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सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी पत्रिका पहुंचने पर सकारात्मक वातावरण बना

मातृवंदना के राष्ट्र जागरण विशेषांक का विमोचन शिमला. नववर्ष के अवसर पर मातृवंदना के राष्ट्र जागरण विशेषांक व नववर्ष कैलेण्डर का विमोचन किया गया. कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख अनिल कुमार जी मुख्य वक्ता, पाञ्चजन्य के पूर्व संपादक एवं नेशनल बुक ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन बलदेव भाई शर्मा कार्यक्रम केअध्यक्ष, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला के निदेशक प्रो. मकरंद परांजपे मुख्य अतिथि ...

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हिन्दुस्थान भारतवासियों का है और पूर्ण स्वराज्य हमारा ध्येय है – डॉ. हेडगेवार

मैं अच्छी तरह जानता हूं कि मातृभूमि के भक्तों को दमन की चक्की में पीसने वाली सरकार पर मेरे कथन का कोई भी परिणाम नहीं होने वाला है. फिर भी मैं इस बात को दोहराना चाहता हूं कि हिन्दुस्थान भारतवासियों के लिए ही है और पूर्ण स्वराज्य हमारा ध्येय है. आज तक ब्रिटिश प्रधानों एवं शासकों द्वारा उद्घोषित ‘आत्म निर्णय’ का नारा यदि कोरा ढोंग मात्र है तो सरकार खुशी से मेरे भाषण को राजद्रोहात्मक समझे, पर ईश्वर के न्याय पर ...

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25 दिसंबर / जन्मदिवस – भारत के अमूल्य रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी

राष्ट्रीय क्षितिज पर स्वच्छ छवि के साथ अजातशत्रु कहे जाने वाले कवि एवं पत्रकार, सरस्वती पुत्र अटल बिहारी वाजपेयी, एक व्यक्ति का नाम नहीं वरन् राष्ट्रीय विचारधारा का नाम था. राष्ट्रहित एवं राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रबल पक्षधर अटल जी राजनेताओं में नैतिकता के प्रतीक थे. अटल जी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ब्रह्ममुहर्त में ग्वालियर में हुआ था. मान्यता अनुसार पुत्र होने की खुशी में जहाँ घर में फूल की थाली बजाई जा रह ...

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हमारी सोच व्यक्तिगत न होकर समाज हित में होनी चाहिए – हितेश शंकर जी

हिमालय हुंकार के विशेषांक का लोकार्पण देहरादून (विसंकें). व्यक्ति के जीवन को समाज से अलग नहीं देखा जा सकता. एकात्म मानववाद का विचार हमें यही सिखाता है. संस्कार, शरीर, मन, बुद्धि व आत्मा को केन्द्र में रखकर ही हमें समाज हित में कार्य करने चाहिएं, तभी देश के प्रति हमारा उत्तरदायित्व पूर्ण हो सकता है. विश्व संवाद केन्द्र द्वारा प्रकाशित ‘हिमालय हुंकार’ पाक्षिक पत्रिका के ‘मेरा भारत और मैं’ विशेषांक के लोकार्पण ...

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पत्रकारिता एक मिशन है, पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर इसके जीवंत उदाहरण – डॉ. कृष्णगोपाल जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने कहा कि पत्रकारिता एक मिशन है. पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर इसका जीवंत उदाहरण हैं. उन्होंने इंगित किया कि कैसे पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर ने समकालीन भारत में इस मिशन को लेकर सच्चा संघर्ष किया है. इस बात की ओर ध्यान आकृष्ट करवाया कि कैसे सरकारी और राजकीय दबावों से लड़ते हुए भी इन दोनों पत्रिकाओं ने राष्ट्र निर्माण के लिए विमर्श को जागृत रखा. वे पाञ ...

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एक है हिन्दुत्व – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी का साक्षात्कार

रा.स्व.संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा यानी संघ से जुड़ा वर्ष का सबसे बड़ा आयोजन. समाज में संघ कार्य की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है. विविध क्षेत्रों में संघ के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की उत्कंठा है. 2018 के अवसर पर रेशिम बाग, नागपुर में सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी ने देश के वर्तमान राजनीतिक - सामाजिक परिदृश्य तथा संघ के बढ़ते व्याप के संदर्भ में पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर तथा आर्गनाइजर के संपाद ...

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पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइज़र ने भारत की पहचान को स्वर देने का काम किया – डॉ. मनमोहन वैद्य जी

नई दिल्ली (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य जी तथा सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी जी ने साप्ताहिक पत्र पाञ्चजन्य एवं ऑर्गनाइजर के विशेषांकों का विमोचन किया. पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर (भारत प्रकाशन) के 70 वर्ष पूर्ण होने पर नेहरु मेमोरियल सभागार, तीनमूर्ति भवन में दोनों राष्ट्रवादी साप्ताहिकों की गौरवशाली यात्रा पर प्रकाश डालने के निमित्त विमोचन समारोह आयोजित कि ...

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जनसहभागिता व राष्ट्रीयता एक दूसरे के पूरक हैं – हितेश शंकर जी

नोएडा. प्रेरणा शोध संस्थान द्वारा "राष्ट्रीयता में जनसहभागिता" विषय पर प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में केशव संवाद पत्रिका के "राष्ट्रीयता" अंक का विमोचन भी किया गया. कार्यक्रम का आयोजन शम्भू दयाल पी.जी. कॉलेज, गाजियाबाद के सभागार में किया गया. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर जी ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के गम्भीर विषयों पर शोध एवं अन्वेषण के उपरान्त इस प्रकार ...

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हथकंडे न अपनाते तो पश्चिम एशिया में सिमटे रहते इस्लाम और ईसाइयत: तसलीमा

आगरा में हुई कन्वर्जन की घटना के बाद जिस तरह से एक राजनीतिक बवंडर बनाकर इसे प्रस्तुत किया गया वह असल में एक सामूहिक भय है. कहीं यह पूरा बवंडर समाज में बढ़ती कन्वर्जन के प्रति बढ़ती जागरूकता एवं गिरते मिशनरियों के भाव के कारण तो नहीं है? राष्ट्रीय विचारों के प्रसार के लिये समर्पित प्रसिद्ध साप्ताहिक पाञ्चजन्य ने अपने नवीनतम अंक में एक पड़ताल में इस सच को उजागर कर दिया है कि कैसे मिशनरियां देश में अपने पैर पस ...

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यूरोपीय इतिहास के विरोध में विश्व संगठित हो

इक्कीसवीं सदी तक विज्ञान का विकास सूचना तकनीक, जैव विज्ञान और नैनोविज्ञान तक आ चुका है, लेकिन आज भी विश्व का इतिहास 'वंशवाद' नामक दकियानूसी सिद्धांत पर ही निर्भर है. विश्व का विभाजन आज भी 'वंश सिद्घांत’ पर ही आधारित है. यह सिद्धांत कहता है कि आज के विश्व का विस्तार नोहा की कहानी के आधार पर तुर्किस्तान के अरावत पर्वत से हुआ है़, यह कहानी जेनेसिस में है. उसी को आधार मानकर आज विश्व के 80 प्रतिशत देशों की पाठशा ...

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