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14 मार्च / बलिदान दिवस – पेशावर पर भगवा लहराया

नई दिल्ली. पेशावर पर बलपूर्वक कब्जा कर अफगानी अजीम खां की सेनाएं नौशेहरा मैदान तक आ चुकी थी. यह सुनकर महाराजा रणजीत सिंह ने हरिसिंह नलवा एवं दीवान कृपाराम के नेतृत्व में उनका मुकाबला करने को स्वराजी सैनिकों के जत्थे खैराबाद भेज दिये. महाराजा के साथ बाबा फूला सिंह अटक नदी के किनारे डट गये, पर शत्रुओं ने अटक पर बना एकमात्र पुल बारूद से उड़ा दिया. इससे दोनों समूहों का आपसी सम्पर्क कट गया. रणजीत सिंह ने नदी पर ...

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05 मार्च / जन्मतिथि – क्रान्तिकारी सुशीला दीदी, क्रांतिकारियों का कंधे से कंधा मिलाकर दिया साथ

नई दिल्ली. सुशीला दीदी का जन्म पांच मार्च, 1905 को ग्राम दत्तोचूहड़ (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था. जालंधर कन्या महाविद्यालय में पढ़ते हुए वे कुमारी लज्जावती और शन्नोदेवी के सम्पर्क में आयीं. इन दोनों ने सुशीला के मन में देशभक्ति की आग भर दी. शिक्षा पूर्ण कर वे कोलकाता में नौकरी करने लगीं, पर क्रांतिकार्य में उनका सक्रिय योगदान जीवन भर बना रहा. काकोरी कांड के क्रांतिवीरों पर चल रहे मुकदमे के दौरान क्रांतिका ...

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04 मार्च / पुण्यतिथि – क्रान्तिकारी की मानव कवच तोसिको बोस

नई दिल्ली. तोसिको बोस का नाम भारतीय क्रान्तिकारी इतिहास में अल्पज्ञात है. अपनी जन्मभूमि जापान में वे केवल 28 वर्ष तक ही जीवित रहीं. फिर भी सावित्री तुल्य इस सती नारी का भारतीय स्वाधीनता संग्राम को आगे बढ़ाने में अनुपम योगदान रहा. रासबिहारी बोस महान क्रान्तिकारी थे. 23 दिसम्बर, 1912 को दिल्ली में तत्कालीन वायसराय के जुलूस पर बम फैंक कर उसे यमलोक पहुंचाने का प्रयास तो हुआ, पर वह पूर्णतः सफल नहीं हो पाया. उस य ...

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21 फरवरी / पुण्यतिथि – कित्तूर की वीर रानी चेन्नम्मा

नई दिल्ली. कर्नाटक में चेन्नम्मा नामक दो वीर रानियां हुई हैं. केलाड़ी की चेन्नम्मा ने औरंगजेब से, जबकि कित्तूर की चेन्नम्मा ने अंग्रेजों से संघर्ष किया था. कित्तूर के शासक मल्लसर्ज की रुद्रम्मा तथा चेन्नम्मा नामक दो रानियां थीं. काकतीय राजवंश की कन्या चेन्नम्मा को बचपन से ही वीरतापूर्ण कार्य करने में आनंद आता था. वह पुरुष वेश में शिकार करने जाती थी. ऐसे ही एक प्रसंग में मल्लसर्ज की उससे भेंट हुई. उसने चेन्न ...

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17 फरवरी / बलिदान दिवस – सह्याद्रि का शेर वासुदेव बलवंत फड़के

नई दिल्ली. घटना वर्ष 1870 की है. एक युवक तेजी से अपने गांव की ओर भागा जा रहा था. उसके मुंह से मां-मां....शब्द निकल रहे थे, पर दुर्भाग्य कि उसे मां के दर्शन नहीं हो सके. उसका मन रो उठा. लानत है ऐसी नौकरी पर, जो उसे अपनी मां के अन्तिम दर्शन के लिए भी छुट्टी न मिल सकी. वह युवक था वासुदेव बलवन्त फड़के. लोगों के बहुत समझाने पर वह शान्त हुआ, पर मां के वार्षिक श्राद्ध के समय फिर यही तमाशा हुआ और उसे अवकाश नहीं मिल ...

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जयंती विशेष – गौरवशाली अतीत को सामने लाने वाले इतिहास पुरुष ठाकुर रामसिंह

ऐसा कहा जाता है कि शस्त्र या विष से तो एक-दो लोगों की ही हत्या की जा सकती है, पर यदि किसी देश के इतिहास को बिगाड़ दिया जाये, तो लगातार कई पीढ़ियाँ नष्ट हो जाती हैं. हमारे इतिहास के साथ दुर्भाग्य से ऐसा ही हुआ. और वर्तमान में हमारी युवा पीढ़ी गलत इतिहास पढ़ रही है, तथा अपने गौरवशाली अतीत से अनभिज्ञ होती जा रही है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता इस भूल को सुधारने में लगे हैं और वास्तविक इतिहास को खोज क ...

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14 फरवरी / जन्मदिवस – स्वतंत्रता के साधक बाबा गंगादास

नई दिल्ली. वर्ष 1857 के भारत के स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बाबा गंगादास का जन्म 14 फरवरी, 1823 (बसंत पंचमी) को गंगा के तट पर बसे प्राचीन तीर्थ गढ़मुक्तेश्वर (उत्तर प्रदेश) के पास रसूलपुर ग्राम में हुआ था. इनके पिता चौधरी सुखीराम तथा माता दाखादेई थीं. बड़े जमींदार होने के कारण उनका परिवार बहुत प्रतिष्ठित था. जन्म के कुछ दिन बाद पूरे विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ उनका नाम गंगाबख्श रखा ग ...

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13 फरवरी / जन्मदिवस – मुगलों के प्रतिकारक महाराजा सूरजमल जाट

नई दिल्ली. मुगलों के आक्रमण का प्रतिकार करने में उत्तर भारत में जिन राजाओं की प्रमुख भूमिका रही, उनमें भरतपुर (राजस्थान) के महाराजा सूरजमल जाट का नाम बड़े गौरव से लिया जाता है. उनका जन्म 13 फरवरी, 1707 को हुआ था. ये राजा बदनसिंह ‘महेन्द्र’ के दत्तक पुत्र थे. उन्हें पिता की ओर से वैर की जागीर मिली थी. वे शरीर से अत्यधिक सुडौल, कुशल प्रशासक, दूरदर्शी व कूटनीतिज्ञ थे. उन्होंने वर्ष 1733 में खेमकरण सोगरिया की फ ...

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09 फरवरी / पुण्यतिथि – कुष्ठ रोगियों की सेवा में लीन रहे अखण्ड सेवाव्रती बाबा आम्टे

नई दिल्ली. सेवा का मार्ग बहुत कठिन है, उसमें भी कुष्ठ रोगियों की सेवा तो अत्यधिक कठिन है. ऐसे लोगों को स्वयं भी रोगी हो जाने का भय रहता है, पर मुरलीधर देवीदास (बाबा) आम्टे ने सेवा के कठिन क्षेत्र को ही अपनाया. इससे उनके परिजन इतने प्रभावित हुये कि उनकी पत्नी, पुत्र, पुत्रवधू और पौत्र भी इसी कार्य में लगे हैं. ऐसे समाज सेवी परिवार दुर्लभ ही होते हैं. बाबा आम्टे का जन्म 26 दिसम्बर, 1914 को महाराष्ट्र के वर्धा ...

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08 फरवरी / प्रेरक प्रसंग – देशद्रोह करने वालों को दी सजा

नई दिल्ली. देश की स्वाधीनता के लिये जिसने भी त्याग और बलिदान दिया, वह धन्य है. पर जिस घर के सब सदस्य फांसी चढ़ गये, वह परिवार सदा के लिये पूज्य है. चाफेकर बन्धुओं का परिवार ऐसा ही था. 1897 में पुणे में भयंकर प्लेग फैल गया. इस बीमारी को नष्ट करने के बहाने से वहां का प्लेग कमिश्नर सर वाल्टर चार्ल्स रैण्ड मनमानी करने लगा. उसके अत्याचारों से पूरा नगर त्रस्त था. वह जूतों समेत रसोई और देवस्थान में घुस जाता था. उस ...

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