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01 मई / जन्मदिवस – निष्ठावान स्वयंसेवक बंसीलाल सोनी

संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री बंसीलाल सोनी का जन्म एक मई, 1930 को वर्तमान झारखंड राज्य के सिंहभूम जिले में चाईबासा नामक स्थान पर अपने नाना जी के घर में हुआ था. इनके पिता श्री नारायण सोनी तथा माता श्रीमती मोहिनी देवी थीं. इनके पुरखे मूलतः राजस्थान के थे, जो व्यापार करने के लिये इधर आये और फिर यहीं बस गये. बाल्यावस्था में ही उन्होंने अपने बड़े भाई श्री अनंतलाल सोनी के साथ शाखा जाना प्रारम्भ किया. आगे चलकर दोनों ...

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30 अप्रैल / जन्मदिवस – राष्ट्रसन्त तुकड़ो जी महाराज

नई दिल्ली. 23 जुलाई, 1955 को जापान के विश्व धर्म सम्मेलन में एक सन्यासी जब बोलने खड़ा हुआ तो भाषा न समझते हुए भी उनके चेहरे के भाव और कीर्तन के मधुर स्वर ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता मन्त्रमुग्ध हो उठे. लोगों को भावरस में डुबोने वाले वे महानुभाव राष्ट्रसंत तुकड़ो जी महाराज थे. तुकड़ो जी का जन्म 30 अप्रैल, 1909 को अमरावती (महाराष्ट्र) के ‘यावली’ गांव में हुआ था. इनके पिता बंडो जी इंगले तथा माता मंजुला देवी थी ...

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28 अप्रैल / बलिदान दिवस – क्रान्ति पुरोधा जोधासिंह अटैया

नई दिल्ली. वर्ष 1857 की महान क्रान्ति का प्रमुख कारण भारत की स्वतन्त्रता का पावन उद्देश्य और अदम्य उत्साह ही नहीं, आत्माहुति का प्रथम आह्नान भी था. देश के हर क्षेत्र से हर वर्ग और आयु के वीरों और वीरांगनाओं ने आह्वान को स्वीकार किया और अपने रक्त से भारत मां का तर्पण किया. उसी मालिका के एक तेजस्वी पुष्प थे, क्रान्ति पुरोधा जोधासिंह अटैया. वर्ष 1857 में जब बैरकपुर छावनी में वीर मंगल पांडे ने क्रान्ति का शंखना ...

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27 अप्रैल / इतिहास स्मृति – कांगला दुर्ग का पतन

नई दिल्ली. वर्ष 1857 के स्वाधीनता संग्राम में सफलता के बाद अंग्रेजों ने ऐसे क्षेत्रों को भी अपने अधीन करने का प्रयास किया, जो उनके कब्जे में नहीं थे. पूर्वोत्तर भारत में मणिपुर एक ऐसा ही क्षेत्र था. स्वाधीनता प्रेमी वीर टिकेन्द्रजीत सिंह वहां के युवराज तथा सेनापति थे. उन्हें ‘मणिपुर का शेर’ भी कहते हैं. उनका जन्म 29 दिसम्बर, 1856 को हुआ था. वे राजा चन्द्रकीर्ति के चौथे पुत्र थे. राजा की मृत्यु के बाद उनके ब ...

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26 अप्रैल / पुण्यतिथि – भारत दर्शन कार्यक्रम के प्रणेता विद्यानंद शेणाय

नई दिल्ली. भारत माता की जय और वन्दे मातरम् तो प्रायः सब लोग बोलते हैं, पर भारतभूमि की गोद में जो हजारों तीर्थ, धाम, पर्यटन स्थल, महामानवों के जन्म और कर्मस्थल हैं, उनके बारे में प्रायः लोगों को मालूम नहीं होता. भारत दर्शन कार्यक्रम के माध्यम से इस बारे में लोगों को जागरूक करने वाले विद्यानंद शेणाय जी का जन्म कर्नाटक के प्रसिद्ध तीर्थस्थल शृंगेरी में हुआ था. श्रीमती जयम्मा एवं श्री वैकुंठ शेणाय दम्पति को पां ...

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25 अप्रैल / जन्मदिवस – विद्यार्थी परिषद की कार्यप्रणाली को आधार देने वाले यशवंत केलकर

नई दिल्ली. वे यशवंत वासुदेव केलकर ही थे, जिन्होंने ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ की कार्यप्रणाली को महत्वपूर्ण आधार दिया. उनका जन्म 25 अप्रैल, 1925 को पंढरपुर (महाराष्ट्र) में हुआ था. उनके पिता शिक्षा विभाग में नौकरी करते थे. वे रूढि़वादी थे, जबकि माता जानकीबाई जातिभेद से ऊपर उठकर सोचती थीं. यशवंत के मन पर मां के विचारों का अधिक प्रभाव पड़ा. यशवंत पढ़ाई में सदा प्रथम श्रेणी पाते थे. मराठी तथा अंग्रेजी साहि ...

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24 अप्रैल / पुण्यतिथि – गौरक्षा के लिये 166 दिन अनशन करने वाले महात्मा रामचंद्र वीर

नई दिल्ली. वर्ष 1966 में दिल्ली में गौरक्षार्थ 166 दिन का अनशन करने वाले महात्मा रामचंद्र वीर का जन्म आश्विन शुक्ल प्रतिपदा, विक्रमी संवत 1966 (1909 ई) में महाभारतकालीन विराट नगर (राजस्थान) में हुआ था. इनके पूर्वज स्वामी गोपालदास बाणगंगा के तट पर स्थित ग्राम मैड़ के निवासी थे. उन्होंने औरंगजेब द्वारा दिल्ली में हिन्दुओं पर थोपे गये शमशान कर के विरोध में उसके दरबार में ही आत्मघात किया था. उनके पास समर्थ स्वा ...

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23 अप्रैल / इतिहास स्मृति – पेशावर कांड के नायक चन्द्रसिंह गढ़वाली

नई दिल्ली. चन्द्रसिंह का जन्म ग्राम रौणसेरा, (जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड) में 25 दिसम्बर, 1891 को हुआ था. वह बचपन से ही बहुत हृष्ट-पुष्ट था. ऐसे लोगों को वहां ‘भड़’ कहा जाता है. केवल 14 वर्ष की अवस्था में उनका विवाह हो गया. उन दिनों प्रथम विश्व युद्ध प्रारम्भ हो जाने के कारण सेना में भर्ती चल रही थी. चन्द्रसिंह गढ़वाली की इच्छा भी सेना में जाने की थी, पर घर वाले इसके लिए तैयार नहीं थे. अतः चन्द्रसिंह घर स ...

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22 अप्रैल / पुण्यतिथि – क्रांतिकारी योगेश दा

नई दिल्ली. देश को स्वतंत्र करवाने में अने क्रांतिकारियों ने योगदान दिया था. उन्हीं में से एक योगेश चंद्र चटर्जी भी थे. क्रान्तिवीर योगेश चन्द्र चटर्जी (योगेश दा) का जीवन देश को विदेशी दासता से मुक्त कराने की गौरवमय गाथा है. उनका जन्म अखंड भारत के ढाका जिले के ग्राम गोकाडिया, थाना लोहागंज में तथा लालन-पालन और शिक्षा कोमिल्ला में हुई. 1905 में बंग-भंग से जो आन्दोलन शुरू हुआ, योगेश दा उसमें जुड़ गये. पुलिन दा ...

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20 अप्रैल / इतिहास स्मृति – विजयनगर साम्राज्य के प्रेरक देवलरानी और खुशरोखान

नई दिल्ली. मध्यकालीन इतिहास में हिन्दू गौरव के अनेक पृष्ठों को वामपंथी इतिहासकारों ने छिपाने का राष्ट्रीय अपराध किया है. ऐसा ही एक प्रसंग गुजरात की राजकुमारी देवलरानी और खुशरोखान का है. अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत में नरसंहार कर अपार धनराशि लूटी तथा वहां हिन्दू कला व संस्कृति को भी नष्ट किया. उसने गुजरात को भी दो बार लूटा. गुजरात के शासक रायकर्ण की पत्नी कमलादेवी को जबरन अपनी तथा राजकुमारी देवलरानी को अप ...

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