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29 मई / बलिदान दिवस – हैदराबाद सत्याग्रह के बलिदानी नन्हू सिंह

नई दिल्ली. 15 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों ने भारत को स्वतन्त्र कर दिया. पर इसके साथ ही यहाँ की सभी रियासतों, राजे-रजवाड़ों को यह स्वतन्त्रता भी दे गये, कि वे अपनी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में जा सकते हैं. देश की सभी रियासतें भारत में मिल गयीं, पर जूनागढ़ और भाग्यनगर (हैदराबाद) टेढ़ी-तिरछी हो रही थीं. इन दोनों के मुखिया मुसलमान थे. हैदराबाद में यूं तो हिन्दुओं की जनसंख्या सर्वाधिक थी, पर पुलिस शत-प्रतिशत मु ...

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02 मई / पुण्यतिथि – आधुनिक विश्वकर्मा बड़े भाई रामनरेश सिंह

बड़े भाई रामनरेश सिंह का जन्म 1925 की दीपावली के शुभ दिन ग्राम बघई (मिर्जापुर, उ.प्र.) में एक सामान्य किसान श्री दलथम्मन सिंह के घर में हुआ था. 1942 में हाईस्कूल कर चुनार तहसील में नकल नवीस के नाते उनकी नौकरी लग गयी. जब वहां सायं शाखा प्रारम्भ हुई, तो ये तहसील की निर्धारित वेशभूषा में ही वहां आने लगे. शाखा पर आने वालों में सबसे बड़े थे. अतः सब इन्हें ‘बड़े भाई’ कहने लगे. उन दिनों माधव जी देशमुख मिर्जापुर मे ...

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18 जनवरी / जन्मदिवस – अनुशासन प्रिय महादेव गोविन्द रानाडे जी

नई दिल्ली. सामान्यतः नेता या बड़े लोग दूसरों को तो अनुशासन की शिक्षा देते हैं. पर, वे स्वयं इसका पालन नहीं करते. वे सोचते हैं कि अनुशासन का पालन करना दूसरों का काम है और वे इससे ऊपर हैं. लेकिन 18 जनवरी, 1842 को महाराष्ट्र के गाँव निफड़ में जन्मे महादेव गोविन्द रानाडे जी इसके अपवाद थे. उन्होंने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया. इसके साथ ही समाज सुधार उनकी चिन्ता का मुख्य विषय था. एक बार ...

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17 जनवरी / बलिदान दिवस – रामसिंह कूका और उनके गोभक्त शिष्य

नई दिल्ली. 17 जनवरी, 1872 की प्रातः ग्राम जमालपुर (मालेरकोटला, पंजाब) के मैदान में भारी भीड़ एकत्र थी. एक-एक कर 50 गोभक्त सिख वीर वहां लाये गये. उनके हाथ पीछे बंधे थे. इन्हें मृत्युदण्ड दिया जाना था. ये सब सद्गुरु रामसिंह कूका जी के शिष्य थे. अंग्रेज जिलाधीश कोवन ने इनके मुंह पर काला कपड़ा बांधकर पीठ पर गोली मारने का आदेश दिया, पर इन वीरों ने साफ कह दिया कि वे न तो कपड़ा बंधवाएंगे और न ही पीठ पर गोली खायेंग ...

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12 जनवरी / जन्मदिवस – विश्वविजेता स्वामी विवेकानंद

नई दिल्ली. यदि कोई यह पूछे कि वह कौन युवा संन्यासी था, जिसने विश्व पटल पर भारत और हिन्दू धर्म की कीर्ति पताका फहराई, तो सबके मुख से निःसंदेह स्वामी विवेकानन्द का नाम ही निकलेगा. विवेकानन्द का बचपन का नाम नरेन्द्र था. उनका जन्म कोलकाता में 12 जनवरी, 1863 को हुआ था. बचपन से ही वे बहुत शरारती, साहसी और प्रतिभावान थे. पूजा-पाठ और ध्यान में उनका मन बहुत लगता था. नरेन्द्र के पिता उन्हें अपनी तरह प्रसिद्ध वकील बना ...

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10 जनवरी / पुण्यतिथि – साहसी न्यायाधीश डॉ. राधाविनोद पाल जी

नई दिल्ली. अनेक भारतीय ऐसे हैं, जिन्हें विदेशों में तो सम्मान मिलता है. पर, अपने देशवासी उन्हें प्रायः स्मरण नहीं करते. डॉ. राधाविनोद पाल वैश्विक ख्याति प्राप्त विधिवेत्ता तथा न्यायाधीश थे, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान के विरुद्ध चलाये गये अन्तर्राष्ट्रीय मुकदमे में मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध निर्णय देने का साहस किया था, जबकि उस समय विजयी होने के कारण मित्र राष्ट्रों का दुःसाहस बहुत बढ़ा हुआ थ ...

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09 जनवरी / जन्मदिवस – सरलचित्त प्रचारक तिलकराज कपूर जी

नई दिल्ली. तिलकराज कपूर का नाम सुनते ही सरलचित्त व्यक्ति का चित्र आँखों में उभर आता है. कन्धे पर कपड़ों और पुस्तकों से भरा झोला. हाथ में अंग्रेजी के समाचारपत्र. किसी हल्के रंग की कमीज, सफेद ढीला पाजामा और टायर सोल की चप्पल. बस ऐसे ही व्यक्तित्व का नाम था तिलकराज कपूर. 9 जनवरी, 1925 को जालन्धर में एक समृद्ध घर में जन्मे तिलक जी वर्ष 1945 में एमए, एलएलबी कर प्रचारक बने. परीक्षा में उनके प्रायः 90 प्रतिशत से अ ...

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08 जनवरी / पुण्यतिथि – राष्ट्र आराधना के स्वर चन्द्रकांत भारद्वाज

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा पर खेल, व्यायाम, आसन, चर्चा आदि के माध्यम से संस्कार देने का सफल प्रयोग चलता है. शाखा में गाये जाने वाले गीतों की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण होती है. ये गीत  व्यक्ति के अन्तर्मन को छूते हैं. ऐसे ही सैकड़ों प्रेरक और हृदयस्पर्शी गीतों के लेखक थे - चन्द्रकान्त भारद्वाज जी, जिनका आठ जनवरी, 2007 को दिल्ली में देहान्त हुआ था. वर्ष 1920 ई. में चन्द्रकान्त जी का जन्म ग्राम ...

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07 जनवरी / बलिदान दिवस – महिदपुर के सेनानी अमीन सदाशिवराव

नई दिल्ली. 1857 का स्वाधीनता संग्राम भले ही सफल न हुआ हो, पर उसने सिद्ध कर दिया कि देश का कोई भाग ऐसा नहीं है, जहां स्वतन्त्रता की अभिलाषा न हो तथा लोग स्वाधीनता के लिए मर मिटने को तैयार न हों. मध्य प्रदेश में इंदौर और उसके आसपास का क्षेत्र मालवा कहलाता है. सन् 1857 में यह पूरा क्षेत्र अंग्रेजों के विरुद्ध दहक रहा था. यहां का महिदपुर सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र था. इसलिए अंग्रेजों ने यहां छावनी ...

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06 जनवरी / पुण्यतिथि – जयुपर फुट के निर्माता डॉ. प्रमोदकरण सेठी जी

नई दिल्ली. किसी व्यक्ति का कोई अंग जन्म से न हो, या किसी दुर्घटना में वह अपंग हो जाए, तो उसकी पीड़ा समझना बहुत कठिन है. अपने आसपास हँसते-खेलते, दौड़ते-भागते लोगों को देखकर उसके मन में भी यह सब करने की उमंग उठती है. पर शारीरिक विकलांगता के कारण वह यह कर नहीं सकता. पैर से विकलांग हुए ऐसे लोगों के जीवन में आशा की तेजस्वी किरण बन कर आये डॉ. प्रमोद करण सेठी जी, जिन्होंने ‘जयपुर फुट’ का निर्माण कर हजारों विकलांगो ...

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