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लेकिन, कांग्रेस ने पाकिस्तान और शेख अब्दुल्ला की धमकियों के कारण विधेयक पास नहीं होने दिया

भाग - 2 1964 में तमाम दल आर्टिकल 370 को हटाने के लिए एकजुट थे भारतीय जनसंघ के सांसद यू.एम. त्रिवेदी 13 मई, 1964 को किसी प्रस्ताव पर लोकसभा में बोल रहे थे. हालाँकि यह प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर पर नहीं था, फिर भी चर्चा में उन्होंने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का मुद्दा उठा दिया. त्रिवेदी ने जोर देते हुए कहा, “अनुच्छेद 370 को समाप्त करने में क्या अड़चन आ रही है?” यहाँ से उस दौर का सूत्रपात हुआ, जब अनुच्छेद 370 को ह ...

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साल 1964 में अनुच्छेद 370 हटाने को देश के दर्जनों सांसदों ने लोकसभा में एकमत से उठायी थी आवाज़

भाग - 1 भारतीय राजनीति में साल 1964 को दो महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए याद किया जा सकता है. पहला, इसी एक साल में देश ने तीन प्रधानमंत्री देखे. जवाहरलाल नेहरू के निधन (27 मई) के बाद गुलजारी लाल नंदा (कार्यकारी) और फिर लाल बहादुर शास्त्री ने देश का नेतृत्व संभाला. दूसरा, लोकसभा में अनुच्छेद 370 को संविधान से समाप्त करने के लिए एकसाथ कई प्रस्ताव आने शुरू हुए. इससे पहले अनुच्छेद 370 का प्रमुखता से जिक्र 07 अगस्त, 1 ...

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भारत की सम्प्रभुता पर हमलावर अब्दुल्ला-मुफ़्ती के विरुद्ध हो कार्यवाही – विहिप

नई दिल्ली. विश्व हिन्दू परिषद ने तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों, नेशनल कॉन्फ्रेंस तथा पीडीपी के प्रमुख नेताओं के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत कर इनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की. इन नेताओं द्वारा बार-बार दिए जा रहे भारत विरोधी बयानों व धमकियों के साथ कश्मीर घाटी के बहुसंख्यक मुस्लिम समाज तथा अल्पसंख्यक गैर मुस्लिमों के बीच वैमनस्य पैदा करने के विरुद्ध शिकायत लेकर विश्व हिन्दू परिषद का उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल ...

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आर्टिकल 35A – सुप्रीम कोर्ट में याचिका, पीड़ित बाल्मीकि समाज ने विधानसभा चुनाव में वोटिंग अधिकार मांगा

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में जम्मू कश्मीर से जुड़े संविधान के आर्टिकल 35A को हटाने की मांग को लेकर पहले से केस लंबित है. जिसकी सुनवाई की तारीख अभी तक तय नहीं हो पाई है. लेकिन इस बीच जम्मू में बसे बाल्मीकि समाज ने एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है. जिसमें आर्टिकल 35A को हटाने की मांग की गयी है. जम्मू के गांधीनगर एरिया में बाल्मीकि कॉलोनी निवासी अजीत कुमार, कौशल्या, नीलम, इंद्रजीत सिंह, कुलविन्दर और स ...

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चंद्रकांत शर्मा पंचतत्व में विलीन, हमले की जांच के लिए पुलिस ने बनाई एसआईटी

नई दिल्ली. मंगलवार को आतंकियों के हमले में बलिदान हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता चंद्रकांत शर्मा का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया. किश्तवाड़ में चंद्रकांत की अंतिम यात्रा में उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया था. कड़ी सुरक्षा में काफी संख्या में स्थानीय लोगों ने अंतिम संस्कार में भाग लिया. इनमें रविन्दर रैना और कविन्द्र गुप्ता भी शामिल थे. डोगरा स्वाभिमान संगठन के नेता लाल सिंह भी ...

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वह रात, जब कश्मीर घाटी में इस्लामिक आतंकवादियों ने 24 हिन्दुओं को बेहरहमी से मार डाला

रामकिशन धर वर्ष 2018 में एक अंग्रेजी पत्रिका को बताते हैं कि, “बगल वाली मस्जिद से पंडितों और भारत के खिलाफ ऊंची आवाज में नारे लगने शुरू होते ही हम समझ जाते थे कि हमारा यहाँ से जाने का समय आ गया है.” ऐसा 1989 से लगातार होता रहा और आज जम्मू-कश्मीर हिन्दुओं से लगभग खाली हो चुका है. साल 1994 तक 2 लाख और 2003 तक विस्थापितों की संख्या 3 लाख से भी ऊपर चली गयी. इस साल तक वहां मात्र 7823 हिन्दू बचे थे. नाड़ीमर्ग नरस ...

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जम्मू-कश्मीर में गिलानी, यासीन मलिक सहित 18 अलगाववादियों, 155 नेताओं की सुरक्षा वापिस ली

नई दिल्ली. जम्मू कश्मीर में अलगाववादी नेताओं से सरकारी सुरक्षा व सुविधाएं वापिस लेने का क्रम जारी है. पुलवामा आतंकी हमले के पश्चात सरकार ने प्रमुख अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा व सुविधाएं वापिस ली थी. 17 फरवरी को राज्य सरकार ने अलगाववादी नेताओं मीरवाइज उमर फारूक, अब्दुल गनी भट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी और शबीर अहमद शाह की सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया था. अब डेढ़ सौ से अधिक अन्य नेताओं से सुरक्षा व सुविधाएं ...

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जम्मू कश्मीर अधिमिलन के 7 नायक

1947 में ब्रिटेन समेत अंतरराष्ट्रीय ताकतें जम्मू कश्मीर राज्य को भारत में शामिल न होने देने की चालें चल रही थीं. क्योंकि एशिया में जम्मू कश्मीर का बहुत बड़ा भौगोलिक और सामरिक महत्व है. ब्रिटिश शासन ने तमाम कूटनीतिक चालें चली. जब पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर हमला किया और राज्य में सांप्रदायिक भावनाएं भड़काईं. तब भी ब्रिटेन मूकदर्शक बना रहा. लेकिन तमाम साजिशों के बावजूद जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया. जम् ...

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कब, कैसे हुआ जम्मू कश्मीर अधिमिलन – तारीख की नज़र में

आजादी के समय जम्मू कश्मीर राज्य की संवैधानिक स्थिति क्या थी और कैसे जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना. इसको समझने के लिए कुछ समय के पड़ावों को समझकर आप आसानी से जम्मू कश्मीर के अधिमिलन को समझ सकते हैं. पढ़िए औऱ जानिए – 1. 1946, भारत में अंग्रेज़ी शासन, प्रशासनिक रूप से दो भागो में बंटा था. ब्रिटिश भारत - इस क्षेत्र पर अंग्रेज़ों का प्रत्यक्ष शासन था, जिसका शासन सीधे लंदन में बैठे राज्य के सचिव की कलम से चलत ...

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कश्मीर समस्या के समाधान के लिये वहां के समाज को गहराई से समझना आवश्यक – प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री जी

भोपाल (विसंकें). हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति एवं हिमालय क्षेत्र के विशेषज्ञ प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री जी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की समस्या को समझने के लिए वहाँ के समाज को गहराई से समझना जरूरी है. हमें जम्मू-कश्मीर के इतिहास और आतंरिक व्यवस्था को समझना चाहिए. एक बहुत छोटा समुदाय कश्मीर के मूल लोगों पर अधिपत्य जमाना चाहता है, जिसके कारण वहाँ समस्या पैदा हुई है. वे माखनलाल चतुर्वेदी राष् ...

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