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समाज भगवान श्रीराम के सर्वप्रिय वनवासी समाज के कल्याण हेतु आगे आए – विहिप

नई दिल्ली. भगवान श्रीराम का सर्वप्रिय समाज, जिनके साथ चौदह वर्ष रहकर उन्होंने उनके कल्याण हेतु कार्य किया, दुर्भाग्य से वह आज अभावग्रस्त अवस्था में जी रहा है. विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल जी ने समाज का आह्वान करते हुए कहा कि सभी राम भक्त मिलकर भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलते हुए समाज के हर दलित या पिछड़े व्यक्ति की सेवार्थ तन मन धन से आगे आएं. सृष्टि के आदि ग्रंथ वेदों के मंत्रों को स ...

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27 मई / पुण्यतिथि – कर्मवीर धर्मचंद नाहर

नई दिल्ली. धर्मचंद नाहर जी का जन्म राजस्थान में अजमेर से लगभग 150 किमी दूर स्थित ग्राम हरनावां पट्टी में वर्ष 1944 की कार्तिक कृष्ण 13 (धनतेरस) को हुआ था. जब वे केवल तीन वर्ष के थे, तब उनके पिता मिश्रीमल जी बच्चों की समुचित शिक्षा के लिये लाडनू आ गये. यह परिवार जैन मत के तेरापंथ से सम्बन्धित था. लाडनू उन दिनों तेरापंथ का प्रमुख स्थान था. सात भाई और एक बहन वाला यह परिवार एक ओर धर्मप्रेमी, तो दूसरी ओर संघ के ...

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जहां समस्या होती है, वहां समाधान भी होता है

छत्तीसगढ़. जशपुरनगर में बाला साहब देशपांड़े के जन्म शताब्दी वर्ष के समापन पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. वनवासी छात्रावास में अध्ययनरत 108 छात्रों के अभिभावकों की 108 की संख्या सहित अन्य क्षेत्रों में कार्यरत 108 कार्यकर्ता अलग-अलग समूहों में यज्ञकर्ता यजमान के रूप में शामिल हुये. वनवासियों के यज्ञपूजन में डॉ सुभाष चंद्रा,गुणवंत सिंह कोठारी सहित सभी अतिथियों ने आहुति डाली और वनवासियों के हितार्थ प्रार्थना क ...

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26 दिसम्बर/जन्म-दिवस; वनयोगी बालासाहब देशपाण्डे

श्री रमाकान्त केशव (बालासाहब) देशपांडे का जन्म अमरावती (महाराष्ट्र) में श्री केशव देशपांडे के घर में 26 दिसम्बर, 1913 को  हुआ. अमरावती, अकोला, सागर, नरसिंहपुर तथा नागपुर में पढ़ाई कर 1938 में वे राशन अधिकारी बन गये. एक बार उन्होंने एक व्यापारी को गलत काम करते हुए पकड़ लिया; पर बड़े अफसरों से मिलीभगत के कारण वह छूट गया. इससे बालासाहब का मन खट्टा हो गया और उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने मामा श्री गंगाधरराव देवरस ...

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24 दिसम्बर/जन्म-दिवस : कर्तव्यनिष्ठ व सेवाभावी श्रीकृष्णचंद्र भारद्वाज

संघ के प्रचारक का अपने घर से मोह प्रायः छूट जाता है; पर 24 दिसम्बर, 1920 को पंजाब में जन्मे श्रीकृष्णचंद्र भारद्वाज के एक बड़े भाई नेत्रहीन थे. जब वे वृद्धावस्था में बिल्कुल अशक्त हो गये, तो श्रीकृष्णचंद्र जी ने अंतिम समय तक एक पुत्र की तरह लगन से उनकी सेवा की. इस प्रकार उन्होंने संघ और परिवार दोनों के कर्तव्य का समुचित निर्वहन किया. श्री कृष्णचंद्र जी अपनी शिक्षा पूर्ण कर 1942 में प्रचारक बने. प्रारम्भ में ...

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संघ और व्यक्ति पूजा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझना आसान नहीं है. इसका मुख्य कारण यह है कि संघ वर्तमान में प्रचलित किसी राजनीतिक पार्टी या सामाजिक संस्था या संगठन के ढांचे में नहीं बैठता. कुछ लोगों को लगता हैं कि संघ में तानाशाही पद्धति से काम चलता हैं तो कुछ अन्य लोग यह दावा करते हैं कि संघ में नेतृत्व की पूजा होती हैं. ये दोनों भी सत्य से बिल्कुल परे हैं. व्यक्ति पूजा नहीं संघ के संस्थापक ने ऐसी एक कार्यशैली का आविष्कार किय ...

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संघ की शाखा में आईं जर्मनी की पत्रकार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है. यही कारण है कि इसके बारे में जानने की जिज्ञासा विदेशियों में भी बहुत है. यही जिज्ञासा जर्मनी के एक अखबार स्पीगल की महिला पत्रकार उल्रिके पुत्ज को फरीदाबाद में संघ की शाखा तक ले आई.13 अप्रैल को फरीदाबाद महानगर की शिवाजी नगर की परशुराम प्रभात शाखा में उनका आना हुआ. उन्होंने पूरे समय शाखा की गतिविधियों को देखा. शाखा में 69 स्वयंसेवकों के साथ-साथ फर ...

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