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05 जनवरी / पुण्यतिथि – वीर रस के प्रसारक स्वामी शिवचरण लाल जी

नई दिल्ली. प्रायः हर व्यक्ति में कुछ न कुछ गुण एवं प्रतिभा होती है. संघ की शाखा में आने से ये गुण और अधिक विकसित एवं प्रस्फुटित होते हैं. शाखा एवं अन्य कार्यक्रमों में गीत एवं कविता के माध्यम से भी संस्कार दिये जाते हैं. शिवचरण लाल जी ऐसे ही एक प्रचारक थे, जो विभिन्न कार्यक्रमों में वीर रस की कविताओं का इतने मनोयोग से पाठ करते थे कि श्रोता मन्त्रमुग्ध हो जाते थे. कविता समाप्त होने पर ऐसा लगता था मानो श्रोता ...

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04 जनवरी / पुण्यतिथि – श्री हरि बाबा : संकीर्तन से बांध निर्माण

नई दिल्ली. किसी भी नदी पर बाँध बनाना सरल काम नहीं है. उसमें आधुनिक तकनीक के साथ करोड़ों रुपये और अपार मानव श्रम लगता है, पर श्री हरिबाबा ने केवल हरिनाम-संकीर्तन के बल पर गंगा जी पर बाँध बनाकर लाखों ग्रामवासियों के जन-धन की रक्षा की. श्री हरिबाबा का जन्म ग्राम मेंगखाला (होशियारपुर, पंजाब) में फाल्गुन शुक्ल 14, विक्रमी सम्वत् 1941 को श्री प्रतापसिंह जी के घर में हुआ था. उनका बचपन का नाम दीवान सिंह था. प्राथमि ...

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3 जनवरी / जन्मदिवस – पांड्य नरेश कट्टबोमन का संकल्प

नई दिल्ली. 17वीं शताब्दी के अन्त में दक्षिण भारत का अधिकांश भाग अर्काट के नवाब के अधीन था. वह कायर लगान भी ठीक से वसूल नहीं कर पाता था. अतः उसने यह काम ईस्ट इंडिया कम्पनी को दे दिया. फिर क्या था, अंग्रेज छल, बल से लगान वसूलने लगे. उनकी शक्ति से अधिकांश राजा डर गये, पर तमिलनाडु के पांड्य नरेश कट्टबोमन ने झुकने से मना कर दिया. उसने अपने जीते जी धूर्त अंग्रेजों को एक पैसा नहीं दिया. कट्टबोमन (बोम्मु) का जन्म त ...

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02 जनवरी / पुण्यतिथि – प्रदर्शनियों के विशेषज्ञ राजाभाऊ पातुरकर जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम पीढ़ी के प्रचारकों में से एक राजाभाऊ जी पातुरकर का जन्म 1915 में नागपुर में हुआ था. गहरा रंग, स्वस्थ व सुदृढ़ शरीर, कठोर मन, कलाप्रेम, अनुशासन प्रियता, किसी भी कठिनाई का साहस से सामना करना तथा सामाजिक कार्य के प्रति समर्पण के गुण उन्हें अपने पिताजी से मिले थे. खेलों में अत्यधिक रुचि के कारण वे अपने साथी छात्रों में बहुत लोकप्रिय थे. महाल के सीताबर्डी विद्यालय में ...

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1 जनवरी / जन्मदिवस – अजातशत्रु बद्रीलाल दवे जी

नई दिल्ली. बद्रीलाल दवे जी का जन्म एक जनवरी, 1901 को बड़नगर (उज्जैन, मध्य प्रदेश) में हुआ था. वे सब ओर ‘दा साहब’ के नाम से प्रसिद्ध थे. अपनी शिक्षा पूर्ण कर कुछ समय तक वे अध्यापक और फिर विद्यालयों के निरीक्षक रहे, पर सामाजिक कार्य में रुचि होने के कारण बंधन वाली नौकरी में उनका मन नहीं लगा और उन्होंने खेती को अपनी आजीविका का साधन बना लिया. दा साहब बिर्गोदा के जमींदार थे, पर वे अपने क्षेत्र के लोगों को पुत्र ...

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30 दिसंबर / बलिदान दिवस – मेघालय का क्रांतिवीर उक्यांग नागवा

नई दिल्ली. उक्यांग नागवा मेघालय के एक क्रान्तिकारी वीर थे. 18वीं शती में मेघालय की पहाड़ियों पर अंग्रेजों का शासन नहीं था. वहां खासी और जयन्तियां जनजातियां स्वतन्त्र रूप से रहती थीं. इस क्षेत्र में आज के बांग्लादेश और सिल्चर के 30 छोटे-छोटे राज्य थे. इनमें से एक जयन्तियापुर था. अंग्रेजों ने जब यहां हमला किया, तो उन्होंने ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के अन्तर्गत जयन्तियापुर को पहाड़ी और मैदानी भागों में बां ...

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29 दिसम्बर / बलिदान दिवस – धौलाना के अमर बलिदानी

नई दिल्ली. भारत के स्वाधीनता संग्राम में मेरठ की 10 मई, 1857 की घटना का बड़ा महत्व है. इस दिन गाय और सूअर की चर्बी लगे कारतूसों को मुंह से खोलने से मना करने वाले भारतीय सैनिकों को हथकड़ी-बेड़ियों में कसकर जेल में बंद कर दिया गया. जहां-जहां यह समाचार पहुंचा, वहां की देशभक्त जनता तथा भारतीय सैनिकों में आक्रोश फैल गया. मेरठ पुलिस कोतवाली में उन दिनों धनसिंह गुर्जर कोतवाल थे. वे परम देशभक्त तथा गौभक्त थे. अपने ...

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28 दिसम्बर / बलिदान दिवस – राव रामबख्श सिंह जी का बलिदान

नई दिल्ली. श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या और लक्ष्मणपुरी (लखनऊ) का निकटवर्ती क्षेत्र सदा से अवध कहलाता है. इसी अवध में उन्नाव जनपद का कुछ क्षेत्र बैसवारा कहा जाता है. इसी बैसवारा की वीरभूमि में राव रामबख्श सिंह जी का जन्म हुआ, जिन्होंने मातृभूमि को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए अन्तिम दम तक संघर्ष किया और फिर हंसते हुए फांसी का फन्दा चूम लिया. राव रामबख्श सिंह जी बैसवारा के संस्थापक राजा त्रिलोक चन् ...

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27 दिसम्बर / जन्मदिवस – सीमाओं के जागरूक प्रहरी राकेश जी

नई दिल्ली. देश की सीमाओं की रक्षा का काम यों तो सेना का है, पर सीमावर्ती क्षेत्र के नागरिकों की भी इसमें बड़ी भूमिका होती है. शत्रुओं की हलचल की सूचना सेना को सबसे पहले वही देते हैं. अतः उनका हर परिस्थिति में वहां डटे रहना जरूरी है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस विषय के महत्व को देखते हुए ‘सीमा जागरण मंच’ का गठन किया है. इसके राष्ट्रीय संगठन मंत्री थे श्री राकेश जी, जिनका एक कार दुर्घटना में असामयिक निधन हो ...

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23 दिसम्बर / बलिदान दिवस – परावर्तन के अग्रदूत स्वामी श्रद्धानन्द जी

नई दिल्ली. भारत में आज जो मुसलमान हैं, उन सबके पूर्वज हिन्दू ही थे. उन्हें अपने पूर्वजों के पवित्र धर्म में वापस लाने का सर्वाधिक सफल प्रयास स्वामी श्रद्धानन्द जी ने किया. संन्यास से पूर्व उनका नाम मुंशीराम था. उनका जन्म वर्ष 1856 में ग्राम तलबन (जिला जालन्धर, पंजाब) में एक पुलिस अधिकारी नानकचन्द जी के घर में हुआ था. 12 वर्ष की अवस्था में ही उनका विवाह हो गया. बरेली में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द ...

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