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31 मार्च / पुण्य तिथि – संघनिष्ठ नानासाहब भागवत

नई दिल्ली. श्री नारायण पांडुरंग (नानासाहब) भागवत मूलतः महाराष्ट्र में चंद्रपुर जिले के वीरमाल गांव के निवासी थे. वहां पर ही उनका जन्म 1884 में हुआ था. घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वे अपने मामा जी के घर नागपुर काटोल पढ़ने आ गये. आगे चलकर उन्होंने प्रयाग (उत्तर प्रदेश) से कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा चंद्रपुर के पास वरोरा में कारोबार करने लगे. इसी दौरान उनका संपर्क संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी ...

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26 मार्च – पेड़ों की रक्षा के लिये महिलाओं को प्रेरित करने वाली गौरादेवी

पूरी दुनिया लगातार बढ़ रही वैश्विक गर्मी से चिन्तित है. पर्यावरण असंतुलन, कट रहे पेड़, बढ़ रहे सीमेंट और कंक्रीट के जंगल, बढ़ते वाहन, एसी, फ्रिज, सिकुड़ते ग्लेशियर तथा भोगवादी पश्चिमी जीवन शैली इसका प्रमुख कारण है. हरे पेड़ों को काटने के विरोध में सबसे पहला आंदोलन पांच सितम्बर, 1730 में जोधपुर (राजस्थान) में अमृता देवी के नेतृत्व में हुआ था, जिसमें 363 लोगों ने अपना बलिदान दिया था. इसी प्रकार 26 मार्च, 1974 ...

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09 मार्च / पुण्यतिथि – नारी संगठन को समर्पित सरस्वती ताई आप्टे

1925 में समाज के संगठन के लिए डॉ. हेडगेवार जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारम्भ किया। संघ की शाखा में पुरुष ही आते थे। स्वयंसेवक परिवारों की महिलाएँ एवं लड़कियाँ डॉ. हेडगेवार जी से कहती थीं कि हिन्दू संगठन में महिलाओं का भी योगदान होना चाहिए। डॉ. हेडगेवार भी यह चाहते थे; पर शाखा में लड़के एवं लड़कियाँ एक साथ खेलें, यह उन्हें व्यावहारिक नहीं लगता था। इसलिए वे चाहते थे कि कोई महिला आगे बढ़कर महिलाओ ...

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05 मार्च / जन्मतिथि – क्रान्तिकारी सुशीला दीदी, क्रांतिकारियों का कंधे से कंधा मिलाकर दिया साथ

नई दिल्ली. सुशीला दीदी का जन्म पांच मार्च, 1905 को ग्राम दत्तोचूहड़ (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था. जालंधर कन्या महाविद्यालय में पढ़ते हुए वे कुमारी लज्जावती और शन्नोदेवी के सम्पर्क में आईं. इन दोनों ने सुशीला के मन में देशभक्ति की आग भर दी. शिक्षा पूर्ण कर वे कोलकाता में नौकरी करने लगीं, पर क्रांतिकार्य में उनका सक्रिय योगदान जीवन भर बना रहा. काकोरी कांड के क्रांतिवीरों पर चल रहे मुकदमे के दौरान क्रांतिकार ...

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04 मार्च / पुण्यतिथि – क्रान्तिकारी की मानव कवच तोसिको बोस

नई दिल्ली. तोसिको बोस का नाम भारतीय क्रान्तिकारी इतिहास में अल्पज्ञात है. अपनी जन्मभूमि जापान में वे केवल 28 वर्ष तक ही जीवित रहीं. फिर भी सावित्री तुल्य नारी का भारतीय स्वाधीनता संग्राम को आगे बढ़ाने में अनुपम योगदान रहा. रासबिहारी बोस महान क्रान्तिकारी थे. 23 दिसम्बर, 1912 को दिल्ली में तत्कालीन वायसराय के जुलूस पर बम फैंक कर उसे यमलोक पहुंचाने का प्रयास तो हुआ, पर वह पूर्णतः सफल नहीं हो पाया. उस योजना मे ...

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03 मार्च / जन्मदिवस – कारगिल युद्ध का सूरमा परमवीर संजय कुमार

नई दिल्ली. भारत माता वीरों की जननी है. इसकी कोख में एक से बढ़कर एक वीर पले हैं. ऐसा ही एक वीर है - संजय कुमार, जिसने कारगिल के युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाया. इसके लिए उन्हें युद्धकाल में अनुपम शौर्य के प्रदर्शन पर दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार ‘परमवीर चक्र’ देकर सम्मानित किया गया. संजय का जन्म ग्राम बकैण (बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश) में दुर्गाराम व भागदेई के घर में 03 मार्च, 1976 को हुआ था. संजय ने 1998 ...

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02 मार्च / जन्मदिवस – निर्धनों के वास्तुकार लॉरी बेकर

नई दिल्ली. दुनिया में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं, जिनमें प्रतिभा के साथ-साथ सेवा और समर्पण का भाव भी उतना ही प्रबल हो. इंग्लैंड के बरमिंघम में दो मार्च, 1917 को जन्मे भवन निर्माता एवं वास्तुकार लारेन्स विल्फ्रेड (लॉरी) बेकर ऐसे ही व्यक्ति थे, जिन्होंने कम खर्च में पर्यावरण के अनुकूल भवन बनाए. सन् 1943 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय जिस पानी के जहाज पर वे तैनात थे, उसे किसी कारण से कुछ दिन के लिए मुम्बई में रु ...

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01 मार्च / बलिदान दिवस – क्रान्तिवीर गोपीमोहन साहा

नई दिल्ली.  पुलिस अधिकारी टेगार्ट ने अपनी रणनीति से बंगाल के क्रान्तिकारी आन्दोलन को काफी नुकसान पहुँचाया. प्रमुख क्रान्तिकारी या तो फाँसी पर चढ़ा दिये गए थे या जेलों में सड़ रहे थे. उनमें से कई को तो कालेपानी भेज दिया गया था. ऐसे समय में बंगाल की वीरभूमि पर गोपीमोहन साहा नामक एक क्रान्तिवीर का जन्म हुआ, जिसने टेगार्ट से बदला लेने का प्रयास किया. यद्यपि दुर्भाग्यवश उसका यह प्रयास सफल नहीं हो पाया. टेगार्ट क ...

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26 फरवरी / पुण्यतिथि – एक जन्म में अनेक जन्मों का कारावास पाने वाले अप्रतिम क्रांतिकारी

एक जन्म में अनेक जन्मों का कारावास पाने वाले अप्रतिम क्रांतिकारी, समर्पित समाज सुधारक, ओजस्वी वक्ता, कवि व अखंड भारत के स्वप्न दृष्टा विनायक दामोदर सावरकर जी की पुण्यतिथि पर देश शत्-शत् नमन करता है. सावरकर वे पहले कवि थे, जिन्होंने कलम-काग़ज़ के बिना जेल की दीवारों पर पत्थर के टुकड़ों से कवितायें लिखीं. कहा जाता है - उन्होंने अपनी रची दस हज़ार से भी अधिक पंक्तियों को प्राचीन वैदिक साधना के अनुरूप वर्षों स्म ...

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25 फरवरी / पालखेड़ का ऐतिहासिक संग्राम – बाजीराव पेशवा (प्रथम)

नई दिल्ली. द्वितीय विश्व युद्ध के प्रसिद्ध सेनानायक फील्ड मार्शल मांटगुमरी ने युद्धशास्त्र पर आधारित अपनी पुस्तक ‘ए कन्साइस हिस्ट्री ऑफ वारफेयर’ में  विश्व के सात प्रमुख युद्धों की चर्चा की है. इसमें एक युद्ध पालखेड़ (कर्नाटक) का है, जिसमें 27 वर्षीय बाजीराव पेशवा (प्रथम) ने संख्या व शक्ति में अपने से दुगनी से भी अधिक निजाम हैदराबाद की सेना को हराया था. बाजीराव (प्रथम) शिवाजी के पौत्र छत्रपति शाहूजी के प्रध ...

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