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27 सितम्बर / जन्मदिवस – आदर्श स्वयंसेवक : सत्यनारायण बंसल

श्री सत्यनारायण बंसल का जन्म 27 सितम्बर, 1927 (अनंत चतुर्दशी) को हुआ था. उनके पिता श्री बिशनस्वरूप सामाजिक कायकर्ता तथा तथा कोयले के बड़े व्यापारी थे. सत्यनारायण जी ने बी.कॉम, एम.ए. (राजनीति शास्त्र) तथा कानून की उपाधियां प्रथम श्रेणी में प्राप्त कीं. छात्र-जीवन में क्रांतिवीर मास्टर अमीरचंद के संपर्क में आकर उन्होंने स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया. सत्यनारायण जी अपने नाम के अनुरूप सदा सत्य पर अड़ जाते थे. ...

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25 सितम्बर / जन्मदिवस – एकात्म मानववाद के प्रणेता : दीनदयाल उपाध्याय

सुविधाओं में पलकर कोई भी सफलता पा सकता है; पर अभावों के बीच रहकर शिखरों को छूना बहुत कठिन है. 25 सितम्बर, 1916 को जयपुर से अजमेर मार्ग पर स्थित ग्राम धनकिया में अपने नाना पण्डित चुन्नीलाल शुक्ल के घर जन्मे दीनदयाल उपाध्याय ऐसी ही विभूति थे. दीनदयाल जी के पिता श्री भगवती प्रसाद ग्राम नगला चन्द्रभान, जिला मथुरा, उत्तर प्रदेश के निवासी थे. तीन वर्ष की अवस्था में ही उनके पिताजी का तथा आठ वर्ष की अवस्था में माता ...

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23 सितम्बर / जन्मदिवस – नवदधीचि अनंत रामचंद्र गोखले जी

नई दिल्ली. अनुशासन के प्रति अत्यन्त कठोर श्री अनंत रामचंद्र गोखले जी का जन्म 23 सितम्बर, 1918 (अनंत चतुर्दशी) को म.प्र. के खंडवा नगर में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था. ‘’ संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी के पिता श्री सदाशिव गोलवलकर जब खंडवा में अध्यापक थे, तब वे उनके घर में ही रहते थे. नागपुर से इंटर करते समय गोखले जी धंतोली सायं शाखा में जाने लगे. एक सितम्बर, 1938 को वहीं उन्होंने प्रतिज्ञा ली. इंटर की ...

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हिंदुस्तानी कला, आचार-विचार को नए संदर्भ व व्याख्या और परिभाषा के साथ उजागर करने वाले

नई दिल्ली. आनंद कुमार स्वामी ने पश्चिम के सामने हिंदुस्तानी कला ही नहीं, आचार-विचार को नए संदर्भ, नई व्याख्या और परिभाषा के साथ उजागर किया. वे मूल रूप से सिंहली थे. उनका जन्म भी तब के सिलोन और आज के श्रीलंका में हुआ था. उनका परिवार तमिल भाषी था. पिता भी दार्शनिक थे और माता इंग्लिश मूल की थीं. दो साल की उम्र में पिता के देहांत के बाद उनका लालन-पालन इंग्लैंड में ही हुआ. वहीं उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई. उन्होंने ह ...

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28 जुलाई / इतिहास स्मृति – त्रिपुरा के बलिदानी स्वयंसेवक

नई दिल्ली. विश्व भर में फैले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करोड़ों स्वयंसेवकों के लिए 28 जुलाई, 2001 एक काला दिन सिद्ध हुआ. इस दिन भारत सरकार ने संघ के चार वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की मृत्यु की विधिवत घोषणा कर दी, जिनका अपहरण छह अगस्त, 1999 को त्रिपुरा राज्य में कंचनपुर स्थित ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ के एक छात्रावास से चर्च प्रेरित आतंकियों ने किया था. इनमें सबसे वरिष्ठ थे, 68 वर्षीय श्यामलकांति सेनगुप्ता. उनका जन्म ग ...

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29 मई / बलिदान दिवस – हैदराबाद सत्याग्रह के बलिदानी नन्हू सिंह

नई दिल्ली. 15 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों ने भारत को स्वतन्त्र कर दिया. पर इसके साथ ही यहाँ की सभी रियासतों, राजे-रजवाड़ों को यह स्वतन्त्रता भी दे गये, कि वे अपनी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में जा सकते हैं. देश की सभी रियासतें भारत में मिल गयीं, पर जूनागढ़ और भाग्यनगर (हैदराबाद) टेढ़ी-तिरछी हो रही थीं. इन दोनों के मुखिया मुसलमान थे. हैदराबाद में यूं तो हिन्दुओं की जनसंख्या सर्वाधिक थी, पर पुलिस शत-प्रतिशत मु ...

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02 मई / पुण्यतिथि – आधुनिक विश्वकर्मा बड़े भाई रामनरेश सिंह

बड़े भाई रामनरेश सिंह का जन्म 1925 की दीपावली के शुभ दिन ग्राम बघई (मिर्जापुर, उ.प्र.) में एक सामान्य किसान श्री दलथम्मन सिंह के घर में हुआ था. 1942 में हाईस्कूल कर चुनार तहसील में नकल नवीस के नाते उनकी नौकरी लग गयी. जब वहां सायं शाखा प्रारम्भ हुई, तो ये तहसील की निर्धारित वेशभूषा में ही वहां आने लगे. शाखा पर आने वालों में सबसे बड़े थे. अतः सब इन्हें ‘बड़े भाई’ कहने लगे. उन दिनों माधव जी देशमुख मिर्जापुर मे ...

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18 जनवरी / जन्मदिवस – अनुशासन प्रिय महादेव गोविन्द रानाडे जी

नई दिल्ली. सामान्यतः नेता या बड़े लोग दूसरों को तो अनुशासन की शिक्षा देते हैं. पर, वे स्वयं इसका पालन नहीं करते. वे सोचते हैं कि अनुशासन का पालन करना दूसरों का काम है और वे इससे ऊपर हैं. लेकिन 18 जनवरी, 1842 को महाराष्ट्र के गाँव निफड़ में जन्मे महादेव गोविन्द रानाडे जी इसके अपवाद थे. उन्होंने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया. इसके साथ ही समाज सुधार उनकी चिन्ता का मुख्य विषय था. एक बार ...

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17 जनवरी / बलिदान दिवस – रामसिंह कूका और उनके गोभक्त शिष्य

नई दिल्ली. 17 जनवरी, 1872 की प्रातः ग्राम जमालपुर (मालेरकोटला, पंजाब) के मैदान में भारी भीड़ एकत्र थी. एक-एक कर 50 गोभक्त सिख वीर वहां लाये गये. उनके हाथ पीछे बंधे थे. इन्हें मृत्युदण्ड दिया जाना था. ये सब सद्गुरु रामसिंह कूका जी के शिष्य थे. अंग्रेज जिलाधीश कोवन ने इनके मुंह पर काला कपड़ा बांधकर पीठ पर गोली मारने का आदेश दिया, पर इन वीरों ने साफ कह दिया कि वे न तो कपड़ा बंधवाएंगे और न ही पीठ पर गोली खायेंग ...

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12 जनवरी / जन्मदिवस – विश्वविजेता स्वामी विवेकानंद

नई दिल्ली. यदि कोई यह पूछे कि वह कौन युवा संन्यासी था, जिसने विश्व पटल पर भारत और हिन्दू धर्म की कीर्ति पताका फहराई, तो सबके मुख से निःसंदेह स्वामी विवेकानन्द का नाम ही निकलेगा. विवेकानन्द का बचपन का नाम नरेन्द्र था. उनका जन्म कोलकाता में 12 जनवरी, 1863 को हुआ था. बचपन से ही वे बहुत शरारती, साहसी और प्रतिभावान थे. पूजा-पाठ और ध्यान में उनका मन बहुत लगता था. नरेन्द्र के पिता उन्हें अपनी तरह प्रसिद्ध वकील बना ...

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