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23 अप्रैल / इतिहास स्मृति – पेशावर कांड के नायक चन्द्रसिंह गढ़वाली

नई दिल्ली. चन्द्रसिंह का जन्म ग्राम रौणसेरा, (जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड) में 25 दिसम्बर, 1891 को हुआ था. वह बचपन से ही बहुत हृष्ट-पुष्ट था. ऐसे लोगों को वहां ‘भड़’ कहा जाता है. केवल 14 वर्ष की अवस्था में उनका विवाह हो गया. उन दिनों प्रथम विश्व युद्ध प्रारम्भ हो जाने के कारण सेना में भर्ती चल रही थी. चन्द्रसिंह गढ़वाली की इच्छा भी सेना में जाने की थी, पर घर वाले इसके लिए तैयार नहीं थे. अतः चन्द्रसिंह घर स ...

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22 अप्रैल / पुण्यतिथि – क्रांतिकारी योगेश दा

नई दिल्ली. देश को स्वतंत्र करवाने में अने क्रांतिकारियों ने योगदान दिया था. उन्हीं में से एक योगेश चंद्र चटर्जी भी थे. क्रान्तिवीर योगेश चन्द्र चटर्जी (योगेश दा) का जीवन देश को विदेशी दासता से मुक्त कराने की गौरवमय गाथा है. उनका जन्म अखंड भारत के ढाका जिले के ग्राम गोकाडिया, थाना लोहागंज में तथा लालन-पालन और शिक्षा कोमिल्ला में हुई. 1905 में बंग-भंग से जो आन्दोलन शुरू हुआ, योगेश दा उसमें जुड़ गये. पुलिन दा ...

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20 अप्रैल / इतिहास स्मृति – विजयनगर साम्राज्य के प्रेरक देवलरानी और खुशरोखान

नई दिल्ली. मध्यकालीन इतिहास में हिन्दू गौरव के अनेक पृष्ठों को वामपंथी इतिहासकारों ने छिपाने का राष्ट्रीय अपराध किया है. ऐसा ही एक प्रसंग गुजरात की राजकुमारी देवलरानी और खुशरोखान का है. अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत में नरसंहार कर अपार धनराशि लूटी तथा वहां हिन्दू कला व संस्कृति को भी नष्ट किया. उसने गुजरात को भी दो बार लूटा. गुजरात के शासक रायकर्ण की पत्नी कमलादेवी को जबरन अपनी तथा राजकुमारी देवलरानी को अप ...

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19 अप्रैल / बलिदान दिवस – युवा बलिदानी अनन्त कान्हेरे

नई दिल्ली. भारत मां की कोख कभी सपूतों से खाली नहीं रही. ऐसे ही एक सपूत थे - अनन्त लक्ष्मण कान्हेरे. जिन्होंने देश की स्वतन्त्रता के लिए केवल 19 साल की युवावस्था में ही फाँसी के फन्दे को चूम लिया. उन दिनों महाराष्ट्र के नासिक नगर में जैक्सन नामक अंग्रेज जिलाधीश कार्यरत था. उसने मराठी और संस्कृत सीखकर अनेक लोगों को प्रभावित कर लिया था; पर उसके मन में भारत के प्रति घृणा भरी थी. वह नासिक के पवित्र रामकुंड में घ ...

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18 अप्रैल / बलिदान दिवस – अमर बलिदानी दामोदर हरि चाफेकर

नई दिल्ली. दामोदर हरि चाफेकर उस बलिदानी परिवार के अग्रज थे, जिसके तीनों पुष्पों ने स्वयं को भारत माँ की अस्मिता की रक्षा के लिए बलिदान कर दिया. उनका जन्म 25 जून, 1869 को पुणे में प्रख्यात कथावाचक श्री हरि विनायक पन्त के घर हुआ था. दामोदर के बाद 1873 में बालकृष्ण और 1879 में वासुदेव का जन्म हुआ. तीनों भाई बचपन से ही अपने पिता के साथ भजन कीर्तन में भाग लेते थे. दामोदर को गायन के साथ काव्यपाठ और व्यायाम का भी ...

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17 अप्रैल / पुण्यतिथि – मित्रता प्रेमी गोविन्दराव जी

गोविंदराव कुलकर्णी (अन्ना) 1945 में नागपुर से ही प्रचारक बने थे. प्रारम्भ में उन्हें महाराष्ट्र में ही भंडारा और फिर गोंदिया में जिला प्रचारक का काम दिया गया. 1948 में गांधी जी की हत्या के बाद लगे प्रतिबंध के समय वे उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में प्रचारक थे. प्रतिबंध समाप्ति के बाद उन्हें फिर महाराष्ट्र बुला लिया गया. वे विदर्भ में खामगांव, गोंदिया, भंडारा और नागपुर में नगर, जिला और विभाग प्रचारक जैसी महत्वपू ...

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13 अप्रैल / इतिहास स्मृति – अंग्रेजों के अत्याचारों की पराकाष्ठा “जलियांवाला बाग नरसंहार”

नई दिल्ली. भारत की स्वतन्त्रता के लिये संघर्ष के गौरवशाली इतिहास में अमृतसर के जलियाँवाला बाग का अप्रतिम स्थान है. इस आधुनिक तीर्थ पर हर देशवासी का मस्तक उन वीरों की याद में स्वयं ही झुक जाता है, जिन्होंने अपने रक्त से भारत की स्वतन्त्रता के पेड़ को सींचा. 13 अप्रैल, 1919 को बैसाखी का पर्व था. इसे पूरे देश में ही मनाया जाता है, पर खालसा पन्थ की स्थापना का दिन होने के कारण पंजाब में इसका उत्साह देखते ही बनता ...

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10 अप्रैल / जन्म दिवस – घोष स्वर, लिपि का भारतीयकरण करने वाले सुब्बू श्रीनिवास

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शाखा और शाखा में शारीरिक कार्यक्रमों का बड़ा महत्व है. शाखा पर खेल के साथ ही पथ संचलन का अभ्यास भी होता है. जब स्वयंसेवक घोष (बैंड) की धुन पर कदम मिलाकर चलते हैं, तो चलने वालों के साथ ही देखने वाले भी झूम उठते हैं. घोष विभाग को नया रूप देकर विकास में अपना पूरा जीवन खपा देने वाले श्री सुब्बू श्रीनिवास का जन्म 10 अप्रैल, 1940 को मैसूर (कर्नाटक) में एक सामान्य दुकानदार बी ...

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8 अप्रैल/ बलिदान दिवस – क्रांति की ज्वाला धधकाने वाले क्रांतिवीर मंगल पांडे

नई दिल्ली. देश को अंग्रेजों की परतंत्रता से मुक्त करवाने के लिये 1857 में ज्वाला को धधकाने वाले क्रांतिवीर थे........मंगल पांडे. अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे का जन्म 30 जनवरी, 1831 को ग्राम नगवा (बलिया, उत्तर प्रदेश) में हुआ था. कुछ लोग इनका जन्म ग्राम सहरपुर (जिला साकेत, उत्तर प्रदेश) तथा जन्मतिथि 19 जुलाई, 1827 भी मानते हैं. युवावस्था में ही वे ...

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‘भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता’ के सेनानी डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार

चिरसनातन अखण्ड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता के लिए कटिबद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे अज्ञात सेनापति थे, जिन्होंने अपने व अपने संगठन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में अपना तन-मन सब कुछ भारत माता के चरणों में अर्पित कर दिया था. बाल्यकाल से लेकर जीवन की अंतिम श्वास तक भारत की स्वतंत्रता के लिए जूझते रहने वाले इस महान स्वतंत्रता सेनानी ने न तो अपनी आत्मकथा लिखी और न ही ...

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