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रानी दुर्गावती शोध संस्थान में ‘निष्पक्ष चुनाव, स्वस्थ प्रजातंत्र’ विषय पर परिचर्चा

परिचर्चा में रूस, जर्मनी, जापान, ब्राजील के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया भारत विश्व का सबसे बड़ा स्वस्थ प्रजातंत्र है और इसकी मजबूती का कारण मताधिकार है. यहां के हर नागरिक को यह अधिकार है कि वह अपनी पसंद का जनप्रतिनिधि चयनित कर सके. जाति, धर्म, भाषा तथा वेशभूषा की समस्त विभिन्नताओं के बावजूद भारत निष्पक्ष और सफल लोकतंत्र के लिए जाना जाता है. पूरी दुनिया यहां की लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव कराने की व्यवस्था ...

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पहला वार जो करता है वही आखिरी वार करता है – मेजर जनरल जी.डी. बक्शी

जबलपुर. मेजर जनरल (सेनि.) जीडी बक्शी ने कहा कि अपने जीवन को समर्पित कर पल-प्रति-पल मौत के साए में बैठे रहने वाले, अपने घर-परिवार से दूर नितांत निर्जन में कर्तव्य निर्वहन करने वाले जांबाज़ सैनिकों के लिए बस चंद शब्द, चंद वाक्य, चंद फूल, दो-चार मालाएँ, दो-चार दीप और फिर उनके बलिदान को विस्मृत कर देना, उन सैनिकों को विस्मृत कर देना है. आज समूचे परिदृश्य को राजनैतिक चश्मे से देखने की आदत के चलते, वातावरण में तुष ...

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मां और मातृभाषा ही सशक्त राष्ट्र के निर्माण का आधार – आनंदी बेन पटेल

जबलपुर (विसंकें). मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि वर्तमान समय में समर्थ समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका प्रमुख है. "माँ और मातृभाषा ही सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार होती है. उस पर अपने घर और समाज दोनों को संस्कारित करने की जिम्मेदारी होती है". अंग्रेजी शिक्षा के कारण हम अपने संस्कार और संस्कृति से दूर होते चले गए और महिला व पुरूष में भेद का वातावरण पश्चिमी संस्कृति के कारण हमारे बीच आ ...

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संस्कार देने वाली भाषा है संस्कृत – डॉ. पवन तिवारी

जबलपुर (विसंकें). संस्कृत के प्रचार-प्रसार, संस्कृत लेखन प्रतियोगिताओं एवं छात्रों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की दो दिवसीय संस्कृत संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी का उद्घाटन विद्याभारती महाकौशल प्रान्त के संगठन मंत्री डॉ. पवन तिवारी जी द्वारा किया गया. संगोष्ठी में डॉ. तिवारी ने कहा संस्कृत पढ़ने वाला ही समाज को नई दिशा और दशा प्रदान करता है. संस्कृत ...

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समुत्कर्ष का प्रतिभा सम्मान समारोह

जबलपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्रीरंग राजे ने कहा कि सफलता किसी की मोहताज नहीं होती. परिश्रम से आगे बढ़ने वालों को कोई भी बाधा रोक नहीं सकती. ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं, जहां एक व्यक्ति की सकारात्मक सोच एवं दृढ़ इच्छाशक्ति ने दुनिया को झुका दिया. अगर हौंसले बुलंद हों और दिल में मंजिल पाने की चाहत हो तो कोई भी परिस्थिति इंसान को रोक नहीं सकती. आज मुझे बहुत खुशी है कि समुत्कर्ष के छा ...

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समस्त जनों के प्रेरणास्रोत भारत रत्न नानाजी देशमुख

जबलपुर (विसंकें). नानाजी देशमुख ने अपना जीवन वंचितों और शोषितों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया. एकात्म मानववाद को अपने जीवन में उतारकर जीवन भर सामाजिक समरसता के लिए “भारत रत्न श्री नानाजी” ने आजीवन कार्य किया. प्रखर राष्ट्रवादी, महान समाजसेवी नानाजी न सिर्फ असंख्य कार्यकर्ताओं, बल्कि आमजन के भी प्रेरणास्रोत हैं. नानाजी ने अपनी वसीयत की पंक्तियों में मनोभाव व्यक्त करते हुए कहा था - “मेरी यह मानव देह मानवमा ...

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शिक्षा जीविका का ही नहीं, जीवन का आधार होनी चाहिए

विद्याभारती राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री यतीन्द्र शर्मा जी ने स्वर्ण जयंती समारोह की पूर्व संध्या पर आयोजित पूर्व छात्र महासम्मेलन में कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा आध्यात्मिकता पर आधारित थी. शिक्षा, मुक्ति एवं आत्मबोध के साधन के रूप में थी. ये व्यक्ति के लिये नहीं, बल्कि धर्म के लिये थी. भारत की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक परम्परा विश्व इतिहास में प्राचीनतम है. भारतवासियों के लिये शिक्षा का अभिप्राय यह रहा है कि श ...

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लोक भाषाएं जिंदा रहेंगी तो साहित्य जिंदा रहेगा – प्रो. योगेश चंद्र दूबे

कटनी (विसंकें). कटनी पुस्तक मेले के अंतिम दिन मुख्य अतिथि प्रो. योगेश चंद्र दूबे जी ने कहा कि लोक भाषाएं जिंदा रहेंगी तो साहित्य जिंदा रहेगा. लोक भाषाओं के विकास के लिए उनका अलग से संकलन होना आवश्यक है. पुस्तक मेला आकर्षण का केंद्र है, आज साहित्य सृजन बहुत हो रहा है. काव्य गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन की संख्या घट रही है. इंटरनेट के युग में भले ही कंप्यूटर पर लोगों की निर्भरता बढ़ गई है, किंतु इस तरह के आयोजन निर ...

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जब सकारात्मक ऊर्जा शब्दों में ढलती है, तब साहित्य का सृजन होता है – श्याम सुंदर दूबे

कटनी (विसंकें). साहित्यकार श्याम सुंदर दूबे जी ने कहा कि साहित्यकार आत्मा का इंजीनियर होता है. सकारात्मक ऊर्जा जब शब्दों में ढलती है, तब साहित्य का सृजन होता है. साहित्य का लक्ष्य है मन की शांति व समाज का निर्माण. समाज में रहने वाले लोग यदि अपनी आंचलिक बोलियों को सुनकर भाव विभोर नहीं होते हैं तो उनका हृदय उस बंजर धरती की तरह है, जिस पर ना तो कुछ हो सकता है, ना कुछ पनप सकता है. वे कटनी पुस्तक मेले में साहित् ...

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अपने कार्य से समाज को परिचित करवाना ही प्रचार विभाग का कार्य – डॉ. अवनीश भटनागर

जबलपुर (विसंकें). विद्या भारती के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. अवनीश भटनागर जी ने कहा कि हमें किसी भी कार्य को करने के लिए उसमें उतरना पड़ता है. हम अच्छा कार्य करें, उसकी सुगन्ध समाज में फैले. श्रीगुरुजी के अनुसार मेरा स्वयंसेवक ही मेरा प्रचार है. जो लोग समाज के बारे में सोचने की धारा रखते हैं, जिनकी समाज सुनता है, उसे मानता है, उन्हें ओपिनियन मेकर कहते हैं. इनकी 3 श्रेणी हैं - 1. अकादमिक .... जिसमें कुलपति से लेकर ...

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