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आपातकाल के दौरान लोकतंत्र सेनानियों का अभिनन्दन किया

मेरठ (विसंकें). सन् 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा घोषित आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष में जेल जाने वाले एवं अनेक प्रकार की यातनाओं को सहने वाले कार्यकर्ताओं का ‘‘कार्यकर्ता मिलन’’ कार्यक्रम शंकर आश्रम शिवाजी मार्ग स्थित संघ कार्यालय में आयोजित किया गया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा जी ने आपातकाल के अनुभवों को बताते हुए कहा कि 25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा के साथ ही इंद ...

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अनुभवों को सांझा करना, कार्य के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण – डॉ. मनमोहन वैद्य जी

वृंदावन (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक संगठनों के माध्यम से सक्रिय हैं. अपनी उपलब्धि, अनुभव व निरीक्षण को सांझा करने की दृष्टि से हर साल ऐसी समन्वय बैठक का आयोजन होता है. श्रीधाम वृंदावन के केशव धाम में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक से पूर्व एक पत्रकार वार्ता मे ...

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लोकतंत्र में अधिकार के साथ-साथ स्वनियमन का दायित्व भी अंगीकार करना चाहिए – दत्तात्रेय होसबले जी

लखनऊ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने कहा कि बृजमंडल के केशव और आधुनिक केशव के कर्म में कोई अंतर नहीं है. धर्म की स्थापना के लिए, दुष्टों के विनाश के लिए संघे शक्ति कलियुगे अर्थात कलियुग में वह संघ शक्ति के रूप में आए. भारत भूमि से इस विचार को बढ़ाया जाता रहा है. राष्ट्र को संगठित करके उच्च शिखर पर आगे बढ़ाना है. राष्ट्र को मजबूत करके बरगद की तरह हम आगे बढ़ें. सभी समा ...

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केवल स्वतंत्रता दिवस पर भारत माता की जय बोल लेना पर्याप्त नहीं – सुरेश भय्या जी जोशी

इंदौर (विसंकें). स्वतंत्रता दिवस पर इंदौर में प्रातः 8:00 बजे, शुभ कारज गार्डन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी ने महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इस अवसर पर विद्यार्थियों एवं कार्यकर्ताओ को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में अनेक बलिदानों के पश्चात देश को स्वतंत्रता मिली. स्वतंत्रता के पश्चात देश अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ा ...

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आंकड़ों में गिनने की बात नहीं, अनुभूति का विषय है सेवा  – भय्याजी जोशी

निष्काम भाव से काम कर रहा है संघ – शिवराज सिंह चौहान भोपाल (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्याजी जोशी ने कहा कि समाज के अपने बंधुओं की पीड़ा और वेदना को समझने के लिए मन संवेदनशील होना चाहिए. सेवा कोई स्पर्धा का विषय नहीं है. किसने अधिक सेवा की यह विचार करना निम्न स्तर की भावना है. सेवा आंकड़ों में गिनने की बात नहीं, अपितु अनुभूति का विषय है. सेवा के विषय में हमें यह समझना होगा कि से ...

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राष्ट्र की एकता और अखंडता में संघ का योगदान अविस्मरणीय – रामदत्त चक्रधर जी

रांची (विसंकें). झारखण्ड की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्र सम्वर्धन समिति झारखण्ड द्वारा रांची विश्वविद्यालय केंद्रीय सभागार में ‘राष्ट्र की एकता और अखंडता में संघ का योगदान’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची के कुलपति परविंदर कौशल जी तथा मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर पूर्व क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक रामदत्त चक्रधर जी का उद्बोधन हुआ ...

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छुआछूत मुक्त भारत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य – इंद्रेश कुमार जी

नारी संस्कृति है, संस्कार है, नारी शोषण मुक्त समाज संघ का मिशन भिवानी (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इन्द्रेश कुमार जी ने कहा कि संघ स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देकर राष्ट्रनिर्माण के कार्य में लगा रहा है. संपूर्ण देश में प्रतिदिन लाखों स्वयंसेवक तथा राष्ट्र सेविका समिति की हजारों सेविकाएं राष्ट्र निर्माण में साधनारत हैं. इंद्रेश कुमार जी 20 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर् ...

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आत्म विस्मृति को दूर कर राष्ट्र की सुप्त आत्मा को जगाना होगा – अरुण कुमार जी

पत्रकारों को विश्वसनीयता बनाए रखने की आवश्यकता – सुमित्रा महाजन जी नई दिल्ली (इंविसंकें). राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सम्पर्क प्रमुख अरुण कुमार जी ने कहा कि आत्म विस्मृति को दूर भगाकर राष्ट्र की सोयी हुई आत्मा को जगाना होगा. ये हमारा दुर्भाग्य रहा है कि हम पश्चिम की दृष्टि से देखने–सोचने लगे हैं. बीच के काल-खंड में नारद जी हम सभी से विस्मृत हो गए थे. लेकिन खुशी इस बात की है, कि इद्रंप्रस्थ विश ...

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सामाजिक व्यवस्था में समरसता एक श्रेष्ठ तत्व है – गुणवंत सिंह कोठारी जी

आगरा (विसंकें). हमारे महापुरूषों ने भारतवर्ष की सृष्टि को समरसता के सूत्रों में हमेशा से एकीकृत करने का प्रयोग किया है और वर्तमान में इसका प्रकटीकरण हमें देखाई देता है - एक स्वयंसेवक के अनुशासन में. हमारा पड़ोसी किस जाति का है, किसान है या मजदूर, वकील है या डॉक्टर, छात्र है या व्यापारी, नौकरी करता है या बेरोजगार, धनी है या निर्धन, शिक्षित है या अशिक्षित, ये सब बातें उस समय गौण हो जाती हैं, जब हम सब भाई की भा ...

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योग को जीवन में उतारकर योगमय जीवन बनाना चाहिये – दत्तात्रेय होसबाले जी

लखनऊ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि योग जीवन पद्धति है. योग को जीवन में उतारकर योगमय जीवन बनाना चाहिए. सह सरकार्यवाह जी रविवार को विश्व संवाद केन्द्र के अधीश सभागार में पाक्षिक पत्रिका अवध प्रहरी के योग विशेषांक के विमोचन अवसर पर संबोधित कर रहे थे. सह सरकार्यवाह जी ने कहा कि गीता के अट्ठारह अध्यायों में योग है. हजारों वर्ष पूर्व हमारे पूर्वजों ने योग दिया ...

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