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दरिद्र नारायण की सेवा प्रत्येक सामर्थ्यवान व्यक्ति का सामाजिक दायित्व – अजीत महापात्रा जी

गोरक्ष. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख अजीत महापात्रा जी ने कहा कि समाज के उपेक्षित बन्धुओं की सेवा करना, उनको मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयत्न करना यह समाज के प्रत्येक सामर्थ्यवान व्यक्ति की जिम्मेदारी है. यदि हम वंचित समाज के इन बंधुओं के लिए आगे नहीं आएंगे तो हमारी उपेक्षा के शिकार हमारे अपने ही बंधुओं को भड़का कर देश विरोधी ताकतें उन्हें हमारे ही देश और समाज के खिलाफ खड़ा करने का षड्य ...

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परिवार के संस्कारों से ही जीवित है हिन्दू जीवन पद्धति – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

गोरखपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि देश की हजारों वर्षों की गुलामी के बाद भी हिन्दू जीवन पद्धति जीवित है, इसका मूल कारण हमारी परिवार व्यवस्था से मिलने वाले संस्कार हैं. डॉ. ईश्वरचंद विद्यासागर, विनोवा भावे जी में जो समाज सेवा भाव आया, उसका स्रोत परिवार में माँ ही थी, किन्तु आज इस परिवार व्यवस्था पर ही बड़ा संकट खड़ा है. सह सरकार्यवाह जी गोरखपुर में माधव ध ...

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अंग्रेजी शिक्षा ने युवाओं को अपनी ऐतिहासिक विरासत से काटने का कार्य किया है

“स्वयंसिद्ध- 2017” गोरक्ष. राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के व्यापक सन्दर्भ में कार्य करने का लक्ष्य सामने रखकर अखिल भारतीय छात्र संगठन के रूप में समाज के सभी क्षेत्रों में कार्य करने वाला ऐसा एक संगठन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद है. आंदोलनात्मक, प्रतिनिधित्वात्मक कार्यक्रमों के साथ- साथ विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहन देने व उन्हें आवश्यक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से संगठन समय-समय पर रचनात्मक कार्यक्रम ...

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भारत के युवाओं में देश के हालात बदलने की क्षमता है – अजीत महापात्रा जी

गोरखपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख अजीत महापात्रा जी ने 15 जनवरी को गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में युवा भारती द्वारा आयोजित गोष्ठी सेवा, समरसता और युवा में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया. उन्होंने कहा कि युवा देश के बारे में सोचें. गरीब होना क्या गुनाह है? सबकी सेवा करने वाला समाज का सबसे वंचित वर्ग सर्वाधिक उपेक्षित क्यों है? इतना विकसित होने के बावजूद आज ...

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संघ की शाखा साधना स्थल है – शिव नारायण जी

गोरखपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के प्रचारक शिवनारायण जी ने कहा कि संघ की शाखा साधना स्थल है. साधना अगर खंडित है तो मकसद पूरा होने से रहा. लिहाजा घंटे भर की शाखा को साधना मानें, इसमें इसी भाव से आएं. स्वयंसेवक वह है जो खुद की प्रेरणा से संघ में समाज और देश को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के भाव से आता है. शिव नारायण जी रविवार को गोरखपुर महानगर स्थित महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज क ...

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भाव, ज्ञान और कर्म से ही मानव की पहचान बनती है – प्रो. एसपी सिंह जी

गोरखपुर (विसंकें). लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एसपी सिंह ने कहा कि सामाजिक समरसता एक क्रांतिकारी विचार है. किसी भी देश की एकता के लिए यह आवश्यक शर्त है. बरगद की तरह विचार कभी खत्म नहीं होते, समय आने पर वे प्रासंगिक हो जाते हैं. प्रो. एसपी सिंह जी दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्विद्यालय के संवाद भवन में आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक बालास ...

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समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए शाखा विस्तार आवश्यक – दत्तात्रेय जी होसबले

देवरिया (गोरक्ष प्रांत). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिये शाखा विस्तार आवश्यक है. जिसके लिये स्वयंसेवक सर्वस्पर्शी बनें. सह सरकार्यवाह जी नर्वदेश्वर सरस्वती शिशु मंदिर में गोरक्ष प्रांत के नगरीय क्षेत्रों के पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे. पांच दिवसीय बैठक के अंतिम दिन (सोमवार, 21 दिसंबर) कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. इससे पह ...

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साहित्यकारों का पुरस्कार लौटाना – संवेदना या राजनीति विषय पर गोष्ठी का आयोजन

गोरखपुर (विसंकें). अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकार एक सोची समझी रणनीति के तहत एक भ्रम उत्पन्न करना चाहते हैं कि इस समय देश में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. ये वही साहित्यकार हैं, जिन्होंने कश्मीर से हिन्दुओं के पलायन और 1984 के दंगों पर अपनी जुबानें सिल रखीं थीं. पूर्व रेल अधिकारी एवं व्यंग्यकार रणविजय सिंह ने विश्व संवाद केंद्र गोरखपुर के साहित्य प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए संब ...

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ध्येय, अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता रहती है तो लक्ष्य प्राप्ति के लिए सब साथ चल पड़ते हैं – डॉ. मोहन जी भागवत

गोरखपुर (विसंकें). संस्कृति पब्लिक स्कूल में आयोजित क्षेत्रीय समन्वय बैठक को संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि विभिन्न समवैचारिक संगठनों में समन्वय की आवश्यकता नहीं, वरन् कार्यकर्ताओं में समन्वय ही वास्तव में समन्वय है. समन्वय स्वभाव के आधार पर होता है न कि नीतियों से. सभी संगठनों के कार्यकर्ताओं में व्यवहार, ध्येय और अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता रहती है तो बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लि ...

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संघ में सबसे महत्वपूर्ण सामान्य स्वयंसेवक होता है – डॉ. मोहन भागवत जी

गोरखपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि अपना कार्य भारत को परम वैभव, साधन संपन्नता तक ले जाने के लिए समाज को तैयार करना है. इस काम के महत्व को समझकर काम को उत्कृष्ट तरीके से तथा संस्कारक्षम्य होकर करना. समाज की कुछ दुष्ट शक्तियां कार्य से भटकाने का प्रयास करती हैं, परंतु कार्य की पद्धति को ध्यान में रखकर अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार कार्य को अलग-अलग महत्व देने स ...

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