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संघ शिक्षा वर्ग – तृतीय वर्ष के समापन समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोधन के अंश…

चुनाव के बाद, इस वर्ग का प्रारंभ हुआ और समापन हो रहा है। संयोग की बात है, पांच वर्ष पूर्व 2014 में भी ऐसा ही हुआ था और उस समय जो तिथिमान बना वर्ष का, उसमें संयोग ऐसा हुआ कि हिन्दू साम्राज्य दिवस की तिथि शिविर समापन के पहले दिन थी, और इस बार भी हिन्दू साम्राज्य दिवस की तिथि वर्ग समापन से एक दिन पहले है। चुनाव में स्पर्द्धा होती ही है। प्रजातंत्र है, राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ने ही पड़ते हैं। स्पर्द्धा होने क ...

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स्वयंसेवक के अनुशासित आचरण से अन्य समाज भी प्रेरणा लेता है – डॉ. मोहन भागवत

इंदौर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी मध्य क्षेत्र के प्रवास पर हैं. 20 फरवरी को सरसंघचालक जी ने इंदौर महानगर की सभी शाखाओं से आए गटनायकों व प्रवासी कार्यकर्ताओं की बैठक में भाग लिया. कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गटनायक का कार्य हम सभी निभा रहे हैं, यह हमारे तंत्र का एक मुख्य कार्य है. गटनायक स्वयंसेवकों के एक समूह का नायक है. वह स्वयंसेवकों के समूह का स ...

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संघ समता युक्त-शोषण मुक्त समाज एवं अहंकार व स्वार्थ मुक्त व्यवस्था बनाने में लगा है – डॉ. मोहन भागवत

देहरादून (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी जन्मजात देशभक्त थे. उनको लगा कि हमारे समाज का परिवर्तन या देश को स्वतन्त्रता सिर्फ सरकारों या नारों के माध्यम से नहीं मिलेगी तथा स्वतन्त्रता का लाभ तभी मिलेगा, जब हमारा समाज एकजुट होगा. इस उद्देश्य को लेकर उन्होंने सन् 1925 में संघ की स्थापना की और शाखा के माध्यम से व्यक्ति निर्माण व समाज सेवा क ...

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हमारा राष्ट्रध्वज स्फूर्ति एवं प्रेरणा का प्रतीक है – डॉ. मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज नारायना ग्रुप आफ इन्स्टीट्यूशन्स, पनकी कानपुर में ‘गणतन्त्र दिवस’ के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय ध्वज फहराया. कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालय के आचार्य एवं छात्रों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्रध्वज स्फूर्ति एवं प्रेरणा का प्रतीक है. इसके मध्य का चक्र धर्म चक्र है, धर्म मात्र पूजा पद्धति नहीं है पूजा धर्म का एक भाग हो सकता है. धर्म स ...

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तात्कालिक हित नहीं, शाश्वत हित में है राष्ट्रहित – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली. भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की स्मृति में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया. व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का व्यापक व्यक्तित्व होते हुए भी हर छोटा बड़ा कार्यकर्ता उनसे निःसंकोच अपनी बात कह पाता था. हमको यह देखना पड़ेगा कि विचारों के ...

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देश के नायकों को पूर्वज मानता हो व परम्पराओं में आस्था हो, वह हिन्दू है – आलोक कुमार जी

मेरठ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मेरठ महानगर द्वारा विजयादशमी के उपलक्ष्य में रविवार, 28 अक्तूबर को संघ संगम का आयोजन किया गया. संघ संगम में महानगर के 6 स्थानों से पूर्ण गणवेश में संचलन प्रारम्भ हुआ. 03 संचलन गोल मंदिर शास्त्रीनगर, सूरजकुण्ड पार्क, सरदार पटेल इण्टर कॉलेज से चलकर हापुड़ अड्डा पर मिलकर जिमखाना मैदान पहुंचे, वहीं तीन संचलन गांधी बाग, फुटबाल मैदान रजबन, वर्धमान अकादमी रेलवे रोड से चलकर बच ...

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खाली जगह को अच्छे कार्यों के प्रचार से भरना चाहिये – डॉ. मोहन भागवत जी

जालंधर. देशभर में संस्कारों की शिक्षा का उजियारा फैला रहे संस्थान विद्या भारती ने शिक्षा जगत में ऐतिहासिक पहल की है. बदलते समाय के साथ कदम से कदम मिलाते हुए विद्या भारती ने शिक्षा क्षेत्र में पहला न्यूज़ बुलेटिन शुरू किया है. विद्या भारती पंजाब के प्रचार विभाग की ओर से शुरू किए गए न्यूज़ बुलेटिन का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने किया. यह बुलेटिन विद्या भारती के उत्तर क्षेत ...

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जो शाश्वत है, वही सनातन धर्म है और वही हिन्दुत्व है – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि समय बदलता है, परिस्थितियां बदलती हैं. लेकिन मनुष्य के जीवन में बहुत कुछ ऐसा शाश्वत होता है, जिसको कभी बदल नहीं सकते और उस पर ही पैर गढ़ाकर, अड़ाकर बदलते समय के झोकों का सामना करते हुए मनुष्यता आगे बढ़ती है. वो जो शाश्वत है, वही सनातन धर्म है और वही हिन्दुत्व है. उन्होंने कहा कि हजार वर्षों के परकीय आक्रमणों के बाद भी हिन्दुस्थान है, ...

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अपनत्व की संवेदना से सेवा कार्य को सर्वव्यापी करें, यही सच्ची सेवा है – डॉ. मोहन भागवत जी

जयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि दिव्यांगों की सेवा का कार्य बहुत कठिन है. दिव्यांग हमारे मध्य आज से नहीं हैं,  समाज में सदैव से रहे हैं. बस संवेदनहीनता के कारण इस क्षेत्र में सेवा कार्य हेतु प्रयास कम हो गए थे. दिव्यांगों को करूणा की आवश्यकता नहीं है, उन्हें आवश्यकता है आत्मीयतापूर्ण अपनत्व एवं सहयोग की. हम अपनत्व की संवेदना से अपने सेवा कार्य को सर्वव्यापी ...

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भारतीय दर्शन के अनुरूप हो महिला विमर्श – डॉ. मोहन भागवत जी

जयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारतीय विचार परम्परा में पुरुष और महिला को  एक-दूसरे का पूरक माना गया है. महिला और पुरुष दोनों के अपनी-अपनी प्राकृतिक गुण संपदा के आधार पर साथ चलने से ही सृष्टि चलती है. उन्होंने कहा कि महिलाओं में कई भिन्न-भिन्न कार्यों को साथ-साथ कर पाने की नैसर्गिक क्षमता होती है. पुरुष अपनी आजीविका के माध्यम से परिवार को चलाने और उसे सुरक् ...

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