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09 जुलाई / जन्मदिवस – दुर्लभ चित्रों के संग्राहक : सत्यनारायण गोयल

नई दिल्ली. प्रसिद्ध फोटो चित्रकार सत्यनारायण गोयल जी का जन्म नौ जुलाई, 1930 को आगरा में हुआ था. वर्ष 1943 में वे संघ के स्वयंसेवक बने. वर्ष 1948 के प्रतिबन्ध के समय वे कक्षा 12 में पढ़ रहे थे. जेल जाने से उनकी पढ़ाई छूट गयी. अतः उन्होंने फोटो मढ़ने का कार्य प्रारम्भ कर दिया. कला में रुचि होने के कारण उन्होंने वर्ष 1956 में ‘कलाकुंज’ की स्थापना की. वे पुस्तक, पत्र-पत्रिकाओं आदि के मुखपृष्ठों के डिजाइन बनाते ...

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08 जुलाई / इतिहास स्मृति – टाइगर हिल पर फहराया तिरंगा

नई दिल्ली. पाकिस्तान अपनी मजहबी मान्यताओं के कारण जन्म के पहले दिन से ही भारत विरोध का मार्ग अपनाया है. जब भी उसने भारत पर हमला किया, उसे मुंह की खानी पड़ी. ऐसा ही एक प्रयास उसने 1999 में किया, जिसे ‘कारगिल युद्ध’ कहा जाता है. भारतीय सेना ने पाक सेना को बुरी तरह से धूल चटाई थी, टाइगर हिल की जीत युद्ध का एक महत्वपूर्ण अध्याय है. सियाचिन भारत की सर्वाधिक ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है. चारों ओर बर्फ ही बर ...

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07 जुलाई / जन्मदिवस – शौर्यपूर्ण व्यक्तित्व राव हमीर

नई दिल्ली. भारत के इतिहास में राव हमीर को वीरता के साथ ही उनके हठ के लिए भी याद किया जाता है. उनके हठ के बारे में कहावत प्रसिद्ध है - सिंह सुवन, सत्पुरुष वचन, कदली फलै इक बार, तिरिया तेल हमीर हठ, चढ़ै न दूजी बार.. अर्थात सिंह एक ही बार संतान को जन्म देता है. सज्जन लोग बात को एक ही बार कहते हैं. केला एक ही बार फलता है. स्त्री को एक ही बार तेल एवं उबटन लगाया जाता है अर्थात उसका विवाह एक ही बार होता है. ऐसे ही ...

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03 जुलाई / पुण्यतिथि – विरक्त सन्त : स्वामी रामसुखदास जी

नई दिल्ली. धर्मप्राण भारत में एक से बढ़कर एक विरक्त सन्त एवं महात्माओं ने जन्म लिया है. ऐसे ही सन्तों में शिरोमणि थे परम वीतरागी स्वामी रामसुखदेव जी महाराज. स्वामी जी के जन्म आदि की ठीक तिथि एवं स्थान का प्रायः पता नहीं लगता, क्योंकि इस बारे में उन्होंने पूछने पर भी कभी चर्चा नहीं की. फिर भी जिला बीकानेर (राजस्थान) के किसी गाँव में उनका जन्म 1902 ई. में हुआ था, ऐसा कहा जाता है. उनका बचपन का नाम क्या था, यह ...

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2 जुलाई / जन्मदिवस – स्वदेशी अर्थचेतना की संवाहक : डॉ. कुसुमलता केडिया

नई दिल्ली. स्वदेशी अर्थचेतना की संवाहक डॉ. कुसुमलता केडिया का जन्म दो जुलाई, 1954 को पडरौना (उ.प्र.) में हुआ. इनके पिता श्री राधेश्याम जी संघ के स्वयंसेवक थे. उन्होंने नानाजी देशमुख के साथ गोरखपुर में पहले 'सरस्वती शिशु मंदिर' की स्थापना में सहयोग किया था. द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी इनके ननिहाल में प्रायः आते थे. घर में संघ विचार की पत्र-पत्रिकायें भी आतीं थीं. अतः इनके मन पर देशप्रेम के संस्कार बचपन से ...

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01 जुलाई / जन्मदिवस – श्रमिक हित को समर्पित राजेश्वर दयाल जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह विशेषता ही है कि उसके कार्यकर्त्ता को जिस काम में लगाया जाता है, वह उसमें ही विशेषज्ञता प्राप्त कर लेता है. राजेश्वर जी भी ऐसे ही एक प्रचारक थे, जिन्हें भारतीय मजदूर संघ के काम में लगाया गया, तो उसी में रम गये. कार्यकर्त्ताओं में वे ‘दाऊ जी’ के नाम से प्रसिद्ध थे. राजेश्वर जी का जन्म एक जुलाई, 1933 को ताजगंज (आगरा) में पण्डित नत्थीलाल शर्मा जी तथा चमेली देवी के घर मे ...

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30 जून / इतिहास स्मृति – संथाल परगना में 20 हजार वीरों ने दी प्राणाहुति

नई दिल्ली. स्वाधीनता संग्राम में वर्ष 1857 एक मील का पत्थर है, लेकिन वास्तव में अंग्रेजों के भारत आने के कुछ समय बाद से ही विद्रोह का क्रम शुरू हो गया था. कुछ हिस्सों में रवैये से परेशान होकर विरोध करना शुरू कर दिया था. वर्तमान झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में हुआ ‘संथाल हूल’ या ‘संथाल विद्रोह’ इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है. संथाल परगना उपजाऊ भूमि वाला वनवासी क्षेत्र है. वनवासी बंधु स्वभाव से धर्म और प्रकृति के ...

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29 जून / पुण्यतिथि – देहदानी : शिवराम पंत जोगलेकर

नई दिल्ली. वर्ष 1943 की बात है. द्वितीय सरसंघचालक श्रीगुरुजी ने युवा प्रचारक शिवराम जोगलेकर जी से पूछा - क्यों शिवराम, तुम्हें रोटी अच्छी लगती है या चावल ? शिवराम जी ने कुछ संकोच से कहा  गुरुजी, मैं संघ का प्रचारक हूं. रोटी या चावल, जो मिल जाए, वह खा लेता हूं. श्रीगुरुजी ने कहा - अच्छा, तो तुम चैन्नई चले जाओ, अब तुम्हें वहां संघ का काम करना है. इस प्रकार शिवराम जी संघ कार्य के लिए तमिलनाडु में आये, तो फिर अ ...

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28 जून / जन्मदिवस – अपना सर्वस्व दान करने वाला अनुपम दानी भामाशाह

नई दिल्ली. दान की चर्चा होते ही भामाशाह का चरित्र स्वयं ही आंखों के सामने आ जाता है. देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाला दूसरे उदाहरण कम ही मिलेंगे. देश रक्षा के लिए महाराणा प्रताप के चरणों में अपनी सब जमा पूंजी अर्पित करने वाले दानवीर भामाशाह का जन्म अलवर (राजस्थान) में 28 जून, 1547 को हुआ था. उनके पिता भारमल्ल तथा माता कर्पूरदेवी थीं. भारमल्ल राणा सांगा के समय रणथम्भौर के किलेदार थे. अपने पिता की तरह ...

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27 जून / पुण्यतिथि – कर्तव्य व अनुशासनप्रिय दादाराव परमार्थ

नई दिल्ली. बात एक अगस्त, 1920 की है. लोकमान्य तिलक के देहान्त के कारण पूरा देश शोक में डूबा था. संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी किसी कार्य से घर से निकले. उन्होंने देखा कुछ लड़के सड़क पर गेंद खेल रहे हैं. डॉ. जी क्रोध में उबल पड़े - तिलक जी जैसे महान् नेता का देहान्त हो गया और तुम्हें खेल सूझ रहा है. सब बच्चे सहम गये. इन्हीं में एक थे गोविन्द सीताराम परमार्थ, जो आगे चलकर दादाराव परमार्थ के नाम से प्रसिद्ध हुए. ...

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