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27 जून / पुण्यतिथि – कर्तव्य व अनुशासनप्रिय दादाराव परमार्थ

नई दिल्ली. बात एक अगस्त, 1920 की है. लोकमान्य तिलक के देहान्त के कारण पूरा देश शोक में डूबा था. संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी किसी कार्य से घर से निकले. उन्होंने देखा कुछ लड़के सड़क पर गेंद खेल रहे हैं. डॉ. जी क्रोध में उबल पड़े - तिलक जी जैसे महान् नेता का देहान्त हो गया और तुम्हें खेल सूझ रहा है. सब बच्चे सहम गये. इन्हीं में एक थे गोविन्द सीताराम परमार्थ, जो आगे चलकर दादाराव परमार्थ के नाम से प्रसिद्ध हुए. ...

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वीर माता विद्यावती कौर जी

इतिहास साक्षी है कि देश, धर्म और समाज की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वालों के मन पर संस्कार उनकी माताओं ने ही डाले हैं. भारत के स्वाधीनता संग्राम में हंसते हुए फांसी चढ़ने वाले वीरों में भगत सिंह का नाम प्रमुख है. उस वीर की माता थीं,  वीर माता विद्यावती कौर. भगत सिंह पर उज्जैन के विख्यात लेखक श्रीकृष्ण ‘सरल’ ने एक महाकाव्य लिखा. नौ मार्च, 1965 को इसके विमोचन के लिए माता जी जब उज्जैन आईं, तो उनके स्वागत के ...

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विश्व में बढ़ा है भारत का मान – सम्मान – इंद्रेश कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा कि यह लोकसभा चुनाव एक मेरिटोरियस तथा कई अनुत्तीर्ण लोगों के बीच का चुनाव है. वे जयपुर जन जागृति मंच की ओर से अजमेरी गेट के निकट स्थित राजस्थान चेंबर ऑफ कॉमर्स के भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. "मतदान-राष्ट्र निर्माण" कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि वर्तमान में एक नया भारत बन रहा है. यह भारत पह ...

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बलिदानियों के परिवारों को सम्मानित किया

गाजियाबाद. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गाजियाबाद द्वारा 23 मार्च को नवयुग मार्केट दुर्गा भाभी चैक, शहीद पथ पर बलिदानियों को नमन कार्यक्रम किया गया. कार्यक्रम में पुलवामा में बलिदानी प्रदीप प्रजापति, भारतीय वायुसेना के बलिदानी स्क्वाड्रन लीडर समीर अबरोल के परिवारजनों का सम्मानित किया गया. इनके परिजनों के आगमन पर उपस्थित विशाल जनसमूह ने खड़े होकर तालियां बजाकर स्वागत किया. मुख्य वक्ता पावन चिंतन धारा के संस्थापक ...

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05 मार्च / जन्मतिथि – क्रान्तिकारी सुशीला दीदी, क्रांतिकारियों का कंधे से कंधा मिलाकर दिया साथ

नई दिल्ली. सुशीला दीदी का जन्म पांच मार्च, 1905 को ग्राम दत्तोचूहड़ (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था. जालंधर कन्या महाविद्यालय में पढ़ते हुए वे कुमारी लज्जावती और शन्नोदेवी के सम्पर्क में आईं. इन दोनों ने सुशीला के मन में देशभक्ति की आग भर दी. शिक्षा पूर्ण कर वे कोलकाता में नौकरी करने लगीं, पर क्रांतिकार्य में उनका सक्रिय योगदान जीवन भर बना रहा. काकोरी कांड के क्रांतिवीरों पर चल रहे मुकदमे के दौरान क्रांतिकार ...

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15 मई / जन्मदिवस – क्रांतिवीर सुखदेव

नई दिल्ली. स्वतन्त्रता संग्राम के समय उत्तर भारत में क्रान्तिकारियों की दो त्रिमूर्तियाँ बहुत प्रसिद्ध हुईं. पहली चन्द्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल तथा अशफाक उल्ला खाँ की थी, जबकि दूसरी भगत सिंह, सुखदेव तथा राजगुरु की थी. इनमें से सुखदेव का जन्म ग्राम नौघरा (जिला लायलपुर, पंजाब, वर्तमान पाकिस्तान) में 15 मई, 1907 को हुआ था. इनके पिता प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता रामलाल थापर तथा माता रल्ली देई थीं. सुखदेव के ...

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भगत सिंह की वीर माता विद्यावती कौर

1 जून/पुण्य-तिथि इतिहास इस बात का साक्षी है कि देश, धर्म और समाज की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वालों के मन पर ऐसे संस्कार उनकी माताओं ने ही डाले हैं. भारत के स्वाधीनता संग्राम में हंसते हुए फांसी चढ़ने वाले वीरों में भगत सिंह का नाम प्रमुख है. उस वीर की माता थीं श्रीमती विद्यावती कौर. विद्यावती जी का पूरा जीवन अनेक विडम्बनाओं और झंझावातों के बीच बीता. सरदार किशन सिंह से विवाह के बाद जब वे ससुराल आयीं, तो ...

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एफआईआर में नाम ही नहीं था शहीद भगत सिंह का

लाहौर. लाहौर पुलिस को 1928 में यहां एक ब्रिटिश पुलिस अधिकारी की हत्या के मामले में दर्ज एफआईआर में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के नाम का जिक्र नहीं मिला है. भगत सिंह को फांसी दिये जाने के 83 साल बाद मामले में महान स्वतंत्रता सेनानी की बेगुनाही को साबित करने के लिए यह बड़ा प्रोत्साहन है. भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष याचिकाकर्ता इम्तियाज राशिद कुरैशी ने याचिका दायर की थी, जिसमें भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु क ...

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