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29 जून / पुण्यतिथि – देहदानी : शिवराम पंत जोगलेकर

नई दिल्ली. वर्ष 1943 की बात है. द्वितीय सरसंघचालक श्रीगुरुजी ने युवा प्रचारक शिवराम जोगलेकर जी से पूछा - क्यों शिवराम, तुम्हें रोटी अच्छी लगती है या चावल ? शिवराम जी ने कुछ संकोच से कहा  गुरुजी, मैं संघ का प्रचारक हूं. रोटी या चावल, जो मिल जाए, वह खा लेता हूं. श्रीगुरुजी ने कहा - अच्छा, तो तुम चैन्नई चले जाओ, अब तुम्हें वहां संघ का काम करना है. इस प्रकार शिवराम जी संघ कार्य के लिए तमिलनाडु में आये, तो फिर अ ...

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28 जून / जन्मदिवस – अपना सर्वस्व दान करने वाला अनुपम दानी भामाशाह

नई दिल्ली. दान की चर्चा होते ही भामाशाह का चरित्र स्वयं ही आंखों के सामने आ जाता है. देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाला दूसरे उदाहरण कम ही मिलेंगे. देश रक्षा के लिए महाराणा प्रताप के चरणों में अपनी सब जमा पूंजी अर्पित करने वाले दानवीर भामाशाह का जन्म अलवर (राजस्थान) में 28 जून, 1547 को हुआ था. उनके पिता भारमल्ल तथा माता कर्पूरदेवी थीं. भारमल्ल राणा सांगा के समय रणथम्भौर के किलेदार थे. अपने पिता की तरह ...

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27 जून / पुण्यतिथि – कर्तव्य व अनुशासनप्रिय दादाराव परमार्थ

नई दिल्ली. बात एक अगस्त, 1920 की है. लोकमान्य तिलक के देहान्त के कारण पूरा देश शोक में डूबा था. संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी किसी कार्य से घर से निकले. उन्होंने देखा कुछ लड़के सड़क पर गेंद खेल रहे हैं. डॉ. जी क्रोध में उबल पड़े - तिलक जी जैसे महान् नेता का देहान्त हो गया और तुम्हें खेल सूझ रहा है. सब बच्चे सहम गये. इन्हीं में एक थे गोविन्द सीताराम परमार्थ, जो आगे चलकर दादाराव परमार्थ के नाम से प्रसिद्ध हुए. ...

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26 जून / जन्मदिवस – वन्देमातरम् के गायक – बंकिमचन्द्र चटर्जी

नई दिल्ली. भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में वन्देमातरम् नामक जिस महामन्त्र ने उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक जन-जन को उद्वेलित किया, उसके रचियता बंकिमचन्द्र चटर्जी का जन्म ग्राम काँतलपाड़ा, जिला हुगली,पश्चिम बंगाल में 26 जून, 1838 को हुआ था. प्राथमिक शिक्षा हुगली में पूर्ण कर उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंसी कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की. पढ़ाई के साथ-साथ छात्र जीवन से ही उनकी रुचि साहित् ...

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25 जून / इतिहास स्मृति – …..और अंग्रेज सेना को करना पड़ा समर्पण

नई दिल्ली. जिन अंग्रेजों के अत्याचार की पूरी दुनिया में चर्चा होती है,  भारतीय वीरों ने कई बार उनके छक्के छुड़ाए थे. ऐसे कई प्रसंग इतिहास के पृष्ठों पर सुरक्षित हैं. ऐसा ही एक स्वर्णिम पृष्ठ कानपुर (उ.प्र.) से सम्बन्धित है. वर्ष 1857 में जब देश के अनेक भागों में भारतीय वीरों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल बजा दिया, तो इसकी आंच से कानपुर भी सुलग उठा. यहां अंग्रेज इतने भयभीत थे कि 24 मई, 1857 को रानी ...

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“मैं युद्ध भूमि छोड़कर नहीं जाऊंगी, इस युद्ध में मुझे विजय अथवा मृत्यु में से एक चाहिए” – रानी दुर्गावती

अकबर ने वर्ष 1563 में आसफ खान नामक बलाढ्य सेनानी को गोंडवाना पर आक्रमण करने भेज दिया. यह समाचार मिलते ही रानी दुर्गावती ने अपनी व्यूहरचना आरंभ कर दी. सर्वप्रथम अपने विश्वसनीय दूतों द्वारा अपने मांडलिक राजाओं तथा सेनानायकों को सावधान हो जाने की सूचनाएं भेज दीं. अपनी सेना की कुछ टुकड़ियों को घने जंगल में छिपा रखा और शेष को अपने साथ लेकर रानी निकल पड़ी. रानी ने सैनिकों को मार्गदर्शन किया. एक पहाड़ की तलहटी पर ...

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23 जून / बलिदान दिवस – जम्मू कश्मीर के लिए डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान

नई दिल्ली. छह जुलाई, 1901 को कोलकत्ता में आशुतोष मुखर्जी एवं योगमाया देवी के घर में जन्मे डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी को दो कारणों से सदा याद किया जाता है. पहला तो यह कि वे योग्य पिता के योग्य पुत्र थे. आशुतोष मुखर्जी कोलकत्ता विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुलपति थे. 1924 में उनके देहान्त के बाद केवल 23 वर्ष की अवस्था में ही श्यामाप्रसाद को विश्वविद्यालय की प्रबन्ध समिति में ले लिया गया. 33 वर्ष की छोटी अवस्था म ...

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20 जून / बलिदान दिवस – राजा दाहरसेन का बलिदान

नई दिल्ली. भारत को लूटने और इस पर कब्जा करने के लिए पश्चिम के रेगिस्तानों से आने वाले मजहबी हमलावरों का वार सबसे पहले सिन्ध की वीरभूमि को ही झेलना पड़ता था. सिन्ध के राजा थे दाहरसेन, जिन्होंने युद्धभूमि में लड़ते हुए प्राणाहुति दी. उनके बाद उनकी पत्नी, बहिन और दोनों पुत्रियों ने भी अपना बलिदान देकर भारत में एक परम्परा का सूत्रपात किया. सिन्ध के महाराजा के असमय देहांत के बाद उनके 12 वर्षीय पुत्र दाहरसेन गद्द ...

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19 जून / जन्मदिवस – आत्मविलोपी व्यक्तित्व : श्रीपति शास्त्री जी

नई दिल्ली. संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता, इतिहास के प्राध्यापक तथा राजनीति, समाजशास्त्र, साहित्य आदि विषयों के गहन अध्येता श्रीपति सुब्रमण्यम शास्त्री जी का जन्म 19 जून, 1935 को कर्नाटक राज्य के चित्रदुर्ग जिले के हरिहर ग्राम में हुआ था. बालपन में ही वे स्वयंसेवक बने तथा अपने संकल्प के अनुसार अविवाहित रहकर अंतिम सांस तक संघ कार्य करते रहे. वर्ष 1956 में वे मैसूर नगर कार्यवाह बने. उस दौरान उन्होंने मैसूर विश्वविद ...

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18 जून / इतिहास स्मृति – हल्दीघाटी का महासमर

नई दिल्ली. 18 जून, 1576 को सूर्य प्रतिदिन की भांति उदित हुआ, पर उस दिन कुछ अधिक लाल दिखायी दे रहा था. क्योंकि उस दिन हल्दीघाटी में खून की होली खेली जाने वाली थी. एक ओर लोसिंग में अपने प्रिय चेतक पर सवार हिन्दुआ सूर्य महाराणा प्रताप देश की स्वतन्त्रता की रक्षा के लिए डटे थे, तो दूसरी ओर मोलेला गांव में मुगलों का पिट्ठू मानसिंह पड़ाव डाले था. सूर्योदय के तीन घण्टे बाद मानसिंह ने राणा प्रताप की सेना की थाह लेन ...

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