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महात्मा गांधी की हत्या और कुछ अनुत्तरित प्रश्न

हर साल, 30 जनवरी को हिन्दू राष्ट्रवाद पर टिप्पणी करना कांग्रेस और कम्युनिस्ट ब्रिगेड की आदत का हिस्सा है. 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी. उनकी मृत्यु के कुछ महीने पहले भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त की थी और स्वतंत्रता से कुछ घंटे पहले भारत का विभाजन हुआ था. विभाजन मुस्लिम लीग के आक्रामक रुख, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कमजोर नेतृत्व, भारत को दयनीय स्थिति में छोड़ जाने की ब्रिटिश ...

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स्वामी स्वरूपानन्द जी का कांग्रेसी स्वरूप

द्वारकापीठ के शंकराचार्य श्रद्धेय स्वामी स्वरूपानन्द जी सरस्वती ने अपने कुछ संतों की एक परमधर्म संसद में घोषणा कर दी है कि वे 21 फरवरी को अयोध्या में जाकर 04 ईंटों की पूजा करके श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण प्रारम्भ कर देंगे. स्वामी जी का यह ऐलान जहां एक ओर हिन्दू समाज की मंदिर निर्माण के प्रति जिज्ञासा को दर्शाता है, वहीं यह गत 490 वर्षों से मंदिर के पुर्ननिर्माण के लिए संघर्षरत हिन्दू समाज में फूट ...

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धर्म संसद में पारित प्रस्ताव – हिन्दू समाज के विघटन के षड्यंत्र

धर्मसंसद दिनांक 31 जनवरी, 2019 सेक्टर-14, ओल्ड जी. टी. रोड, कुम्भ मेला क्षेत्र, प्रयागराज प्रस्ताव (2) - हिन्दू समाज के विघटन के षड्यंत्र हिन्दू समाज की एकता को तोड़ने के लिए इस्लामिक, चर्च तथा साम्यवादी संगठन हमेशा से कुचक्र रचते रहे हैं. अब कुछ राजनैतिक दल व अन्य संगठन भी अपने निहित स्वार्थों के कारण लोक लुभावने नारे देकर व हिंसा का सहारा लेकर इन षड्यंत्रों को तेजी से बढ़ा रहे हैं.  इनकी कार्य पद्धति देखकर ...

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धर्म संसद में पारित प्रस्ताव – शबरीमला में परम्परा और आस्था की रक्षा करने का संघर्ष – अयोध्या आन्दोलन के समकक्ष

धर्मसंसद दिनांक 31 जनवरी, 2019 सेक्टर-14, ओल्ड जी. टी. रोड, कुम्भ मेला क्षेत्र, प्रयागराज   प्रस्ताव (1) - शबरीमला में परम्परा और आस्था की रक्षा करने का संघर्ष - अयोध्या आन्दोलन के समकक्ष शबरीमला सहित भारत में स्थित प्रत्येक मन्दिर का अपना इतिहास एवं विशिष्ट परम्परा  रही है, जो भारत के पूज्य ऋषि-मुनियों द्वारा स्थापित है. सदियों से हिन्दू समाज इन परम्पराओं के आधार पर श्रद्धा से पूजन करता आया है. गत कुछ ...

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शबरीमला आंदोलन समाज का संघर्ष है – डॉ. मोहन भागवत

धर्म संसद अधिवेशन, प्रयागराज प्रयागराज. धर्म संसद जगद्गुरू स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज की अध्यक्षता में प्रारंभ हुई, जिसमें देश भर के पूज्य संतों की उपस्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि शबरीमाला समाज का संघर्ष है. वामपंथी सरकार न्यायपालिका के आदेशों के परे जा रही है. वे छलपूर्वक कुछ ग़ैर श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर ले गए हैं, जो अय्यप्पा भक्त हैं उनका दमन क ...

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विश्व की सभी चुनौतियों से मुकाबला करने का सूत्र भारतीय संस्कृति में है

सर्वसमावेशी सांस्कृतिक कुम्भ प्रयागराज. विभिन्न मत, पंथ, सम्प्रदाय के विभिन्न प्रान्तों से पधारे भारत के हजारों पूज्य संत गंगा पण्डाल में एकत्रित हुए. जहाँ ‘एक सद्रविप्रा बहुधा वदन्ति’ ध्येय वाक्य पर पूज्य सन्तों ने अपने विचार रखे. कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन, गणेश वन्दना, हरिभजन से हुआ. सभी मत, पंथ, सम्प्रदाय के पूज्य सन्तों के वचनों की एक सुन्दर प्रदर्शनी लगाई गई थी, जिसका उद्घाटन सुबह 10 बजे हुआ ...

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वैचारिक कुम्भ हम सब को एकात्मता की ओर ले जाने वाला सिद्ध होगा – भय्याजी जोशी

प्रयागराज. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने कहा कि भारत की विशिष्ट पहचान एवं हिन्दू समाज की जीवन दृष्टि, विभिन्न विचार मत, पंथ, सम्प्रदाय एवं साधना पद्धतियों का ध्येय व सत्य एक है, उसे प्राप्त करने के मार्ग अनेक हैं. सभी सम्प्रदायों का उद्देश्य नर को नारायण बनाना है. संयमित उपभोग, मर्यादाओं का पालन ही संस्कार है. भारतीय संस्कृति सिद्धान्त नहीं आचरण है और विश्व कल्याण की कामना इसी संस्कृ ...

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हमारी सनातन परंपरा में शामिल है महिलाओं का सम्मान

कुंभ और अर्द्धकुंभ में अखाड़ों की पेशवाई और शाही स्नान का एक अलग ही आकर्षण रहा है. वर्तमान में शैव, वैष्णव और उदासीन पंथ के संन्यासियों के मान्यता प्राप्त 13 अखाड़े हैं - इनमें से सात शैव अखाड़े हैं - जूना, निरंजनी, महानिर्वाणी, अटल, आह्वान, आनंद और अग्नि. तीन वैष्णव हैं - दिगंबर, निर्वाणी और निर्मोही तथा तीन उदासीन अखाड़े - बड़ा उदासीन, नया उदासीन और निर्मल. इन अखाड़ों की प्रतिनिधि समन्वयक संस्था अखिल भारतीय अखा ...

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समस्त जनों के प्रेरणास्रोत भारत रत्न नानाजी देशमुख

जबलपुर (विसंकें). नानाजी देशमुख ने अपना जीवन वंचितों और शोषितों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया. एकात्म मानववाद को अपने जीवन में उतारकर जीवन भर सामाजिक समरसता के लिए “भारत रत्न श्री नानाजी” ने आजीवन कार्य किया. प्रखर राष्ट्रवादी, महान समाजसेवी नानाजी न सिर्फ असंख्य कार्यकर्ताओं, बल्कि आमजन के भी प्रेरणास्रोत हैं. नानाजी ने अपनी वसीयत की पंक्तियों में मनोभाव व्यक्त करते हुए कहा था - “मेरी यह मानव देह मानवमा ...

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सादगी और शुचिता श्री जॉर्ज फर्नांडीस की पहचान थी – भय्याजी जोशी

देश की राजनीति में दशकों तक अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले श्री जॉर्ज फर्नांडीस हमारे बीच नहीं रहे. सामाजिक जीवन में सादगी और शुचिता उनकी पहचान थी. आपातकाल का प्रखर विरोध हो, पोखरण में परमाणु विस्फोट हो अथवा करगिल युद्ध, साहसिक निर्णय लेना और कुशलता के साथ उन्हें निर्णायक परिणति तक पहुंचाना उनके चरित्र की विशेषता थी. लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता के साथ साथ सभी विचारधाराओं के लोगों के साथ उनका समन्वय और ...

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