You Are Here: Home » व्यक्तित्व (Page 49)

श्री रामानुजाचार्य

श्रीरामानुजाचार्य जयंती पर विशेष दक्षिण भारत के पाण्ड्य राज्य का महाप्रतिभुतिपुरी वह शक्ति स्थान है, जो आचार्य के आविर्भाव से धन्य हुआ. आसुरिकेशवाचार्य दीक्षित चन्द्र ग्रहण के समय कैरविणी सागर संगम पर अपनी पत्नी के साथ स्नान करने आये थे. उनकी पत्नी श्रीकान्तिमती जी श्रीयामुनाचार्य जी के शिष्य श्री शैलपूर्ण जी की बहिन थी. भगवदीय वरदान से जो तेजोमय पुत्र उन्हें यथासमय प्राप्त हुआ, उसका नाम लक्ष्मण रखा गया. यह ...

Read more

आद्य शंकराचार्य

सहस्रों वर्ष की बात है. सर्वशास्त्र-निष्णात श्रीशिवगुरु नामक एक अत्यन्त पवित्र धर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे. उनकी पत्नी का नाम सुभद्रा था. सुभद्र देवी धर्म की मूर्ति जैसी थीं. अधिक आयु व्यतीत होने के बाद भी उन्हें कोई संतान नहीं हुई. पुण्यमयी देवी ने भगवान आशुतोष शिव की आराधना आरम्भ की.शशांकशेखरसंतुष्ट हुये और वृद्धावस्था में उनकी कोख से एक अत्यंत तेजस्वी बालक उत्पन्न हुआ. कहा जाता है, भगवान शंकर ही उपासना से तुष् ...

Read more

भीमबेटका गुफा चित्रों के अन्वेषक हरिभाऊ वाकणकर

4 मई/जन्म-दिवस भीमबेटका गुफा चित्रों के अन्वेषक हरिभाऊ वाकणकर भारतीय सभ्यता न केवल लाखों वर्ष प्राचीन है, अपितु वह अत्यन्त समृद्ध भी रही है. इसे विश्व के सम्मुख लाने में जिन लोगों का विशेष योगदान रहा, उनमें श्री विष्णु श्रीधर (हरिभाऊ) वाकणकर का नाम उल्लेखनीय है. हरिभाऊ का जन्म 4 मई, 1919 को नीमच (जिला मंदसौर, म.प्र.) में हुआ था. इतिहास, पुरातत्व एवं चित्रकला में विशेष रुचि होने के कारण अपनी प्राथमिक शिक्षा ...

Read more

राष्ट्रसन्त तुकड़ो जी महाराज

30 अप्रैल / जन्म-दिवस 23 जुलाई, 1955 को जापान के विश्व धर्म सम्मेलन में एक संन्यासी जब बोलने के लिये खड़े हुये, तो भाषा न समझते हुए भी उनके चेहरे के भाव और कीर्तन के मधुर स्वर ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता मन्त्रमुग्ध हो उठे. लोगों को भावरस में डुबोने वाले वे महानुभाव थे राष्ट्रसंत श्री तुकड़ो जी महाराज. तुकड़ो जी का जन्म 30 अप्रैल, 1909 को अमरावती (महाराष्ट्र) के ‘यावली’ गांव में हुआ था.  इनके पिता श्री बंडो ...

Read more

क्रान्ति पुरोधा जोधासिंह अटैया

28 अप्रैल / बलिदान-दिवस भारत की स्वतन्त्रता का पावन उद्देश्य और अदम्य उत्साह 1857 की महान क्रान्ति का प्रमुख कारण ही नहीं, आत्माहुति का प्रथम आह्वान भी था. देश के हर क्षेत्र से हर वर्ग और आयु के वीरों और वीरांगनाओं ने इस आह्वान को स्वीकार किया और अपने रक्त से भारत माँ का तर्पण किया. उस मालिका के एक तेजस्वी पुष्प थे क्रान्ति पुरोधा जोधासिंह अटैया. 10 मई, 1857 को जब बैरकपुर छावनी में वीर मंगल पांडे ने क्रान्त ...

Read more
Scroll to top