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पत्र लेखन व नागरिक पत्रकारिता की विधा के प्रति आमजनों को प्रेरित करने की आवश्यकता – नरेन्द्र ठाकुर जी

राज्य स्तरीय पत्र लेखक एवं नागरिक पत्रकारिता सम्मान समारोह ग्वालियर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर जी ने कहा कि पत्र लेखन विधा अब विलुप्त होती जा रही है, इसका स्थान अब सोशल मीडिया ने ले लिया है. लेकिन सोशल मीडिया पर लोग नकारात्मक विचार जल्दी पकड़ते हैं और सकारात्मक एवं राष्ट्रवादी विचार का उतना प्रचार प्रसार नहीं हो पाता है, जितना होना चाहिए. इसलिए हमें ऐसी ...

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पंथ – संप्रदाय नहीं, भारत की पहचान हमारी पुरातन संस्कृति है – डॉ. मोहन भागवत जी

रायपुर में मकर संक्रांति उत्सव पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का संबोधन रायपुर, छत्तीसगढ़ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने सामाजिक समरसता का मूलमंत्र बताते हुए कहा कि सुख की चाह में हम जो बटोर रहे हैं, उसमें से जरूरतमंदों को कुछ बांटने की जरूरत है. भारत का चेहरा कोई पंथ या संप्रदाय नहीं हो सकता, बल्कि हमारी चिर पुरातन संस्कृति ही हमारी पहचान है. उपरोक्त विचारों को हम आत्म ...

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दुश्मन देश भारत का बाल भी बांका नहीं कर सकता – मेजर जनरल जी.डी. बख्शी जी

समरस गंगा महोत्सव के अवसर पर शहीद सैनिक परिवारों, पूर्व सैनिकों का सम्मान वीर सैनिकों के गांव की रज (मिट्टी) कलशों में लाई गई पलवल, हरियाणा (विसंकें). मेजर जनरल जी.डी. बख्शी जी ने कहा कि भारत ने युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे. अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है तो हमारी युवा पीढ़ी अबकी बार उसके चार टुकड़े करके आए. मेजर जर्नल जी.डी. बख्सी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस स्टेडियम में राष्ट्रीय स्वय ...

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सबको साथ लेकर भारत को पुनः विश्व गुरू बनाना, हमारा कर्तव्य – इंद्रेश कुमार जी

मुंबई (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार जी ने कहा कि हिन्दू समाज में भेदभाव के कारण अंग्रेज 150 साल तथा मुगल सैकड़ों वर्षों तक हिन्दुस्थान पर शासन कर सके. भेदभाव के कारण बिखरे हिन्दू समाज को एकता के सूत्र में बांधना, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यही उद्देश्य व लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि भले ही 130 करोड़ लोगों की पूजा पद्धति, रहन-सहन अलग-अलग है, परंपराएं और भा ...

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हमारे पास अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष को जोड़ने वाला धर्म है – डॉ. मोहन भागवत जी

प्रतिष्ठा कमाने में नहीं, बांटने में है – सरसंघचालक जी इंदौर (विसंकेंभा). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हम जीवन जीने की कला भूल गए हैं. इसी कारण हम विघटित होते जा रहे हैं. हमें अपनी संस्कृति की ओर आगे बढ़ना पड़ेगा. संस्कृति के मार्ग पर पीछे जाने की बात ही नहीं है. वेदों की ओर बढ़ने पर हम आगे ही जाएंगे. वेद को सामान्य लोग केवल पूजा-पाठ का ज्ञान मानते हैं. वेद तो जीवन जीने क ...

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अफ्रीका की किलिमंजारो चोटी पर पहुँचा राष्ट्रोदय का संदेश

मुरादाबाद (विसंकें). कुछ करने की ठान ली जाये तो कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं रह जाती. आवश्यकता बस मजबूत इच्छा शक्ति की है. यह कहना है सात महाद्वीपों के शिखरों में से एक अफ्रीका की किलिमंजारो चोटी को फतह कर लौटे विपिन चौधरी का. विपिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं और वर्तमान में मुरादाबाद महानगर में विद्यार्थी प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. विपिन जी ने शिखर पर चढ़ने की शुरुआत 13 दिसम्बर को तंजानि ...

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विश्व को सहकार और सहयोग के साथ चलने की प्रेरणा केवल भारत ही दे सकता है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

नई दिल्ली (इंविसंकें). युवा विमर्श तीन दिवसीय सम्मेलन का शुभारम्भ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने किया. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान के सभागृह में ‘आधुनिक सभ्यता की चुनौतियां’ विषय पर कहा कि विज्ञान की आंख सीमित है. जहां विज्ञान रुकता है, वहां से अध्यात्म शुरु होता है. आधुनिक सिविलाइजेशन में विज्ञान द्वारा अर्जित भौतिक प्रगति की स्पर्धा में अध्यात्म को जीवन से निकाला जा रहा ...

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अपनी बीमारी भूल समाज के रोगोपचार में लगे रहे महावीर जी – डॉ. कृष्णगोपाल जी

वरिष्ठ प्रचारक महावीर जी के श्रद्धांजलि समारोह में रुदनकण्ठों से यशगान हजारों गणमान्यों व सामाजिक संगठनों ने आज के दधीचि को याद किया मानसा, पंजाब (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि संसार ने अभी तक लोक कल्याण के लिए अस्थियों का दान करने वाले महर्षि दधीचि के बारे में केवल शास्त्रों में पढ़ा, परंतु हमने अपने वरिष्ठतम साथी महावीर जी के रूप में उस प्रात: स्मरणीय महान ...

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राष्ट्र के निर्माण में जनजातीय समाज का योगदान भी अहम – दत्तात्रेय होसबले जी

रांची. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने प्रज्ञा प्रवाह के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के निर्माण में जितना कथित सभ्य समाज का योगदान है, उतना ही जनजातीय समाज का भी. उन्होंने भारतीय संस्कृति, सभ्यता पर कहा कि जो नगर में रहे, वे नागरिक कहलाए, गांव में रहने वाले ग्रामीण और जंगल में रहने वाले जनजातीय. इन सबका योगदान राष्ट्र निर्माण में है. राष्ट्र और राष्ट्रीयता के मुद ...

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30 अक्तूबर / जन्मदिवस – बहुमुखी कल्पनाओं के धनी मोरोपन्त पिंगले जी

नई दिल्ली. संघ के वरिष्ठ प्रचारक मोरोपन्त पिंगले जी को देखकर सब खिल उठते थे. उनके कार्यक्रम हास्य-प्रसंगों से भरपूर होते थे. पर, इसके साथ ही वे एक गहन चिन्तक और कुशल योजनाकार भी थे. संघ नेतृत्व द्वारा सौंपे गए हर काम को उन्होंने नई कल्पनाओं के आधार पर सर्वश्रेष्ठ ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उनका पूरा नाम मोरेश्वर नीलकंठ पिंगले था. उनका जन्म 30 अक्तूबर, 1919 को हुआ था. वे बचपन में मेधावी होने के साथ ही बहुत चंचल ए ...

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