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05 मई / जन्मदिवस – सेवा के धाम विष्णु कुमार जी

नई दिल्ली. सेवा पथ के साधक विष्णु जी का जन्म कर्नाटक में बंगलौर के पास अक्कीरामपुर नगर में 5 मई, 1933 को हुआ था. छह भाई और एक बहन वाले परिवार में वे सबसे छोटे थे. घर में सेवा व अध्यात्म का वातावरण होने के कारण छह में से दो भाई संघ के प्रचारक बने, जबकि दो रामकृष्ण मिशन के संन्यासी. विष्णु जी का मन बचपन से ही निर्धनों के प्रति बहुत संवेदनशील था. छात्रावास में पढ़ते समय घर से मिले धन और वस्त्रों को वे निर्धनों ...

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14 मई / पुण्यतिथि – उत्कृष्ट लेखक भैया जी सहस्रबुद्धे

नई दिल्ली. प्रभावी वक्ता, उत्कृष्ट लेखक, कुशल संगठक, व्यवहार में विनम्रता व मिठास के धनी प्रभाकर गजानन सहस्रबुद्धे का जन्म खण्डवा (मध्य प्रदेश) में 18 सितम्बर, 1917 को हुआ था. उनके पिताजी वहां अधिवक्ता थे. वैसे यह परिवार मूलतः ग्राम टिटवी (जलगाँव, मध्य प्रदेश) का निवासी था. भैया जी जब नौ वर्ष के ही थे, तब उनकी माताजी का देहान्त हो गया. इस कारण तीनों भाई-बहिनों का पालन बदल-बदलकर किसी सम्बन्धी के यहां होता रह ...

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13 मई / जन्मदिवस – ‘दिल्लीश्वर’ वसंतराव ओक

नई दिल्ली. संघ की प्रारम्भिक प्रचारकों में एक श्री वसंतराव कृष्णराव ओक का जन्म 13 मई, 1914 को नाचणगांव (वर्धा, महाराष्ट्र) में हुआ था. जब वे पढ़ने के लिये अपने बड़े भाई मनोहरराव के साथ नागपुर आये, तो बाबासाहब आप्टे द्वारा संचालित टाइपिंग केन्द्र के माध्यम से दोनों का सम्पर्क संघ से हुआ. डा. हेडगेवार के सुझाव पर वसंतराव 1936 में कक्षा 12 उत्तीर्ण कर शाखा खोलने के लिए दिल्ली आ गये. उनके रहने की व्यवस्था 'हिन् ...

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6 जुलाई / जन्म-दिवस; नारी जागरण की अग्रदूत: लक्ष्मीबाई केलकर

बंगाल विभाजन के विरुद्ध हो रहे आन्दोलन के दिनों में छह जुलाई, 1905 को नागपुर में कमल नामक बालिका का जन्म हुआ. तब किसे पता था कि भविष्य में यह बालिका नारी जागरण के एक महान संगठन का निर्माण करेगी. कमल के घर में देशभक्ति का वातावरण था. उसकी माँ जब लोकमान्य तिलक का अखबार ‘केसरी’ पढ़ती थीं, तो कमल भी गौर से उसे सुनती थी. केसरी के तेजस्वी विचारों से प्रभावित होकर उसने निश्चय किया कि वह दहेज रहित विवाह करेगी. इस ज ...

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27 जून / पुण्य-तिथि; कर्तव्य कठोर : दादाराव परमार्थ

बात एक अगस्त, 1920 की है. लोकमान्य तिलक के देहान्त के कारण पूरा देश शोक में डूबा था. संघ संस्थापक डा. हेडगेवार किसी कार्य से घर से निकले. उन्होंने देखा कुछ लड़के सड़क पर गेंद खेल रहे हैं. डा. जी क्रोध में उबल पड़े - तिलक जी जैसे महान् नेता का देहान्त हो गया और तुम्हें खेल सूझ रहा है. सब बच्चे सहम गये. इन्हीं में एक थे c, जो आगे चलकर दादाराव परमार्थ के नाम से प्रसिद्ध हुये. दादाराव का जन्म नागपुर के इतवारी म ...

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