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सरकार व मुख्य न्यायाधीश से अपील, शीघ्र प्रारम्भ हो राम मंदिर का निर्माण

केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की हरिद्वार बैठक में संतों ने पारित किया प्रस्ताव हरिद्वार. विश्व हिन्दू परिषद् के केंद्रीय मार्गदर्शक मण्डल की बैठक के दूसरे व अंतिम दिन श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर के निर्माण का मामला प्रमुख रहा. आध्यात्मिक नगरी हरिद्वार पधारे पूज्य संतों का कहना था कि मंदिर को भव्यता देने का कार्य शीघ्रातिशीघ्र प्रारंभ हो. इस सम्बन्ध में आयोजित प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए पूज्य जगद् ...

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धर्म संसद में श्रीराम जन्मभूमि पर पारित प्रस्ताव

धर्मसंसद दिनांक 01 फरवरी, 2019 सेक्टर-14, ओल्ड जी. टी. रोड, कुम्भ मेला क्षेत्र, प्रयागराज प्रस्ताव - श्रीराम जन्मभूमि श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति का संघर्ष 1528 से ही हिन्दू समाज सन्तों के नेतृत्व में निरन्तर करता रहा है. इसी का परिणाम है कि आज वहां गुलामी का प्रतीक बाबरी ढांचा नहीं रहा. आज वहां श्रीरामलला का मन्दिर है, जिसमें निरन्तर पूजा-अर्चना हो रही है. अब भव्य मन्दिर का निर्माण करना शेष है. इसके लिए सन् ...

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केंद्र सरकार कानून बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे – दत्तात्रेय होसबले

मुंबई (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने कहा कि इलाहाबाद कोर्ट के निर्णय से स्पष्ट हो चुका है कि रामजन्मभूमि पर जहां विवादित ढांचा खड़ा किया गया था, उस जगह उत्खनन में राम मंदिर के पुरातात्त्विक अवशेष अर्थात् सबूत प्राप्त हुए हैं. इसके पश्‍चात् भी यह जमीन मंदिर निर्माण के लिये उपलब्ध नहीं हुई. भगवान विष्णु ने वामनावतार में केवल तीन चरणों में तीनों लोकों को नाप लिया था ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 6

मंदिर के खण्डहरों पर बाबरी ढांचा अयोध्या के प्रसिद्ध हिन्दू संत स्वामी श्यामानंद को अपना गुरु मानने वाले दोनों मुस्लिम फकीरों ख्वाजा अब्बास और जलालशाह ने बाबर को चेतावनी दी कि यदि रामजन्मभूमि पर बने मंदिर को नहीं तोड़ा गया तो हिन्दू पुनः संगठित और शक्तिशाली होकर बाबर और उसके सारे सैन्यबल का सफाया कर देंगे. ठीक उसी तरह जैसे राणा संग्राम सिंह के मात्र 30 हजार सैनिकों ने बाबर के 1 लाख सैनिकों को गाजर-मूली की तर ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 5

दो विधर्मी फकीरों की गद्दारी सम्पूर्ण भारत के भूगोल, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को बर्बाद करने के उद्देश्य से विदेशी हमलावरों ने जो हिंसक रणनीति अपनाई थी, उसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों को तोड़ना और अत्यंत अपमानजनक हथकंडे अपना कर भारत के राष्ट्रीय समाज का उत्पीड़न करना. इसी अमानवीय व्यवहार के अंतर्गत हजारों मंदिर टूटे, ज्ञान के भंडार विश्वविख्यात विद्या परिसर जले, अथाह धन सम्पदा लूट ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 4

एक भी यवन सैनिक जिंदा नहीं बचा 11वीं सदी के प्रारम्भ में कौशल प्रदेश पर महाराज लव के वंशज राजा सुहैल देव का राज था. उनकी राजधानी अयोध्या थी, इन्हीं दिनों महमूद गजनवी ने सोमनाथ का मंदिर और शिव की प्रतिमा को अपने हाथ से तोड़कर तथा हिन्दुओं का कत्लेआम करके भारत के राजाओं को चुनौती दे दी. परन्तु देश के दुर्भाग्य से भारत के छोटे-छोटे राज्यों ने महमूद का संगठित प्रतिकार नहीं किया. गजनवी भारत को अपमानित करके सुरक्ष ...

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अयोध्या की धर्म सभा में बोले संत हर सूरत में बनना चाहिए राम मंदिर

अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिये रविवार को विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने धर्मसभा का आयोजन किया. जिन लोगों को यह भ्रम हो गया था कि राम जन्म भूमि का मुद्दा ठंडा पड़ चुका है और अब नई पीढ़ी को राम जन्म भूमि के मुद्दे में कोई दिलचस्पी नहीं है उनका भ्रम टूट गया. बड़े भक्तमाल की बगिया की तरफ जाने वाले हर रास्ते पर राम भक्त ही नजर आ रहे थे. धर्मसभा में विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने कहा कि “व ...

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राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – 2

कुश निर्मित आद्य श्रीराम मंदिर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भारत की सांस्कृतिक मर्यादा के अनुरूप अनेक महत्वपूर्ण निर्णय अपने जीवन में ही ले लिये थे. मरते दम तक सत्ता से चिपके रहने के अनैतिक दुर्भाव को ठोकर मारकर राजा राम ने समस्त साम्राज्य को अपने भाईयों एवं पुत्रों में बांट दिया था. श्रीराम ने अयोध्या छोड़ने का निश्चय कर के महाप्रयाण की मानसिकता बना ली. आयु का प्रभाव शरीर पर पड़ते ही उन्होंने सरयु मैया की ग ...

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श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के उन्नायक श्री अशोक सिंहल जी की पुण्यतिथि पर नमन

बीसवीं इक्कीसवीं सदी का संधि काल हिन्दू समाज के नवजागरण के काल खण्ड के रूप में इतिहास के पन्नों में अंकित होगा. यह वह कालखंड है, जब शताब्दियों से पराधीनता की बेड़ियों में जकड़े जाने से उत्पन्न आत्मविस्मृति एवं आत्महीनता की भावना को तोड़कर हिन्दू समाज ने विश्वपटल पर हूंकार भरी थी. सोए हुए हिन्दू पौरुष को जगाने का आधार बना श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और इस आंदोलन के स्मरण के साथ ही इसके नायकों में जो नाम प्रमुखता ...

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मंदिर कोई पिकनिक स्पॉट नहीं, अपितु आस्था का केंद्र हैं – डॉ. कृष्णगोपाल जी

वृंदावन (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने कहा कि श्रीराम धर्म की धुरी हैं. जनता के मन में राम का आदर्श, उनका दर्शन और चरित्र गहराई से बैठ गया है. राम को लेकर देश प्रेरणा और दिशा पाता है. हमें राम का मंदिर केवल एक भवन के रूप में नहीं बनाना, बल्कि समाज में राम के चरित्र और आदर्शों के प्रतीक के रूप में स्थापित भी करना है. मुगलकाल में बाबा तुलसी ने रामनाम का गान किया और आज ...

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