You Are Here: Home » समाचार » महाकौशल

समुत्कर्ष का प्रतिभा सम्मान समारोह

जबलपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्रीरंग राजे ने कहा कि सफलता किसी की मोहताज नहीं होती. परिश्रम से आगे बढ़ने वालों को कोई भी बाधा रोक नहीं सकती. ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं, जहां एक व्यक्ति की सकारात्मक सोच एवं दृढ़ इच्छाशक्ति ने दुनिया को झुका दिया. अगर हौंसले बुलंद हों और दिल में मंजिल पाने की चाहत हो तो कोई भी परिस्थिति इंसान को रोक नहीं सकती. आज मुझे बहुत खुशी है कि समुत्कर्ष के छा ...

Read more

समस्त जनों के प्रेरणास्रोत भारत रत्न नानाजी देशमुख

जबलपुर (विसंकें). नानाजी देशमुख ने अपना जीवन वंचितों और शोषितों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया. एकात्म मानववाद को अपने जीवन में उतारकर जीवन भर सामाजिक समरसता के लिए “भारत रत्न श्री नानाजी” ने आजीवन कार्य किया. प्रखर राष्ट्रवादी, महान समाजसेवी नानाजी न सिर्फ असंख्य कार्यकर्ताओं, बल्कि आमजन के भी प्रेरणास्रोत हैं. नानाजी ने अपनी वसीयत की पंक्तियों में मनोभाव व्यक्त करते हुए कहा था - “मेरी यह मानव देह मानवमा ...

Read more

शिक्षा जीविका का ही नहीं, जीवन का आधार होनी चाहिए

विद्याभारती राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री यतीन्द्र शर्मा जी ने स्वर्ण जयंती समारोह की पूर्व संध्या पर आयोजित पूर्व छात्र महासम्मेलन में कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा आध्यात्मिकता पर आधारित थी. शिक्षा, मुक्ति एवं आत्मबोध के साधन के रूप में थी. ये व्यक्ति के लिये नहीं, बल्कि धर्म के लिये थी. भारत की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक परम्परा विश्व इतिहास में प्राचीनतम है. भारतवासियों के लिये शिक्षा का अभिप्राय यह रहा है कि श ...

Read more

लोक भाषाएं जिंदा रहेंगी तो साहित्य जिंदा रहेगा – प्रो. योगेश चंद्र दूबे

कटनी (विसंकें). कटनी पुस्तक मेले के अंतिम दिन मुख्य अतिथि प्रो. योगेश चंद्र दूबे जी ने कहा कि लोक भाषाएं जिंदा रहेंगी तो साहित्य जिंदा रहेगा. लोक भाषाओं के विकास के लिए उनका अलग से संकलन होना आवश्यक है. पुस्तक मेला आकर्षण का केंद्र है, आज साहित्य सृजन बहुत हो रहा है. काव्य गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन की संख्या घट रही है. इंटरनेट के युग में भले ही कंप्यूटर पर लोगों की निर्भरता बढ़ गई है, किंतु इस तरह के आयोजन निर ...

Read more

जब सकारात्मक ऊर्जा शब्दों में ढलती है, तब साहित्य का सृजन होता है – श्याम सुंदर दूबे

कटनी (विसंकें). साहित्यकार श्याम सुंदर दूबे जी ने कहा कि साहित्यकार आत्मा का इंजीनियर होता है. सकारात्मक ऊर्जा जब शब्दों में ढलती है, तब साहित्य का सृजन होता है. साहित्य का लक्ष्य है मन की शांति व समाज का निर्माण. समाज में रहने वाले लोग यदि अपनी आंचलिक बोलियों को सुनकर भाव विभोर नहीं होते हैं तो उनका हृदय उस बंजर धरती की तरह है, जिस पर ना तो कुछ हो सकता है, ना कुछ पनप सकता है. वे कटनी पुस्तक मेले में साहित् ...

Read more

अपने कार्य से समाज को परिचित करवाना ही प्रचार विभाग का कार्य – डॉ. अवनीश भटनागर

जबलपुर (विसंकें). विद्या भारती के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. अवनीश भटनागर जी ने कहा कि हमें किसी भी कार्य को करने के लिए उसमें उतरना पड़ता है. हम अच्छा कार्य करें, उसकी सुगन्ध समाज में फैले. श्रीगुरुजी के अनुसार मेरा स्वयंसेवक ही मेरा प्रचार है. जो लोग समाज के बारे में सोचने की धारा रखते हैं, जिनकी समाज सुनता है, उसे मानता है, उन्हें ओपिनियन मेकर कहते हैं. इनकी 3 श्रेणी हैं - 1. अकादमिक .... जिसमें कुलपति से लेकर ...

Read more

परमात्मा का सतत् चिंतन व अनासक्त भाव ही जीवन की सफलता का मार्ग – आनंदमूर्ति गुरु माँ

जबलपुर (विसंकें). परमात्मा के सतत् चिंतन एवं अनासक्त भाव से किये गए कर्मों द्वारा मन को नियंत्रित किया जाता है. निष्काम कर्म के आचरण से मनुष्य का अन्तःकरण नितांत निर्मल हो जाता है और साक्षात् भगवत्प्राप्ति हेतु अनुभूति ज्ञान का पवित्र स्थल बन जाता है. ऐसा कर्म मनुष्य को आसक्त नहीं करता है, न वह उसमें संलिप्त होता है. कर्तापन कर्म को दूषित करता है. मैं और मेरा से अहंकार झलकता है. कार्य की सफलता का श्रेय स्वय ...

Read more

भारत का अध्यात्म एवं दर्शन ही भारत का परिचय है – डॉ. मनमोहन वैद्य जी

जबलपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि भारत की मूल धारा अध्यात्म है, इसलिए हिन्दू समाज में सबके प्रति स्वीकार्यता है. ये प्राचीन भारतीय दर्शन का सार है. धर्म एक विशुद्ध भारतीय शब्द है, जिसका अर्थ पूजा पद्धति नहीं है. धर्म का अर्थ है - जीवन के संतुलन को बनाए रखना. और ये संतुलन जब बिगड़ता है, तब धर्म की हानि होती है. सह सरकार्यवाह जी संघ के स्वयंसेवकों के राष्ट ...

Read more

राष्ट्र सेविका समिति का प्रशिक्षण वर्ग

जबलपुर (विसंकें). शिक्षित और संस्कारी नारी परिवार की धुरी होती है. उसके द्वारा प्राप्त संस्कार दोनों कुलों की शोभा बढ़ाते हैं. मातृशक्ति विश्व की आधी आबादी है. उसमें संस्कार से ही विश्व का कल्याण सम्भव है. राष्ट्र सेविका समिति के प्रवेश शिक्षा वर्ग में सुश्री शशि सिंह जी ने संबोधित किया. स्थानीय नालंदा पब्लिक स्कूल में महाकौषल प्रांत के राष्ट्र सेविका समिति का प्रशिक्षण वर्ग प्रारम्भ हुआ. जिसमें पूरे प्रान्त ...

Read more

न्याय मम् धर्मः – न्याय ही मेरा धर्म है – न्या. एच.पी. सिंह जी

न्याय केन्द्र वह पथ है, जिससे समाज सेवा का पथ प्रशस्त होता है – एम.पी. बेन्द्रे जी जबलपुर (विसंकें). अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद द्वारा 30 मार्च को कचनार क्लब, विजय नगर जबलपुर में  दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ. मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति एच.पी. सिंह जी रहे. इस अवसर पर न्यायमूर्ति एच.पी. सिंह जी ने कहा कि न्याय मम् धर्मः - अर्थात् न्याय ही मेरा धर्म है. सबके प्रति न्याय हो, यही हमारा धर्म है. न्याय ...

Read more
Scroll to top