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भीमा-कोरेगाँव घटना पर दिल्ली विश्वविद्यालय में सेमिनार का आयोजन

नई दिल्ली (इंविसंकें). दिल्ली विश्वविद्यालय के SC/ST/OBC प्राध्यापकों और शोध छात्रों के संगठन सेंटर फॉर सोशल डेवलपमेंट (सीएसडी) ने भीमा-कोरेगाँव की घटना पर "भीमा-कोरेगाँव का सच" विषय पर दिल्ली विश्वविद्यालय की आर्ट्स फैकल्टी में सेमिनार का आयोजन किया. सेमिनार के मुख्य वक्ता प्रो. विद्युत चक्रबर्ती जी राजनीति विज्ञान विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय और ज्ञानेन्द्र बरतरिया जी सलाहकार प्रसार भारती रहे. प्रो. विद्युत ...

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लोकभावनाओं को ध्यान में रखकर लिखा साहित्य होता है कालजयी

नई दिल्ली (इंविसंकें). महिला बृद्धिजीवियों के संगठन 'जिया' एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संयुक्त तत्वाधान में विश्व पुस्तक मेले के साहित्य मंच में “लोक को नकारे तो कैसा साहित्य?” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गयी. गोष्ठी में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी जी, सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी जी, आकाशवाणी में लोक सम्पदा विभाग के निदेशक सोमदत्त शर्मा जी, साहित्यकार प्रो. प ...

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भारत का भविष्य सुरक्षित रखने वाले प्रज्ञावान विवेकशील विद्यार्थी तैयार करें शिक्षक – सुरेश सोनी जी

नई दिल्ली (इंविसंकें). नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के तत्वाधान में दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज सभागार में मकर संक्रांति वार्षिक मिलनोत्सव का आयोजन किया गया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी ने इस अवसर पर “वर्तमान परिदृश्य में शिक्षकों की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया. उन्होंने कहा कि समय से ही सभी चीजें चलती हैं, इसलिए काल को मापने और उसकी गणना के आधार पर ...

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पत्रकारिता और साहित्य का अन्योन्याश्रित संबंध

नई दिल्ली (इंविसंकें). विश्व पुस्तक मेले में “साहित्य और पत्रकारिता, कितने दूर कितने पास” विषय पर लेखक मंच में परिचर्चा की गयी. परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार एवं समीक्षक अनंत विजय जी, चर्चित व्यंग्यकार डॉ. आलोक पुराणिक जी, प्रसिद्ध लेखक राजीव रंजन प्रसाद जी तथा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की निदेशक रीता चौधरी जी ने पत्रकारिता में साहित्य के महत्व पर चर्चा की. विषय वस्तु प्रस्तुतीकरण व मंच संचालन अनुराग पुनेठा जी न ...

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स्वामी विवेकानंद की जयंती पर विश्व पुस्तक मेले में ई-जर्नलिज़म पर परिचर्चा

नई दिल्ली (इंविसंकें). दिल्‍ली के प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में प्रबुद्ध चर्चाओं का दौर जारी है. स्वामी विवेकानंद की जयंती पर विश्व पुस्तक मेले के साहित्य मंच पर युवा की ई-मैगज़ीन "कैम्पस क्रौनिकल" और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संयुक्त प्रयास से भारत में पाठन व्यवहार के बदलते स्वरूप और ई-जर्नलिज़म के विकास पर चर्चा का आयोजन किया गया. चर्चा में नवभारत टाइम्स के डिप्टी ऑनलाईन एडिटर प्रभाश झा जी ...

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पहले भारत की चिंता करें, फिर अपनी – बलदेव भाई शर्मा

नई दिल्ली (इंविसंकें). विश्व पुस्तक मेले में इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र एवं नेशनल बुक ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में “संकेत रेखा” पुस्तक का विमोचन किया गया. भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के भाषणों के संग्रह पर आधारित भानुप्रताप शुक्ल लिखित इस पुस्तक का पुनः प्रकाशन श्री भारती प्रकाशन नागपुर ने किया है. पुस्तक विमोचन के मौके पर दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के लम्बे समय तक सहयोगी रहे भारतीय मजद ...

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हमें देश विरोध की किसी घटना पर खामोश नहीं रहना चाहिए – जे. नंदकुमार जी

नई दिल्ली (इंविसंकें). “कलम खामोश क्यों” विषय पर विश्व पुस्तक मेले में परिचर्चा आयोजित की गई. प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेले के चौथे दिन प्रेरणा मीडिया एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय साहित्य संगम में रखी गयी परिचर्चा में प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे. नंदकुमार जी, वरिष्ठ टी.वी पत्रकार चन्द्र प्रकाश जी, आर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर जी, दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफ ...

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राष्ट्रीय साहित्य संगम में 8 पुस्तकों का विमोचन

नई दिल्ली (इंविसंकें). नई दिल्ली में चल रहे अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले के दौरान राष्ट्रीय साहित्य संगम हॉल में “साहित्य इतिहास में मिथक और यथार्थ” नामक विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी का आयोजन दीनदयाल शोध संस्थान एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा संयुक्त रूप से किया गया. इस मौके पर प्रसिद्ध इतिहासकार कपिल कुमार, इतिहासकार रजनीश कुमार, माखनलाल लाल उपस्थित रहे. कपिल कुमार ने कहा कि भारत के गौरवश ...

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ज्ञान बांटते चलो – एकलव्य प्रकल्प

अपने पिता की उंगली थामे वह नन्हा बालक अक्सर उन कंन्सट्रक्शन साइट्स पर जाता था, जहाँ उसके पिता राज मिस्त्री का काम किया करते थे. तभी से उसके बाल मन में इन ऊँची इमारतों के लिए एक अजीब सा आकर्षण पैदा हो गया था. ऐसे ही एक दिन उसने अपने पिता से इंजीनियर बनने की इच्छा जाहिर की. पर, उसके पिता राम प्रकाश ने इसे बाल सुलभ इच्छा समझ कर प्यार से मना कर दिया. यूं भी अनपढ़ राम प्रकाश के लिए यह कल्पना करना भी मुश्किल था क ...

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सफलता की नई कहानी – स्वरूपवर्धिनी

पुणे की मलीन बस्तियों की झुग्गियों में पला बड़ा नेत्रहीन चंद्रकांत आज उसी ब्लाइंड-स्कूल का प्रिंसिपल है, जहां से उसने अपनी पढ़ाई की थी. इससे ही मिलती - जुलती कहानी संतोष की भी है. मलखम में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी व पुणे पुलिस में हवलदार संतोष का बचपन भी घोर गरीबी व अभावों की भेंट चढ़ जाता, यदि वो स्वरूपवर्धिनी के संपर्क में न आया होता. इतना ही नहीं, गांवों के रूढ़ीवादी परिवेश में बेटी होने के तमाम बंधनों से ...

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