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19 अप्रैल / बलिदान दिवस – युवा बलिदानी अनन्त कान्हेरे

नई दिल्ली. भारत मां की कोख कभी सपूतों से खाली नहीं रही. ऐसे ही एक सपूत थे - अनन्त लक्ष्मण कान्हेरे. जिन्होंने देश की स्वतन्त्रता के लिए केवल 19 साल की युवावस्था में ही फाँसी के फन्दे को चूम लिया. उन दिनों महाराष्ट्र के नासिक नगर में जैक्सन नामक अंग्रेज जिलाधीश कार्यरत था. उसने मराठी और संस्कृत सीखकर अनेक लोगों को प्रभावित कर लिया था; पर उसके मन में भारत के प्रति घृणा भरी थी. वह नासिक के पवित्र रामकुंड में घ ...

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18 अप्रैल / बलिदान दिवस – अमर बलिदानी दामोदर हरि चाफेकर

नई दिल्ली. दामोदर हरि चाफेकर उस बलिदानी परिवार के अग्रज थे, जिसके तीनों पुष्पों ने स्वयं को भारत माँ की अस्मिता की रक्षा के लिए बलिदान कर दिया. उनका जन्म 25 जून, 1869 को पुणे में प्रख्यात कथावाचक श्री हरि विनायक पन्त के घर हुआ था. दामोदर के बाद 1873 में बालकृष्ण और 1879 में वासुदेव का जन्म हुआ. तीनों भाई बचपन से ही अपने पिता के साथ भजन कीर्तन में भाग लेते थे. दामोदर को गायन के साथ काव्यपाठ और व्यायाम का भी ...

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17 अप्रैल / पुण्यतिथि – मित्रता प्रेमी गोविन्दराव जी

गोविंदराव कुलकर्णी (अन्ना) 1945 में नागपुर से ही प्रचारक बने थे. प्रारम्भ में उन्हें महाराष्ट्र में ही भंडारा और फिर गोंदिया में जिला प्रचारक का काम दिया गया. 1948 में गांधी जी की हत्या के बाद लगे प्रतिबंध के समय वे उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में प्रचारक थे. प्रतिबंध समाप्ति के बाद उन्हें फिर महाराष्ट्र बुला लिया गया. वे विदर्भ में खामगांव, गोंदिया, भंडारा और नागपुर में नगर, जिला और विभाग प्रचारक जैसी महत्वपू ...

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13 अप्रैल / इतिहास स्मृति – अंग्रेजों के अत्याचारों की पराकाष्ठा “जलियांवाला बाग नरसंहार”

नई दिल्ली. भारत की स्वतन्त्रता के लिये संघर्ष के गौरवशाली इतिहास में अमृतसर के जलियाँवाला बाग का अप्रतिम स्थान है. इस आधुनिक तीर्थ पर हर देशवासी का मस्तक उन वीरों की याद में स्वयं ही झुक जाता है, जिन्होंने अपने रक्त से भारत की स्वतन्त्रता के पेड़ को सींचा. 13 अप्रैल, 1919 को बैसाखी का पर्व था. इसे पूरे देश में ही मनाया जाता है, पर खालसा पन्थ की स्थापना का दिन होने के कारण पंजाब में इसका उत्साह देखते ही बनता ...

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10 अप्रैल / जन्म दिवस – घोष स्वर, लिपि का भारतीयकरण करने वाले सुब्बू श्रीनिवास

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शाखा और शाखा में शारीरिक कार्यक्रमों का बड़ा महत्व है. शाखा पर खेल के साथ ही पथ संचलन का अभ्यास भी होता है. जब स्वयंसेवक घोष (बैंड) की धुन पर कदम मिलाकर चलते हैं, तो चलने वालों के साथ ही देखने वाले भी झूम उठते हैं. घोष विभाग को नया रूप देकर विकास में अपना पूरा जीवन खपा देने वाले श्री सुब्बू श्रीनिवास का जन्म 10 अप्रैल, 1940 को मैसूर (कर्नाटक) में एक सामान्य दुकानदार बी ...

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8 अप्रैल/ बलिदान दिवस – क्रांति की ज्वाला धधकाने वाले क्रांतिवीर मंगल पांडे

नई दिल्ली. देश को अंग्रेजों की परतंत्रता से मुक्त करवाने के लिये 1857 में ज्वाला को धधकाने वाले क्रांतिवीर थे........मंगल पांडे. अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे का जन्म 30 जनवरी, 1831 को ग्राम नगवा (बलिया, उत्तर प्रदेश) में हुआ था. कुछ लोग इनका जन्म ग्राम सहरपुर (जिला साकेत, उत्तर प्रदेश) तथा जन्मतिथि 19 जुलाई, 1827 भी मानते हैं. युवावस्था में ही वे ...

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‘भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता’ के सेनानी डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार

चिरसनातन अखण्ड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता के लिए कटिबद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे अज्ञात सेनापति थे, जिन्होंने अपने व अपने संगठन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में अपना तन-मन सब कुछ भारत माता के चरणों में अर्पित कर दिया था. बाल्यकाल से लेकर जीवन की अंतिम श्वास तक भारत की स्वतंत्रता के लिए जूझते रहने वाले इस महान स्वतंत्रता सेनानी ने न तो अपनी आत्मकथा लिखी और न ही ...

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05 अप्रैल / जन्मदिवस – बाबू जगजीवनराम और सामाजिक समरसता

नई दिल्ली. समाज के निर्धन और वंचित वर्ग के जिन लोगों ने उपेक्षा सहकर भी अपना मनोबल ऊंचा रखा, उनमें ग्राम चन्दवा (बिहार) में पांच अप्रैल, 1906 को जन्मे बाबू जगजीवनराम का नाम उल्लेखनीय है. उनके पिता शोभीराम थे. उनकी माता बसन्ती देवी ने आर्थिक अभावों के बीच अपने बच्चों को स्वाभिमान से जीना सिखाया. विद्यालय में हिन्दू, मुसलमान तथा दलित हिन्दुओं के लिए पानी के अलग घड़े रखे जाते थे. उन्होंने अपने मित्रों के साथ म ...

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03 अप्रैल / जन्म दिवस – वीरता की मिसाल फील्ड मार्शल मानेकशा

नई दिल्ली. 20वीं शती के प्रख्यात सेनापति फील्ड मार्शल सैम होरमुसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशा का जन्म 3 अप्रैल 1914 को एक पारसी परिवार में अमृतसर में हुआ था. उनके पिता जी वहां चिकित्सक थे. पारसी परम्परा में अपने नाम के बाद पिता, दादा और परदादा का नाम भी जोड़ा जाता है, पर वे अपने मित्रों में अंत तक सैम बहादुर के नाम से प्रसिद्ध रहे. सैम मानेकशा का सपना बचपन से ही सेना में जाने का था. 1942 में उन्होंने मेजर के न ...

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01 अप्रैल / जन्मदिवस – मौन साधक अरविन्द भट्टाचार्य

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सैकड़ों मौन साधकों का निर्माण किया है, जिन्होंने अपनी देह को तिल-तिल गलाकर गहन क्षेत्रों में हिन्दुत्व की जड़ें मजबूत कीं. ऐसे ही एक मौन साधक थे अरविन्द भट्टाचार्य. अरविन्द दा का जन्म एक अप्रैल, 1929 को हैलाकांडी (असम) में हुआ. वे विद्यार्थी जीवन में संघ के स्वयंसेवक बने. एम.ए. तथा बी.टी. कर एक इंटर कॉलेज में प्राध्यापक बने. उन दिनों मधुकर लिमये असम में प्रचारक थे. उनके ...

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