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सुदर्शन स्मृति विशेषांक का लोकार्पण

भोपाल. राष्ट्रीय स्वयंसेवकसंघ के पूर्व परम पूज्य सरसंघचालक स्वर्गीय कुप्पाहेल्ली सीतारमैया सुदर्शन पर केन्द्रित विशेषांक सुदर्शन स्मृति का लोकार्पण शुक्रवार को समन्वय भवन में सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल और गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया. मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि सुदर्शन जी हर विषय का विस्तृत अध्ययन कर उसके जानकारों के बीच जाते थे. मृदुला सिन्हा ने कहा कि सुदर्शनजी को स्व ...

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ग़रीबों के बीच चल रहा धर्मान्तरण का कुचक्र

शिवपुरी (विसंके). जिले के सबसे पिछड़े क्षेत्र खनियाधाना में विगत अनेक वर्षों से धर्मान्तरण का कुचक्र चलने की घटना सामने आई है. वहीं इस प्रकार के गंभीर मामले में प्रशासनिक उदासीनता भी प्रकाश में आई है. लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व बुकर्रा निवासी तुलाराम जाटव ने जब मुसलमान बन जाने का निर्णय किया तो उसकी पत्नी नाराज होकर अपने मायके हसर्रा चली गई  तथा उसने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसका पति उसे भी जबरन मुसलमान बन जा ...

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जहां कम कानून, वह अच्छा राज्य: डॉ. मनमोहन वैद्य

27 जुलाई 2014, भोपाल. कानून से समाज का संचालन करते जाएंगे तो व्यवस्था ठीक नहीं रहेगी. समाज के अपने मूल्य होने चाहिए, जिनसे समाज संचालित हो. जहां कम से कम कानून होते हैं, वह राज्य अच्छा होता है. राज्य या सरकार द्वारा प्रत्येक काम किया जाए, यह व्यवस्था भी ठीक नहीं है. समाज की रचना ऐसी बनानी चाहिए कि सभी कार्यों के लिए सरकार पर आश्रित न रहना पड़े. यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मन ...

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‘आरोग्य भारती’ ने विचार क्रांति के लिये कसी कमर

भोपाल. आरोग्य भारती ने चिकित्सा के बजाय आरोग्य को महत्व देने के विचार को भारत के जनजीवन में फिर से सहज बनाने के लिये समाज में विचार क्रांति लाने का निश्चय किया है. आरोग्य भारती का दो दिवसीय राष्ट्रीय विमर्श यहां 19 और 20 जुलाई को सम्पन्न हुआ. इस राष्ट्रीय विमर्श में देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ, स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और विद्याथियों ने भाग लिया. स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करने में स्वैच्छिक ...

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सुदर्शन जी का स्वप्न साकार करने में जुटें : बजरंगलाल जी

भोपाल.  सुदर्शन जी की पीड़ा थी कि भारत की स्वतंत्रता में “स्व” कहाँ है . तंत्र का अर्थ है व्यवस्था, रचना, प्रणाली. आजादी के पूर्व विदेशी हाथ व्यवस्था संचालित करते थे, 1947 के बाद हाथ बदल गये, किन्तु व्यवस्था वही रही. जिन जीवन मूल्यों के आधार पर भारत की आत्मा का प्रकटीकरण हो, स्वदेशी, स्वावलंबन केन्द्रित व्यवस्था स्वतंत्र भारत में बने, यह पूज्य सुदर्शन जी का स्वप्न था. हम सब चुनौती मानकर उनके स्वप्न को साकार ...

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संघ का प्रशिक्षण सेना से अधिक कठोर

भोपाल. 18 मई से प्रारम्भ हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्रीष्मकालीन संघ शिक्षा वर्ग (व्दितीय वर्ष) का 7 जून को स्थानीय शारदा विहार सरस्वती शिशु मंदिर में समापन हुआ. स्वयंसेवकों के शारीरिक प्रदर्शनों के साथ समारोह प्रारम्भ हुआ. समता, नियुद्ध, दण्डयुद्ध, घोष, सूर्य नमस्कार व सांघिक योग प्रदर्शन ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टीनेंट जनरल श्री म ...

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मनुष्य को मनुष्य बनाने वाली प्रयोगशाला है रसोई घर

‘मां की कोख से जन्म लेने के पश्चात् हमारा शरीर तो मनुष्य का होता है, परन्तु क्या हम मनुष्य हैं, इस बात पर प्रश्नचिन्ह अंकित होता है? क्योंकि मनुष्य बनने के लिए विशेष गुणों की आवश्यकता होती है, जिसके बिना वह पूर्ण हो ही नहीं सकता’. ये विचार हैं सुप्रसिद्ध चिंतक श्री विवेक घलसासी के. श्री घलसाली पिछले दिनों मध्य प्रदेश के दमोह में आयोजित श्रीगुरुजी व्याख्यानमाला को सम्बोधित कर रहे थे. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख ...

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