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‘भगवा आतंक’ की कहानी के पीछे थी राजनीतिक साजिश

डॉ. प्रवीण तिवारी दो दशक से प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ टेलीविजन पत्रकार के तौर पर जुड़े हुए हैं. इस दौरान उन्होंने मीडिया, अध्यात्म और प्रेरणापरक 7 पुस्तकें लिखी हैं. 'सत्य की खोज' उनकी पहली पुस्तक थी, जिसे पाठकों ने बहुत पसंद किया था. इसी कड़ी में हाल ही में उनकी पुस्तक 'आतंक से समझौता' भी प्रकाशित हुई, जिसे उन्होंने दो वर्ष के गहन शोध के आधार पर लिखा है. यह पुस्तक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ...

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‘‘यह समय हिन्दू विरोधियों, देशद्रोहियों को परास्त करने का है’’

स्वामी असीमानंद को 9 वर्ष की लंबी न्यायिक लड़ाई के बाद पंचकुला की विशेष एनआईए अदालत ने हाल ही में समझौता धमाके के आरोप से बरी कर दिया. अब वह सभी आरोपों से मुक्त हो चुके हैं. लेकिन 2010 के बाद उनका जो कठिन समय जेल में गुजरा, अमानवीय यातनाओं को सहना पड़ा, अब उस साजिश की परतें खुल रही हैं. साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य ने आरोप मुक्त होने के बाद स्वामी असीमानंद से विशेष बातचीत की और जाना कि कैसे संप्रग सरकार के दौर ...

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राष्ट्र को सर्वोपरि मानने वाला व राष्ट्रहित में सोचने वाला समूह सत्ता में आए – भय्याजी जोशी

“देश को सर्वोपरि मानने वाला, देश के हित में सोचने वाला राजनैतिक समूह केंद्र सरकार की बागडोर संभाले यही संघ की इच्छा है. संकुचित बातों से ऊपर उठकर देश हित में सोचने वाला राजनैतिक समूह सत्ता में आना चाहिए.” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने हिन्दी विवेक पत्रिका के साथ साक्षात्कार में कहा, “चुनाव में भाषा और आचरण का संयम होना चाहिए. संवाद के जरिए चर्चा हो और चुनाव खत्म होते ही कटुता भी खत्म ...

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माओवादी ताकतों का मकसद है संविधान और लोकतंत्र को जड़ से उखाड़ना

भीमा कोरेगांव की घटना के विरोध में 03 जनवरी 2018 को मुंबई में भी प्रदर्शन किया गया था, रैलियां निकाली गईं थीं, बंद का आह्वान किया गया था. इस घटना को एक वर्ष पूर्ण हो गया है. अब केंद्र तथा राज्य में एक मजबूत सरकार होने और माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे कड़े अभियान से उनकी कमर टूट चुकी है और वे बौखला गए हैं. भीमा-कोरेगांव दंगों की माओवादियों की साजिश, उनकी नई रणनीति, दलित-पिछड़े वर्ग व आदिवासियों को बरगलाने के ...

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यह देश राम-कृष्ण का है, इसलिए मुसलमानों को तहे दिल से इनका सम्मान करना ही होगा

वरिष्ठ अधिवक्ता, सामाजिक-पांथिक एवं वैधानिक मुद्दों को लेकर टी.वी. चैनलों पर होने वाली बहसों में इस्लाम की कुरीतियों पर तीखे प्रहार करने के कारण वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सैयद रिजवान अहमद कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं. उन्हें ट्विटर पर सच कहने के लिए न केवल कट्टरपंथी धमकाते हैं, बल्कि उनके मौसेरे भाई और फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी तक भला-बुरा कहते हैं. पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के ‘हिन्दू प ...

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वामपंथी इतिहासकारों ने मुसलमानों को गुमराह किया, नहीं तो मुद्दा सुलझ जाता – के.के. मुहम्मद

प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर) श्री के.के. मुहम्मद जी 1978 में डॉ. बी.बी. लाल की अगुआई वाली उस टीम के सदस्य थे, जिसने अयोध्या में उत्खनन किया था. श्री मुहम्मद साक्ष्यों के आधार पर पुरजोर तरीके से कहते आ रहे हैं कि अयोध्या में विवादित ढांचा हिन्दू मंदिरों के अवशेष पर खड़ा किया गया. उन्होंने अपनी किताब में भी इसका उल्लेख किया है. केरल के कालीकट में जन्मे ...

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‘भेद रहित समाज का निर्माण होने वाला है’ – डॉ. मोहन भागवत जी

और फिर कोई अन्याय करने वाला खड़ा न हो सके - इसका इंतजाम होना चाहिए फिर कोई अन्याय करने वाला खड़ा न होना सके - इसका इंतजाम होना चाहिए. यह सब इसलिए करना है ताकि संपूर्ण समाज एक हो सके. आपस में दुर्भावना बढ़ाने वाली भाषा नहीं होनी चाहिए. फिर व्यवस्था में इस दृष्टि से जो-जो प्रावधान किए जाते हैं, या करने के सुझाव आते हैं, वे प्रावधान लागू हों. इस प्रक्रिया में सबको समाहित करते हुए, किसी की राह देखे बिना, नित्य व्य ...

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नया गणवेश संघ को ज्यादा स्वीकार्य बनाएगा

सप्ताह का इंटरव्यू - मनमोहन वैद्य इससे (गणवेश में बदलाव से) संघ के साथ काम करने में समाज के लोगों को अधिक सहजता रहेगी. युवाओं का संघ से जुड़ना तो लगातार बढ़ ही रहा है. उसमें और अधिक सहजता आएगी. नुकसान का तो कोई कारण ही नहीं है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं की पहचान रही है उनकी खाकी हाफ पैंट. पर इस विजयादशमी से संघ का गणवेश बदल जाएगा. अब वे फुल पैंट में दिखेंगे. इस बदलाव की पृष्ठभूमि और संघ ...

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माकपा छोड़ संघ में आना है हत्याओं की वजह

केरल लंबे समय से मार्क्सवादी आतंकवाद की छाया में रहा है. जिस तरह रूस में स्टालिन के कार्यकाल में हत्या की राजनीति का जोर था, उसका प्रतिरूप कन्नूर में दिखा, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इस बारे में कभी बहस नहीं सुनी गई. दिल्ली में हम असहिष्णुता पर बहस सुन चुके हैं, लेकिन पांच लंबे, खूनी दशकों के दौरान कन्नूर में जैसी हिंसा दिखी है, उससे असहिष्णुता का असली रूप चरितार्थ हुआ. हालांकि, इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक सं ...

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शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण होना चाहिए – अतुल कोठारी जी

स्वतंत्रता पश्चात हमें शिक्षा क्षेत्र में किस दिशा में बढ़ना था और हम किस तरफ चल पड़े, हमारी वर्तमान शिक्षा नीति जीवन के मूल उद्देश्यों को पूरा कर पा रही है अथवा नहीं, मातृभाषा केवल भावनात्मक विषय नहीं है, बल्कि मातृभाषा में शिक्षा पर जोर देने के पीछे वैज्ञानिक कारण विद्यमान हैं, भाषा न केवल ज्ञानार्जन का माध्यम है, अपितु संस्कार व संस्कृति के प्रसार का माध्यम भी है,  विदेशी भाषा में शिक्षा के प्रभाव, सहित ...

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