You Are Here: Home » साक्षात्कार

‘भेद रहित समाज का निर्माण होने वाला है’ – डॉ. मोहन भागवत जी

और फिर कोई अन्याय करने वाला खड़ा न हो सके - इसका इंतजाम होना चाहिए फिर कोई अन्याय करने वाला खड़ा न होना सके - इसका इंतजाम होना चाहिए. यह सब इसलिए करना है ताकि संपूर्ण समाज एक हो सके. आपस में दुर्भावना बढ़ाने वाली भाषा नहीं होनी चाहिए. फिर व्यवस्था में इस दृष्टि से जो-जो प्रावधान किए जाते हैं, या करने के सुझाव आते हैं, वे प्रावधान लागू हों. इस प्रक्रिया में सबको समाहित करते हुए, किसी की राह देखे बिना, नित्य व्य ...

Read more

नया गणवेश संघ को ज्यादा स्वीकार्य बनाएगा

सप्ताह का इंटरव्यू - मनमोहन वैद्य इससे (गणवेश में बदलाव से) संघ के साथ काम करने में समाज के लोगों को अधिक सहजता रहेगी. युवाओं का संघ से जुड़ना तो लगातार बढ़ ही रहा है. उसमें और अधिक सहजता आएगी. नुकसान का तो कोई कारण ही नहीं है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं की पहचान रही है उनकी खाकी हाफ पैंट. पर इस विजयादशमी से संघ का गणवेश बदल जाएगा. अब वे फुल पैंट में दिखेंगे. इस बदलाव की पृष्ठभूमि और संघ ...

Read more

माकपा छोड़ संघ में आना है हत्याओं की वजह

केरल लंबे समय से मार्क्सवादी आतंकवाद की छाया में रहा है. जिस तरह रूस में स्टालिन के कार्यकाल में हत्या की राजनीति का जोर था, उसका प्रतिरूप कन्नूर में दिखा, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इस बारे में कभी बहस नहीं सुनी गई. दिल्ली में हम असहिष्णुता पर बहस सुन चुके हैं, लेकिन पांच लंबे, खूनी दशकों के दौरान कन्नूर में जैसी हिंसा दिखी है, उससे असहिष्णुता का असली रूप चरितार्थ हुआ. हालांकि, इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक सं ...

Read more

शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण होना चाहिए – अतुल कोठारी जी

स्वतंत्रता पश्चात हमें शिक्षा क्षेत्र में किस दिशा में बढ़ना था और हम किस तरफ चल पड़े, हमारी वर्तमान शिक्षा नीति जीवन के मूल उद्देश्यों को पूरा कर पा रही है अथवा नहीं, मातृभाषा केवल भावनात्मक विषय नहीं है, बल्कि मातृभाषा में शिक्षा पर जोर देने के पीछे वैज्ञानिक कारण विद्यमान हैं, भाषा न केवल ज्ञानार्जन का माध्यम है, अपितु संस्कार व संस्कृति के प्रसार का माध्यम भी है,  विदेशी भाषा में शिक्षा के प्रभाव, सहित ...

Read more

विविधता है, भेद नहीं, इसी आधार पर हम सबको साथ लाते हैं’

शाखा यानी टहनी, इस टहनी को संभालने वाला संघवृक्ष कैसा है ? इसके कार्य की प्रकृति और आयाम क्या हैं, यह जानने के क्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य जी से बात की, प्रस्तुत हैं वार्ता के प्रमुख अंश........ प्रश्न - संघ के नाम पर कुछ लोग नाक - भौं  चढ़ाते हैं, कुछ इसे रचनात्मक शक्ति कहते हैं, आपने संघ के प्रचारक के रूप में जीवन दिया है, आपने संघ को कैसा पाया ? उत्तर - रा.स ...

Read more

दुनिया चाहती है कि आपदा के बाद नेपाल फिर खड़ा हो – सह सरकार्यवाह जी

नेपाल में आए भूकम्प के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले राहत कार्यों का मार्गदर्शन करने नेपाल गए थे. उन्होंने पीडि़तों के दु:ख-दर्द को साझा किया, उनकी आवश्यकताओं की जानकारी ली और हिन्दू स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों में हाथ बंटाया. नेपाल से दिल्ली लौटने पर साप्ताहिक पाञ्चजन्य ने उनसे बात की, प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश- कहा जा रहा है कि भूकंप ...

Read more

निस्वार्थ और पूजा भाव से की गई सेवा ही सच्ची सेवा है – सुहास राव हिरेमठ

सच्चे अर्थों में सेवा का भाव क्या है, सेवा का उद्देश्य क्या है, संघ और सेवा भारती किन क्षेत्रों में सेवा कार्य कर रहे हैं, सेवा को लेकर भारतीय चिंतन क्या कहता है, सेवा की आड़ में मतांतरण और स्वार्थ सिद्धि के प्रयास कितने उचित हैं, ईसाई मिशनरी की सेवा के पीछे का सच क्या है....सहित अन्य विषयों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख सुहास हिरेमठ जी से विश्व संवाद केंद्र भारत के प्रतिनिधि ने विस् ...

Read more

घर वापसी अपनी जड़ों से जुड़ने की स्वाभाविक आकांक्षा है : डॉ. मनमोहन वैद्य

23 दिसंबर को संसद का शीतकालीन सत्र विपक्षी दलों के हंगामे के चलते हुये गतिरोध की भेंट चढ़ गया. देश के कई हिस्सों में घर वापसी की कुछ घटनाओं के चलते विपक्ष ने यह सब किया. यद्यपि सरकार ने पहले ही दिन यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि सदन के सदस्य तैयार हों तो वह धर्मांतरण (कन्वर्जन) विरोधी कानून लाने को तैयार है. जबकि विपक्ष ने इस विषय पर बिना चर्चा किये लगातार अवरोध को बनाये रखा. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भार ...

Read more

हथकंडे न अपनाते तो पश्चिम एशिया में सिमटे रहते इस्लाम और ईसाइयत: तसलीमा

आगरा में हुई कन्वर्जन की घटना के बाद जिस तरह से एक राजनीतिक बवंडर बनाकर इसे प्रस्तुत किया गया वह असल में एक सामूहिक भय है. कहीं यह पूरा बवंडर समाज में बढ़ती कन्वर्जन के प्रति बढ़ती जागरूकता एवं गिरते मिशनरियों के भाव के कारण तो नहीं है? राष्ट्रीय विचारों के प्रसार के लिये समर्पित प्रसिद्ध साप्ताहिक पाञ्चजन्य ने अपने नवीनतम अंक में एक पड़ताल में इस सच को उजागर कर दिया है कि कैसे मिशनरियां देश में अपने पैर पस ...

Read more

बच्चों तक अपने जीवन मूल्यों को पहुँचाना भगवाकरण नहीं

शिक्षा बचाओ आंदोलन और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के जरिये पाठ्य पुस्तकों के तथ्यहीन बातों को हटवाने वाले श्री दीनानाथ बत्रा आज एक बार फिर चर्चा में हैं. आश्चर्य हो सकता है किन्तु 5 जनवरी, 1930 को राजनपुर, जिला-डेरागाजी खान (अब पाकिस्तान) में जन्मे दीनानाथ बत्रा ने अब तक सिर्फ चार फिल्में देखी हैं और वह भी विभाजन से पहले. वैसे, इन दिनों वे महाराणा प्रताप धारावाहिक देखते हैं. अध्ययन में उनका मन रमता है और श ...

Read more
Scroll to top