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अध्यात्म के बिना भौतिक ज्ञान भी मार्ग से भटक जाएगा – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत एक है और अब वो जाग रहा है. भारत उठेगा और अपना स्थान हासिल करेगा, ऐसी आशाएं पल्लवित हो रही हैं. ज्ञान निधि प्रकट करने का समय आ गया है. हमें अपने आप को पहचानना होगा. वेद हमारी पहचान तो हैं, लेकिन उसे एक बार फिर लोगों के लिए आधुनिक युग के हिसाब से समझाना होगा. परमाणु क्षेत्र में हुए खोज का श्रेय भी वैज्ञानिक वेदों को ही देते रहे ह ...

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सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के विजयादशमी उत्सव 2017 के अवसर पर दिया गया उद्बोधन……

इस वर्ष की विजयादशमी के पावन अवसर को संपन्न करने के लिये हम सब आज यहाँ पर एकत्रित हैं. यह वर्ष परमपूज्य पद्मभूषण कुषोक बकुला रिनपोछे (His eminence Kushok Bakula Rinpoche) की जन्मशती का वर्ष है, साथ ही स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध शिकागो अभिभाषण का 125वां वर्ष तथा उनकी शिष्या स्वनामधन्य भगिनी निवेदिता के जन्म का 150वाँ वर्ष है. पूज्य कुषोक बकुला रिनपोछे तथागत बुद्ध के 16 अर्हतों में से बकुल के अवतार थे, ऐसी ...

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अभावग्रस्तों की सेवा करना, उनकी सहायता करना हमारे जीवन मूल्यों में है – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली. एयरो सिटी नई दिल्ली, वरलक्ष्मी फाउंडेशन (जीएमआर ग्रुप) के सिल्वर जुबली समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का उद्बोधन....... वरलक्ष्मी फाउंडेशन और जीएमआर ग्रुप से संबन्धित सभी कर्मचारीगण, कार्यकर्तागण उपस्थित नागरिक सज्जन, माता और बहनों, मंत्री जी ने जो कहा, उससे मैं 100 प्रतिशत सहमत हूँ, कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी, ये तीन शब्द आने के बहुत पहले से जो कमाते हो, उसमें से कितना देते हो, उस पर ...

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स्वस्थ समाज व सफल राष्ट्र के लिए सामाजिक समरसता प्रथम आवश्यकता – डॉ. मोहन भागवत जी

जयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारे समाज में विद्यमान सभी प्रकार के भेदभाव को निर्मूल करते हुए समरसता के निर्माण में संलग्न हों, स्वस्थ समाज व सफल राष्ट्र के लिए सामाजिक समरसता प्रथम आवश्यकता है. सरसंघचालक जी शुक्रवार को भारती भवन में राजस्थान क्षेत्र के प्रचारकों की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे. बैठक में जिला, विभाग व प्रान्त स्तर के प्रचारक उपस्थित थे. इस ...

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अपनत्व की भावना से सेवा सर्वोपरि : सरसंघचालक

आगरा. ‘‘देश और समाज के लिये प्रेम, आत्मीयता और अपनेपन की भावना से सेवा कार्य किये जाने चाहिये, न कि किसी तरह का सम्मान पाने की भावना से. स्वाभाविक आत्मीयता से किया गया कठिन कार्य भी सरलता से हो जाता है, हमें हर पल अपने देश के हित तथा उसकी सुरक्षा को देखकर करना चाहिये. आज जिन्हें सम्मानित किया गया है, ये सभी इसी भावना से कार्य कर रहे हैं ”. उक्त उद्गार राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के परम पूज्य सरसंघचालक मोहन भागव ...

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