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27 जून / पुण्यतिथि – कर्तव्य व अनुशासनप्रिय दादाराव परमार्थ

नई दिल्ली. बात एक अगस्त, 1920 की है. लोकमान्य तिलक के देहान्त के कारण पूरा देश शोक में डूबा था. संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी किसी कार्य से घर से निकले. उन्होंने देखा कुछ लड़के सड़क पर गेंद खेल रहे हैं. डॉ. जी क्रोध में उबल पड़े - तिलक जी जैसे महान् नेता का देहान्त हो गया और तुम्हें खेल सूझ रहा है. सब बच्चे सहम गये. इन्हीं में एक थे गोविन्द सीताराम परमार्थ, जो आगे चलकर दादाराव परमार्थ के नाम से प्रसिद्ध हुए. ...

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26 जून / जन्मदिवस – वन्देमातरम् के रचयिता बंकिमचन्द्र चटर्जी

नई दिल्ली. भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में वन्देमातरम् नामक जिस महामन्त्र ने उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक जन-जन को उद्वेलित किया, उसके रचियता बंकिमचन्द्र चटर्जी का जन्म ग्राम कांतलपाड़ा, जिला हुगली, पश्चिम बंगाल में 26 जून, 1838 को हुआ था. प्राथमिक शिक्षा हुगली में पूर्ण कर उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंसी कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की. पढ़ाई के साथ-साथ छात्र जीवन से ही उनकी रुचि साहित ...

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25 जून / इतिहास स्मृति – …..और अंग्रेज सेना को करना पड़ा समर्पण

नई दिल्ली. जिन अंग्रेजों के अत्याचार की पूरी दुनिया में चर्चा होती है,  भारतीय वीरों ने कई बार उनके छक्के छुड़ाए थे. ऐसे कई प्रसंग इतिहास के पृष्ठों पर सुरक्षित हैं. ऐसा ही एक स्वर्णिम पृष्ठ कानपुर (उ.प्र.) से सम्बन्धित है. वर्ष 1857 में जब देश के अनेक भागों में भारतीय वीरों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल बजा दिया, तो इसकी आंच से कानपुर भी सुलग उठा. यहां अंग्रेज इतने भयभीत थे कि 24 मई, 1857 को रानी ...

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“मैं युद्ध भूमि छोड़कर नहीं जाऊंगी, इस युद्ध में मुझे विजय अथवा मृत्यु में से एक चाहिए” – रानी दुर्गावती

अकबर ने वर्ष 1563 में आसफ खान नामक बलाढ्य सेनानी को गोंडवाना पर आक्रमण करने भेज दिया. यह समाचार मिलते ही रानी दुर्गावती ने अपनी व्यूहरचना आरंभ कर दी. सर्वप्रथम अपने विश्वसनीय दूतों द्वारा अपने मांडलिक राजाओं तथा सेनानायकों को सावधान हो जाने की सूचनाएं भेज दीं. अपनी सेना की कुछ टुकड़ियों को घने जंगल में छिपा रखा और शेष को अपने साथ लेकर रानी निकल पड़ी. रानी ने सैनिकों को मार्गदर्शन किया. एक पहाड़ की तलहटी पर ...

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23 जून / बलिदान दिवस – डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी

छह जुलाई, 1901 को कोलकाता में श्री आशुतोष मुखर्जी एवं योगमाया देवी के घर में जन्मे डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी को दो कारणों से सदा याद किया जाता है. पहला तो यह कि वे योग्य पिता के योग्य पुत्र थे. श्री आशुतोष मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुलपति थे. 1924 में उनके देहान्त के बाद केवल 23 वर्ष की अवस्था में ही श्यामाप्रसाद को विश्वविद्यालय की प्रबन्ध समिति में ले लिया गया. 33 वर्ष की छोटी आयु में ही ...

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22 जून / बलिदान दिवस – बेटे व स्वयं की आहुति देने वाले नगर सेठ अमरचन्द बांठिया

नई दिल्ली. स्वाधीनता समर के अमर सेनानी सेठ अमरचन्द मूलतः बीकानेर (राजस्थान) के निवासी थे. वे अपने पिता अबीर चन्द बांठिया के साथ व्यापार के लिए ग्वालियर आकर बस गये थे. जैन मत के अनुयायी अमरचन्द जी ने अपने व्यापार में परिश्रम, ईमानदारी एवं सज्जनता के कारण इतनी प्रतिष्ठा पायी कि ग्वालियर राजघराने ने उन्हें नगर सेठ की उपाधि देकर राजघराने के सदस्यों की भांति पैर में सोने के कड़े पहनने का अधिकार दिया. आगे चलकर उन ...

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प्यारे लाल बेरी जी का जीवन

प्यारे लाल बेरी जी सन् 1946 में अमृतसर में तत्कालीन संघ प्रचारक ठाकुर राम सिंह जी के संपर्क में आने के बाद संघ के स्वयंसेवक बने. दुर्भाग्यवश 1947 में भारत का विभाजन हो गया. आप तब अमृतसर में ही संघ कार्य कर रहे थे. पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों के ठहरने, भोजन की व्यवस्था तथा उनको गंतव्य तक पहुंचाने के लिये बनी 'पंजाब रक्षा समिति' के भी सदस्य थे. अमृतसर में मुस्लिमों द्वारा पाकिस्तान जाने के समय खाली किये ...

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20 जून / बलिदान दिवस – राजा दाहरसेन का बलिदान

नई दिल्ली. भारत को लूटने और इस पर कब्जा करने के लिए पश्चिम के रेगिस्तानों से आने वाले मजहबी हमलावरों का वार सबसे पहले सिन्ध की वीरभूमि को ही झेलना पड़ता था. सिन्ध के राजा थे दाहरसेन, जिन्होंने युद्धभूमि में लड़ते हुए प्राणाहुति दी. उनके बाद उनकी पत्नी, बहिन और दोनों पुत्रियों ने भी अपना बलिदान देकर भारत में एक परम्परा का सूत्रपात किया. सिन्ध के महाराजा के असमय देहांत के बाद उनके 12 वर्षीय पुत्र दाहरसेन गद्द ...

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19 जून / जन्मदिवस – आत्मविलोपी व्यक्तित्व श्रीपति शास्त्री जी

संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता, इतिहास के प्राध्यापक तथा राजनीति, समाजशास्त्र, साहित्य आदि विषयों के गहन अध्येता श्रीपति सुब्रमण्यम शास्त्री जी का जन्म 19 जून, 1935 को कर्नाटक राज्य के चित्रदुर्ग जिले के हरिहर ग्राम में हुआ था. बालपन में ही वे स्वयंसेवक बने तथा अपने संकल्प के अनुसार अविवाहित रहकर अंतिम सांस तक संघ कार्य करते रहे. 1956 में वे मैसूर नगर कार्यवाह बने. उस दौरान उन्होंने मैसूर विवि से इतिहास में स्वर् ...

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18 जून / जन्मदिन – निर्मल और निर्भय सुदर्शन जी

सार्थकता और धन्यता 18 जून 1931 यह उनका जन्म दिन और 15 सितंबर 2012 उनका मृत्यु दिन. मतलब उनकी आयु 81 वर्ष थी. इस कारण, उनका अकाल निधन हुआ ऐसा नहीं कहा जा सकता. लेकिन कौन कितने दिन जीवित रहा, इसकी अपेक्षा कैसे जीया, इसका महत्त्व होता है. अनेक महापुरुषों ने तो बहुत ही जल्दी अपनी जीवन यात्रा समाप्त की है. आद्य शंकराचार्य, संत ज्ञानेश्‍वर, स्वामी विवेकानंद जैसे उनमें के लक्षणीय नाम हैं. एक पुरानी लोकोक्ति है; जो ...

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