस्मिल, उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे जो देश की आजादी के लिये अंग्रेजी शासन से संघर्ष करते शहीद हुए थे. उन्होंने वीर रस से भरी हुई, लोगों के हृदय को जोश से भर देने वाली अनेक कविताएं लिखीं. उन्होंने देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिये अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया. महान क्रान् ...

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अमर क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खान

अशफ़ाक़ उल्ला भारत माता के ऐसे वीर सपूत थे जो देश की आजादी के लिये हंसते- हंसते फांसी पर झूल गए. उनका पूरा नाम अशफाक़ उल्ला खान वारसी ‘हसरत’ था. बचपन से ही इनके मन में देश के प्रति अनुराग था. देश की भलाई के लिये चल रहे आंदोलनों की कक्षा में वे बहुत रूचि से पढ़ाई करते थे. धीरे धीरे उनमें क्रांतिकारी के भाव पैदा हुए. वे हर समय इस प्रयास में रहते थे कि किसी ऐसे व्यक्ति से भेंट हो जाए जो क्रांतिकारी दल का सदस्य ...

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