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समाज में राष्ट्रीयता से ओतप्रोत लोगों को जोड़ें – भय्याजी जोशी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दो दिवसीय समन्वय बैठक संपन्न समरस व समर्थ भारत बनाने की कार्य योजना पर हुआ मंथन जोधपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने राष्ट्रीय विचारों के लिए समर्पित और संगठन के व्याप में सहयोगी बनने वाले समाज के लोगों को जोड़ने का आह्वान किया. सरकार्यवाह जी जोधपुर में संघ की समन्वय बैठक के अंतिम सत्र को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप ...

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भारत  के ऋषि मुनियों का चिंतन चिरंतन और शाश्वत है – सुरेश भय्याजी जोशी

जयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्याजी जोशी ने कहा कि हमारे ऋषि मुनियों के चिंतन की प्रासंगिकता पर कोई प्रश्न चिह्न नहीं लग सकता, क्योंकि उनका चिंतन मूलभूत और सर्वकालिक रहा है. युगानुकूल उसकी व्याख्याएं बदलती रही हैं, लेकिन मूलभूत विषय कभी नहीं बदला. इसलिए यह चिरंतन और शाश्वत है. इसी में विश्व के समग्र मानव का कल्याण समाहित है. सरकार्यवाह जी गुरुवार को एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान ...

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संघ में सभी का स्वागत है – सुनील कुलकर्णी जी

गोरखपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय शारीरिक शिक्षण प्रमुख सुनील कुलकर्णी जी ने कहा कि संघ समाज के सभी वर्गों को समाहित करता है. संघ में सभी का स्वागत है. संघ की पद्धति व कार्यशैली अलग है, इसलिए संघ को समझना है तो शाखा आना पड़ेगा. संघ की शाखा में व्यक्ति का शारीरिक एवं बौद्धिक विकास होता है. संघ की शाखा में धैर्यवान, राष्ट्रप्रेमी और जोशीले कार्यकर्ता तैयार किये जाते हैं जो समय-समय पर सम ...

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घुमंतु लोगों के साहित्य में भारतीय मिट्टी की सुगंध – गिरीश प्रभुणे जी

महाराष्ट्र में दो दिवसीय समरसता साहित्य सम्मेलन संपन्न पुणे (विसंकें). समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर कर समरसतापूर्ण जीवन, सबके प्रति आत्मीयता रखने वाला जीवन समाज में फिर से दिखाई दे, इस उद्देश्य के साथ सामाजिक समरसता मंच पिछले तीन दशकों से कार्यरत है. इसी दिशा में प्रयास के रूप में समरसता साहित्य परिषद की ओर से समाज के वंचित घटकों पर लेखन करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मेलन सन् 1998 से आयोजित किया जा रहा ...

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महामना ने काशी हिन्दू विवि में मानवीय मूल्यों को भी स्थापित किया

काशी (विसंकें). काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी की 156वीं जयन्ती पर कार्यक्रम का आयोजन मालवीय मिशन की ओर से किया गया. राष्ट्र निर्माण में महामना के लोक प्रेरक जीवन दर्शन मूल्य विषय पर मालवीय भवन में कार्यक्रम का आयोजन हुआ. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी जी ने कहा कि महामना के आदर्शों में भारतीय संस्कृति के पुरूषार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का आपस में सम ...

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संस्कारित समाज की रचना से ही सामाजिक परिवर्तन संभव – सुरेश भय्याजी जोशी

25 फरवरी 2018 को होने वाले ‘राष्ट्रोदय’ कार्यक्रम के लिये भूमि पूजन मेरठ (विसंकें). मेरठ में ‘राष्ट्रोदय’ कार्यक्रम हेतू जागृति विहार एक्सटेंशन में तैयार किए गए संघ स्थान का विधिवत भूमि पूजन हुआ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्याजी जोशी उपस्थित रहे. भूमि पूजन के पश्चात सरकार्यवाह जी ने उपस्थित स्वयंसेवकों को सम्बोधित किया. उन्होंने राष्ट्रोदय कार्यक्रम के विभिन्न आयामों व संघ के लक्ष्यों के ...

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सर्वसमावेशी है भारतीय दर्शन – डॉ. कृष्णगोपाल जी

'ज्ञान संगम' में 'भारतीय जीवन दृष्टि - वर्तमान संदर्भ में व्याख्या' पर चिंतन-मंथन भोपाल (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह एवं विचारक डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि भारत की दृष्टि विशाल, विराट एवं सम्यक है. भारत में कभी भी खण्ड-खण्ड में चिंतन नहीं किया गया, बल्कि सभी शास्त्रों को समान दृष्टि से देखा गया है. भारत की समावेशी दृष्टि में सभी प्रकार की पूजा पद्धति एवं विचारों का स्वागत किया गया है ...

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अंग्रेजी पढ़ें व बोलें, पर जीवन पद्धति में पाश्चात्य संस्कृति का प्रवेश न होने दें – सुरेश भय्याजी जोशी

देहरादून महानगर का शाखा दर्शन कार्यक्रम देहरादून (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्याजी जोशी ने परेड ग्राउण्ड देहरादून में आयोजित शाखा दर्शन कार्यक्रम में सम्बोधित किया. उन्होंने स्वयंसेवकों से बस्ती सेवा, ग्राम सेवा, धर्म जागरण, कुटुम्ब प्रबोधन, जातिवाद से ऊपर उठकर समानतायुक्त हिन्दू जागरण, आपसी सद्भाव, राष्ट्रीयता, निस्वार्थ सेवा, अच्छा हिन्दू (उत्तम सिद्धान्त से युक्त स्वयंसेवक) ब ...

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भारत भूमि पर विकसित सभी दर्शनों में सबके कल्याण का विचार – जे नंदकुमार जी

भोपाल (विसंकें). प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि भारतीय दृष्टि समूची सृष्टि को ईश्वर ही मानती है. मनुष्य मात्र में ही नहीं, अपितु प्रकृति के प्रत्येक तत्व- पेड़-पौधे, पक्षी, ग्रह-नक्षत्र, पृथ्वी, समुद्र एवं पहाड़, सबमें ईश्वर का ही अंश है. सबमें एक ही ब्रह्म है. इसलिए भारतीय ज्ञान परंपरा में सबके साथ आत्मीय संबंध देखे गए हैं. अन्यत्र किसी विचार-संस्कृति में प्रकृति के प्रति ऐसा ...

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वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, पर जनसरोकारों के साथ मतभेद नहीं – जे. नंदकुमार जी

‘वर्तमान समय में कलम और विचार का द्वंद’ विषय पर संगोष्ठी भोपाल (विसंकें). प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि पत्रकारों का यह दायित्व है कि वह वैचारिक दृष्टि से ऊपर उठकर समाज में शांति बनाए रखने के लिए कार्य करें. आपस में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, पर जनसरोकारों के साथ मतभेद नहीं होना चाहिए. पत्रकार को संस्थान और स्वयं के विचार के प्रति जवाबदेह न होकर जनता के प्रति समर्पित रहना चाहि ...

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