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संघ की ‘शाखा’ संस्कार देने वाला विद्यापीठ – सुनील कुलकर्णी

गोरखपुर (विसंकें). महाराणा प्रताप इण्टर कॉलेज परिसर गोलघर, गोरखपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरखपुर महानगर के स्वयंसेवक समागम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय शारीरिक शिक्षण प्रमुख सुनील कुलकर्णी जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 93 वर्षों से अनवरत चला आ रहा है. इस कालखंड में संगठन ने अनेकों उतार-चढ़ाव देखे. डॉ. हेडगेवार जी ने जब संघ की स्थापना की थी, तब समाज का एक बड़ा वर्ग अ ...

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जो शाश्वत है, वही सनातन धर्म है और वही हिन्दुत्व है – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि समय बदलता है, परिस्थितियां बदलती हैं. लेकिन मनुष्य के जीवन में बहुत कुछ ऐसा शाश्वत होता है, जिसको कभी बदल नहीं सकते और उस पर ही पैर गढ़ाकर, अड़ाकर बदलते समय के झोकों का सामना करते हुए मनुष्यता आगे बढ़ती है. वो जो शाश्वत है, वही सनातन धर्म है और वही हिन्दुत्व है. उन्होंने कहा कि हजार वर्षों के परकीय आक्रमणों के बाद भी हिन्दुस्थान है, ...

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‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में स्वयंसेवकों की अतुलनीय शहादतें

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 14 संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार के देहावसान के बाद संघ के सभी अधिकारी एवं कार्यकर्ता अपने नये सरसंघचालक श्री गुरुजी के नेतृत्व में डॉक्टर जी द्वारा निर्धारित कार्य-विस्तार के लक्ष्य को पूरा करने हेतु परिश्रमपूर्वक जुट गए. श्रीगुरुजी एवं सहयोगी संघ अधिकारियों के सामूहिक प्रयास के फलस्वरूप अनेक युवा स्वयंसेवक अपने घर-परिवार छोड़कर देश के प्रायः सभी प्रांतों में प्रच ...

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हजारों स्वयंसेवकों के साथ डॉक्टर हेडगेवार पुनः सश्रम कारावास में

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 11 पूर्व में हुए असहयोग आंदोलन की विफलता से शिक्षा लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अब एक और देशव्यापी आंदोलन करने की योजना बनाई. महात्मा गांधी जी को इस नए, ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ का नेतृत्व सौंप दिया गया. अतः गांधी जी ने 6 अप्रैल 1920 को सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत अपनी ऐतिहासिक दांडी यात्रा के माध्यम से कर दी. गांधी जी ने सरकार द्वारा बनाए गए नमक कानून को तोड़ ...

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संघ-शाखाओं में मनाया गया स्वतंत्रता दिवस (26 जनवरी 1930)

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 10 संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार तथा उनके अंतरंग सहयोगी अप्पाजी जोशी 1928 तक मध्य प्रांत कांग्रेस की प्रांतीय समिति के वरिष्ठ सदस्य के नाते सक्रिय रहे. कांग्रेस की इन बैठकों एवं कार्यक्रमों के आयोजन में डॉक्टर जी का पूरा साथ रहता था. सभी महत्वपूर्ण प्रस्ताव इन्हीं के द्वारा तैयार किए जाते थे. इसी समय अंग्रेज सरकार ने भारतीय फौज की कुछ टुकड़ियों को चीन में भेजने का ...

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परम वैभवशाली राष्ट्र के लिए संघ की स्थापना

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 9 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अनुशीलन समिति समेत कई क्रांतिकारी दलों, विभिन्न संस्थाओं, लगभग 30 छोटी बड़ी परिषदों/मंडलों, समाचार पत्रों, आंदोलनों, सत्याग्रहों और व्यायामशालाओं की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने तथा एक वर्ष की सश्रम जेल यात्रा करने के पश्चात डॉक्टर हेडगेवार ने एक ऐतिहासिक शक्ति सम्पन्न और आत्मनिर्भर हिन्दू संगठन बनाने के निश्चय को व्यवहार में पर ...

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विदेशी/विधर्मी परतंत्रता के कारणों पर गहरा मंथन

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 8 सन् 1922 में डॉक्टर हेडगेवार को मध्य प्रांत की कांग्रेस इकाई ने प्रांतीय सह मंत्री का पदभार सौंप दिया. डॉक्टर जी ने कांग्रेस के भीतर ही एक संगठित स्वयंसेवक दल बनाने का प्रयास किया था, परन्तु वह ‘फर्माबरदार’ वॉलिंटियर दल खड़ा करने के पक्ष में कतई नहीं थे. उनके स्वयंसेवक की कल्पना केवल मात्र दरियां बिछाने और कुर्सियां उठाने तक सीमित नहीं थी. वे चाहते थे कि ‘देशभक् ...

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कठोर कारावास में वीरव्रती जीवन की तपस्वी दिनचर्या

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 7 हिन्दू धर्म के सिद्धांतों और अधिकांश रीतिरिवाजों में डॉ. हेडगेवार पूर्ण निष्ठा रखते हुए जेल में अपनी दिनचर्या का निर्वाह करते थे. वे यज्ञोपवीत पहनते थे. जेल के नियमों के अनुसार जब उन्हें इसे उतारने के लिए कहा गया तो उन्होंने ऐसा करने से साफ इन्कार कर दिया ‘मैं इसे नहीं उतार सकता, यह मेरा धार्मिक हक है, इसमें दखलअंदाजी करने का आपका कोई अधिकार नहीं बनता’. उस समय ...

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गांधी जी के असहयोग आंदोलन में अग्रणी भूमिका

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 6 प्रखर राष्ट्रभक्ति की सुदृढ़ मानसिकता के साथ डॉक्टर हेडगेवार ने ‘कांग्रेसी’ कहलाना भी स्वीकार कर लिया. नागपुर अधिवेशन में अपना रुतबा जमाने के बाद वे महात्मा गांधी द्वारा मार्गदर्शित असहयोग आंदोलन को सफल बनाने के लिए जी जान से जुट गए. गांधी जी के आह्वान पर सारा देश अहसयोग आंदोलन में हर प्रकार से शिरकत करने को तैयार हो गया. पूर्व में अनुशीलन समिति द्वारा संचालित ...

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प्रणब दा के साथ संघ विरोधियों को भी धन्यवाद

अपने ही लोगों के तीव्र विरोध के बाद भी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में नागपुर आए, इसके लिए उनका विशेष अभिनंदन एवं धन्यवाद. वह डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार के कक्ष में भी गए और वहां अपना भाव एकदम स्पष्ट शब्दों में लिखा. वह अत्यंत सहज-सरल थे. परिचय सत्र में जब संघचालक परिचय कराने वाले ही थे कि प्रणबदा ने कहा सब अपना-अपना परिचय देंगे और स्वयं खड़े होकर कहा, ‘मैं प्रणब मुखर ...

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