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30 मार्च / जन्मदिवस – देशसेवा की कीमत वसूलने को पाप मानते थे अप्पा जी जोशी

नई दिल्ली. एक बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने कार्यकर्ता बैठक में कहा कि क्या केवल संघकार्य किसी के जीवन का ध्येय नहीं बन सकता ? यह सुनकर हरिकृष्ण जोशी जी ने उन 56 संस्थाओं से त्यागपत्र दे दिया, जिनसे वे सम्बद्ध थे. यही बाद में ‘अप्पा जी जोशी’ के नाम से प्रसिद्ध हुए. 30 मार्च, 1897 को महाराष्ट्र के वर्धा में जन्मे अप्पा जी ने क्रांतिकारियों तथा कांग्रेस के साथ रहकर काम किया. कांग्रेस ...

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25 मार्च / जन्मदिवस – दुनिया में स्वयंसेवकों को एक सूत्र में जोड़ने वाले श्रद्धेय चमन लाल जी

नई दिल्ली. दुनिया भर में फैले स्वयंसेवकों को एक सूत्र में जोड़ने वाले चमनलाल जी का जन्म 25 मार्च, 1920 को ग्राम सल्ली (स्यालकोट, वर्तमान पाकिस्तान) में जमीनों का लेनदेन करने वाले धनी व्यापारी बुलाकीराम गोरोवाड़ा जी के घर में हुआ था. वे मेधावी छात्र और कबड्डी तथा खो-खो के उत्कृष्ट खिलाड़ी थे. गणित में उनकी प्रतिभा का लोहा पूरा शहर मानता था. वर्ष 1942 में उन्होंने लाहौर से स्वर्ण पदक के साथ वनस्पति शास्त्र मे ...

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19 मार्च / पुण्यतिथि – क्रांतिवीर चारुचंद्र बोस, देशद्रोही को लगाया ठिकाने

नई दिल्ली. बंगाल के क्रांतिकारियों की निगाह में अलीपुर का सरकारी वकील आशुतोष विश्वास बहुत समय से खटक रहा था. देशभक्तों को पकड़वाने, उन पर झूठे मुकदमे लादने तथा फिर उन्हें कड़ी सजा दिलवाने में अपनी कानूनी बुद्धि का पूरा उपयोग कर रहा था. ब्रिटिश शासन के लिये वह एक पुष्प था, जबकि क्रांतिकारी उस कांटे को शीघ्र ही अपने मार्ग से हटाना चाहते थे. आशुतोष विश्वास यह जानता था कि क्रांतिकारी उसके पीछे पड़े हैं, अतः वह ...

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17 मार्च / बलिदान दिवस – आजाद हिन्द फौज के सेनानी लेफ्टिनेंट ज्ञानसिंह बिष्ट

नई दिल्ली. द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों एवं मित्र देशों की सामरिक शक्ति अधिक होने पर भी आजाद हिन्द फौज के सेनानी उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे थे. लेफ्टिनेंट ज्ञानसिंह बिष्ट भी ऐसे ही एक सेनानायक थे, जिन्होंने अपने से छह गुना बड़ी अंग्रेज टुकड़ी को भागने पर मजबूर कर दिया. 16 मार्च, 1945 को ‘सादे पहाड़ी के युद्ध’ में भारतीय सेना की ए कंपनी ने कैप्टेन खान मोहम्मद के नेतृत्व में अंग्रेजों को पराजित किया था. इस ...

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15 मार्च / जन्मदिवस – संगठन को समर्पित व्यक्तित्व सुनील उपाध्याय जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों से प्रेरित संगठनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् का विशेष स्थान है. अन्य संगठनों में जहां सभी आयु वर्ग के लोग होते हैं, वहां विद्यार्थी परिषद् शुद्ध युवाओं का संगठन है. परिषद के काम को हिमाचल प्रदेश में सुदृढ़ आधार देने वाले सुनील उपाध्याय जी का जन्म 15 मार्च, 1959 को जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में हुआ था. वे विद्या प्रकाश जी एवं पद्मावती देवी जी की छठी सन्ता ...

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14 मार्च / बलिदान दिवस – पेशावर पर भगवा लहराया

नई दिल्ली. पेशावर पर बलपूर्वक कब्जा कर अफगानी अजीम खां की सेनाएं नौशेहरा मैदान तक आ चुकी थी. यह सुनकर महाराजा रणजीत सिंह ने हरिसिंह नलवा एवं दीवान कृपाराम के नेतृत्व में उनका मुकाबला करने को स्वराजी सैनिकों के जत्थे खैराबाद भेज दिये. महाराजा के साथ बाबा फूला सिंह अटक नदी के किनारे डट गये, पर शत्रुओं ने अटक पर बना एकमात्र पुल बारूद से उड़ा दिया. इससे दोनों समूहों का आपसी सम्पर्क कट गया. रणजीत सिंह ने नदी पर ...

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05 मार्च / जन्मतिथि – क्रान्तिकारी सुशीला दीदी, क्रांतिकारियों का कंधे से कंधा मिलाकर दिया साथ

नई दिल्ली. सुशीला दीदी का जन्म पांच मार्च, 1905 को ग्राम दत्तोचूहड़ (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था. जालंधर कन्या महाविद्यालय में पढ़ते हुए वे कुमारी लज्जावती और शन्नोदेवी के सम्पर्क में आयीं. इन दोनों ने सुशीला के मन में देशभक्ति की आग भर दी. शिक्षा पूर्ण कर वे कोलकाता में नौकरी करने लगीं, पर क्रांतिकार्य में उनका सक्रिय योगदान जीवन भर बना रहा. काकोरी कांड के क्रांतिवीरों पर चल रहे मुकदमे के दौरान क्रांतिका ...

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04 मार्च / पुण्यतिथि – क्रान्तिकारी की मानव कवच तोसिको बोस

नई दिल्ली. तोसिको बोस का नाम भारतीय क्रान्तिकारी इतिहास में अल्पज्ञात है. अपनी जन्मभूमि जापान में वे केवल 28 वर्ष तक ही जीवित रहीं. फिर भी सावित्री तुल्य इस सती नारी का भारतीय स्वाधीनता संग्राम को आगे बढ़ाने में अनुपम योगदान रहा. रासबिहारी बोस महान क्रान्तिकारी थे. 23 दिसम्बर, 1912 को दिल्ली में तत्कालीन वायसराय के जुलूस पर बम फैंक कर उसे यमलोक पहुंचाने का प्रयास तो हुआ, पर वह पूर्णतः सफल नहीं हो पाया. उस य ...

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21 फरवरी / पुण्यतिथि – कित्तूर की वीर रानी चेन्नम्मा

नई दिल्ली. कर्नाटक में चेन्नम्मा नामक दो वीर रानियां हुई हैं. केलाड़ी की चेन्नम्मा ने औरंगजेब से, जबकि कित्तूर की चेन्नम्मा ने अंग्रेजों से संघर्ष किया था. कित्तूर के शासक मल्लसर्ज की रुद्रम्मा तथा चेन्नम्मा नामक दो रानियां थीं. काकतीय राजवंश की कन्या चेन्नम्मा को बचपन से ही वीरतापूर्ण कार्य करने में आनंद आता था. वह पुरुष वेश में शिकार करने जाती थी. ऐसे ही एक प्रसंग में मल्लसर्ज की उससे भेंट हुई. उसने चेन्न ...

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17 फरवरी / बलिदान दिवस – सह्याद्रि का शेर वासुदेव बलवंत फड़के

नई दिल्ली. घटना वर्ष 1870 की है. एक युवक तेजी से अपने गांव की ओर भागा जा रहा था. उसके मुंह से मां-मां....शब्द निकल रहे थे, पर दुर्भाग्य कि उसे मां के दर्शन नहीं हो सके. उसका मन रो उठा. लानत है ऐसी नौकरी पर, जो उसे अपनी मां के अन्तिम दर्शन के लिए भी छुट्टी न मिल सकी. वह युवक था वासुदेव बलवन्त फड़के. लोगों के बहुत समझाने पर वह शान्त हुआ, पर मां के वार्षिक श्राद्ध के समय फिर यही तमाशा हुआ और उसे अवकाश नहीं मिल ...

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