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सुदर्शन जी का स्वप्न साकार करने में जुटें : बजरंगलाल जी

भोपाल.  सुदर्शन जी की पीड़ा थी कि भारत की स्वतंत्रता में “स्व” कहाँ है . तंत्र का अर्थ है व्यवस्था, रचना, प्रणाली. आजादी के पूर्व विदेशी हाथ व्यवस्था संचालित करते थे, 1947 के बाद हाथ बदल गये, किन्तु व्यवस्था वही रही. जिन जीवन मूल्यों के आधार पर भारत की आत्मा का प्रकटीकरण हो, स्वदेशी, स्वावलंबन केन्द्रित व्यवस्था स्वतंत्र भारत में बने, यह पूज्य सुदर्शन जी का स्वप्न था. हम सब चुनौती मानकर उनके स्वप्न को साकार ...

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संघ का प्रशिक्षण सेना से अधिक कठोर

भोपाल. 18 मई से प्रारम्भ हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्रीष्मकालीन संघ शिक्षा वर्ग (व्दितीय वर्ष) का 7 जून को स्थानीय शारदा विहार सरस्वती शिशु मंदिर में समापन हुआ. स्वयंसेवकों के शारीरिक प्रदर्शनों के साथ समारोह प्रारम्भ हुआ. समता, नियुद्ध, दण्डयुद्ध, घोष, सूर्य नमस्कार व सांघिक योग प्रदर्शन ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टीनेंट जनरल श्री म ...

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मनुष्य को मनुष्य बनाने वाली प्रयोगशाला है रसोई घर

‘मां की कोख से जन्म लेने के पश्चात् हमारा शरीर तो मनुष्य का होता है, परन्तु क्या हम मनुष्य हैं, इस बात पर प्रश्नचिन्ह अंकित होता है? क्योंकि मनुष्य बनने के लिए विशेष गुणों की आवश्यकता होती है, जिसके बिना वह पूर्ण हो ही नहीं सकता’. ये विचार हैं सुप्रसिद्ध चिंतक श्री विवेक घलसासी के. श्री घलसाली पिछले दिनों मध्य प्रदेश के दमोह में आयोजित श्रीगुरुजी व्याख्यानमाला को सम्बोधित कर रहे थे. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख ...

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