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पाकिस्तान – विभाजन के बाद नहीं बना कोई मंदिर, पुराने मंदिरों पर भू-माफिया का कब्जा

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नई दिल्ली. पाकिस्तान में अल्पसंख्यक दोयम दर्जे का जीवन व्यतीत कर रहे हैं. और कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं को जीवन दुभर कर दिया है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान बनने के पश्चात 74 साल में वहां एक भी मंदिर नहीं बना, और पुराने मंदिरों की हालत या तो खस्ता है या उन पर कट्टरपंथियों, भू-माफिया ने कब्जा कर लिया है.

मीडिया रिपोर्ट् के अनुसार हिन्दुओं और सिक्खों के भारत जाने के बाद उनके धर्मस्थलों के रखरखाव का जिम्मा संभालने वाले बोर्ड ईटीपीबी के अधिकारी तारीक वजीर ने बताया, कि आजादी के बाद देश में कोई मंदिर नहीं बना.

वहीं, 286 मंदिर मुकदमेबाजी के कारण बंद हो गए. हालत यह है कि दो हजार साल पुराने ऐतिहासिक मंदिर सहित ज्यादातर हिन्दू धर्मस्थलों पर भू-माफिया का कब्जा हो गया है. देश में सबसे ज्यादा 275 मंदिर पंजाब में हैं. इसके बाद सिंध जहां हिंदुओं की सबसे ज्यादा जनसंख्या है, वहां 53, खैबर पख्तूनख्वा में 25 और बलूचिस्तान में 12 मंदिर हैं. इनमें 14 की देखरेख ही ईटीपीबी करता है.

वहीं, 65 की जिम्मेदारी हिन्दू समुदाय के लोग संभाल रहे हैं. बीते साल दिसंबर में खैबर पख्तूनख्वा में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी के लोगों ने एक मंदिर में आग लगा दी थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक धर्मस्थलों की स्थिति जानने के लिए आयोग बनाया था.

गोरखनाथ मंदिर – 64 साल बाद खुला, विरासत है पर हिफाजत नहीं

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पेशावर के गोरघत्री क्षेत्र में स्थित नाथ संप्रदाय का गोरखनाथ मंदिर 19वीं सदी के मध्य में बना. बंटवारे के समय हुए दंगे के बाद मंदिर बंद कर दिया. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पेशावर हाईकोर्ट के आदेश पर मंदिर को 2011 में दोबारा खोला गया. मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले सरपंच काका राम ने बताया – 200 साल पुराने मंदिर के कई हिस्से अभी मूल स्वरूप में हैं.

पुरातत्व विभाग ने मंदिर को राष्ट्रीय विरासत घोषित कर दिया, लेकिन हिफाजत और रखरखाव के लिए कुछ नहीं किया. हम खुद मरम्मत करवाते हैं, ताकि ऐतिहासिक मंदिर को बचाया जा सके. अगर देखरेख नहीं हुई तो किसी भी दिन मंदिर गिर सकता है. मंदिर में पूजन के लिए कोहट से आए हिन्दू नेता राजेश चंद ने बताया, हमने मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया है. इसके बहाने हम पूरे पेशावर से अपने समुदाय के लोगों को बुलाते हैं ताकि हम आपस में जुड़े रह सकें.

पंज तीरथ – हजारों साल पुराने मंदिर की जमीन पर बना दिया पार्क

दैनिक भास्कर ने रिपोर्ट में दूसरे मंदिर की स्थिति को भी बयां किया है. पेशावर के सबसे प्रचीन मंदिर पंज तीरथ को 2019 में राष्ट्रीय विरासत घोषित किया गया और पूजा के लिए खोलने का ऐलान हुआ, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. खैबर पख्तूनख्वा म्यूजियम के डायरेक्टर डॉ. अब्दुल समद कहते हैं पंज तीरथ का जिक्र हजारों साल पुराने ‘महाभारत’ सहित अन्य पवित्र ग्रंथों में है. मंदिर परिसर में पांडवों के नाम पर पांच कुंड थे. हालांकि अब खंडहर बचा है.

इसके बड़े हिस्से में कब्जा कर चाचा यूनुस पार्क बना दिया गया. पेशावर हिन्दू पंचायत की राजपूत वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अनिल कुमार ने बताया, पार्क मंदिर की जमीन पर बना है. जीटी रोड पर होने से जमीन की कीमत करोड़ों में है.

इसलिए भू-माफियाओं की नजरें बाकी जमीन पर है. पेशावर के धार्मिक नेता और पंडित हारून दयाल बताते हैं कि राजधानी में चार-पांच मंदिर ऐसे हैं, जहां हिन्दू समुदाय के लोग नियमित पूजा करने जाते हैं. 11 मंदिर मुकदमेबाजी के चलते बंद हैं. वहां पूजा करने की भी अनुमति नहीं है.

खंडहर हो गया दुर्लभ मंदिर

पेशावर स्थित आसामाई मंदिर दशकों से बंद पड़ा है. बंटवारे के वक्त आसामाई कॉम्प्लेक्स में तीन छोटे मंदिर और गुरुद्वारा था. यहां भी कब्जा कर प्लाजा बना लिया गया. हारुन दयाल कहते हैं कि यहां एक मंदिर कुछ गज में अवशेष में सिमट गया है. बाकी मंदिरों की जगह नए निर्माण हो गए हैं. यहीं बगल में मस्जिद महबात खान है. बंटवारे के पहले मस्जिद के साथ तीन मंदिर भी बने थे. कहते हैं कि दुनिया में आसमाई के दो ही मंदिर है, एक काबुल में और दूसरा पेशावर में.

इनपुट – दैनिक भास्कर

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